Satyarth Ias Institute for Ias/bpsc/jpsc&other State Pcs -___patna".

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SATYARTH IAS _AN INSTITUTE DEDICATED TO CIVIL SERVICE_ --- FOR IAS/BPSC/JPSC&OTHER STATE PCS ---___PATNA

26/06/2014

वीर प्रसूता मेवाड की धरती राजपूती प्रतिष्ठा, मर्यादा एवं गौरव का प्रतीक तथा सम्बल है। राजस्थान के दक्षिणी पूर्वी अंचल का यह राज्य अधिकांशतः अरावली की अभेद्य पर्वत श्रृंखला से परिवेष्टिता है। उपत्यकाओं के परकोटे सामरिक दृष्टिकोण के अत्यन्त उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है। >मेवाड अपनी समृद्धि, परम्परा, अधभूत शौर्य एवं अनूठी कलात्मक अनुदानों के कारण संसार के परिदृश्य में देदीप्यमान है। स्वाधिनता एवं भारतीय संस्कृति की अभिरक्षा के लिए इस वंश ने जो अनुपम त्याग और अपूर्व बलिदान दिये सदा स्मरण किये जाते रहेंगे। मेवाड की वीर प्रसूता धरती में रावल बप्पा, महाराणा सांगा, महाराण प्रताप जैसे सूरवीर, यशस्वी, कर्मठ, राष्ट्रभक्त व स्वतंत्रता प्रेमी विभूतियों ने जन्म लेकर न केवल मेवाड वरन संपूर्ण भारत को गौरान्वित किया है। स्वतन्त्रता की अखल जगाने वाले प्रताप आज भी जन-जन के हृदय में बसे हुये, सभी स्वाभिमानियों के प्रेरक बने हुए है। मेवाड का गुहिल वंश संसार के प्राचीनतम राज वंशों में माना जाता है। मान्यता है कि सिसोदिया क्षत्रिय भगवान राम के कनिष्ठ पुत्र लव के वंशज हैं। श्री गौरीशंकर ओझा की पुस्तक “मेवाड़ राज्य का इतिहास” एक ऐसी पुस्तक है जिसे मेवाड़ के सभी शासकों के नाम एवं क्रम के लिए सर्वाधिक प्रमाणिक माना जाता है.

मेवाड में गहलोत राजवंश – बप्पा ने सन 734 ई० में चित्रांगद गोरी परमार से चित्तौड की सत्ता छीन कर मेवाड में गहलौत वंश के शासक का सूत्रधार बनने का गौरव प्राप्त किया। इनका काल सन 734 ई० से 753 ई० तक था। इसके बाद के शासकों के नाम और समय काल निम्न था -
रावल बप्पा ( काल भोज ) - 734 ई० मेवाड राज्य के गहलौत शासन के सूत्रधार।
रावल खुमान – 753 ई०
मत्तट – 773 – 793 ई०
भर्तभट्त – 793 – 813 ई०
रावल सिंह – 813 – 828 ई०
खुमाण सिंह – 828 – 853 ई०
महायक – 853 – 878 ई०
खुमाण तृतीय – 878 – 903 ई०
भर्तभट्ट द्वितीय – 903 – 951 ई०
अल्लट – 951 – 971 ई०
नरवाहन – 971 – 973 ई०
शालिवाहन – 973 – 977 ई०
शक्ति कुमार – 977 – 993 ई०
अम्बा प्रसाद – 993 – 1007 ई०
शुची वरमा – 1007- 1021 ई०
नर वर्मा – 1021 – 1035 ई०
कीर्ति वर्मा – 1035 – 1051 ई०
योगराज – 1051 – 1068 ई०
वैरठ – 1068 – 1088 ई०
हंस पाल – 1088 – 1103 ई०
वैरी सिंह – 1103 – 1107 ई०
विजय सिंह – 1107 – 1127 ई०
अरि सिंह – 1127 – 1138 ई०
चौड सिंह – 1138 – 1148 ई०
विक्रम सिंह – 1148 – 1158 ई०
रण सिंह ( कर्ण सिंह ) – 1158 – 1168 ई०
क्षेम सिंह – 1168 – 1172 ई०
सामंत सिंह – 1172 – 1179 ई०
(क्षेम सिंह के दो पुत्र सामंत और कुमार सिंह। ज्येष्ठ पुत्र सामंत मेवाड की गद्दी पर सात वर्ष रहे क्योंकि जालौर के कीतू चौहान मेवाड पर अधिकार कर लिया। सामंत सिंह अहाड की पहाडियों पर चले गये। इन्होने बडौदे पर आक्रमण कर वहां का राज्य हस्तगत कर लिया। लेकिन इसी समय इनके भाई कुमार सिंह पुनः मेवाड पर अधिकार कर लिया। )

