17/07/2022
जीवन में कर्म के दो प्रकार है! एक वह कर्म जो आप नित्य दिन अपने जीवन के लिए करते है। और दूसरा वह कर्म जो आप दूसरे के लिए करते हुए स्वम् के लिए कर्म फल अर्जित करते है। नित्य कर्म सामान्य है किंतु दूसरे के लिए करते हुए स्वम् का फल अर्जित करना कठिन है क्योंकि अक्सर ऐसे फल प्राप्ति के समय व्यक्ति स्वार्थी होकर स्वम् का लाभ-हानि सोचने के पश्चात कर्म करता है और यही उसके चरित्र का मानवीय या अमानवीय व्यवहार अंकित कर प्रारब्ध तक ले जाता है।