01/11/2025
मोकामा का इंतकाम
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चार दिन पहले एबीपी न्यूज़ का पत्रकार मोकामा में एक व्यक्ति का इंटरव्यू कर रहा था " उस व्यक्ति के अनुसार अनंत सिंह की पत्नी जो राष्ट्रीय जनता दल से विधायक का चुनाव जीती थी उन्हें वह कोठे वाली बता रहा था, और उनके नाम के अंत में खातून लगा रहा था, और कह रहा था कि वह पश्चिम बंगाल के एक कोठे से आई हैं"
जो व्यक्ति यह प्रलाप कर रहा था वह कभी अनंत सिंह के ही बड़े भाई दिलीप सिंह के खिलाफ जेल में रहकर चुनाव लड़ा था और उस समय भी दिलीप सिंह राष्ट्रीय जनता दल के ही टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे, जो व्यक्ति इंटरव्यू दे रहा था उसके ऊपर कुल गंभीर 38 मुकदमे दर्ज थे, कभी वह मोकामा के टाल इलाके में आतंक का पर्याय रह चुका था। बीते हफ्ते से लगातार वह अनंत सिंह के ऊपर व्यक्तिगत भद्दे भद्दे कमेंट कर रहे थे।
कल टाल के इलाके में अनंत सिंह का तूफानी दौरा था जो की सुबह से ही 7:00 बजे से चल रहा था, दुलारचंद यादव ने अपने कई इंटरव्यू में यह कह चुके थे कि उन्हें टाल में आने दो तो वापस नहीं जाने देंगे, जो लोग यह कह रहे हैं कि दुलारचंद यादव राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकर्ता थे, कुछ तो यहां तक कह रहे थे कि लालू के करिबो तो उन्हें बता दूं कि वह जनसुराज के प्रत्याशी पियूष प्रियदर्शी का प्रचार कर रहे थे और 10 दिनों के अंदर उनके जितने भी इंटरव्यू है वह सब पीयूष प्रियदर्शी के ही साथ है, अब राष्ट्रीय जनता दल इस मामले को हाईजैक करना चाह रहा है, लेकिन जो वीडियो प्राप्त हुए हैं उनसे उन्हें देखकर यह मालूम पड़ता है सुबह से ही जब अनंत सिंह टाल के इलाके में घूम रहे थे उसके पहले से ही उनके ऊपर हमले की तैयारी की गई थी, वीडियो में भी दिख रहा है की सबसे पहले उनकी ही गाड़ियों पर पत्थर फेके गए और उन्हें तोड़ा गया, तो मेरी समझ से यह हत्या नहीं दो गुटों की झड़प में क्रिया की प्रतिक्रिया है, इसमें किसी भी तरफ से जान तो जानी ही थी।
अपराधी अगर अपनी पसंदीदा पार्टी से चुनाव लड़ रहा हो तो उसके प्रति भारी सहानुभूति बन जाती है, और वह अपराधी नहीं एक आम नागरिक बन जाता है लेकिन वही अपराधी अगर दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ रहा हो तो वह अपराधी नहीं नरसंहार करने वाला बन जाता है।
बिहार में अपराधियों को टिकट देना आम प्रचलन में है और सभी पार्टी की जरूरत भी होती है।
राष्ट्रीय जनता दल ने ADR के आंकड़ों के मुताबिक 76% अपराधियों को टिकट दिया है, जिसका नेतृत्व कर रहे हैं रीतलाल यादव जिनके ऊपर जीवन का पहला मुकदमा साइकिल छीनने का दर्ज हुआ था और आखिरी मुकदमा बिहार के होटल कारोबारी और उद्योगपतियों से रंगदारी मांगने का और लेने का दर्ज हुआ जिसके चक्कर में वह जेल में है और चुनाव लड़ रहें हैं, आरजेडी के पसंद वाले व्यक्तियों को वे अच्छे लगते हैं।
