Patna High School

Patna High School SRPS GOVT +2 SCHOOL
(Patna High School)
Road No.16, Khagaul Road , Gardanibagh , Patna - 800002, Bihar

वरिष्ठ आयकर पदाधिकारी एवं पटना हाई स्कूल के पूर्ववर्ती छात्र से लेखक बने श्री मनीश वर्मा (मनु) द्वारा रचित पुस्तक “कोलका...
05/12/2025

वरिष्ठ आयकर पदाधिकारी एवं पटना हाई स्कूल के पूर्ववर्ती छात्र से लेखक बने श्री मनीश वर्मा (मनु) द्वारा रचित पुस्तक “कोलकाता मेरी नज़र से” पर मेरी समीक्षा हिंदी दैनिक अखबार "जागृति टाइम्स" के छठे पृष्ठ पर प्रकाशित हुई है जिसे उपरोक्त न्यूज कटिंग में पढ़ा जा सकता है।

पुस्तक समीक्षा
“कोलकाता मेरी नज़र से” - मनीष वर्मा

मनीष वर्मा की पुस्तक “कोलकाता मेरी नज़र से” एक ऐसे शहर का आत्मीय आख्यान है, जो इतिहास, संस्कृति, आध्यात्मिकता और रोज़मर्रा जीवन की अनगिनत परतों से मिलकर बना है। कर-अधिकारी से साहित्यकार बने लेखक ने कोलकाता को चौवन अध्यायों में इस तरह उकेरा है कि वह पाठक के सामने एक जीवित, धड़कता हुआ महानगर बनकर उभरता है।

शहर की पहली झलक से लेकर कॉलेज स्ट्रीट के इंडिया कॉफी हाउस, हावड़ा ब्रिज, ट्राम और पीली टैक्सी तक- कोलकाता का हर परिचित दृश्य यहाँ नए भावबोध के साथ सामने आता है। परिवहन, गलियाँ, पुरानी इमारतें और लोगों की आत्मीयता पुस्तक को मानवीय गर्माहट देती हैं। आध्यात्मिक परंपराओं की चर्चा- मायापुर का इस्कॉन मंदिर, बेलूर मठ, कालीघाट, दक्षिणेश्वर और तारापीठ- कोलकाता की धार्मिक विविधता को गहराई से प्रकाशित करती है, जबकि अलीपुर जेल, नेताजी से जुड़ी जगहें और बी बी डी बाग स्वतंत्रता-संग्राम की स्मृतियों को मार्मिकता प्रदान करते हैं।

पुस्तक का एक महत्वपूर्ण पक्ष बंगाल की सांस्कृतिक विरासत है- सुंदरवन की नमी भरी प्रकृति, शांतिनिकेतन का सौंदर्य, मुर्शीदाबाद का नवाबी इतिहास और विष्णुपुर की टेराकोटा कला लेखक की यात्रा-दृष्टि को विस्तृत और संतुलित बनाते हैं। भोजन-संस्कृति के अध्याय- रोसोगुल्ला, संदेश, झालमुरी, चाय की विविध शैलियाँ और बालीगंज की थाली- शहर के स्वाद के साथ-साथ उसकी सामाजिकता और अपनापन भी प्रकट करते हैं।

त्योहारों के वर्णन में लेखक की भाषा अपनी सौंदर्य-सीमा पर पहुँच जाती है। दुर्गा पूजा की कलात्मकता, सामूहिक चेतना और रात्रिकालीन उल्लास को वे जिस संवेदनशीलता से पकड़ते हैं, वह पुस्तक की सबसे प्रभावशाली विशेषताओं में से एक है। शहर के पाड़ा-जीवन, क्लब संस्कृति, तीरेती बाज़ार, नाखुदा मस्जिद और विक्टोरिया मेमोरियल जैसे अध्याय कोलकाता की बहुरंगी सामाजिक बनावट को एक समेकित रूप देते हैं।

समग्रतः, “कोलकाता मेरी नज़र से” यात्रा-वृत्तांत, संस्मरण और सांस्कृतिक अध्ययन का एक सफल संगम है। भाषा सरल, शैली आत्मीय और दृष्टि संवेदनशील है। लेखक न केवल कोलकाता को देखते हैं, बल्कि उसे जीते भी हैं- और यही अनुभूति पाठक तक सहजता से पहुँचती है। शहर आधारित साहित्य में यह पुस्तक एक उल्लेखनीय, परिपक्व और पठनीय योगदान है।
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रवि रंजन
पूर्व प्राचार्य
बिहार शिक्षा सेवा
बिहार सरकार

