24/02/2018
श्रीकृष्ण की आखों में आंसू क्यों भर आये कही इसकी वजह आप तो नहीं !!!
श्रीकृष्ण की आखों में आंसू क्यों भर आये कही इसकी वजह आप तो नहीं !!! -----------------------------------------------------------------------------------------...
27/04/2017
द्रौपदी श्रीकृष्ण से करना चाहती थीं विवाह, जानिए कैसे टूटा उसका ये स्वप्न
द्रौपदी कृष्ण से विवाह करना चाहती थीं और उन्होंने विवाह का प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन भगवान कृष्ण ने यह कह कर द्रौपदी से मना कर दिया कि वे स्वयं उनके योग्य नहीं है।
17/02/2017
ये हैं महाभारत के 10 ऐसे अनसुने विचित्र तथ्य, जिन्हें आप पक्का नहीं जानते हैं, शेयर कीजिए और जानिए
महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चला था, इस किताब के 18 अध्याय हैं, श्री कृष्ण ने अर्जुन को 18 दिनों तक गीता का ज्ञान दिया था. गीता में भी 18
16/02/2017
🌸🌸 कर्मों का फल 🌸🌸
महाभारत के युद्ध में जो कुरुक्षेत्र के मैंदान में हुआ, जिसमें अठारह अक्षौहणी सेना मारी गई, इस युद्ध के समापन और सभी मृतकों को तिलांज्जलि देने के बाद पांडवों सहित श्री कृष्ण पितामह भीष्म से आशीर्वाद लेकर हस्तिनापुर को वापिस हुए
तब श्रीकृष्ण को रोक कर पितामाह ने श्रीकृष्ण से पूछ ही लिया, "मधुसूदन, मेरे कौन से कर्म का फल है जो मैं सरसैया पर पड़ा हुआ हूँ?'' यह बात सुनकर मधुसूदन मुस्कराये और पितामह भीष्म से पूछा, 'पितामह आपको कुछ पूर्व जन्मों का ज्ञान है?'' इस पर पितामह ने कहा, 'हाँ''। श्रीकृष्ण मुझे अपने सौ पूर्व जन्मों का ज्ञान है कि मैंने किसी व्यक्ति का कभी अहित नहीं किया |
इस पर श्रीकृष्ण मुस्कराये और बोले पितामह आपने ठीक कहा कि आपने कभी किसी को कष्ट नहीं दिया, लेकिन एक सौ एक वें पूर्वजन्म में आज की तरह तुमने तब भी राजवंश में जन्म लिया था और अपने पुण्य कर्मों से बार-बार राजवंश में जन्म लेते रहे, लेकिन उस जन्म में जब तुम युवराज थे, तब एक बार आप शिकार खेलकर जंगल से निकल रहे थे, तभी आपके घोड़े के अग्रभाग पर एक करकैंटा एक वृक्ष से नीचे गिरा। आपने अपने बाण से उठाकर उसे पीठ के पीछे फेंक दिया, उस समय वह बेरिया के पेड़ पर जा कर गिरा और बेरिया के कांटे उसकी पीठ में धंस गये क्योंकि पीठ के बल ही जाकर गिरा था?
करकेंटा जितना निकलने की कोशिश करता उतना ही कांटे उसकी पीठ में चुभ जाते और इस प्रकार करकेंटा अठारह दिन जीवित रहा और यही ईश्वर से प्रार्थना करता रहा, 'हे युवराज! जिस तरह से मैं तड़प-तड़प कर मृत्यु को प्राप्त हो रहा हूँ, ठीक इसी प्रकार तुम भी होना।'' तो, हे पितामह भीष्म! तुम्हारे पुण्य कर्मों की वजह से आज तक तुम पर करकेंटा का श्राप लागू नहीं हो पाया। लेकिन हस्तिनापुर की राज सभा में द्रोपदी का चीर-हरण होता रहा और आप मूक दर्शक बनकर देखते रहे। जबकि आप सक्षम थे उस अबला पर अत्याचार रोकने में, लेकिन आपने दुर्योधन और दुःशासन को नहीं रोका। इसी कारण पितामह आपके सारे पुण्यकर्म क्षीण हो गये और करकेंटा का 'श्राप' आप पर लागू हो गया।
अतः पितामह प्रत्येक मनुष्य को अपने कर्मों का फल कभी न कभी तो भोगना ही पड़ेगा। प्रकृति सर्वोपरि है, इसका न्याय सर्वोपरि और प्रिय है। इसलिए पृथ्वी पर निवास करने वाले प्रत्येक प्राणी व जीव जन्तु को भी भोगना पड़ता है और कर्मों के ही अनुसार ही जन्म होता है।
जय जय श्री राधे
16/02/2017
सिर्फ कौरव ही नहीं सभी पांडव भी मारे जाते
बर्बरीक, भीम के पुत्र घटोत्कच का पुत्र था। वह बहुत शक्तिशाली और पराक्रमी था। उसने कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर तीन अजेय बाण लिए थे।
11/01/2017
कैसे अर्जुन ने सीखी अंधेरे में बाण चलाने की कला | Revolt Press Hindi
कैसे अर्जुन ने सीखी अंधेरे में बाण चलाने की कला - अर्जुन जब अभी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे, तभी से उनमें विशेष रूप से बाण चलाने में सबसे अधिक
16/10/2016
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प्राचीन भारतीय इतिहास जितना व्यापक और रोचक है, शायद ही किसी अन्य देश का इतिहास इसके करीब हो। महाभारत के रचयिता वेदव्यास के अनुसार महाराज दुष्यन्त के पुत्र सम्राट भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा था। एतरेय ब्राह्मण के मुताबिक, भरत एक चक्रवर्ती राजा थे, जिन्होंने चार दिशाओं तक की भूमि …
16/09/2016
हजारों वर्षों से जीवित है ये आठ महामानव
संसार का एक मात्र सत्य मरण है। जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु निश्चित है। चाहे संसार का कोई भी चर- अचर, द्रश्य-अद्रश्य जीव हो। अर्थात् मृत्यु अटल सत्य है। जिससे कोई भी नहीं बच सका है। लेकिन कुछ जीवात्माएं आज भी जीवित हैं, सशरीर जीवित हैं, ये एक रहस्य ही है..!! यह दुनिया का एक आश्चर्य है। विज्ञान इ
16/09/2016
वीडियो: मिल गई समुद्र में डूबी भगवान श्रीकृष्ण की नगरी 'द्वारिका'
समुद्र में विलीन हुई द्वारिका नगरी को ढूढ़ने के लिए कई वैज्ञानिकों सालों से इससे जुड़े सवालों के उत्तर तलाशते रहे और आखिरकार उन्हें इसके जवाब मिले भी हैं।