04/01/2026
38 लाख करोड़ की करेंसी, 107 लाख करोड़ का कर्ज़ – ये अर्थव्यवस्था है या लूट?
देश में पैसा कम, कर्ज़ कई गुना ज़्यादा – RBI के आंकड़े क्या कहते हैं?
जिस देश में करेंसी नहीं, वहाँ 107 लाख करोड़ का कर्ज़ कैसे?
कर्ज़ का मायाजाल: आम जनता फँसी, कॉरपोरेट माफ़
भारत की अर्थव्यवस्था या सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला?
RBI के आंकड़ों के अनुसार देश में कुल करेंसी लगभग 38 लाख करोड़ रुपये है,
लेकिन सरकार और बैंकों द्वारा दिया गया कुल कर्ज़ 107 लाख करोड़ रुपये से भी ज़्यादा है।
सवाल साफ़ है —
➡️ जब देश में पैसा ही नहीं है, तो कर्ज़ आया कहाँ से?
➡️ ये कर्ज़ किसे दिया गया?
➡️ क्या आम जनता को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य मिला?
➡️ या फिर चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों को मालामाल किया गया?
आज आम नागरिक महंगाई, बेरोज़गारी और टैक्स के बोझ से दबा हुआ है,
जबकि बड़े उद्योगपतियों के कर्ज़
❌ माफ़ किए जा रहे हैं
❌ रिस्ट्रक्चर किए जा रहे हैं
❌ NPA बना कर छुपा दिए जा रहे हैं
यह सवाल सिर्फ़ अर्थव्यवस्था का नहीं,
लोकतंत्र, जवाबदेही और जनता के भविष्य का है।
अब चुप रहने का समय नहीं,
सवाल पूछने का समय है — संसद से लेकर सड़क तक।
✊ देश बिकने नहीं देंगे, सवाल पूछते रहेंगे।
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