ज्ञातव्य हो कि
दिनांक 02 दिसंबर 2025 को प्रत्यक्ष कर भवन , लखनऊ में एक गरिमामय समारोह के दौरान इस पुस्तक का लोकार्पण प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, उत्तर प्रदेश (पूर्व), लखनऊ, आदरणीय अमल पुष्प
द्वारा किया गया।
इस उत्कृष्ट साहित्यिक प्रयास के लिए श्री मनीष कुमार वर्मा जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। उनकी लेखनी इसी प्रकार नव-दृष्टि और सृजनात्मक ऊर्जा के साथ निरंतर आगे बढ़ती रहे।

दिनांक 02 दिसंबर 2025 को प्रत्यक्ष कर भवन , लखनऊ में एक गरिमामय समारोह के दौरान, वरिष्ठ आयकर पदाधिकारी एवं पटना हाई स्कू...
03/12/2025

दिनांक 02 दिसंबर 2025 को प्रत्यक्ष कर भवन , लखनऊ में एक गरिमामय समारोह के दौरान, वरिष्ठ आयकर पदाधिकारी एवं पटना हाई स्कूल के पूर्ववर्ती छात्र से लेखक बने श्री मनीश वर्मा (मनु) द्वारा रचित पुस्तक “कोलकाता मेरी नज़र से” का लोकार्पण प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, उत्तर प्रदेश (पूर्व), लखनऊ, आदरणीय अमल पुष्प
द्वारा किया गया।
इस उत्कृष्ट साहित्यिक प्रयास के लिए श्री मनीष कुमार वर्मा जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। उनकी लेखनी इसी प्रकार नव-दृष्टि और सृजनात्मक ऊर्जा के साथ निरंतर आगे बढ़ती रहे।
रवि रंजन
पूर्व प्राचार्य

07/11/2025

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के महाशुभ अवसर पर बधाई एवं शुभकामनाएं।
बंकिमचन्द्र चटर्जी द्वारा रचित यह गीत सन् 1882 में प्रकाशित उनके उपन्यास आनन्द मठ से लिया गया था ।इसकी धुन यदुनाथ भट्टाचार्य ने बनायी थी।
इस गीत से सदियों से सुप्त भारत देश जग उठा और आधी शताब्दी तक यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरक बना रहा।
इस गीत को गाने में 65 सेकेंड (1 मिनट और 5 सेकेंड) का समय लगता है। सन् 2003 में, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस द्वारा आयोजित एक अन्तरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में, जिसमें उस समय तक के सबसे मशहूर दस गीतों का चयन करने के लिये दुनिया भर से लगभग 7,000 गीतों को चुना गया था और बी०बी०सी० के अनुसार 155 देशों/द्वीप के लोगों ने इसमें मतदान किया था उसमें वन्दे मातरम् शीर्ष के 10 गीतों में दूसरे स्थान पर था।
साभार विकिपीडिया
रवि

08/08/2025
सौजन्य : रवि रंजनधन्यवाद टीम बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन
09/05/2023

सौजन्य : रवि रंजन
धन्यवाद टीम बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन

मुझे अपनी परम आदरणीय बहन एवं लोक भाषा मंत्री, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना की श्रीमती डॉ पुष्पा जमुआर को अपनी पुस्त...
06/04/2023

