23/02/2025
संपूर्ण बजरंग बाण दोहा : "निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।" "तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥" चौपाई : जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।। जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै।। जैसे कूदि सिन्धु महि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।। आगे जाई लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।। जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा।।...
दोहा :