25/11/2024
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सामाजिक-मानवीय आधार पर शिक्षा के पुनर्गठन की ज़रूरत - लोकजीवन
सत्ता और पूँजीवाद के गठजोड़ ने शिक्षा को अपने हितों की पूर्ति का साधन बना लिया है। सामाजिक और मानवीय हित कहीं खो गए ...
05/09/2024
आज शिक्षक दिवस है। इस अवसर पर शुभकामनाओं के आदान-प्रदान से शिक्षकों के प्रति आभार-प्रदर्शन की कर्तव्य-पूर्ति होती है। लेकिन उनकी व्यावहारिक परिस्थितियाँ नियमों और नीतियों से निर्धारित होती है। इसलिए 'शिक्षक दिवस' के अवसर पर शिक्षा नीति 2020 में शिक्षकों के हितों की पड़ताल प्रस्तुत है।
शिक्षा नीति 2020 में शिक्षकों के हितों की पड़ताल - लोकजीवन
यह शिक्षा नीति शिक्षकों के ‘प्राचीन सम्मान’ को लौटाने का वाचिक आश्वासन भले ही देती हो, शिक्षकों से एक स्पंदनशील शै...
01/07/2024
पटना। दिनांक : ३० जून, २०२४
राजधानी पटना के बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के सभागार में रविवार को राइट टू एजुकेशन फोरम, बिहार इकाई एवं जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, समस्तीपुर के संयुक्त तत्वावधान में 'लोकतंत्र के सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव में शिक्षा की भूमिका' विषय पर राज्य स्तरीय विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस विमर्श कार्यक्रम की अध्यक्षता राइट टू एजुकेशन फोरम बिहार के संयोजक डॉ अनिल कुमार राय ने किया। उन्होंने विमर्श के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा अधिकार कानून का अभी तक अनुपालन नहीं होना मौजूदा व्यवस्था की पोल खोलता है। उन्होंने विद्यालय संचालन के समय सारणी को लेकर भी सवाल खड़ा किया। कई देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समय सारणी के बजाय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। इसको लेकर पहल करनी चाहिए। राइट टू एजुकेशन फोरम के सह संयोजक राजीव रंजन ने कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विषय प्रवेश कराया तथा अब तक की उपलब्धियां पर विस्तार से प्रकाश डाला।
राइट टू एजुकेशन फोरम के नेशनल सचिवालय से जुड़े मित्र रंजन ने आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिक्षा अधिकार कानून के अधिकांश प्रावधान के क्रियान्वयन के मामले में अभी भी हम बहुत पीछे है। इस कानून को लागू हुए 14 साल से अधिक हो रही है। उसके बावजूद कानून के विभिन्न प्रावधान का अनुपालन नहीं कर पाये हैं।
जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद अक्षय कुमार ने कहा कि लोकतंत्र के सशक्तिकरण एवं सामाजिक बदलाव पर विमर्श का विषय काफी व्यापक है। इस पर शिक्षा की भूमिका को रेखांकित की किया जाना है। उन्होंने शिक्षा के सर्वव्यापीकरण पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था से शिक्षा के सर्वव्यापीकरण संभव नहीं है। इसके लिए बड़े बदलाव की जरूरत है।
शिक्षाविद गालिब खान ने एक साल की कार्य योजना बनाने पर जोर देते हुए कहा कि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व सभी जिले में कार्य योजना के तहत अभियान चलाया जाना चाहिए।
इस विमर्श कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षक संघ के नेता विजय कुमार सिंह, शिक्षक संघ के राष्ट्रीय महासचिव डॉ भोला पासवान, प्रमोद कुमार शर्मा, रणजीत कुमार, सुधीर पासवान, डॉ गंगासागर दीनबंधु, नारायण पासवान, यशवंत, सुजीत कुमार, रवि प्रकाश सूरज, दिनेश कुमार, जयप्रकाश, रामकृष्ण, मारुत नंदन, चन्द्र किशोर, अनवर हक़, राकेश कुमार, शशि प्रसाद, रजनीकांत सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए शिक्षा के सर्वव्यापीकारण पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की शुरुआत से पूर्व पूर्व विदेश सचिव प्रो मुचकुंद दुबे, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता विनोद रंजन व शिक्षिका चित्रलेखा के असामयिक निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।
12/06/2024
आज अंतरराष्ट्रीय बालश्रम निषेध दिवस है। बालश्रम बनाये रखने की आर्थिकी को उजागर करता हुआ यह आलेख पठनीय है।
बालश्रम की राजनीतिक आर्थिकी और बिहार
निजी मुनाफे पर आधारित पूँजीवाद और राजनीतिक सत्ता का अपवित्र गठबंधन बाल श्रम को कायम रखता है। जब तक पूँजीवादी शक्त....