मुझे अपनी परम आदरणीय बहन एवं लोक भाषा मंत्री, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना की श्रीमती डॉ पुष्पा जमुआर को अपनी पुस्तक "छात्र से प्राचार्य" सप्रेम भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।
इसी महीने में पुस्तक के प्रकाशन का एक वर्ष पूर्ण हुआ और सौभाग्यवश मुझे आज ही उनके करकमलों से लिखी मेरी पुस्तक पर अनमोल समीक्षा प्राप्त हुआ । मैं उनको हृदय से धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मुझे लेखनी के नए विधा ' रिपोर्ताज' अर्थात रिपोर्ट के नायकों के शुरू के पायदान पर ला कर खड़ा कर दिया है । आपको पुनः धन्यवाद दीदी । साथ ही इस समीक्षा को आप मित्रों को साझा करने का लोभ भी संवरण नहीं कर पा रहा हूं ।
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समीक्षात्मक आलेख ----
शीर्षक ------
"छात्र से प्राचार्य तक की यात्रा- अथ से इति तक" *
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(छात्र से प्राचार्य
पटना हाई स्कूल" लेखक --(रवि रंजन)
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' साहित्य और विचारों के बीच गहरा संबंध होता है। विचारों का आवेग जब अपनी सीमा तोड़ने पर उतारू हो जाती है तब सृजनात्मक शक्ति का उदय होता है। फलस्वरूप एक लेखक का जन्म होता है। जिसके द्वारा साहित्य में विधाओं की प्रस्तुती होती है। चाहे वह किसी भी विधा की रचना हो।
"रचनाकार अपने प्रमुख विचारों का दोहन कर के अपनी चिंतन -दृष्टी के अनुसार जीवन -मूल्यों का निर्धारण करता है‌।और यही मूल्यांकन, चेतना, "साहित्य सृजन" का कारण बनता है। अतः यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि --"(शहीद राजेंद्र प्रसाद सिंह राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय) के प्राचार्य रवि रंजन को 'अदृश्य प्रेरणा' साहित्य लेखनी की ओर धकेलकर लेखक बनाने की तैयारी कर रही थी। फलत: ' रवि' की अंतरात्मा ईश्वरीय शक्ति से फलीभूत होकर अपनी अनुभूतियों की अभिव्यक्ति की परिकल्पना अस्पताल के विस्तर पर अस्वस्थ अवस्था में सुनिश्चित किया। तत्पश्चात् वे अपने जीवन की शिक्षा चरित्र की यथार्थ यात्रा 'अथ से इति तक' को कलम बंद करने का संकल्प लिए। और फिर साहित्य पटल पर इन्होंने अपनी कृति ' रिपोर्ताज' विधा में "छात्र से प्राचार्य'(पटना हाई स्कूल)संग्रह की प्रस्तुति दी,तब कहीं इन्हें चैन मिला।" अतः विद्वानों का कहना अक्षरश: सत्य है कि 'अंतरात्मां की आवाज न सुनने वाले मनुष्य की नैतिक पतन हो जाता है।' वस्तुत: ज़ाहिर है कि "रवि रंजन"भी इन सब से अ़ल्हदा नहीं हैं । सो रवि रंजन लेखन के पहले पायदान पर क़दम रखा । ऐसी स्थिति में जब कि देश दुनिया कोविंड 19 के कोरोनावायरस का शिकार हो कर जूझ रहे थे। खुद रवि रंजन भी कोरोनावायरस के कारण जिंदगी- मौत से लड़ रहे थे। कोरोनावायरस की विभत्स तांडव के बीच 'रवि' सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होकर सृजनात्मक कार्य की ओर अग्रसर हुए। दृष्टव्य है कतिपय इनके वक्तव्य से ---
'रवि रंजन अपनी पुस्तक -छात्र से प्राचार्य , में ('मेरी बात) 'में खुद स्वीकारें हैं कि--"दिसंबर 2020 ,में मैं कोविंड19के वायरस से न मालूम कैसे पंगा ले बैठा और अस्पताल जाना पड़ गया। वहां तबियत कुछ सम्भली तो अस्पताल में खाली वक्त मिला और उसी समय ईश्वर की,या फिर मेरे माता -पिता के द्वारा प्रेरणा मिली कि मैं पटना हाई स्कूल में,"छात्र से प्राचार्य'तक के अपने अनुभवों पर आधारित लेखन प्रारम्भ करूं। अतः रवि रंजन के अवचेतन मन में छुपी प्रबल इच्छाशक्ति का ही परिणाम है यह पुस्तक '। वस्तुत:रवि ने उस अवस्था में अपने आप को टूटने नहीं दिए। बल्कि कोविंड़ 19, से साहस और आत्मविश्वास से लबरेज हो कर जीवन की जंग जीतकर कोविड 19 को मात देकर अपने जीवन की वैयक्तिक मूल्यों को स्थापित किये।परिणामत:वे अपनी पुस्तक की प्रस्तुति दी।और मुझे इनकी कृति पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ।
"छात्र से प्राचार्य -पटना हाई स्कूल पुस्तक" आद्योपांत पढ़ने के बाद मैंने यह पाया कि रवि रंजन सुलझे विचारधारा के व्यक्ति हैं तथा सिद्धहस्त आयोजक, दृढ़ संकल्प साधक, एवं अपने काम में ईमानदार हैं। इन्होंने अपनी लेखनी में वो सभी बातें रिपोर्टर की तरह से रिपोर्टिंग दिया है। जैसे एक सुलझे हुए पत्रकार हों। अतः इस पुस्तक के आधार पर हम यह कहने में सक्षम है कि रवि अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निर्वहन किया है। बहुत बहुत धन्यवाद! साधुवाद! आशीर्वाद! है।
"वस्तुत: इन्हीं आधारों पर इनकी पुस्तक 'छात्र से प्राचार्य 'संग्रह "रिपोर्ताज विधा" को इंगित करती है।

"रिपोर्ताज आधुनिक हिंदी गद्य लेखन की एक विधा है। हिन्दी कोश के अनुसार --"रिपोर्ट के कलात्मक और साहित्यिक रूप को 'रिपोर्ताज'कहतें हैं।"इसमें भावनाओं का आवेग होता है किन्तु कल्पना का आधार नहीं होता है। लेकिन इस में लेखक के हृदय का निजी उत्साह व्यापक रूप से रहता है, जो सत्य पर बिना किसी आवरण डाले प्रभावमय बना देता है। लेकिन इस में आत्मकथा के आंशिक बातें ध्वनित होती है। जैसा कि इस पुस्तक में बाते निकल कर आती है -"छात्र से प्राचार्य --- के "पहला दिन "अध्याय में अपने और अपने माता पिता और शिक्षा का परिचय दिया है।(पृष्ट--7-से10 में --पहला दिन)।
"डॉ भागीरथ मिश्र के कथनानुसार -- "किसी घटना या दृश्य का अत्यंत विवरणपूर्ण सूक्ष्म रोचक वर्णन इस प्रकार किया जाता है कि वह हमारी आंखों के सामने प्रत्यक्ष हो जाता है, और हम उससे प्रभावित हो जाते हैं।"अर्थात यह कहना उचित होगा कि सम्पूर्ण विवरण दृश्यमान हो जाता है। और पाठक अपने आप को तथ्य चित्र में प्रत्यक्ष उपस्थित पाता है।यह लेखक पर निर्भर करता है कि वह पाठक को कितना प्रभावित करता है।
"रिपोर्ताज आधुनिक हिंदी गद्य में नवीन विधा माना जाता है। हिंदी साहित्य में रिपोर्ताज के जनक 'शिवदान सिंह चौहान 'हैं। 1938ई, में इनकी प्रथम रिपोर्ताज रचना 'लक्ष्मीपुरा' (रूपाभ पत्रिका के दिसम्बर,1938मेंप्रकाशित हुए हैं। इसके बाद हंस पत्रिका में 'मौत के खिलाफ़ ज़िन्दगी 'प्रकाशित हुआ। तत्पश्चात् इस विधा में गति आई।और अनेकानेक प्रतिष्ठित लेखक जुड़ते गए। जिस में --शिवदान सिंह चौहान के बाद --रांगेय राघव,भदंत आनंद कौशल्यायन, शमशेर सिंह बहादुर, कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर, शिव सागर मिश्र, धर्मवीर भारती, फणीश्वरनाथ रेणु, उपेन्द्रनाथ अश्क, प्रकाश चंद्रगुप्त, इनके अलावे भी अनेकानेकों रिपोर्ताजक लेखक कड़ी दर कड़ी जुड़ते गए । और विधा अपनी विकास यात्रा तय करने में सक्षम होने लगी। तत्पश्चात् इस विधा की एक कड़ी में रवि रंजन का भी नाम आदर सहित जुड़ गया है।
"यह पुस्तक मूलतः रिपोर्टिंग पर आधारित है। रवि रंजन ने इस स्कूल में अपने छात्र जीवन से लेकर प्राचार्य बनने तक का सफल यात्रा को सेवा निवृत्त होने तक में अपने कार्यकाल में किए गए उन सभी बातों को गंभीरता से लिखे हैं। शिक्षक मित्रों, शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्री इस स्कूल से पढ़ें बिहार के विशिष्ट व्यक्तियों राज्यपाल, चर्चित डाॅक्टर, सरकारी महकमों के पदाधिकारियों इत्यादि सभी छात्रों, व्याख्याताओं की विशेष चर्चा किए हैं।

"रवि रंजन का पठन-पाठन "पटना हाई स्कूल"से हुआ है और वे पटना हाई स्कूल से हीं मैट्रिक की परिक्षा 1979 वर्ष में उत्तीर्ण हुए। तत्पश्चात् समय के अंतराल पर रवि ने पुनः इसी विद्यालय में व्याख्याता के रूप में 1989में भौतिकी के पद पर कार्यरत हुए। उसके बाद ये बाइस वर्षों तक प्लस टू के प्रभारी रहे। और फिर ये दिनांक 7अप्रेल2018वर्ष में प्राचार्य के पद पर आसीन हुए। चार वर्षों की अनवरत सेवा के उपरांत मार्च 2022 में सेवा निवृत्त हुए। प्राचार्य बनने पर स्कूल को हर तौर पर व्यवस्थित किया।और सभी कार्य सफलतापूर्वक सुचारू रूप से कर के अपने साथ कार्यरत सभी स्टाफों के दिलों में जगह बनाई। इन्होंने अपने स्कूल के प्रार्थना के लिए कहा है कि --पटना हाई स्कूल की प्रार्थना का विशेष महत्व है। इस प्रार्थना की प्रमुख बात यह है कि सौ सालों से यही प्रार्थना इस स्कूल में गाया जाता रहा है। और आगे भी यही प्रार्थना गाए जाते रहेंगे "हे नाथ अलख, अनादि,अनुपम जगत के आधार हे ०००००!" इसके रचयिता --'पंडित शिवनंदन ठाकुर 'इसी पटना हाई स्कूल के संस्थापक शिक्षक थे। रवि ने उनकी किर्ति को बखूबी उकेरा है। सुंदर शब्दांजलि दी है।साधुवाद है! इन्होंने अपने दोस्ती का मतलब दर्शाया है । उदहारण स्वरूप है कुछ संवाद के अंश--"मुझे यह बात स्वीकार करने में गर्व अनुभव हो रहा है कि 31साल के लंबे अंतराल में भी कभी हम लोगों में (रवि रंजन, डॉ अरूण कुमार झा और डॉ लक्ष्मीकांत चौधरी) न कभी मतभेद पैदा हुआ और न ही हम लोगों ने अपने विचारों को एक दूसरे पर थोपा "।इन सब से इतर
"रवि रंजन का कहना कि -'नकारात्मकता को भी देखना एक कला है' । उन्होंने शिक्षक के गुणों का प्रत्यक्ष प्रमाण दिया है।वाक्या एक नटखट लड़के की है।वह सीटी बजा कर रवि रंजन जी के सामने से गुजरने लगता है।तो प्राचार्य रवि रंजन जी ने उसे इस तरह के व्यवहार को कला -कलाकार की बातों से उसके चरित्र को दिशानिर्देश तय किए।और सफल भी हुए। वस्तुत:यह अक्षरशः सत्य है कि स्कूल शिक्षा का मंदिर होता है और शिक्षक उसके चरित्र निर्माता।
"रवि रंजन के पिता जी आदरणीय 'चंद्रिका प्रसाद 'सचिवालय में कार्यरत थे और मां' रंजना प्रसाद 'राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं। शिक्षित परिवार में पले-बढ़े होने से रवि का झूकाव पढ़ाई कि ओर था। वस्तुत: शिक्षिका मां का संस्कार बेटे में फलीभूत है। फलस्वरुप आज रवि सफल छात्र से प्राचार्य तक का यात्रा तय करते हुए अथ से इति तक की यात्रा-सफलतापूर्वक तैय किए।
इस पुस्तक में ( 16) शीर्षकों के द्वारा स्कूल के "सौ वर्षो"के कार्यकाल का इतिहास की रिपोर्ट को कलमबद्ध किए है।
"पटना हाई स्कूल"की स्थापना 2जुलाई 1919ई०को बिहार के तत्कालीन उपराज्यपाल 'सर एडवर्ड अल्बर्ट गेट 'के द्वारा हुआ था। यह 11.8 एकड़ भूखंड में है 34 कमरे का ई आकर का दो मंजिला भवन है। सुयोग्य शिक्षक तथा भरपूर मात्रा में छात्र की उपस्थिति इत्यादि वे सभी चीजें मौजूद हैं जिस पर स्कूल का कार्यभार चलता है।और यही मूल्यांकन है इस स्कूल की जहां के छात्र रहे हैं सिक्किम के राजपाल महामहिम श्री गंगा प्रसाद जी एवं और चर्चित विभूति भी छात्र रहे हैं, जिसने अपने स्कूल का मान बढ़ाया है।फलत: रवि के लिखित व्यक्तव्यों से यह ज्ञात होता है कि पटना हाई स्कूल, (पटना-बिहार) के सभी स्कूलों में यह स्कूल प्रथम श्रेणी में गिने जाते हैं। वर्तमान समय में अब "पटना हाई स्कूल"का नाम 'अमर "शहीद राजेंद्र प्रसाद सिंह राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय "के नाम से जाना जाता है। इतिहास गवाह है कि( 1942 ) के आजादी की आंदोलन में सात वीर शहीदों में राजेंद्र प्रसाद सिंह भी थे। उन्होंने 11अगस्त 1942 को अपराह्न पांच बजे सचिवालय पर तिरंगा फहराते हुए अंग्रेजों की गोलियां का शिकार हो कर अपने बलिदान को अमर कर दिया। आज़ इन सातों वीर सपूतों की मूर्ति 'बिहार विधानसभा के ठीक सामने शहीद स्मारक के नाम से विख्यात है। शत् शत् नमन है ,भारत (बिहार) के वीर सपूतों को। अब उसकी बात जिसके बगैर यह लेख अधुरा है। बात है
"एतिहासिक शताब्दी समारोह"की। जो इस पुस्तक का मूल आधार है। जैसे कि पहले इंगित किया गया है कि यह स्कूल 2जुलाई 1919ई०में अंग्रेज गवर्नर 'सर गेट 'के द्वारा स्थापित हुआ था।और इसके सौ वर्ष 2019ई०में शताब्दी वर्ष में स्थापना दिवस समारोह का आयोजन स्कूल के प्राचार्य-रवि रंजन एवं और सभी स्कूल के सदस्यों के सर्व सहमति से हुआ है। उदघाटन महामहिम उपराष्ट्रपति 'श्री एम के वेंकैया नायडू जी' के हाथों हुआ है। स्वागत हेतु प्राचार्य रवि रंजन के उत्साह व्यापक रूप से प्रत्यक्ष दृष्टि गोचर है । प्रास्तुत है---प्राचार्य रवि और महामहिम उपराष्ट्रपति जी श्री वेंकैया नायडू ' का संवेदनात्मक संवाद--"प्रिंसिपल साहब कैसा लग रहा है।तो मैंने (रवि जी) कहा-'सर , आपका स्वागत है। आज हम काफी रोमांचित हैं और गोरवान्वित महसूस कर रहें हैं।'इसके अलावे हर क्षेत्र में, सभी कार्य सफलतापूर्वक सुचारू रूप से सम्पन्न किए। जैसे-मिनट-टू-मिनट, वृक्षारोपण इत्यादि बातें इस पुस्तक में सरल सहज भाव से, भाषा में लिखे गए हैं।
इस समारोह में बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, सिक्किम के राजपाल महामहिम श्री गंगा प्रसाद, एवं और इनके साथ महकमों की टीम की उपस्थिति स्कूल का मान बढ़ाएं हैं। हार्दिक बधाई !
'दूसरे भाग में --"बोलते तस्वीर-बोलते अखबार"में लौकडाउन में ऑनलाइन एजुकेशन का खेलोत्सव का सम्मान -पुरस्कार, एवं पटना हाई स्कूल की खबरें, तथा महामहिम उपराष्ट्रपति जी की तस्वीरी खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हुई है।जो इस पुस्तक में प्रमाण स्वरूप प्रकाशित हुई हैं। क्यों कि प्राचार्य श्री रवि रंजन जी की यह कथन आत्म संतोष को दर्शाता है देखें----"मैने मन में विद्यालय के आधारभूत सुविधाओं की जो-जो कल्पना संजो रखी थी,वह लगभग पूर्ण हो गई थी।" कहने का तात्पर्य यह है कि रवि रंजन जी ने इस पुस्तक में सारे वाक़्यात, घटनाक्रमों का जिवंत रिपोर्टिंग दिया है मानो पाठक उस में अपने को मौजूद पाता है।और यही रिपोर्ताज की सफल प्रस्तुति है। बावजूद इसके रिपोर्ताज विधा में लेखन कार्य और विधाओं की अपेक्षा अधिक नहीं है लेकिन जो भी हैं पठनीय हैं। जिस में रवि रंजन की यह संग्रह रिपोर्ताज साहित्य में विकास दिया है। और आगे भी इस विधा में लेखन कार्य होंगे। आशा बनती है। रिपोर्ताज विधा को रवि ने जाने -अनजाने जो लिखा है सभी बातों विवरण सत्य, सुलझे, सहजता से दिया है। मानो सारे दृश्य चलचित्र की भांति आंखों से होकर गुजर रही हों। भाषा शैली सरस सहज स्वस्थ सुदृढ़ हैं।' रिपोर्ताज' लेखन में रवि की लेखनी में झरने की तरह से बहाव है। एवं पठनीय है। पाठक को बांध लेती है।
"यों तो इस पुस्तक में बहुत कुछ छूट रहा जो लिखा जा सकता है। किन्तु हर चीज की सीमा होती है। मुझे आशा ही नहीं बल्कि विश्वास है कि यह पुस्तक पटना हाई स्कूल का धरोहर है।और यह साहित्य पटल पर अपना छाप छोड़ेगी।
मैंने जो समझा वो ईमानदारी से लिखे हैं।और यह कामना करती हूॅं कि रवि रंजन की लेखनी में गति आए और वे साहित्य सृजन में अग्रसर हों। धन्यवाद!,,
(डॉ पुष्पा जमुआर, लोक भाषा मंत्री, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना,--मो०7488788201
दिनांक --6--4--2023,)
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https://youtu.be/kQkVyt2sClA
03/04/2022

