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🌱 मल्चिंग वाले खेत में बेड के बीच की घास नियंत्रण — 🎯 उद्देश्यमल्चिंग वाले बैंगन के खेत में दो बेड के बीच की नाली/रास्ते...
24/08/2026

🌱 मल्चिंग वाले खेत में बेड के बीच की घास नियंत्रण —

🎯 उद्देश्य

मल्चिंग वाले बैंगन के खेत में दो बेड के बीच की नाली/रास्ते में उगी खरपतवार को नियंत्रित करना, बिना मुख्य फसल को नुकसान पहुँचाए।

1️⃣ सबसे सुरक्षित तरीका — निराई-गुड़ाई

खुरपी, फावड़ा या इंटर-रो वीडर से घास निकालें।

घास छोटी अवस्था में निकालना सबसे आसान रहता है।

बैंगन की जड़ों और ड्रिप पाइप को नुकसान न पहुँचाएँ।

मल्चिंग शीट को फटने से बचाएँ।

2️⃣ पावर वीडर

पर्याप्त चौड़ी नाली होने पर छोटे पावर वीडर/इंटर-रो वीडर का प्रयोग किया जा सकता है।

मशीन को बैंगन के तने और जड़ों से सुरक्षित दूरी पर चलाएँ।

मल्चिंग फिल्म और ड्रिप लाइन की सुरक्षा जरूरी है।

3️⃣ रासायनिक नियंत्रण ⚠️

यदि नाली में घास बहुत ज्यादा हो और हर्बिसाइड जरूरी हो, तो non-selective herbicide का उपयोग केवल नाली की खरपतवार पर करें।

संभावित विकल्प:

Glufosinate Ammonium

Paraquat Dichloride

⚠️ दोनों ही non-selective हैं, इसलिए बैंगन की पत्ती/तने पर पड़ने से गंभीर नुकसान हो सकता है।

🛡️ स्प्रे की जरूरी सावधानियाँ

Hood/Shielded nozzle का प्रयोग करें।

नोजल को नीचे रखकर केवल नाली की घास को target करें।

तेज हवा में स्प्रे बिल्कुल न करें।

स्प्रे की बूंद या धुंध बैंगन तक नहीं पहुँचनी चाहिए।

मल्चिंग शीट और ड्रिप लाइन पर अनावश्यक स्प्रे न करें।

मात्रा हमेशा उसी उत्पाद के लेबल/पंजीकृत उपयोग के अनुसार रखें।

4️⃣ भविष्य में घास रोकने के उपाय

नाली की सफाई के बाद:

W**d Mat बिछाएँ।

या धान का सूखा पुआल/Straw Mulch की पर्याप्त परत डालें।

इससे सूर्य का प्रकाश कम पहुँचेगा और नई खरपतवार का उगना कम होगा।

⭐ सबसे अच्छा तरीका

छोटी घास → खुरपी/वीडर
ज्यादा घास → यांत्रिक सफाई
बाद में → W**d Mat/Straw Mulch
बहुत ज्यादा समस्या → Hooded/Shielded herbicide, केवल नाली में और लेबल के अनुसार

🚨 याद रखें

बैंगन की मौजूदगी में पूरे खेत में non-selective herbicide का खुला स्प्रे न करें।
नाली में targeted application ही करें और drift से फसल को पूरी तरह बचाएँ।
©️ 079030 55903

24/08/2026

धान की फसल में बाली बनने से लेकर दाना पकने तक का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी समय पैदावार (Yield) और दानों की गुणवत्ता तय होती है।

# # # 1. पहली स्टेज: गभोट अवस्था (बाली निकलने से ठीक पहले / Booting Stage)
जब धान का तना मोटा होने लगे और बाली अंदर बन रही हो, तब पौधे को ऊर्जा और परागण के लिए विशेष तत्वों की जरूरत होती है।

* **कौन सा खाद:** **NPK 0:52:34** (1 किग्रा) + **बोरॉन 20%** (100 ग्राम) प्रति एकड़ (150-200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें)।
* **क्यों इस्तेमाल करें?**

* **फॉस्फोरस (52%):** पौधे की जड़ों और तने को अतिरिक्त ताकत देता है ताकि बाली बाहर निकलते समय तना टूटे या गिरे नहीं। साथ ही, यह बालियों की लंबाई और उनमें दानों की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।

* **पोटैशियम (34%):** पौधे में पानी का संतुलन बनाए रखता है और प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) की गति तेज करता है, जिससे पौधे के पत्तों में ज्यादा भोजन बनता है।

