देश में सभी महत्वपूर्ण परीक्षाएं जैसे neet jee का exam साल में दो बार करवाया जाए इससे कोचिंग पे निर्भरता बहुत कम होगी और स्टूडेंट्स दवाब में नहीं रहेंगे। Upsc का एग्जाम भी साल में दो बार होना चाहिए। अब वक्त आ गया है की हम exam को ले के बहुत एडवांस लेवल पे आ जाए बिना कोई बहाने के क्योंकि अगर हमे अच्छी ह्यूमन रिसोर्स चाहिए तो exam को लेके बहुत संवेदनशील होना होगा।
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Deepak prakash पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री बने थे लेकिन सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने दूसरी बार 7 मई 2026 को सपथ ली थी। इस आधार पर उनका कार्यकाल बिना किसी सदन के सदस्य रहते हुए 7 नवंबर 2026 तक रहेगा। क्या मैं तथ्य के अनुसार सही हूं। क्या संविधान में इस प्रक्रिया पे कोई रोक है ???
1955 में Jawaharlal Nehru सोवियत संघ गए थे उसके बाद 130 करोड़ रुपए की भिलाई स्टील प्लांट जैसी भारी औद्योगिक परियोजनाएं आईं। उस दौर में भारत में भारी उद्योग खड़े हुए। मशीनें बनीं। फैक्ट्रियां लगीं।
एक गरीब कृषि प्रधान देश धीरे धीरे औद्योगिक देश बनने लगा। उस समय विदेश यात्रा का मतलब था “देश कैसे खड़ा होगा।”
1960 और 70 के दशक में सोवियत सहयोग से BHEL जैसी सार्वजनिक औद्योगिक ताकतें मजबूत हुईं। बिजली परियोजनाएं आईं। इंजीनियरिंग सेक्टर बढ़ा। लाखों रोजगार बने। प्रधानमंत्री विदेश जाकर रील नहीं बनाते थे, कारखाने बनवाते थे।
1982 में Indira Gandhi और बाद में Rajiv Gandhi के दौर में तकनीकी सहयोग बढ़ा। कंप्यूटर और दूरसंचार सेक्टर के लिए विदेशों से समझौते हुए। उसी नींव पर बाद में भारत का आईटी सेक्टर खड़ा हुआ। आज जो लोग मोबाइल पर राष्ट्रवाद का वीडियो देखकर कमेंट करते हैं, वह भी उसी तकनीकी ढांचे की देन है।
1991 में P. V. Narasimha Rao विदेश गए और आर्थिक उदारीकरण के बाद दुनिया के निवेशकों के लिए भारत खोला। उस समय भारत के पास सिर्फ कुछ हफ्तों का विदेशी मुद्रा भंडार बचा था। फिर विदेशी निवेश आया। ऑटोमोबाइल सेक्टर बढ़ा। प्राइवेट कंपनियां आईं। नौकरी के अवसर बढ़े। उस समय विदेश यात्रा का मतलब था “भारत को आर्थिक रूप से बचाना।”
1998 के बाद Atal Bihari Vajpayee ने अमेरिका और दुनिया के दबाव के बीच भारत की परमाणु ताकत को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया। फिर गोल्डन क्वाड्रिलेटरल जैसी सड़क परियोजना आई। करीब छह हजार किलोमीटर हाईवे नेटवर्क बना।
दिल्ली मुंबई चेन्नई कोलकाता जुड़े। ट्रांसपोर्ट तेज हुआ। व्यापार बढ़ा। गांव शहर से जुड़ने लगे। विदेश नीति और विकास साथ साथ चलते थे।
2005 में Manmohan Singh अमेरिका से न्यूक्लियर डील लेकर आए। उस समझौते के बाद भारत पर तकनीकी प्रतिबंधों में राहत मिली। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ा। भारत को वैश्विक रणनीतिक पहचान मिली। विदेश यात्रा का मतलब था “देश को क्या मिला।”
अब 2026 में दृश्य बदल चुका है। भारत का प्रधानमंत्री इटली जाता है और देश में सबसे ज्यादा चर्चा किस बात की होती है। “मेलोडी टॉफी।” कोई पूछ रहा है कितनी फैक्ट्री आई। कोई पूछ रहा है कितने रोजगार आए। कोई पूछ रहा है रुपया मजबूत हुआ या नहीं। नहीं।
पूरा मीडिया ऐसे उत्साहित है जैसे भारत ने चांद पर टॉफी की दुकान खोल दी हो।
इधर देश की हालत पिछले 5 दिनों में दूध महंगा। ब्रेड महंगी। पेट्रोल ऊपर। कमर्शियल गैस सिलेंडर हजार पार। रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर। बेरोजगारी पर लगातार बहस। लेकिन टीवी पर क्या दिख रहा है। “देखिए विदेशी नेता मोदी जी के साथ कितनी शानदार केमिस्ट्री शेयर कर रहे हैं।”
अब राजनीति विकास से ज्यादा इवेंट मैनेजमेंट लगने लगी है। पहले विदेश यात्रा के बाद परियोजनाओं की फाइल खुलती थी। अब इंस्टाग्राम रील खुलती है। पहले प्रधानमंत्री लौटते थे तो पत्रकार एयरपोर्ट जाते थे। अब यूट्यूबर थंबनेल बनाते हैं।