https://youtu.be/kQkVyt2sClA

सौजन्य: मनीष वर्मा (मनु)*"छात्र से प्राचार्य"* - *रवि रंजन*उस पल को सोचकर ही मन आह्लादित हो उठता है। कितना रोमांचित कर ज.....

https://thebiharnow.com/big-news/patna/student-to-principal/Ravi Ranjan
03/04/2022

https://thebiharnow.com/big-news/patna/student-to-principal/

Ravi Ranjan

उस पल को सोचकर ही मन आह्लादित हो उठता है. कितना रोमांचित कर जाता है वह पल, आप उसकी सिर्फ़ और सिर्फ़ कल्पना ही कर सकते .....

सौजन्य: मनीष वर्मा (मनु)"छात्र से प्राचार्य"              रवि रंजन (Ravi Ranjan)उस पल को सोचकर ही मन आह्लादित हो उठता है...
02/04/2022

सौजन्य: मनीष वर्मा (मनु)

"छात्र से प्राचार्य"
रवि रंजन (Ravi Ranjan)

उस पल को सोचकर ही मन आह्लादित हो उठता है। कितना रोमांचित कर जाता है वह पल , आप उसकी सिर्फ़ और सिर्फ़ कल्पना ही कर सकते हैं। पर, ज़रा उनसे पूछिए जिन्होंने इस पल को जीया है।
मैं कल्पना कर सकता हूं। कितना भावुक पल रहा होगा। आपको बहुत मशक्कत करनी पड़ी होगी अपनी भावनाओं को काबू करने में, संतुलन बैठाने में।
कल दिनांक ३१.०३.२०२२, मैं साक्षी बना कुछ इसी तरह के पलों का। अवसर था , शहीद राजेंद्र प्रसाद सिंह राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गर्दनीबाग, पटना जो पहले पटना हाई स्कूल के नाम से जाना जाता था। उस स्कूल के प्राचार्य श्री रवि रंजन जी के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अवसर पर विदाई समारोह का और उनके द्वारा रचित पुस्तक 'छात्र से प्राचार्य' के विमोचन का ।
श्री रवि रंजन जी इसी पटना हाई स्कूल के छात्र रहें हैं और यहीं से वो आज प्राचार्य के पद पर रहते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले रहे थे।
जिस संस्थान को आपने अपनी जिंदगी का अधिकांश हिस्सा दिया हो वहां से अलग होना एक भावुक पल तो होता ही है। पर , जब आपने नौकरी की है तो सेवानिवृत्ति की तिथि तो नियुक्ति के दिन के साथ ही अंकित हो जाती है ।पर यहां मामला कुछ और था। सर ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी इसलिए यह दिन कुछ हद तक उनके मुताबिक ही बना था। सेवानिवृत्ति का पल वैसे ही काफी भावुक होता है ।आप अपनी जिंदगी की दूसरी पारी शुरू करने जा रहे होते हैं । एक दूसरी ही भूमिका में अब आप नजर आने वाले हैं। अब तक आपने चरित्र अभिनेता का रोल अदा किया है अब आप मुख्य पात्र के रूप में नजर आएंगे। हम सब की शुभकामनाएं उनके साथ है। वह जहां रहें स्वस्थ रहें, आनंदित रहे, सदा मुस्कुराते रहें। समाज को उन्होंने जो आज तक दिया है उस दिशा में वह बढ़-चढ़कर प्रयास करें। अब समय भी उनके साथ है। माहौल भी अनुकूल है ।
अब हम आते हैं आज के मुख्य कार्यक्रम जो उनके सेवानिवृत्ति के साथ ही है, उनकी पुस्तक 'छात्र से प्राचार्य' के विमोचन का।
मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि मुझे आज उसी स्कूल में मंच प्रदान किया गया विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलने के लिए जहां का मैं खुद विद्यार्थी रहा हूं और इंटर तक की पढ़ाई मैंने वहां से पूरी की है।
रवि रंजन सर की पुस्तक पहली नज़र में आपको उनकी आत्मकथा लगेगी। पर, शायद नहीं जब आप पुस्तक को पढ़ेंगे उसे अपने हाथों में लेंगे और तब जब उसके पन्नों को आप पलटेंगे तब आप महसूस करेंगे यह पुस्तक उन की आत्मकथा तो ख़ैर है ही । इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है । पर, यह पुस्तक हमें पटना हाई स्कूल के गौरवशाली अतीत को भी बताती है। हमें कुछ वैसे अनछुए पहलुओं की भी जानकारी देती है जिससे हम आजतक अनभिज्ञ रहे। यह हमें हमारे गौरवशाली अतीत के साथ-साथ हमें वर्तमान में भी ले जाती है ।हमें बताती है कि हम कहां थे और आज हम कहां पर हैं। एक समय था जब पटना के कलेक्टर छुट्टी पर जाते थे तो कलेक्टर की कुर्सी पर पटना हाई स्कूल के प्राचार्य ही बैठा करते थे। प्राचार्य को रिवाल्वर मिला हुआ था। आने जाने को बग्घी थी। गौरवशाली अतीत की बात करें तो हमें 'अंग्रेज भारत छोड़ो' के नारे के साथ जब 1942 में अगस्त क्रांति की शुरूआत हुई थी तो 11 अगस्त 1942 के दिन को नहीं भूलना चाहिए जब पटना में सेक्रेटेरिएट पर तिरंगा फहराने के दौरान अपनी छाती पर फिरंगियों की बंदूक से निकलने वाली गोलियां झेलते हुए जिन 7 छात्र नौजवानों ने शहादत दी उसमें पटना हाई स्कूल के दसवीं कक्षा के छात्र राजेंद्र प्रसाद सिंह जी भी थे जिनके हाथों से अभी शादी के पीले रंग भी नहीं उतरे थे। आज की तारीख में पटना हाई स्कूल अपने उसी अमर शहीद छात्र के नाम से जाना जाता है।
जब इस घटना में पटना हाई स्कूल के छात्र शहीद राजेंद्र प्रसाद सिंह जी भी थे तो लाज़मी था कि यहां के प्राचार्य को दंड दिया जाए तो दंड स्वरूप उस वक्त के प्राचार्य श्री सिद्धनाथ मिश्रा जी का यहां से तबादला कर उन्हें कैमूर भेज दिया गया।
बहुत सारी बातें हैं इस पुस्तक में कहने और सुनने को।
काठ (लकड़ी) से बनी हुई घुमावदार कुर्सी जिस पर उस वक्त के प्राचार्य बैठा करते थे आज भी इस स्कूल में मौजूद है । पेपर स्टैंड जिस पर अखबारें रखी जाती थी। आज़ भी रखी जाती हैं। तिजोरी जिसकी दो चाबियां थी आज भी स्कूल में देखने को मिलेगी। बहुत सारी बातें हैं। आप जब इस पुस्तक को पढ़ेंगे तब आपको अपने इस स्कूल के गौरवशाली अतीत के बारे में जानने का मौका मिलेगा ।आप महसूस करेंगे और मुझे पूरा यकीन है कि आप उन भावुक पलों को याद कर रोमांचित हो जाएंगे कि आप इतनी बड़ी विरासत के हिस्सा रहे हैं ।इस पुस्तक के लेखक श्री रवि रंजन जी को पुनः कोटिश: धन्यवाद और शुभकामनाएं।
मनीश वर्मा 'मनु'

पुस्तक अमेज़न पर उपलब्ध है।

पटना हाईस्कूल के प्राचार्य रवि रंजन ने गुरुवार को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इस मौके पर प्राचार्य रवि रंजन की लिखित प...
01/04/2022

पटना हाईस्कूल के प्राचार्य रवि रंजन ने गुरुवार को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इस मौके पर प्राचार्य रवि रंजन की लिखित पुस्तक छात्र से प्राचार्य का लोकार्पण किया गया। इस स्कूल के छात्र रहे प्राचार्य रवि रंजन शिक्षक के रूप में भी कार्यरत रहे। उन्होंने बताया कि 1983 में छात्र के रूप में इस स्कूल में नामांकन लिया। इसके बाद उच्च शिक्षा लेने के बाद इसी स्कूल में शिक्षक के रूप में 22 साल रहे। इसके बाद प्राचार्य के तौर पर स्कूल में अपनी सेवा दी।

पटना हाईस्कूल के प्राचार्य रवि रंजन ने गुरुवार को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इस मौके पर प्राचार्य रवि रंजन की ....

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