सत्य सनातन धर्म

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06/01/2023
Contact for Maha Aarti for event & Maglik programs ( Marrige event , religious program etc)  =7632025209=महाआरती के लिए ...
20/01/2022

Contact for Maha Aarti for event & Maglik programs ( Marrige event , religious program etc) =7632025209=

महाआरती के लिए संपर्क करे मांगलिक कार्यक्रम , विवाह आदि के लिए

🙏🕉️मृत्यु भोज रीति या कुरीति🙏  शास्त्रो के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो ग्यारहवे दिन महापात्र भोजन हो...
13/01/2022

🙏🕉️मृत्यु भोज रीति या कुरीति🙏
शास्त्रो के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो ग्यारहवे दिन महापात्र भोजन हो गया हो उनको संतुष्ट कर दिया गया हो और बारहवे दिन तेरह विप्र (ब्राह्मण) को भोजन करवा दिया गया हो तो सामाजिक भोज की जरूरत नही है । शास्त्रो मे कहा गया है की ऋण (कर्ज) लेकर अंत्येष्टि (पिण्ड दान,भोज, आदि ) ,यज्ञादि नही करना चाहिए,।
भोज की परंपरा कब से प्रारंभ हुई?
= जब पुराने समय कोई इस दुनिया को छोड कर चला जाता था तब उस घर के लोग बारह दिन तक बाहरी दुनिया से अलग रहते थे और तेरहवे दिन जब सब मिलने आते थे तो सब एक साथ भोजन करते थे तब से लोगो ने इसे सामुहिक भोज का नाम दे दिया ,यह एक लोकाचार है शास्त्रीय परंपरा नही।
निशांत शर्मा (BHU)
7632025208

🙏🕉️क्या सच मे शिवरात्री के दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था ?🙏🕉️शिवमहापुराण के अनुसार एक बार विष्णु जी और ब्रह्म...
06/01/2022

🙏🕉️क्या सच मे शिवरात्री के दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था ?🙏🕉️
शिवमहापुराण के अनुसार एक बार विष्णु जी और ब्रह्मा जी दोनो ने मिलकर भगवान पशुपति शंकर जी की पूजा की । इससे प्रसन्न होकर भक्तिपूर्वक भगवान शिव वहा पधार गये ।

भगवान शंकर ने कहा -आज का दिन एक महान दिन है। इसमे आपलोगो द्वारा जो मेरी पूजा हुई है इससे मै आपलोगो पर प्रसन्न हू। इसी कारण आज का यह दिन महान से महान होगा। आज की यह तिथि (शिवरात्री) के नाम से प्रसिद्ध होगो। 🙏🙏
शिव महापुराण (विद्येश्वर संहिता)
निशांत शर्मा (का हि वि )
7632025202

🙏🕉️आइये जानते है शालिग्राम के विषय मे कुछ तथ्य🙏🕉️ हिंदू धर्म में शालिग्राम को सालग्राम के रूप में जाना जाता है। शालिग्रा...
05/01/2022

🙏🕉️आइये जानते है शालिग्राम के विषय मे कुछ तथ्य🙏🕉️
हिंदू धर्म में शालिग्राम को सालग्राम के रूप में जाना जाता है। शालिग्राम का संबंध सालग्राम नामक गांव से भी है। यह गांव नेपाल में गंडकी नामक नदी के किनारे पर स्थित है। शिवलिंग और शालिग्राम को भगवान का विग्रह रूप माना जाता है और पुराणों के अनुसार भगवान के इस विग्रह रूप की ही पूजा की जानी चाहिए। शिवलिंग के तो भारत में लाखों मंदिर हैं, लेकिन शालिग्रामजी का एक ही मंदिर है।
हिंदू धर्म में आमतौर पर मानवरूपी धार्मिक मूर्तियों के पूजन की प्रथा है। लेकिन इन मूर्तियों के पहले से भगवान ब्रह्मा को शंख, विष्णु को शालिग्राम और शिवजी को शिवलिंग रूप में ही पूजा जाता था। भगवान कृष्ण ने श्रीमद्भगवत गीता के 12वें अध्याय के 5वें श्लोक में कहा है…
”जिन लोगों के मन परमात्मा के अप्रत्यक्ष, अवैयक्तिक गुणों से जुड़े होते हैं, उन लोगों के लिए उन्नति बहुत कठिन है। शरीर युक्त जीव को इस अनुशासन में प्रगति करना सदैव मुश्किल होता है।”