जनता पेट्रोल भरवाते समय लीटर गिन रही है और सत्ता कैमरे के फ्रेम गिन रही है। बेरोजगार युवा भर्ती परीक्षा के नोटिफिकेशन ढूंढ रहा है और सरकार विदेशी मंचों पर स्माइल डिप्लोमेसी बेच रही है।
सबसे बड़ा व्यंग्य यह है कि जनता को त्याग सिखाया जा रहा है। कम पेट्रोल जलाओ। कम गैस खर्च करो। खर्च कम करो। लेकिन चार दिन के त्याग के बाद भी चीजें और महंगी हो रही हैं। मतलब जनता उपवास करे और महंगाई प्रोटीन खाकर बॉडी बना ले।
पहले विदेश यात्राओं से स्टील प्लांट आते थे। अब रील आती है। पहले तकनीक आती थी। अब टॉफी आती है। पहले रोजगार की उम्मीद बनती थी। अब ट्रेंडिंग हैशटैग बनता है।
देश धीरे धीरे लोकतंत्र कम और कैमरा शो ज्यादा लगता जा रहा है।
छोड़िए..... कौन है प्रधानमंत्री..... किस दल की सरकार है...... देश तो आपका है ना ?
तो निवेदन है पेट्रोल डीजल दोनों का कम से कम उपयोग कीजिए। इस देश का आम आदमी भी देश के बड़े बड़े नेताओं से ज्यादा देशभक्त है और जिम्मेदार भी है। हमे नेताओं से उम्मीद रखना छोड़ देना चाहिए। मैं कई घरों में देखता हूं तीन चार सब्जी बनती है गैस का दुरुपयोग है। आप अपने फूड हैबिट को बदलिए। ज्यादा से ज्यादा सलाद का उपयोग कीजिए। शरीर भी स्वस्थ रहेगा। नेताओं को छोड़िए उनसे कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है। भाई उनके खुद के बच्चे उनके साथ नही रहना चाहते है। एक बात और मान लीजिए नेता भ्रष्ट है उसके लिए भी हम ही जिम्मेदार है। क्या हम अपना वोट नही बेचते ? पैसे लेकर या जात के नाम पे या धर्म के नाम पे ? आप कहेंगे मजबूरी है। कुछ हद तक है लेकिन जितना आप मजबूर दिखते है उतना होना बंद कीजिए।
05/05/2026
जब विवाह किसी महिला की जगह वे///श्या से करोगे तो यही होगा। देख समझ के करो पूरा जांच पड़ताल करके करो। नहीं तो इनकी तरह मरोगे।
गैरजरूरी लोगो को खत्म करना अब एक मात्र विकल्प !!!!!
अगर बड़े बड़े पूंजीपतियों ने एक बड़ी आबादी को किसी भी तरीके से मार देने का प्लान बना रखा है तो ठीक ही है। एक आम आदमी ने आबादी बढ़ा बढ़ा के पृथ्वी के इकोलॉजिकल सिस्टम को बर्बाद कर रखा है। लोग सुधरने का नाम नहीं ले रहे है। ऐसी स्थिति में एकमात्र विकल्प सामूहिक विनाश है। जिन लोगो ने आबादी नहीं बढ़ाई है वो बाकियों के करनी का दंड क्यों भुगते?
17/04/2026
RAS टॉपर,रंगेहाथ गिरफ्तार..
ये SDM काजल मीणा है.राजस्थान प्रशासनिक सेवा की ऐसी अफसर,जिसकी कामयाबी की मिसाल दी जाती थी.मैडम ने IIT जैसे संस्थान से पढ़ाई की और अपनी कैटेगीर में प्रदेश में टॉप किया.अब मैडम के ऊपर करौली के नादाैती उपखंड में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 60 हजार ₹ लेते रंगेहाथ पकड़ा है..इनके रिश्वत मांगने में सहयोगी रीडर दिनेश कुमार सैनी और UDC प्रवीण धाकड़ को भी पकड़ा गया है.पूरी कार्रवाई में रिश्वत की रकम के अलावा करीब ₹4 लाख नकद और भी ऑफिस से बरामद किया है. दरअसल परिवादी ने ACB को शिकायत में बताया था कि उसकी भूमि की तकसीम की फाइनल डिक्री जारी करने के लिए उससे पैसे मांगे जा रहें है.पहले 1 लाख रूपये की मांग की गई थी,लेकिन बाद में राशि घटाकर 60 हजार ₹ कर दी गई.मैडम ने 50 हजार अपने व रीडर के लिए 10 हजार मांगे। 16 अप्रैल को परिवादी को नादौती कार्यालय बुलाया गया,जहां पहले से टीम पूरी तैयारी के साथ मौजूद थी.जैसे ही परिवादी ने तय राशि सौपी,रीडर दिनेश सैनी ने पैसे लेकर उन्हें वरिष्ठ सहायक प्रवीण धाकड़ को दे दिया.एंटी करप्शन टीम ने धाकड़ को धरा। तलाशी के दौरान 4 लाख ₹ अलग से मिला हैं.इस रकम के बारे में मौके पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहां था।इस राशि को लेकर इसके स्रोत की तलाश जारी है.काजल जैसी होनहार RAS टॉपर का यह हाल देख आने वाले परीक्षार्थी के भविष्य पर क्या असर पढ़ेगा!