* **बोरॉन (Boron):** बोरॉन का काम परागकणों (Pollen grains) को मजबूत बनाना है। इससे परागण (Pollination) सही से होता है और बाली में एक भी दाना खाली (बांझ/पोचा) नहीं रहता।

# # # 2. दूसरी स्टेज: दुग्ध अवस्था (दाना भरते समय / Milking Stage)
जब बालियां पूरी तरह बाहर निकल आएं और फूलों का झड़ना पूरा हो जाए (दानों में दूध बनने लगे), तब पौधे की वनस्पति बढ़वार (Vegetative growth) पूरी तरह रुक जाती है और उसे सिर्फ दानों को ठोस बनाने की जरूरत होती है।

* **कौन सा खाद:** **NPK 0:0:50** (पोटैशियम सल्फेट) — 1 किग्रा प्रति एकड़ (150-200 लीटर पानी में)।

* **क्यों इस्तेमाल करें?**

* **पोटैशियम (50%):** यह पत्तियों में बने स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट को सीधे दानों में ट्रांसफर करता है। इससे दाने मोटे, ठोस और चमकदार बनते हैं, जिससे 1000 दानों का वजन (Test Weight) बढ़ जाता है।

* **सल्फर (17.5%):** NPK 0:0:50 में मौजूद सल्फर दानों के रंग, चमक और दाने की क्वालिटी को निखारता है और फंगल रोगों से लड़ने की क्षमता देता है।

# # # जरूरी सावधानियां व बातें

* **नाइट्रोजन (यूरिया) का इस्तेमाल न करें:** बाली निकलने के समय या बाद में यूरिया (नाइट्रोजन) देने से पौधा हरा और मुलायम हो जाता है, जिससे **शीथ ब्लाइट (Sheath Blight), फॉल्स स्मट (हल्दी रोग)** और कीटों (जैसे बीपीएच) का हमला बहुत तेजी से बढ़ जाता है।

* **फ्लावरिंग के समय स्प्रे से बचें:** जब खेत में 100% फूल खिल रहे हों (सुबह के समय परागण हो रहा हो), तब स्प्रे करने से बचें ताकि परागकण धुल न जाएं।

* **खेत में नमी:** गभोट अवस्था से लेकर दाना कड़ा होने तक खेत में हल्की नमी (हल्का पानी) जरूर बनाए रखें, सूखा न पड़ने दें।

©️ बिहार युवा किसान

24/08/2026

🌾 मिट्टी का खुदा | किसान की मेहनत, मिट्टी से मोहब्बत और देश की उम्म...

असल में किसान हो तो यह वीडियो जरूर देखे,ओर किसान होने का अपने आप पर गर्व करे।।।।।।।
24/08/2026

असल में किसान हो तो यह वीडियो जरूर देखे,ओर किसान होने का अपने आप पर गर्व करे।।।।।।।

🌾 मिट्टी का खुदा | किसान की मेहनत, मिट्टी से मोहब्बत और देश की उम्म...

24/08/2026

🌧️ बारिश में टमाटर की फसल — 30 दिन का Spray Schedule

बारिश में अधिक नमी, लगातार पत्तियों का गीला रहना और खेत में पानी रुकने से टमाटर में Late Blight, Early Blight, Root/Collar Rot, Bacterial Wilt और Leaf Curl Virus जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए दवा के साथ जल निकासी, सफाई और संतुलित पोषण भी जरूरी है।

📅 30 दिन का Practical Schedule

🔴 Day 1 — Late Blight से सुरक्षा

यदि लगातार बारिश/बादल हैं और Late Blight का खतरा है:

Cymoxanil + Mancozeb @ 2 ग्राम/लीटर पानी

➡️ 15 लीटर पंप = 30 ग्राम

पत्तियों पर पानी जैसे भूरे-काले धब्बे दिखाई दें तो Late Blight की संभावना देखें।

सावधानी: इसे Calcium, Boron, Micronutrient या Trichoderma/Pseudomonas के साथ एक ही टैंक में न मिलाएं।

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🟢 Day 4–5 — कीटों की निगरानी

पत्तियों की नीचे वाली सतह देखें:

- Whitefly
- Thrips
- Aphid
- Mite

हल्का प्रकोप होने पर Neem oil जैसे soft option का उपयोग label के अनुसार किया जा सकता है।

Neem oil 5 ml/L → 15 लीटर में 75 ml

तेज धूप में spray न करें और label पर दिए निर्देशों का पालन करें।

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🟡 Day 7 — पोषण

पौधे कमजोर हों और बारिश के कारण growth धीमी हो तो:

19:19:19 @ 1 ग्राम/लीटर

➡️ 15 लीटर = 15 ग्राम

Micronutrient mixture हो तो केवल उसके label dose पर दें।

एक ही टैंक में बहुत सारे fertilizer और pesticide न मिलाएं।

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🔵 Day 10 — Early Blight / Leaf Spot

यदि पत्तियों पर गोल भूरे धब्बे और concentric rings दिखाई दें:

Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% SC

उत्पाद के वर्तमान label के अनुसार dose रखें। TNAU ने इस formulation को tomato Early Blight management में सूचीबद्ध किया है।

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🟣 Day 13–14 — Calcium + Boron

फल लगना शुरू हो गया हो तो:

- Calcium nitrate → label dose
- Boron → label dose

⚠️ Calcium nitrate को phosphate/sulphate fertilizers के साथ एक ही tank में न मिलाएं।

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🔴 Day 16–17 — Fungicide Rotation

यदि बारिश और बादल लगातार हैं तथा blight का खतरा बना हुआ है तो पहले वाली fungicide को बार-बार repeat करने के बजाय अलग FRAC group का registered fungicide चुनें।

एक ही mode of action की दवा लगातार न चलाएं।

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🟢 Day 20 — Fruit Borer की जांच

फल में छेद, अंदर इल्ली या छेद के पास काला मल दिखाई दे तो Fruit Borer की संभावना है।

कीट दिखाई देने पर ही label-approved insecticide का उपयोग करें।

Routine में बिना कीट के insecticide न डालें।

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🟡 Day 23 — फल विकास

फल बढ़ने की अवस्था में:

13:0:45 (Potassium Nitrate)
→ label dose के अनुसार spray करें।

⚠️ इसे Calcium nitrate के साथ एक ही tank में न मिलाएं।

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🔵 Day 26–27 — रोग की दोबारा जांच

पूरे खेत में पौधों की जांच करें:

पानी जैसे भूरे-काले धब्बे → Late Blight

गोल धब्बे + छल्ले → Early Blight

अचानक पूरा पौधा मुरझाए → Bacterial Wilt

जड़/तना सड़े → Root/Collar Rot

नई पत्तियां मुड़ें + Whitefly → Leaf Curl Virus

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🟢 Day 30 — Biological Support

यदि chemical fungicide से पर्याप्त अंतर हो और उत्पाद के label में उपयोग की अनुमति हो तो:

Trichoderma / Pseudomonas

का उपयोग root-zone/foliar application के लिए किया जा सकता है।

⚠️ इन्हें chemical fungicide के साथ एक ही tank में न मिलाएं।

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🌱 रोग के अनुसार तुरंत पहचान

1️⃣ Late Blight

पानी जैसे भूरे-काले धब्बे + बारिश/बादल
➡️ Blight fungicide को प्राथमिकता दें।

2️⃣ Early Blight

गोल भूरे धब्बे + concentric rings
➡️ उपयुक्त registered fungicide का उपयोग करें।

3️⃣ Bacterial Wilt

पौधा अचानक मुरझाए
➡️ संक्रमित पौधा निकालें; सामान्य fungicide से इलाज नहीं होता।

4️⃣ Root/Collar Rot

जड़ या मिट्टी के पास तना भूरा/काला और सड़ा
➡️ जल निकासी + root-zone management सबसे जरूरी।

5️⃣ Leaf Curl Virus

नई पत्तियां छोटी/मुड़ी + Whitefly
➡️ संक्रमित पौधे हटाएं और Whitefly को नियंत्रित करें।

🚨 बारिश में टमाटर के 9 Golden Rules

1. खेत में पानी जमा न होने दें।
2. Raised bed और अच्छी drainage रखें।
3. पौधों को staking दें।
4. नीचे की संक्रमित पत्तियां हटाएं।
5. खेत में हवा का आवागमन बनाए रखें।
6. जरूरत से ज्यादा यूरिया/नाइट्रोजन न दें।
7. एक ही fungicide को लगातार न दोहराएं।
8. Chemical fungicide और Trichoderma/Pseudomonas को एक tank में न मिलाएं।
9. हर pesticide का वर्तमान label dose और PHI (तोड़ाई से पहले का अंतराल) जरूर देखें।

⭐ याद रखें

बारिश में टमाटर की सुरक्षा = जल निकासी + खेत की सफाई + हवा का आवागमन + संतुलित पोषण + समय पर रोग की पहचान + सही fungicide rotation।

दवा का चुनाव हमेशा वास्तविक रोग की पहचान और उत्पाद के वर्तमान लेबल के अनुसार करें।