कुमार सिंह – 1179 – 1191 ई०
मंथन सिंह – 1191 – 1211 ई०
पद्म सिंह – 1211 – 1213 ई०
जैत्र सिंह – 1213 – 1261 ई०
तेज सिंह -1261 – 1273 ई०
समर सिंह – 1273 – 1301 ई०
(समर सिंह का एक पुत्र रतन सिंह मेवाड राज्य का उत्तराधिकारी हुआ और दूसरा पुत्र कुम्भकरण नेपाल चला गया। नेपाल के राज वंश के शासक कुम्भकरण के ही वंशज हैं। )

35. रतन सिंह ( 1301-1303 ई० ) - इनके कार्यकाल में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौडगढ पर अधिकार कर लिया। प्रथम जौहर पदमिनी रानी ने सैकडों महिलाओं के साथ किया। गोरा – बादल का प्रतिरोध और युद्ध भी प्रसिद्ध रहा।
36. अजय सिंह ( 1303 – 1326 ई० ) – हमीर राज्य के उत्तराधिकारी थे किन्तु अवयस्क थे। इसलिए अजय सिंह गद्दी पर बैठे।
37. महाराणा हमीर सिंह ( 1326 – 1364 ई० ) - हमीर ने अपनी शौर्य, पराक्रम एवं कूटनीति से मेवाड राज्य को तुगलक से छीन कर उसकी खोई प्रतिष्ठा पुनः स्थापित की और अपना नाम अमर किया महाराणा की उपाधि धारण की । इसी समय से ही मेवाड नरेश महाराणा उपाधि धारण करते आ रहे हैं।
38. महाराणा क्षेत्र सिंह ( 1364 – 1382 ई० )
39. महाराणा लाखासिंह ( 1382 – 11421 ई० ) – योग्य शासक तथा राज्य के विस्तार करने में अहम योगदान। इनके पक्ष में ज्येष्ठ पुत्र चुडा ने विवाह न करने की भीष्म प्रतिज्ञा की और पिता से हुई संतान मोकल को राज्य का उत्तराधिकारी मानकर जीवन भर उसकी रक्षा की।
40. महाराणा मोकल ( 1421 – 1433 ई० )
41. महाराणा कुम्भा ( 1433 – 1469 ई० ) – इन्होने न केवल अपने राज्य का विस्तार किया बल्कि योग्य प्रशासक, सहिष्णु, किलों और मन्दिरों के निर्माण के रुप में ही जाने जाते हैं। कुम्भलगढ़ इन्ही की देन है. इनके पुत्र उदा ने इनकी हत्या करके मेवाड के गद्दी पर अधिकार जमा लिया।
42. महाराणा उदा ( उदय सिंह ) ( 1468 – 1473 ई० ) - महाराणा कुम्भा के द्वितीय पुत्र रायमल, जो ईडर में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे थे, आक्रमण करके उदय सिंह को पराजित कर सिंहासन की प्रतिष्ठा बचा ली। अन्यथा उदा पांच वर्षों तक मेवाड का विनाश करता रहा।
43. महाराणा रायमल ( 1473 – 1509 ई० ) - सबसे पहले महाराणा रायमल के मांडू के सुल्तान गयासुद्दीन को पराजित किया और पानगढ, चित्तौड्गढ और कुम्भलगढ किलों पर पुनः अधिकार कर लिया पूरे मेवाड को पुनर्स्थापित कर लिया। इसे इतना शक्तिशाली बना दिया कि कुछ समय के लिये बाह्य आक्रमण के लिये सुरक्षित हो गया। लेकिन इनके पुत्र संग्राम सिंह, पृथ्वीराज और जयमल में उत्तराधिकारी हेतु कलह हुआ और अंततः दो पुत्र मारे गये। अन्त में संग्राम सिंह गद्दी पर गये।