09/04/2026
ये महिला याद है, जिसे पति से तलाक मिलने के बाद इसके बाप ने ढोल बाजे के साथ अपने घर ऐसे लाया जैसे ओलम्पिक में मेडल जीत कर लाई हो ?
इसके पीछे की कहानी ये है की लड़की का पिता एक जज है और इस लड़की की शादी एक आर्मी फैमिली में हुई।
ससुर आर्मी में रिटायर्ड ऑफिसर और बेटा जिससे शादी हुई वो मेजर गौरव अग्निहोत्री आर्मी में ऑफिसर है।
शादी के कुछ सालों बाद लड़की का भाई एक रोड एक्सीडेंट में घायल हो गया, मेजर गौरव काफी दिनों तक इसका देखभाल किया, फिर कुछ दिन बाद वो लड़का अर्थात् लड़की का भाई मर गया। फिर मेजर गौरव को एक बेटा हुआ इस लड़की से, जब बेटा हुआ तो लड़की की मां मायके में ये कहने लगी की मेरा ही बेटा वापस आ गया।
अब यहीं से विवाद शुरू हुआ।
लड़की की मां ने उस शिशु को अपने पास रख लिया और लड़के के परिवार और लड़के को टॉर्चर करना शुरू कर दिया।
जब टॉर्चर शुरू हुआ तो मेजर गौरव अग्निहोत्री ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्र लिख पर इसकी जांच की मांग की।
फिर लड़की और उसके बाप को लगा की मामला खिलाफ जा रहा तो लड़की वापस लड़के के घर आ गई।
फिर एक महीने बाद लड़की अपने मायके चली गई।
कुछ दिन पश्चात् वहीं एक दिन लड़की की मां ने मायके में बच्चे का मुंडन का घोषित कर दिया और बच्चे के पिता यानी बाप को ही खुशी के इस मौके से अलग कर दिया।
यहीं से विवाद शुरू हुआ।
खैर तलाक के बाद मेजर गौरव अग्निहोत्री के पिता ने लड़की को 3 बीघा जमीन, एक BMW X –30 कार और 60 लाख की ज्वेलरी दे रखा है।
फिर भी लड़की का बाप मायके आने पर कहा कि हमने कोई एलुमिनी नहीं ली।
सब के सब फ्रॉड हैं।
सोशल मीडिया पर ढोल नगाड़े बजा कर स्पेशल टीशर्ट छपवा कर रील बना कर खुद को ये टॉक्सिक परिवार पीड़ित दिखा रहा था।
जब असलियत बाहर आया तो पूरा परिवार अब गायब है। कैसे कैसे लोग हैं और बेशर्मों ने ऐसे मजाक बना दिया है शादी व्यवस्था को। जिंदगी नर्क कर देते हैं। जश्न तो ऐसे मनाते हैं जैसे क्या नाम कमाया है। मूर्ख लोग भी खुद को फेमिनिस्ट दिखाने के लिए या महिलावादी बनने के लिए एक तरफ का जान कर क्रांति करने लगते हैं ताकि सोशल मीडिया के फ्रॉड फेमिनिस्ट महिलाओं को इंप्रेस कर सके।
~ Ranvijay Jha
05/04/2026
गैस पर खाना पकाना सेहत के लिए सही नही है। मुझे बहुत दुख है नेहरू ने गैस पर खाना पकाने के लिए सिस्टम तैयार किया। मित्रों तुम मुझे 100 दिन दो मैं गैस 5000 का और पेट्रोल 500 का ना कर दिया तो कहना। फिर देश में 10000 साल पहले वाली सभ्यता अपने आप विकसित हो जाएगी।
जुलाई 2008 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल का कीमत 147 डॉलर प्रति बैरल था तब भारत में पेट्रोल की कीमत 50 से 51 रुपए प्रति लीटर थी जबकि डीजल ₹35 प्रति लीटर था। आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल 122 प्रति बैरल है जबकि पेट्रोल की कीमत लगभग ₹100 के आसपास है। बाकी आप समझदार हैं अपने-अपने हिसाब से अर्थ लगाते रहिए।
Aajeet Kumar के वॉल से
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