23/04/2024
आमंत्रण
RTE Forum is inviting you to a scheduled Zoom meeting.
Topic: शिक्षा, लोकतंत्र और सामाजिक बदलाव
Time: Apr 23, 2024, 6.00 PM India
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29/02/2024
शिक्षा अधिकार के तीन आधार स्तंभ हैं - सार्वभौम, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण। शिक्षा तक सारभौम पहुँच और गुणवत्ता पर तो बहुत चर्चा होती है। लेकिन शिक्षा में समावेशन की चिंता, वह दिव्यांग बच्चों के समावेशन की चिंता, अब चर्चा से बाहर होती जा रही है।
तमाम प्रावधानों के बावक़ूद हमारे विद्यालय अभी तक दिव्यांग-संवेदनशील नहीं हो पाये हैं। इस कारण उनके लिए विद्यालय में उपलब्ध होने वाले प्रावधानों में से अधिकतर अभी न्यूनतम स्तर पर है। जिन विद्यालयों में अभी तक रैंप और शौचालय भी शत-प्रतिशत नहीं बने हैं, वहाँ उनके लिए सहायक सामग्री, दृष्टि या श्रवण बाधित के लिए शिक्षक और पाठ्य सामग्री उपलब्ध हों, यह अभी बहुत दूर की कौड़ी है।
परिणाम है कि varsh 2013-14 में, स्कूल शिक्षा में दिव्यांग बच्चों का पंजीकरण जहां 1.08% था, वह वर्ष 2018-19 में 0.85% तक कम हो गया। वर्ष 2018-19 में पूरे देश के स्कूलों में केवल 29.47% स्कूलों में ही दिव्यांग बच्चे थे। बिहार में भी दिव्यांग बच्चों का पंजीकरण दर 2013-14 में 0.89% से 2021-22 में 0.53% तक गिर गया है।
शिक्षा अधिकार में समावेशी शिक्षा के अन्तर्गत दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर बिहार के पाँच ज़िलों में राइट टू एजुकेशन फोरम, बिहार और आस्था फाउंडेशन, दिल्ली के संयुक्त प्रयास से सघन अध्ययन किया गया। कल दिनांक २८ फ़रवरी, २०२४ को रिपोर्ट जारी करने और विमर्श के अवसर का दृश्य -
04/12/2023
इंडिया सोशल फोरम, बिहार विद्यापीठ, पटना। दिनांक 03 दिसंबर, 2023
राइट टू एजुकेशन फोरम के द्वारा शिक्षा अधिकार : नीति और नियत विषय पर आयोजित सेशन की कुछ झलकियां
02/12/2023
कल 3 दिसंबर, 2023 को 10.30 बजे से बिहार विद्यापीठ, पटना में इंडिया सोशल फोरम के इस शिक्षा सत्र में सादर आमंत्रित हैं।
24/11/2023
दिनांक : 23 नवंबर, 2023
स्थान : होटल वंदना इन, पटना
राइट टू एजुकेशन फोरम, बिहार द्वारा आयोजित शिक्षा संवाद के कुछ चित्र
24/11/2023
22 नवंबर, 2023 को वंदना इन होटल पाटलिपुत्र, पटना में राइट टू एजुकेशन फोरम, बिहार के द्वारा आयोजित कार्यशाला में अगले वर्ष के लिए कार्ययोजना का निर्धारण करते हुए जिला संयोजक
01/11/2023
विभिन्न समाचार माध्यमों से यह ज्ञात हुआ है कि बिहार के विद्यालयों में पढ़नेवाले 22 लाख से अधिक बच्चों का नामांकन रद्द कर उन्हें स्कूल से बाहर कर दिया गया है। यह अत्यंत चिंताजनक है। इस मुद्दे की जमीनी वास्तविकताओं और प्रभावों को समझने तथा इसके लिए कार्यनीति के निर्धारण के लिए Forum, बिहार ने राष्ट्रीय स्तर की बैठक आयोजित की। इस बैठक में फोरम के जिला संयोजक, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश के संयोजक, राष्ट्रीय संयोजक, अनेक शिक्षक एवं शिक्षाविद शामिल हुए। बैठक में हुए विमर्श से निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले गए -