44. महाराणा सांगा ( संग्राम सिंह ) ( 1509 – 1527 ई० ) - महाराणा सांगा उन मेवाडी महाराणाओं में एक था जिसका नाम मेवाड के ही वही, भारत के इतिहास में गौरव के साथ लिया जाता है। महाराणा सांगा एक साम्राज्यवादी व महत्वाकांक्षी शासक थे, जो संपूर्ण भारत पर अपना अधिकार करना चाहते थे। इनके समय में मेवाड की सीमा का दूर – दूर तक विस्तार हुआ। महाराणा हिन्दु रक्षक, भारतीय संस्कृति के रखवाले, अद्वितीय योद्धा, कर्मठ, राजनीतीज्ञ, कुश्ल शासक, शरणागत रक्षक, मातृभूमि के प्रति समर्पित, शूरवीर, दूरदर्शी थे। इनका इतिहास स्वर्णिम है। जिसके कारण आज मेवाड के उच्चतम शिरोमणि शासकों में इन्हे जाना जाता है।
45. महाराणा रतन सिंह ( 1528 – 1531 ई० )
46. महाराणा विक्रमादित्य ( 1531 – 1534ई० ) – यह अयोग्य सिद्ध हुआ और गुजरात के बहादुर शाह ने दो बार आक्रमण कर मेवाड को नुकसान पहुंचाया इस दौरान 1300 महारानियों के साथ कर्मावती सती हो गई। विक्रमादित्य की हत्या दासीपुत्र बनवीर ने करके 1534 – 1537 तक मेवाड पर शासन किया। लेकिन इसे मान्यता नहीं मिली। इसी समय सिसोदिया वंश के उदय सिंह को पन्नाधाय ने अपने पुत्र की जान देकर भी बचा लिया और मेवाड के इतिहास में प्रसिद्ध हो गई।
47. महाराणा उदय सिंह ( 1537 – 1572 ई० ) – मेवाड़ की राजधानी चित्तोड़गढ़ से उदयपुर लेकर आये. गिर्वा की पहाड़ियों के बीच उदयपुर शहर इन्ही की देन है. इन्होने अपने जीते जी गद्दी ज्येष्ठपुत्र जगमाल को दे दी, किन्तु उसे सरदारों ने नहीं माना, फलस्वरूप छोटे बेटे प्रताप को गद्दी मिली.

48. महाराणा प्रताप ( 1572 -1597 ई० ) – इनका जन्म 9 मई 1540 ई० मे हुआ था। राज्य की बागडोर संभालते समय उनके पास न राजधानी थी न राजा का वैभव, बस था तो स्वाभिमान, गौरव, साहस और पुरुषार्थ। उन्होने तय किया कि सोने चांदी की थाली में नहीं खाऐंगे, कोमल शैया पर नही सोयेंगे, अर्थात हर तरह विलासिता का त्याग करेंगें। धीरे – धीरे प्रताप ने अपनी स्थिति सुधारना प्रारम्भ किया। इस दौरान मान सिंह अकबर का संधि प्रस्ताव लेकर आये जिसमें उन्हे प्रताप के द्वारा अपमानित होना पडा।
परिणाम यह हुआ कि 21 जून 1576 ई० को हल्दीघाटी नामक स्थान पर अकबर और प्रताप का भीषण युद्ध हुआ। जिसमें 14 हजार राजपूत मारे गये। परिणाम यह हुआ कि वर्षों प्रताप जंगल की खाक छानते रहे, जहां घास की रोटी खाई और निरन्तर अकबर सैनिको का आक्रमण झेला, लेकिन हार नहीं मानी। ऐसे समय भीलों ने इनकी बहुत सहायता की।अन्त में भामा शाह ने अपने जीवन में अर्जित पूरी सम्पत्ति प्रताप को देदी। जिसकी सहायता से प्रताप चित्तौडगढ को छोडकर अपने सारे किले 1588 ई० में मुगलों से छिन लिया। 19 जनवरी 1597 में चावंड में प्रताप का निधन हो गया।

49. महाराणा अमर सिंह -(1597 – 1620 ई० ) – प्रारम्भ में मुगल सेना के आक्रमण न होने से अमर सिंह ने राज्य में सुव्यवस्था बनाया। जहांगीर के द्वारा करवाये गयें कई आक्रमण विफ़ल हुए। अंत में खुर्रम ने मेवाड पर अधिकार कर लिया। हारकर बाद में इन्होनें अपमानजनक संधि की जो उनके चरित्र पर बहुत बडा दाग है। वे मेवाड के अंतिम स्वतन्त्र शासक है।
50. महाराणा कर्ण सिद्ध ( 1620 – 1628 ई० ) – इन्होनें मुगल शासकों से संबंध बनाये रखा और आन्तरिक व्यवस्था सुधारने तथा निर्माण पर ध्यान दिया।
51.महाराणा जगत सिंह ( 1628 – 1652 ई० )
52. महाराणा राजसिंह ( 1652 – 1680 ई० ) - यह मेवाड के उत्थान का काल था। इन्होने औरंगजेब से कई बार लोहा लेकर युद्ध में मात दी। इनका शौर्य पराक्रम और स्वाभिमान महाराणा प्रताप जैसे था। इनकों राजस्थान के राजपूतों का एक गठबंधन, राजनितिक एवं सामाजिक स्तर पर बनाने में सफ़लता अर्जित हुई। जिससे मुगल संगठित लोहा लिया जा सके। महाराणा के प्रयास से अंबेर, मारवाड और मेवाड में गठबंधन बन गया। वे मानते हैं कि बिना सामाजिक गठबंधन के राजनीतिक गठबंधन अपूर्ण और अधूरा रहेगा। अतः इन्होने मारवाह और आमेर से खानपान एवं वैवाहिक संबंध जोडने का निर्णय ले लिया। राजसमन्द झील एवं राजनगर इन्होने ही बसाया.
53. महाराणा जय सिंह ( 1680 – 1698 ई० ) - जयसमंद झील का निर्माण करवाया.
54. महाराणा अमर सिंह द्वितीय ( 1698 – 1710 ई० ) - इसके समय मेवाड की प्रतिष्ठा बढी और उन्होनें कृषि पर ध्यान देकर किसानों को सम्पन्न बना दिया।
55. महाराणा संग्राम सिंह ( 1710 – 1734 ई० ) – महाराणा संग्राम सिंह दृढ और अडिग, न्यायप्रिय, निष्पक्ष, सिद्धांतप्रिय, अनुशासित, आदर्शवादी थे। इन्होने 18 बार युद्ध किया तथा मेवाड राज्य की प्रतिष्ठा और सीमाओं को न केवल सुरक्षित रखा वरन उनमें वृध्दि भी की।
56. महाराणा जगत सिंह द्वितीय ( 1734 – 1751 ई० ) – ये एक अदूरदर्शी और विलासी शासक थे। इन्होने जलमहल बनवाया। शहजादा खुर्रम (शाहजहाँ) को अपना “पगड़ी बदल” भाई बनाया और उन्हें अपने यहाँ पनाह दी.
57. महाराणा प्रताप सिंह द्वितीय ( 1751 – 1754 ई० )
58. महाराणा राजसिंह द्वितीय ( 1754 – 1761 ई० )
59. महाराणा अरिसिंह द्वितीय ( 1761 – 1773 ई० )
60. महाराणा हमीर सिंह द्वितीय ( 1773 – 1778 ई० ) - इनके कार्यकाल में सिंधिया और होल्कर ने मेवाड राज्य को लूटपाट करके तहस – नहस कर दिया।
61. महाराणा भीमसिंह ( 1778 – 1828 ई० ) – इनके कार्यकाल में भी मेवाड आपसी गृहकलह से दुर्बल होता चला गया। 13 जनवरी 1818 को ईस्ट इंडिया कम्पनी और मेवाड राज्य में समझौता हो गया। अर्थात मेवाड राज्य ईस्ट इंडिया के साथ चला गया।मेवाड के पूर्वजों की पीढी में बप्पारावल, कुम्भा, महाराणा सांगा, महाराणा प्रताप जैसे तेजस्वी, वीर पुरुषों का प्रशासन मेवाड राज्य को मिल चुका था। प्रताप के बाद अधिकांश पीढियों में वह क्षमता नहीं थी जिसकी अपेक्षा मेवाड को थी। महाराजा भीमसिंह योग्य व्यक्ति थे निर्णय भी अच्छा लेते थे परन्तु उनके क्रियान्वयन पर ध्यान नही देते थे। इनमें व्यवहारिकता का आभाव था।ब्रिटिश एजेन्ट के मार्गदर्शन, निर्देशन एवं सघन पर्यवेक्षण से मेवाड राज्य प्रगति पथ पर अग्रसर होता चला गया।
62. महाराणा जवान सिंह ( 1828 – 1838 ई० ) – निःसन्तान। सरदार सिंह को गोद लिया ।
63. महाराणा सरदार सिंह ( 1838 – 1842 ई० ) – निःसन्तान। भाई स्वरुप सिंह को गद्दी दी.
64. महाराणा स्वरुप सिंह ( 1842 – 1861 ई० ) - इनके समय 1857 की क्रान्ति हुई। इन्होने विद्रोह कुचलने में अंग्रेजों की मदद की।
65. महाराणा शंभू सिंह ( 1861 – 1874 ई० ) - 1868 में घोर अकाल पडा। अंग्रेजों का हस्तक्षेप बढा।
66 . महाराणा सज्जन सिंह ( 1874 – 1884 ई० ) – बागोर के महाराज शक्ति सिंह के कुंवर सज्जन सिंह को महाराणा का उत्तराधिकार मिला। इन्होनें राज्य की दशा सुधारनें में उल्लेखनीय योगदान दिया।
67. महाराणा फ़तह सिंह ( 1883 – 1930 ई० ) – सज्जन सिंह के निधन पर शिवरति शाखा के गजसिंह के अनुज एवं दत्तक पुत्र फ़तेहसिंह को महाराणा बनाया गया। फ़तहसिंह कुटनीतिज्ञ, साहसी स्वाभिमानी और दूरदर्शी थे। संत प्रवृति के व्यक्तित्व थे. इनके कार्यकाल में ही किंग जार्ज पंचम ने दिल्ली को देश की राजधानी घोषित करके दिल्ली दरबार लगाया. महाराणा दरबार में नहीं गए .
68. महाराणा भूपाल सिंह (1930 – 1955 ई० ) - इनके समय में भारत को स्वतन्त्रता मिली और भारत या पाक मिलने की स्वतंत्रता। भोपाल के नवाब और जोधपुर के महाराज हनुवंत सिंह पाक में मिलना चाहते थे और मेवाड को भी उसमें मिलाना चाहते थे। इस पर उन्होनें कहा कि मेवाड भारत के साथ था और अब भी वहीं रहेगा। यह कह कर वे इतिहास में अमर हो गये। स्वतंत्र भारत के वृहद राजस्थान संघ के भूपाल सिंह प्रमुख बनाये गये।
69. महाराणा भगवत सिंह ( 1955 – 1984 ई० )
70. श्रीजी अरविन्दसिंह एवं महाराणा महेन्द्र सिंह (1984 ई० से निरंतर..)

