24/07/2026
सबसे ख़तरनाक होता है,
मुर्दा शांति से भर जाना,
ना होना तड़प का, सब कुछ सहन कर जाना।
सबसे ख़तरनाक होता है,
तुम्हारे भीतर उठते हर सवाल का मर जाना।
सबसे ख़तरनाक होता है,
अपनी आँखों के सामने अपने सपनों को नीलाम होते देखना,
और ख़ून का पानी हो जाना।
अन्याय को ही अपनी नियति मानकर,
एक ठंडी मशीन की तरह, चुपचाप घर लौट आना।
सबसे ख़तरनाक होता है,
'गांधी' के सत्याग्रह को महज़ इतिहास की किताब में छोड़ देना,
और 'भगत सिंह' को सिर्फ एक तस्वीर मान लेना।
'आज़ाद' की गोलियों की गूंज का तुम्हारे कानों तक न पहुंचना,
और 'अशफ़ाक़' की शहादत का, तुम्हारे ज़मीर को न झकझोरना।
बिकती हुई डिग्रियां और छिनते हुए रोज़गार से,
बुरा है तुम्हारा वो सन्नाटा, जो सब कुछ मान लेता है।
सबसे ख़तरनाक होता है, विरोध की आग का बुझ जाना.
सबसे ख़तरनाक होता है, एक ज़िंदा नौजवान का...
सिर्फ एक मूक दर्शक बन जाना।
सबसे ख़तरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना।