Vikas kumar Babbu

Vikas kumar Babbu हम माफ बार बार करते हैं....
लेकिन भरोसा सिर्फ एक बार करते हैं ...
🌞

02/08/2024

विश्वास किसी ऐसे पे करो... जिसके किरदार में विश्वास झलके... अन्यथा दो मीठे बोल तो तोता भी बोल लेता है...

क्या कहेँगे इस लूट के बारे में
02/08/2024

क्या कहेँगे इस लूट के बारे में

चालीस वर्षीया मोहिनी खरे का मन आज सुबह से ही अशांत था। सामान्यतः रविवार को वह आराम से बिताती थी, किन्तु आज वह अत्यधिक व्...
25/07/2024

चालीस वर्षीया मोहिनी खरे का मन आज सुबह से ही अशांत था। सामान्यतः रविवार को वह आराम से बिताती थी, किन्तु आज वह अत्यधिक व्यग्र हो रही थी। दो बार चाय बनाकर पी चुकी थी और कई बार बालकनी में झाँक चुकी थी। पेपर भी ठीक से पढ़ा नहीं जा रहा था, अक्षरों में बार-बार अजय का चेहरा दिख रहा था। उसकी बातें याद आते ही मोहिनी पेपर फेंक कर टहलने लगती थी। यद्यपि उसने कुछ गलत नहीं कहा था, फिर भी मोहिनी उसे न स्वीकार कर पा रही थी और न ही अस्वीकार कर पा रही थी। यही तो उसके उद्वेग का कारण था...

कल की बात है...

अजय मित्रा, आफिस में मोहिनी का जूनियर कलीग था और मोहिनी के ही अंडर में काम कर रहा था। मोहिनी ने गौर किया था कि पिछले एक-डेढ़ माह से किसी भी मीटिंग में या दफ्तर में अजय का ध्यान उसके काम पर कम और उसके चेहरे और आँखों पर अधिक होता था। कल, शनिवार को जब अजय किसी प्रोजेक्ट को डिसकस करने के लिए आया तो बजाय प्रोजेक्ट पर ध्यान देने के, वह मोहिनी की आँखों में खो गया। मोहिनी ने उसकी नजरों को महसूस किया और अचकचा गई। उसने अपनी सीट से उठकर अजय की कुर्सी तक जाकर उसके कंधे पर हाथ रखा तो अजय हड़बड़ा कर उठा और बोला, "जी मैम, हम कहाँ पर थे?"

"अभी हम लोग चले ही कहाँ थे अजय? तुम तो सीट पर बैठते ही कहीं खो गए थे!" मोहिनी ने गंभीरता से कहा।

"जी मैम, मैं समझा नहीं!" अजय ने चौंकते हुए कहा।

"पिछले डेढ़ माह से मैं तुम्हें देख रही हूँ," मोहिनी ने घूम कर अपनी सीट पर बैठते हुए कहा।

"मैम, आप अधिकारी हैं और आधीनस्थ को देखना आपका अधिकार और ड्यूटी भी है," अजय ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

"मैंने देखा है कि तुम काम में मन नहीं लगा रहे हो," मोहिनी ने झिझकते हुए कहा।

"मैम, पिछले माह का बेस्ट एम्प्लॉयी मुझे ही आपने चुना था, याद है न?" अजय हँसते हुए बोला।

"हाँ, सही है, लेकिन मैंने देखा है कि मीटिंग्स में या यहाँ मेरे दफ्तर में भी तुम्हारा ध्यान मुझ पर ही रहता है," मोहिनी ने कठिनाई से कहा।

"आप मेरी इमिडीएट बॉस हैं। अगर मैं आप पर ध्यान नहीं दूँगा तो प्रोजेक्ट कैसे समझूँगा और कैसे पूरा करूँगा! यह मेरी ड्यूटी है मैम।" अजय ने हाज़िर जवाबी दिखाई।

"अजय, मेरा मतलब है कि मुझे लगता है कि तुम मुझ पर आसक्त हो रहे हो! जैसे अभी तुम प्रोजेक्ट पर बात करने के बजाय मुझे ही देख रहे थे," मोहिनी ने बड़ी कठिनाई से कहा और पानी का गिलास उठाकर पी गई।

"मैम, सर्विस मैन्युअल में ऐसा कुछ गलत नहीं लिखा गया है। न मैं आपसे बदतमीजी से बात करता हूँ, न उलझता हूँ, न अधिक छुट्टियाँ माँगता हूँ, ना ही आपको घूरता हूँ और न ही कोई गलत संकेत करता हूँ। फिर इसमें दोष क्या है? यह मेरी अपनी पर्सनल चॉइस है। मैं आपको विवश तो नहीं कर रहा कि आप भी मुझे चाहें। यह सम्भव भी नहीं है कि एक सीनियर अधिकारी उम्र में दस वर्ष छोटे अपने कनिष्ठ कर्मचारी से प्रेम करे... अरे, उसकी डिग्निटी का सवाल है! लोग क्या कहेंगे! उसकी शुभ्र धवल चुनरिया में बड़ा सा धब्बा न लग जायेगा भला ऐसा करने से!" अजय ने मुस्कुराते हुए कहा।

मोहिनी की समझ में नहीं आया कि अजय ने क्या कह दिया। उसने अजय से कहा, "ठीक है, अब तुम जाओ।" कोई निर्णय न ले पाने की स्थिति में, उसने कोल्ड कॉफी मंगवाई और अपनी कुहनियों को मेज पर टिका कर चेहरे को दोनों हथेलियों में फँसा लिया। जाते हुए अजय की पीठ देखते हुए वह उलझन में पड़ गई।

रविवार की शाम होते-होते उसने एक कठोर निर्णय ले लिया और यह निर्णय लेते ही उसके मन का सारा तनाव, व्यग्रता और उलझनें पल भर में तिरोहित हो गईं। उसने हल्के मूड में पराठे बनाए, टमाटर धनिया की चटनी बनाई और अपना फेवरेट सीरियल देखते हुए डिनर समाप्त किया। सुखद नींद में सो गई।

सोमवार को मोहिनी ने हल्का मेकअप किया, पसंदीदा कांजीवरम साड़ी पहनी और ऑफिस के लिए निकल गई। ऑफिस में प्रतिदिन के विपरीत जब काफी देर तक अजय उसके केबिन में नहीं आया तो मोहिनी ने इंटरकॉम पर उसके टेबल का नंबर डायल किया। ऑफिस असिस्टेंट ने आकर अनुपस्थित स्टाफ की लिस्ट दी, जिसमें अजय का नाम सबसे ऊपर था। मोहिनी चौंक पड़ी और इंटरकॉम रख दिया। शाम तक अजय का कोई कॉल नहीं आया। ऑफिस की छुट्टी से पहले, उसने उसकी सर्विस फाइल निकाली और कुछ नोट कर लिया।

मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के फ्लैट नम्बर 111 की डोरबेल कई बार बजाने के बाद दरवाजा खुला और अंदर से अजय की मरियल सी आवाज आई, "मैम, आप! यहाँ मेरे फ्लैट में? इस समय? कैसे?"

"ओह! मुझे लगा था कि तुममें इतनी सभ्यता होगी कि आगन्तुक को अंदर बैठाकर एक एक करके प्रश्न करोगे!" मोहिनी ने मुस्कुराते हुए कहा।

"सॉरी मैम, अचानक आपको देखकर मेरी बुद्धि न जाने कहाँ विलुप्त हो गई! आइये, प्लीज अंदर आइये," कहकर वह एक किनारे हो गया।

फ्लैट के अंदर प्रवेश करते हुए मोहिनी ने चारों तरफ देखा। जब तक उसने दृष्टि वापस अजय पर लाई, तब तक अजय ने एक कुर्सी को साफ करके कहा, "प्लीज बैठ जाइए मैम।"

"अरे जब आ ही गई हूँ तो बैठूँगी और चाय भी पियूँगी," मोहिनी ने कुर्सी पर बैठते हुए कहा।

"श्योर श्योर मैम..." कहकर अजय किचन में घुस गया।

कुछ ही पलों में किचन में कुछ गिरने की आवाज आई तो मोहिनी दौड़ कर वहाँ गई और वहाँ का दृश्य देख कर उसका हृदय धक से रह गया।

चूल्हे पर चाय उबल रही थी किन्तु अजय फर्श पर निश्चेष्ट पड़ा हुआ था। उसके मुँह से रक्त की पतली सी धार बह रही थी। मोहिनी ने उसे स्पर्श किया तो उसका बदन तपता हुआ पाया। घबरा कर मोहिनी ने गैस बंद की और अजय को कंधे के सहारे पलँग तक लायी, पानी की छींटे मार कर उसे सचेत करने का प्रयत्न किया।

चेतना वापस आने पर मोहिनी ने पूछा, "तुम्हें क्या परेशानी है और तुम यहाँ किस डॉक्टर से इलाज करा रहे हो?"

"डॉ शांतनु बनर्जी," अजय ने कहा।

"पर वे तो लिवर और किडनी के डॉक्टर हैं," मोहिनी ने चौंकते हुए कहा।

"जी हाँ," कह कर अजय फिर से अचेत हो गया।

मोहिनी ने एम्बुलेंस कॉल की और अजय को डॉ बनर्जी की क्लिनिक में ले गई। ट्रीटमेंट आरम्भ करने के बाद डॉ बनर्जी ने मोहिनी से पूछा, "आप कौन हैं अजय की?"

"जी अजय मेरा कलीग है," मोहिनी ने जवाब दिया।

"क्योंकि कोई और पारिवारिक सदस्य समीप नहीं है, अतः मुझे अब आपको कुछ बताना है अजय के विषय में," डॉ बनर्जी ने गंभीर स्वर में कहा।

"जी अवश्य, आप स्पष्ट शब्दों में कहिये," मोहिनी ने घबराहट भरे स्वर में कहा।

"अजय ने मुझे बताया है कि बचपन में उसके माता-पिता में अलगाव हुआ तो उसकी माँ उसे लेकर अलग हो गई। बाद में, माँ ने दूसरी शादी की और सौतेले बाप ने आठ वर्ष की उम्र में उसे घर से निकाल दिया। तब से वह इधर-उधर काम करता रहा और पढ़ता रहा। क्योंकि वह पढ़ने में कुशाग्र था, इसलिए यूनिफॉर्म और बुक्स मिल जाती थीं और फीस माफ हो जाती थी। फिर उसकी नौकरी यहाँ लग गई। अब सुनिए महोदया, डेढ़ माह पहले की जांच में पता चला कि अजय को लिवरसिरोसिस नामक गम्भीर बीमारी है। प्राइमरी स्टेज में है, लेकिन इलाज के अभाव में यह बढ़ रहा है। हैदराबाद और मुम्बई में इसका इलाज संभव है। दो से ढाई महीने के सफल इलाज के बाद अजय एकदम फिट हो जाएगा।"

चार माह बाद...

जब अजय एकदम स्वस्थ हो गया, तो एक दिन अस्पताल के बगीचे में बनी बेंच पर मोहिनी का हाथ अपने हाथों में लेकर बोला, "मैम, आपने मुझपर लाखों रुपये खर्च कर दिए। मैं इस उपकार को कैसे चुकाऊँगा?"

25/07/2024
🙏जय श्रिराम🙏*सत्यकथन*
01/07/2023

🙏जय श्रिराम🙏
*सत्यकथन*

09/02/2023
।।  नया वर्ष नया उत्साह  ।।           नए साल में कुछ तो नया करेंगे।           गलती ही सही कुछ प्रयास तो करेंगे।         ...
04/01/2023

।। नया वर्ष नया उत्साह ।।

नए साल में कुछ तो नया करेंगे।
गलती ही सही कुछ प्रयास तो करेंगे।
कैसा होगा कल, कैसा हो कल
उस पर आज काम करेंगे,
निश्चित ही नया इतिहास रचेंगे ।।

आपके लिए बड़े सौभाग्य की बात है कि आप अपने जीवन में एक बार फिर नए साल की नई सुबह देख रहें।.... एक दिन पहले पूरा विश्व नया वर्ष का जश्न मनाने में इस कदर डूबा था कि उसे कुछ और ख्याल ही ना रहा,.…. यहां तक कि पिछले साल खुद से किए हुए कितने वादे पूरे हुए और कितने अधूरे रह गए इसका इल्म भी नहीं रहा।
नए वर्ष में जश्न मनाने का तरीका भी बड़ा ही नया और फूहड़ होता जा रहा ,और जो इस तरीके को नहीं अपना रहा उसको पिछड़ा बताया जा रहा।शराब पीना ,कैसिनो जाना, पब जाना आदि को ही प्राथमिकता दी जा रही।
ख़ैर, आपका नया साल तब तक नया नहीं होगा जब तक आपके साथ कुछ नया ना हो।.….... महज़ कैलेंडर में नंबर बदल जाने से जोश दोगुना नहीं होना चाहिए बल्कि Homework स्वरूप 1 जनवरी को सुकून से बैठकर पिछले 1 साल का लेखा-जोखा तैयार करें व अगले साल का ऐसा खाका तैयार करिए जो आपको अपनी मंजिल तक पहुंचाने में भरपूर मदद करें।...…..वैसे तो हम बाकी दिनों में बैठकर कभी "आत्ममंथन " नहीं करते लेकिन नए साल के पहले दिन को "मानसिक शांति दिवस " के रुप में मनाए तो कुछ गलत ना होगा, यह हमारे "आत्म शोधन, आत्ममंथन " का दिन है।

आपने पिछले वर्ष क्या रेजोल्यूशन लिया था उसका कितना अमल कर पाए इस पर पछताने से अच्छा है कि अगले साल नए - नए प्रयोग करने की हिमाकत करें और नया इतिहास रचें।..... "पछतावा "शब्द को अपने जेहन से निकाल फेंके।.... दुनिया की कोई ताकत आपको 2023 में सफल होने से नहीं रोक सकती। ... कुल मिलाकर " 2023 " आपका अपना साल होना चाहिए ,यह पूरा साल अपने हवाले करो फिर देखो जिंदगी का मज़ा।....

यह संदेश सिर्फ युवा वर्ग के लिए ही नहीं है बल्कि उन लोगों के लिए भी है जो अपने जीवन के 50वें पड़ाव पर खड़े हैं।....बहुत सारे सफल व्यक्तियों का " सितारा बालों में सफेदी आने के बाद ही चमका है", इसलिए उम्र की परवाह किए बिना जान फूक दीजिए अपने सीने में, कुछ ना कुछ तो करना ही है 2023 में।
अंत में, सफलता सिर्फ पद गरिमा और पैसे की मोहताज नहीं बल्कि पूरे वर्ष अगर आप खुद को प्रसन्न ,तनाव मुक्त एवं स्वस्थ रखें तो यह भी बहुत बड़ी कामयाबी होगी।

और हां,बच कर रहिएगा ठंड अपने चरम पर हैं।

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