©️ बिहार युवा किसान

24/08/2026

🌧️ बारिश के मौसम में टमाटर के प्रमुख रोग और उनका नियंत्रण

बारिश के मौसम में टमाटर में अधिक नमी, लगातार पत्तियों का गीला रहना और खेत में पानी रुकने के कारण कई रोग तेजी से फैलते हैं। सही समय पर पहचान और नियंत्रण बहुत जरूरी है।

🍅 1. Late Blight — पछेती झुलसा

पहचान

- पत्तियों पर पानी जैसे भीगे हुए भूरे-काले धब्बे।
- धब्बे तेजी से फैलते हैं।
- अधिक बारिश और बादल वाले मौसम में रोग तेजी से बढ़ सकता है।
- फल पर भी भूरे-काले सड़े हुए धब्बे बन सकते हैं।

नियंत्रण

- खेत में पानी जमा न होने दें।
- संक्रमित पत्तियां हटाएं।
- पौधों में हवा का आवागमन रखें।
- रोग की स्थिति में label-approved blight fungicide का उपयोग करें।
- Cymoxanil + Mancozeb जैसे fungicide कुछ परिस्थितियों में उपयोगी हो सकते हैं।
- एक ही fungicide को लगातार बार-बार न दोहराएं।

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🟤 2. Early Blight — अगेती झुलसा

पहचान

- पहले पुरानी पत्तियों पर गोल भूरे धब्बे।
- धब्बों में अक्सर छल्ले जैसे concentric rings दिखाई देते हैं।
- धीरे-धीरे पत्तियां पीली होकर सूखने लगती हैं।
- संक्रमण बढ़ने पर पौधे की पत्तियां काफी कम हो सकती हैं।

नियंत्रण

- संक्रमित पत्तियों को निकालकर खेत से बाहर करें।
- पौधों में उचित दूरी और हवा का आवागमन रखें।
- पत्तियों को अनावश्यक रूप से गीला न रखें।
- Mancozeb/Chlorothalonil जैसे label-approved fungicide का उपयोग किया जा सकता है।

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🦠 3. Bacterial Wilt — जीवाणु मुरझान

पहचान

- पौधा अचानक मुरझाने लगता है।
- शुरुआत में पत्तियां हरी रहते हुए भी लटक सकती हैं।
- धीरे-धीरे पूरा पौधा मुरझा सकता है।
- तना काटने पर vascular tissue भूरा दिखाई दे सकता है।

नियंत्रण

- संक्रमित पौधे जड़ सहित निकालकर खेत से बाहर नष्ट करें।
- खेत में पानी जमा न होने दें।
- लगातार टमाटर/बैंगन/मिर्च जैसी Solanaceae फसलें उसी खेत में न लगाएं।
- फसल चक्र अपनाएं।
- स्वस्थ और रोग-प्रतिरोधी पौध/हाइब्रिड का प्रयोग करें।

⚠️ महत्वपूर्ण: Bacterial wilt पर सामान्य fungicide प्रभावी नहीं होता।

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🌱 4. Root Rot / Collar Rot — जड़ एवं तना सड़न

पहचान

- जड़ें भूरी या काली होकर सड़ने लगती हैं।
- मिट्टी के पास तने का हिस्सा भूरा/काला हो सकता है।
- पौधा कमजोर होकर मुरझाने लगता है।
- पानी रुकने वाले खेत में समस्या ज्यादा हो सकती है।

नियंत्रण

- सबसे पहले जल निकासी अच्छी करें।
- जरूरत से ज्यादा सिंचाई न करें।
- संक्रमित पौधों को निकालें।
- Root-zone में उचित fungicide/biological treatment का उपयोग रोग के कारण के अनुसार करें।
- Trichoderma/Pseudomonas को preventive biological management में उपयोग किया जा सकता है; इन्हें chemical fungicide के साथ एक ही टैंक में न मिलाएं।

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🦠 5. Tomato Leaf Curl Virus — पत्ती मरोड़ रोग

पहचान

- नई पत्तियां छोटी और मुड़ी हुई दिखाई देती हैं।
- पत्तियां ऊपर/नीचे की ओर मुड़ सकती हैं।
- पौधे की वृद्धि रुक जाती है।
- फूल और फल कम लग सकते हैं।

मुख्य कारण

यह virus है और इसका प्रमुख vector Whitefly (सफेद मक्खी) है।

नियंत्रण

- शुरुआती संक्रमित पौधों को निकालकर नष्ट करें।
- खेत में Whitefly की निगरानी रखें।
- Yellow sticky traps का उपयोग करें।
- Whitefly का नियंत्रण label-approved insecticide और सही rotation के अनुसार करें।
- खेत में खरपतवार नियंत्रण रखें।