जनता दल यूनाइटेड 38% अपराधियों को टिकट दिया है, जिसका नेतृत्व कर रहे हैं अनंत सिंह, जो अभी कुछ दिन पहले ही जमानत पर आए हैं और वह भी एक ऐसे मामले में जो उनके ही विधानसभा के सोनू मोनू गैंग ने एक दलित परिवार के घर पर ताला मार दिया था और वही ताला अनंत सिंह खुलवाने गए थे तो वहां गोलीबारी हो गई थी इसमें अनंत सिंह पर केस हुआ था और वह जेल चले गए थे।
भाजपा जो चरित्र धोने का वाशिंग मशीन लिए चलती है उसके अंदर आंकड़ों के मुताबिक उसमें 56%परसेंट उम्मीदवार अपराधी हैं या यूं कह लीजिए कि 56% उम्मीदवार पूर्व अपराधी होते है।
अपनी पार्टी का अपराधी, अपनी बिरादरी का अपराधी सबको चहेता होता है, अगर अपराध का विरोध करना है अपराधी का विरोध करना है तो सभी प्रकार के अपराधियों का और सभी प्रकार के अपराध का विरोध करना सीखिए, अपनी पार्टी के अपराधी बाहुबली को आप टिकट दे रहे हैं और दूसरी तरफ के अपराधी और बाहुबली पर आप तंज कस रहे हैं ये अच्छाई किस प्रकार की !
तेजस्वी जी ने मोकामा में नारा दिया कि मैं कलम बांट रहा हूं, और टिकट किसे बांटा जिसने पूरे बिहार पूर्वांचल में AK 47 बांटा था, जिसके अपराध से तंग आकर उसके पिता ने आत्महत्या कर ली, उसके अपराध से तंग आकर उसके एक भाई ने आत्महत्या कर ली, ओवर स्पीड एक्सीडेंट में पुत्र की जान दिल्ली में चली गई, इसके पहले भी चुनाव में सजा पूरी कर चुके दोषसिद्ध अपराधी अशोक महतो की पत्नी को टिकट दिया था, इस चुनाव में भी दोषसिद्ध सजा पूरी कर चुके अपराधी सूरजभान की पत्नी को टिकट दिया, आप इस परंपरा को तोड़ सकते थे लेकिन आपने परंपरा जारी रखी, 20 साल से सूरजभान NDA के करीब रहे और 2 दिन में राष्ट्रीय जनता दल के मुरीद हो गए और टिकट लेकर भी चले आए।
जब अपराध का विरोध करना है तो अपराधी को संरक्षण और टिकट देना ही क्यों ? और ऐसे लोगों को अपनी जाति के अनुसार पसंद ही क्यों करना ? क्या उन लोगों ने जो हत्याएं की हैं वह हमारी अपनी जाति के हो जाएंगे तो उन हत्याओं को माफ कर दिया जाएगा, सबसे पहले तो अपराधी में जात देखना बंद करिए अपराधी में नेता ढूंढना बंद कर दीजिए, देखिएगा राजनीति में अपराधी आने ही बंद हो जाएंगे।
राजनीति में विरोध की भी एक मर्यादा होती है, शब्द चयन की भी एक अपनी सीमा होती है, एक अपराधी ने दूसरे अपराधी को मारा तो इसमें अपराधी ही मरा ! चाहे वह मरता चाहे यह मरता ! न अनंत सिंह सज्जन इंसान है न दुलारचंद यादव सज्जन इंसान थे, दोषी जो कोई भी हो उस पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, बिहार में अपराध और अपराधी चाहे अपनी जाति के हो या दूसरी जाति के दोनों समाप्त होने चाहिए !
संयोग देखिए कि जिस पत्रकार के समक्ष उन्होंने अभद्र टिप्पणी की थी उसी पत्रकार ने उनकी हत्या की भी कवरेज की, एक बात मैं और बता दूं कि मैंने सच लिखने की कोशिश की है, न हीं मैं दुलारचंद यादव का विरोधी हूं और न हीं मैं अनंत सिंह का समर्थक हूं।
अपराध अपराधी दोनों समाप्त हो ! ना वह आपके सगे हैं ना हमारे सगे हैं !
अतुल सिंह
जौनपुर