इस तरह 556 ई० में जिस गुहिल वंश की स्थापना हुई बाद में वही सिसोदिया वंश के नाम से जाना गया । जिसमें कई प्रतापी राजा हुए, जिन्होने इस वंश की मानमर्यादा, इज्जत और सम्मान को न केवल बढाया बल्कि इतिहास के गौरवशाली अध्याय में अपना नाम जोडा । यह वंश कई उतार-चढाव और स्वर्णिम अध्याय रचते हुए आज भी अपने गौरव और श्रेष्ठ परम्परा के लिये जाना पहचाना जाता है। धन्य है वह मेवाड और धन्य सिसोदिया वंश जिसमें ऐसे ऐसे अद्वीतिय देशभक्त दिये।

24/06/2014

P.K THAKUR IS THE NEW DGP OF BIHAR INSTEAD OF ABHYANAND

03/06/2014

Mangal pandey ne kab aur kis angrej ki hatya kr di thi?

03/06/2014

K Chandrasekhar Rao sworn-in as first CM of Telangana with 11 Cabinet ministers

03/06/2014

1857 ke vidroh ko Delhi .kanpur.lucknow,bihar ,faijabaad etc me kisne,kisne dabaa diya?

02/05/2014

NEW BATCH FOR UGC NET ,,,HISTORY FROM 12th .MAY

31/03/2014

Important for BPSC
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वायु प्रदूषण से संबंधित वैश्विक आकड़े जारी किये
27-MAR-2014
Where: समूचे विश्व में
What: 70 लाख मौते हुईं
When: वर्ष 2012 में
Why: वायु प्रदूषण
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 25 मार्च 2014 को वायु प्रदूषण से संबंधित आकड़े जारी किये. वायु प्रदूषण पर डब्ल्यूएचओ द्वारा हाल ही में प्रकाशित इन आकड़ों के अनुसार समूचे विश्व में वर्ष 2012 के दौरान वायु प्रदूषण के कारण 70 लाख मौते हुईं, जो कि हृद्याघात से होने वाली कुल मौतों की संख्या 80 प्रतिशत है.
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डब्ल्यूएचओ ने वायु प्रदूषण अपनी इस रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण सबसे बड़ा पर्यावरणीय जोखिम है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में होने वाली हर आठ मौतों में से एक का संबंध वायु प्रदूषण से होता है.
डब्ल्यूएचओ द्वारा वर्ष 2012 में वायु प्रदूषण से संबंधित आकड़े मृत्यु संबंधी आकड़ों तथा वायु प्रदूषण से हो रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आधारित है. विश्व के तमाम हिस्सों में घर के बाहर के होने वाले वायु प्रदूषण के आकड़े डेटा मैपिंग की एक नयी तकनीक से किये गये. इस तकनीक में दूरस्थ आकड़े, वास्तविक स्तर पर प्रेक्षण मापन तथा मुख्य स्रोतों से प्रदूषण उत्सर्जन और वायु में प्रदूषण कैसे फैलता है, आदि शामिल हैं.
वायु प्रदूषण पर डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुख्य तथ्य
• वायु प्रदूषण का संबंध हृदय रोग, श्वास संबंधी बिमारियों तथा कैंसर से होता है.
• वर्ष 2012 के दौरान वायु प्रदूषण के कारण 70 लाख मौते हुईं.
• एशिया के विभिन्न इलाकों में खाना पकाने हेतु लकड़ी एवं कोयले के इस्तेमाल वर्ष 2012 में 43 लाख लोगों की मृत्यु हुई.
• शेष 43 लाख मौतें वायु प्रदूषण के अन्य कारकों के कारण हुईं जिनमें विकसित देशों के लोगों का प्रतिशत 90 प्रतिशत है.
• वर्ष 2012 में वायु प्रदूषण से हुई मौतों की संख्या डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी किये गये पिछले आकड़ों से दोगुनी है.
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• वायु प्रदूषण से होने वाली बिमारियों के बारे में जागरूकता फैलाकर इससे होने वाली मौतों को रोका जा सकता है.
• नये आकड़े घर के भीतर व बाहर होने वाले वायु प्रदूषण और हृदवाहिनी बिमारियां (CardiovascularDiseases) जैसे हृदयाघात, आइसेमिक हार्ट डिजीज, आदि में संबंध को दर्शाते हैं.
• इसके अतिरिक्त जारी आकड़े वायु प्रदूषण तथा कर्क रोग के संबंध को भी प्रदर्शित करते हैं.
• ये सभी वायु प्रदूषण से होने वाली श्वास संबंधी बिमारियों, जैसे श्वसन संक्रमण तथा फेफड़े संबंधी बिमारियों के अतिरिक्त हैं.
घर के बाहर होने वाले वायु प्रदूषण होने वाली कुल मौतों का बिमारीवार निरूपण
• 40% – आइसेमिक हार्ट डिजीज
• 40% – हृदयाघात
• 11% – फेफड़ों में दीर्घकालिक रूकावट से होने वाली बिमारियां
• 6% - फेफड़ों में कैंसर
• 3% – बच्चों में तीव्र निम्न श्वास संबंधी संक्रमण
घर के भीतर होने वाले वायु प्रदूषण होने वाली कुल मौतों का बिमारीवार निरूपण
• 34% - हृदयाघात
• 26% - आइसेमिक हार्ट डिजीज
• 22% - फेफड़ों में दीर्घकालिक रूकावट से होने वाली बिमारियां
• 12% - बच्चों में तीव्र निम्न श्वास संबंधी संक्रमण
• 6% - फेफड़ों में कैंसर