⚠️ Virus लग चुके पौधे को fungicide से ठीक नहीं किया जा सकता।

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🌧️ बारिश में टमाटर बचाने के 7 जरूरी नियम

1️⃣ जल निकासी

खेत में पानी जमा न होने दें। टमाटर की जड़ों में लंबे समय तक पानी रहने से root rot और bacterial diseases बढ़ सकते हैं।

2️⃣ Staking करें

पौधों को सहारा दें ताकि पत्तियां और फल जमीन को न छुएं।

3️⃣ संक्रमित पत्तियां हटाएं

रोगग्रस्त पत्तियों को खेत में न छोड़ें।

4️⃣ पत्तियां लंबे समय तक गीली न रखें

बारिश के बाद अतिरिक्त सिंचाई न करें और खेत में हवा का आवागमन रखें।

5️⃣ संतुलित पोषण दें

बारिश के समय जरूरत से ज्यादा यूरिया/नाइट्रोजन देने से बहुत नरम और घनी बढ़वार हो सकती है, जिससे कुछ रोगों का खतरा बढ़ सकता है।

6️⃣ रोग के अनुसार दवा चुनें

हर भूरे धब्बे के लिए एक ही fungicide उपयोग न करें। पहले रोग की पहचान करें।

7️⃣ दवाओं का अनावश्यक मिश्रण न करें

एक साथ कई fungicide, insecticide, micronutrient और biological products मिलाने से phytotoxicity का जोखिम बढ़ सकता है।

---

⭐ आसान पहचान

पानी जैसे भूरे-काले धब्बे + बारिश → Late Blight की जांच करें।

गोल धब्बे + छल्ले → Early Blight की जांच करें।

अचानक पूरा पौधा मुरझाए → Bacterial Wilt की जांच करें।

जड़/तना सड़े + पानी जमा → Root/Collar Rot की जांच करें।

नई पत्तियां मुड़ें + सफेद मक्खी → Leaf Curl Virus की जांच करें।

🚨 सबसे जरूरी बात

बारिश में टमाटर की सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका केवल दवा का छिड़काव नहीं है। जल निकासी + खेत की सफाई + हवा का आवागमन + संतुलित पोषण + समय पर रोग की पहचान—इन सभी को साथ में अपनाना चाहिए।

नोट: किसी भी fungicide/insecticide की अंतिम मात्रा, फसल पर उपयोग की अनुमति और harvest से पहले का waiting period हमेशा उत्पाद के वर्तमान लेबल/स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार रखें।
©️ बिहार युवा किसान

23/08/2026

🚨🌿 कपास में टिंडे बन रहे हैं, लेकिन भराव कमजोर है? ये गलती मत करना! 🌿🚨

कपास में सिर्फ टिंडों की संख्या ज्यादा होना जरूरी नहीं है—हर टिंडे का अच्छा भराव और वजन ही असली उत्पादन तय करता है। 💯

🔥 टिंडे के अच्छे विकास के लिए 5 जरूरी बातें:

1️⃣ पोटाश की कमी न होने दें
➡️ टिंडे के विकास और भराव के लिए पोटाश बेहद महत्वपूर्ण है।

2️⃣ बोरॉन को नजरअंदाज न करें
➡️ फूल से टिंडा बनने की प्रक्रिया में बोरॉन की भूमिका महत्वपूर्ण है।

3️⃣ जरूरत से ज्यादा यूरिया न दें
➡️ केवल पौधे को ज्यादा हरा बनाने के बजाय संतुलित पोषण पर ध्यान दें।

4️⃣ खेत में नमी का संतुलन रखें 💧
➡️ बार-बार सूखना और अचानक ज्यादा पानी देना फूल व टिंडे पर असर डाल सकता है।

5️⃣ कीटों की नियमित निगरानी करें 🐛
➡️ सफेद मक्खी, थ्रिप्स, जेसिड और सुंडी का समय पर पता लगाना जरूरी है।

🌱 एक आसान फार्मूला याद रखें:
स्वस्थ पौधा + संतुलित पोषण + सही नमी + समय पर कीट नियंत्रण = ज्यादा मजबूत टिंडे + बेहतर उत्पादन 📈

⚠️ ध्यान दें: किसी भी खाद/पोषक तत्व की मात्रा खेत की स्थिति, मिट्टी की जांच और फसल की अवस्था के अनुसार रखें; बिना जरूरत ज्यादा मात्रा देना नुकसान कर सकता है।

💬 आपकी कपास में अभी क्या समस्या है?
👇 कमेंट में लिखें: फूल झड़ना / टिंडे गिरना / टिंडे छोटे रहना / कीट / पौधा कमजोर

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