10/07/2025
जब कोई UPSC की तैयारी शुरू करता है, तो वो सिर्फ किताबें नहीं खोलता,
वो अपने सपनों का दरवाज़ा खोलता है…
जहां हर दिन एक जंग है – खुद से, समय से, दुनिया से।
सुबह की नींद कुर्बान होती है,
रातों की नींदें भी अक्सर किताबों के पन्नों में गुम हो जाती हैं।
शादी-ब्याह, त्योहार, दोस्त – सब धुंधले हो जाते हैं एक ही मक़सद के सामने:
“Service Before Self”
लोग कहेंगे – “इतना पढ़ कर क्या मिलेगा?”
कोई कहेगा – “UPSC तो भाग्य वालों का खेल है…”
लेकिन सच्चाई ये है –
UPSC भाग्य से नहीं, बलिदान से जीती जाती है।
हर दिन की consistency, हर बार की revision, हर mock test –
एक एक चीज़ गिनती जाती है।
और फिर…
एक दिन जब वो लिस्ट आती है, और नाम के आगे लिखा होता है –
"IAS, IPS, IFS…"
तब न सिर्फ एक सपना पूरा होता है,
बल्कि एक माँ की आंखें नम होती हैं,
एक पिता की मेहनत रंग लाती है,
और एक पूरे गांव, शहर या मोहल्ले का सिर गर्व से ऊंचा होता है।