26/09/2016
Genius teenegers mid brain
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26/09/2016
its mid brain course
बहुमुखी प्रतिभा का धनी व्यक्ति भी अपनी जिंदगी में अपने ब्रेन का 4 प्रतिशत ही उपयोग कर पाता है। यह चार प्रतिशत भी हम सिर्फ लेफ्ट ब्रेन का उपयोग करते हैं, जो लॉजिकल एप्रोच वाला है। राइट ब्रेन क्रिएटिव थिंकर होता है।
दोनों ब्रेन के बीच का ब्रिज है मिड ब्रेन। वह यदि एक्टिव हो जाए, तो बच्चा ऑल राउंडर बनता है, उसका आईक्यू ईक्यू बड़ता है। लेफ्ट ब्रेन स्कूल की पढ़ाई, लॉजिकल सोच और याद करने के लिए काफी उपयोगी है। लेकिन, राइट ब्रेन इनोवेशन और क्रिएशन के लिए जरूरी है।
क्या है मिड ब्रेन एक्टिवेशन?
हमारे मस्तिष्क के तीन भाग होते हैं। राइट ब्रेन, लेफ्ट ब्रेन (कंशियस, अन-कंशियस) एवंमिड ब्रेन। अधिकतर हम सभी लेफ्ट ब्रेन का 90 फीसदी उपयोग करते हैं, जबकि राइट ब्रेन सिर्फ 10 फीसदी उपयोग किया जाता है। इस पद्धति के जरिए मेमोरी, कॉन्सेंट्रेशन, विजुलाइजेशन, इमेजिनेशन, क्रिएटिव माइंड का उपयोग जल्दी पढ़ने की कला जाग्रत कर सकेंगे।
मिड ब्रेन एक्टिवेशन योग और विज्ञान के संयोग से विकसित एक विशेष तकनीक है जिसके द्वारा सबसे पहले बच्चे के दिमाग को अल्फा या शून्य की स्टेज में लाया जाता है। इस स्थिति में मिड-ब्रेन ‘कंशियस- अनकंशियस’ के बीच बीच ब्रिज का काम करने लगता है। नतीजतन सभी इंद्रियां एक साथ ऑब्जेक्ट को महसूस कर मस्तिष्क को सूचना देने लगती हैं।
म्यूजिक, डांस, जिमिंग, पजल्स व गेम्स अभ्यास को आसान और रोचकपूरी बनाते हैं
यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक प्रणाली पर आधारित है।
इसमें बच्चों के कंफर्ट जोन में जाकर उन्हें अलग अलग steps करवाए जाते हैं जैसे ब्रेन एक्सरसाइज, ब्रेन जिम, डांस, पजल्स, गेम्स तथा योग व ध्यान क्रियाएं सिखाई जाती हैं।
जन्मांध, जन्म से गूंगे-बहरे या इंद्रीय संबंधी किसी दूसरी जन्मजात विकृति से पीड़ित बच्चों के लिए यह तकनीक प्रभावी नहींहै। लेकिनमेंटली-रिटायर्ड, सेरेब्रलपाल्सी व प्रोजेरिया जैसे मानसिक रोगों से पीड़ित बच्चों के लिये ये तकनीक थैरेपी का काम भी कर सकती है।
मिड ब्रेन एक्टिवेशन में कितना समय लगता है?
मिड ब्रेन एक्टिवेशन वैसे तो २ दिन में हो जाता है. पहले और दूसरे दिन 6 घंटे अभ्यास कराया जाता है.
इसके बाद इसका फॉलोअप दो घंटे हर हफ्ते करवाया जाता है। इनके लिए कारगर..करीब डेढ़ माह के अभ्यास में बच्चों की इंद्रियां संवेदनशील होने लगती हैं।
बच्चों को क्या फायदा होता है?
हम अगर चाहते है बच्चा पूरे बैलेंस के साथ काम करे, तो इन दोनों के बीच का पॉइंट यानी मिड ब्रेन एक्टिव करना जरूरी है। बॉडी के लेफ्ट और राइट दोनों तरफ के पार्ट बराबर उपयोग करने की प्रेक्टिस कराई जाती है। म्यूजिक थेरेपी, मेडिटेशन, छोटी छोटी ब्रेन स्ट्रेंथ बढ़ाने की एक्सरसाइज से भी मिड ब्रेन एक्टिव होता है।
ट्रेनिंग और प्रॉपर कोर्स से 5 से 15 साल तक के बच्चों का मिड ब्रेन आसानी से एक्टिव हो सकता है। 15 की उम्र के बाद आने वाले हार्मोनल बदलाव मिड ब्रेन को पूरी तरह से एक्टिव नहीं कर पाते। इसलिए 15 की उम्र के बाद इसके एक्टिवेशन के चांस बहुत कम होते हैं। मिड ब्रेन एक्टिव होने पर बच्चा आंख पर पट्टी बांधकर भी चीजें और रंग पहचान लेता है।
मिड ब्रेन एक्टिवेशन कोर्स करने के बाद बच्चों में एकाग्रता की जबर्दस्त बढ़ोतरी होती है, यहां तक की वे आंखों में पट्टी बांधकर किताबें पढ़ सकते हैं, विभिन्न रंगों को आसानी से पहचान सकते हैं। कोर्स करने के बाद छात्रों की जीवन शैली ही बदल जाती है। यह कोर्स ध्यान वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित है, जिससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।
इस कोर्स के कई लाभ हैं जैसे
आईक्यू बढ़ना, आत्मविश्वास बढ़ना, क्रिएटिविटी का विकास आैर गुस्से पर नियंत्रण।
अन्य फायदे
बच्चा आंखें बंद करके पढ़सकता है.आंखों पर पट्टी बांधकर किसी भी वस्तु या व्यक्ति को छू कर, सूंघ कर उसके बारे मेंसटीक बता देता है, मानो उसे खुली आंखों से देख रहाहो। अगर आप समझ रहे हैं कि को ये चमत्कारी ताकत जन्म से नहीं मिली है, तो ऐसा नहीं है। यह वरदान योग और विज्ञान के मिलेजुले चमत्कार से मिला है। चमत्कार नहीं; योग और विज्ञान का मिलाजुला प्रयोग…यह ‘मिड ब्रेन एक्टिवेशन टेक्निक’के जरिये होता है।
इसमें लगातार अभ्यास, जिसमें बच्चों को ब्रेन-एक्सरसाइज, ब्रेन-जिम, मेडिटेशन और विशेष तौर पर कंपोज किए गए स्प्रिचुअल-म्यूजिक पर डांस कराया जाता है। भारतीय योग और जापानी तकनीक के मिलेजुले अभ्यास से बच्चों की इंद्रियों को अतिसंवेदनशील बना दिया जाता है।
इस अभ्यास के बाद बच्चा अपने आस-पास के संसार को सभी इंद्रियों से महसूस कर पाता है। अति सूक्ष्मग्राही ‘मिड ब्रेन एक्टिवेशन टेक्निक’ के लगातार अभ्यास से सूंघने और स्पर्श से चीजों को पहचानने की क्षमता बढ़ जाती है।
आंखों पर पट्टी बांध देने के बावजूदछू कर या सूंघ कर लिखे हुए को पढ़ लेता है। सूंघने क
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