31/03/2014

A BEST OPEN TEST SERIES FOR UPSC IN PATNA STARTS FROM 5th APRIL

30/03/2014

RIGVED ME PAGRI KO KYA KAHA JATA HAI?.

30/03/2014

1. Who were the A***ns?
Ans. It has been proved that sometime in the past Indians and Europeans probably shared a common home somewhere in central Asia, in the region around the Caspean Sea. The people of these areas were called A***ns.
2. Where did the A***ns at first settle in India?
Ans. Punjab.
3. From where the A***ns came to India?
Ans. Central Asia.
4. What were the earliest literatures of the A***ns?
Ans. Vedas.
5. How many Vedas are there?
Ans. Four the Rigveda, the Samaveda, the Vajurveda and the Athervaveda.
6. Which one of the Vedas is the oldest?
Ans. The Rigveda, it has 1028 mantras or hymns.
7. What are the Brahmans?
The Brahmans are A***ns, religious literatures. These are treatise on the Vedas. They are in prose and explain the hymns of the Vedas to the common people.
8. What are the Aranyakas?
The Aranyakrs are the concluding parts of the Brahmans. They were specially written for the hermits living in the forests.
9. What are the Upanishads?
Ans. The Upanishads deal with the philosophical questions such as the true nature of god and soul.
10. What are the Puranas?
Ans. The puranas were the old religious books of the A***ns. They are 18 in number. The Bhagwat Puranas and the Vishnu Puranas are the important.
11.What are the epics?
Ans. The Ramayan and the Mahabharat are the two great epics of the A***ns.
12.Who did compose the Ramayana?
Ans. Rishi Valmiki. This epic describes the life and the great, deeds of Lord Rama.
13.Who wrote the Mahabharat?
Ans. Rishi Vyas. This epic describes the war between the Pandavas and the Kauravas.
14.What type of book is 'Ashtadhyayi' and who wrote it?
Ans. Ashtadhyayi is a famous book on Sanskrit grammar, Panini wrote this book.
15.What does the word Vid' mean?
Ans. Knowledge.
16.On which river bank the Rigveda had been written?
Ans. Saraswati River.
17.During the Vedic period which river was considered to be the most sacred one? Ans. Saraswati River.
18.The Rigveda is divided into ten Mandalas. Which Manda are the oldest?
Ans. The second and the seventh Mandalas.
19.For what most of the wars of A***ns were fought?
Ans. For cows.
20.Who was the head of a family during Vedic period?
Ans. Grihapati.
21.What was the Gram (village) during Vedic period?
Ans. Several families grouped together and formed a gram.
22.Who was the head of the Gram during Vedic period?
Ans. Gramini.
23.What was the Vish (clan) during Vedic period?
Ans. A group of villages was known as Vish.
24.Who was the headman of the Vish?
Ans. Vishpati.
25.What was the Jana during vedic period?
Ans. Many Vish joined together and formed a Jana or a
26 Who was the headman of a Jana or tribe?
Ans. Rajan (king).
27. Who was the adviser of the king during the Vedic period?
Ans. Purohit.
28. Who was the commander of the army during Vedic period?
Ans. Senani.
29. Who were the two great Purohits during Vedic period?