संविधान के अनुच्छेद 21 (क) के अनुसार प्राप्त मुफ़्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों को अनिवार्य रूप से पढ़ने का अधिकार प्रदान करता है और यह अधिकार सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व होता है। इस अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए विद्यालय से बाहर रह रहे बच्चों को विद्यालय में नामांकित करने का अभियान चलाया जाता था। परंतु अब नये आदेश के अनुसार बिना जाँच-पड़ताल किए पहले से नामांकित बच्चों को भी स्कूल से बाहर किया जाने लगा है। यह बच्चों की शिक्षा के अधिकार के हनन का गंभीर मामला है।
देखने में आ रहा है कि जिन बच्चों का नामांकन रद्द किया गया है, उनमें से अधिक दलित और वंचित समूह के बच्चे हैं। बहुत सारी कोशिशों के बाद विद्यालय में लाए गए पहली पीढ़ी के ये बच्चे यदि एक बार विद्यालय से बाहर हो जाएँगे तो फिर उन्हें विद्यालय में वापस लाना दुष्कर होगा। इस तरह इन बच्चों की यह पूरी पीढ़ी शिक्षा से महरूम रह जाएगी। इस तरह यह असंवैधानिक ही नहीं, अमानवीय एवं असामाजिक कार्य भी है।
नाम काटने के पीछे दोहरे नामांकन का हवाला दिया जाता है। लेकिन नाम काटने के इस क़वायद में न तो इस बात की कोई पहचान की गयी है कि कौन बच्चे दोहरे नामांकित हैं और कौन नहीं। इसके साथ ही उन कारणों को जानने और ठीक करने की भी कोई कोशिश नहीं दिखायी पड़ती है कि एक जगह नामांकित होने के बावजूद बच्चे क्यों दूसरी जगह भी नामांकन कराने के लिए प्रवृत्त होते हैं। इसलिए नाम काटने के इस आदेश का आधार एक अधिकारी की निजी अवधारणा मात्र है कि दोहरे नामांकन के कारण ही बच्चे अनुपस्थित रहते हैं।
अत: अपील है कि जब तक दोहरे नामांकन वाले बच्चों की पहचान नहीं हो जाती है, तब तक नामांकन रद्द करने के आदेश को वापस लेने और बाहर हुए बच्चों को पुन: बिना शर्त विद्यालय में आने दिया जाए।
नीचे इससे संबंधित खबरें हैं।
18/10/2023
दिनांक 17.10.2023 , प्रखंड मुख्यालय सभागार, अकोढी गोला, जिला रोहतास में जिला स्तरीय "शिक्षा संवाद" कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि श्री फतेहपुर बहादुर सिंह, माननीय सदस्य बिहार विधानसभा - डिहरी, विशिष्ट अतिथि डा अनिल कुमार राय, प्रांतीय संयोजक राईट टू एजुकेशन फोरम, बिहार एवं आदरणीय श्री राजीव रंजन राज, प्रांतीय सह संयोजक राईट टू एजुकेशन फोरम, बिहार, कई मुखिया गण, सरपंच गण, पंचायत समिति सदस्य गण, ज्यादातर वार्ड सदस्य गण सह अध्यक्ष विद्यालय शिक्षा समिति, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, एन जी ओ के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।