01/07/2024
पटना। दिनांक : ३० जून, २०२४
राजधानी पटना के बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के सभागार में रविवार को राइट टू एजुकेशन फोरम, बिहार इकाई एवं जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, समस्तीपुर के संयुक्त तत्वावधान में 'लोकतंत्र के सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव में शिक्षा की भूमिका' विषय पर राज्य स्तरीय विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस विमर्श कार्यक्रम की अध्यक्षता राइट टू एजुकेशन फोरम बिहार के संयोजक डॉ अनिल कुमार राय ने किया। उन्होंने विमर्श के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा अधिकार कानून का अभी तक अनुपालन नहीं होना मौजूदा व्यवस्था की पोल खोलता है। उन्होंने विद्यालय संचालन के समय सारणी को लेकर भी सवाल खड़ा किया। कई देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समय सारणी के बजाय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। इसको लेकर पहल करनी चाहिए। राइट टू एजुकेशन फोरम के सह संयोजक राजीव रंजन ने कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विषय प्रवेश कराया तथा अब तक की उपलब्धियां पर विस्तार से प्रकाश डाला।
राइट टू एजुकेशन फोरम के नेशनल सचिवालय से जुड़े मित्र रंजन ने आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिक्षा अधिकार कानून के अधिकांश प्रावधान के क्रियान्वयन के मामले में अभी भी हम बहुत पीछे है। इस कानून को लागू हुए 14 साल से अधिक हो रही है। उसके बावजूद कानून के विभिन्न प्रावधान का अनुपालन नहीं कर पाये हैं।
जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद अक्षय कुमार ने कहा कि लोकतंत्र के सशक्तिकरण एवं सामाजिक बदलाव पर विमर्श का विषय काफी व्यापक है। इस पर शिक्षा की भूमिका को रेखांकित की किया जाना है। उन्होंने शिक्षा के सर्वव्यापीकरण पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था से शिक्षा के सर्वव्यापीकरण संभव नहीं है। इसके लिए बड़े बदलाव की जरूरत है।
शिक्षाविद गालिब खान ने एक साल की कार्य योजना बनाने पर जोर देते हुए कहा कि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व सभी जिले में कार्य योजना के तहत अभियान चलाया जाना चाहिए।
इस विमर्श कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षक संघ के नेता विजय कुमार सिंह, शिक्षक संघ के राष्ट्रीय महासचिव डॉ भोला पासवान, प्रमोद कुमार शर्मा, रणजीत कुमार, सुधीर पासवान, डॉ गंगासागर दीनबंधु, नारायण पासवान, यशवंत, सुजीत कुमार, रवि प्रकाश सूरज, दिनेश कुमार, जयप्रकाश, रामकृष्ण, मारुत नंदन, चन्द्र किशोर, अनवर हक़, राकेश कुमार, शशि प्रसाद, रजनीकांत सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए शिक्षा के सर्वव्यापीकारण पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की शुरुआत से पूर्व पूर्व विदेश सचिव प्रो मुचकुंद दुबे, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता विनोद रंजन व शिक्षिका चित्रलेखा के असामयिक निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।