Ans. Vashishtha and Visvamitra.
30. Who was the group leader of the warrior during Vedic period?
Ans. Gramini, he also helped the king in the administration of the villages.
31.What was the Sabha during Vedic period?
Ans. It was an advising assembly of the king. It was the council of elders who used to give advice to the king.
32.What was the Samiti during Vedic period?
Ans. It was an advising assembly of the king and it was the national assembly of the whole people.
33.What were the agricultural products during Vedic period?
Ans. Barley, wheat and rice.
34. Which were the most popular dieties of the early A***ns?
Ans. Indira and Varuna.
35. Which gods became prominent during later Vedic age?
Ans. Brahma, Vishnu, Shiva, Rama and Krishna.
36. In how many Varnas the A***n Society was divided?
Ans. Four Vamas the Brahmanas, the Kshatriyas, the Vaishyas and the Sudras.
37. What were the main foods of the A***ns?
Ans. Wheat, barley, milk and milk products were the main food­stuffs of the A***ns.
38. What liquor, the A***ns took as drink during religious ceremonies and festive occasions?
Ans. Somaras.
39. What was the position of women during the early Vedic Period?
Ans. The women enjoyed a high status in society. There wasan-system and no child-marriage. Widow remarriage was allowed sati system did not exist,
40. What was the position of women during later Vedic period?
Ans. During the later Vedic period women lost much of their position and privileges enjoyed during early Vedic period.
41.For how many years the early vedic period lasted?
Ans. For 500 years. (1500 B.C. to 1000 B.C.)
42.For how many years the later vedic period lasted?
Ans. For 400 years. (1000 B.C. to 600 B.C.)
43.During the Vedic period whether women were allowed to attend the Sabha and Samiti or not ?
Ans. Women were not allowed to attend these councils.
44.Who were the Indo-A***ns?
Ans. The-A***ns who came to India, are known as Indo-A***ns,
45.Who was the maker of Vedic Civilization?
Ans. A***ns.
46.Why Vedic Civilization is also known as A***n- Civilization?
Ans. Because the A***ns were the maker of this civilization.
47.What kind of civilization was Vedic Civilization?
Ans. Rural civilization.
48.What is the source of information about Vedic Civilization?
Ans. The Rigveda.
49.What does the term 'A***n' mean?
Ans. The great.
50.From which source the information about Vedic Civilization has been established?
Ans. The Rigveda.
51.Which language was used by Indo-A***ns?
Ans. Sanskrit.
52.In which language the Vedas have been written?
Ans. Sanskrit.
53.Which animal had maximum influence during vedic period?
Ans. Horse.
54.Accompanying which animal did the A***ns came to India?
Ans. Horse.
55. Which metal the A***ns had invented?
Ans Iron
56. From which source "Satyameva Jayate" has been derived?
Ans. Mundkopanishad.

28/03/2014

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28/03/2014

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