यहां स्थित है शालिग्राम का एकमात्र मंदिर
शालिग्राम का एकमात्र मंदिर नेपाल के मुक्तिनाथ क्षेत्र में स्थित है। यह वैष्‍णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। मुक्तिनाथ की यात्रा काफी कठिन है। माना जाता है कि यहां से लोगों को हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। काठमांडु से मुक्तिनाथ की यात्रा के लिए पोखरा जाना होता है। पोखरा के लिए सड़क या हवाई मार्ग से जा सकते हैं, यहां से जोमसोम जाना होता है। जोमसोम से मुक्तिनाथ जाने के लिए हेलिकॉप्‍टर या फ्लाइट ले सकते हैं। सड़क मार्ग से जाने के लिए पोखरा तक कुल 200 कि.मी. की दूरी तय करनी होती है।
ऐसा होता है और यहां मिलता है शालिग्राम

शिवलिंग की तरह शालिग्राम भी दुर्लभ है। अधिकतर शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ क्षेत्र, काली गण्डकी नदी के तट पर पाए जाते हैं। काले और भूरे शालिग्राम के अलावा सफेद, नीले और सुनहरी आभा युक्त शालिग्राम भी होता है। लेकिन सुनहरा और ज्योतियुक्त शालिग्राम मिलना अत्यंत दुर्लभ है। पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति प्राकृतिक तौर पर बनी होती है।
शालिग्राम में दिखते हैं भगवान विष्णु के अनेक रूप
लगभग 33 प्रकार के शालिग्राम होते हैं, जिनमें से 24 प्रकार के शालिग्राम को भगवान विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित माना जाता है। मान्यता है कि ये सभी 24 शालिग्राम वर्ष की 24 एकादशी व्रत से संबंधित हैं। भगवान विष्णु के अवतारों के अनुसार, शालिग्राम यदि गोल है तो वह भगवान विष्णु का गोपाल रूप है। मछली के आकार का शालिग्राम श्रीहरि के मत्स्य अवतार का प्रतीक माना जाता है। यदि शालिग्राम कछुए के आकार का है तो इसे विष्णुजी के कच्छप और कूर्म अवतार का प्रतीक माना जाता है। शालिग्राम पर उभरनेवाले चक्र और रेखाएं विष्णुजी के अन्य अवतारों और श्रीकृष्ण रूप में उनके कुल को इंगित करती हैं।

पंडित निशांत शर्मा 7632025209

🙏🕉️आखिर क्यो मनाया जाता है छठ महापर्व 🙏🕉️ शास्त्रो के अनुसार प्रियव्रत नामक एक राजा थे उनकी पत्नी का नाम मालिनी था उनकी ...
04/01/2022

🙏🕉️आखिर क्यो मनाया जाता है छठ महापर्व 🙏🕉️
शास्त्रो के अनुसार प्रियव्रत नामक एक राजा थे उनकी पत्नी का नाम मालिनी था उनकी कोई संतान न थी , संतान प्राप्ति के लिए उन्होने कश्यप ऋषि द्वारा पुत्री पुत्रेष्टि यज्ञ किया , रानी गर्भवती हुई परंतु नवे महिने रानी ने मरे हुए पुत्र को जन्म दिया पुत्र वियोग मे राजा प्राण त्याग करने जा रहे थे तभी षष्ठी देवी (छठी मैया) प्रक्रट होती है और राजा से कहती है मै पुत्र रत्न प्रदान करने वाली देवसेना (षष्ठी देवी) हे राजा तुम मेरा व्रत करो मै तुम्हे पुत्र रत्न दूंगी ऐसा कहकर मां अंतर्ध्यान हो जाती है और व्रत करने से राजा को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है , दूसरी कथा के अनुसार कर्ण भगवान सूर्य का अनन्य उपासक था , द्रौपदी वनवास के समय हर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य उपासना ( छठ ) करती थी और ऐसा माना जाता है कि मां के आशिर्वाद से ही पांडव को राज्य की प्राप्ति हुई थी , तीसरी कथा के अनुसार दिवाली ( धनतेरस से भाईदूज) पांच दिवसीय ये त्योहार जब राम जी अयोध्या आये थे तब मनाया गया एवं राम जी के कुलदेवता सूर्य भगवान थे और कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान सूर्य पूजा के बाद ही सिंहासन पर विराजमान हुए थे 🙏
निशांत शर्मा ( BHU)
7632025209

🙏🕉️क्या मंदिर के पिछे परिक्रमा करते समय गर्भगृह के पिछे माथा टेकना चाहिए🙏🙏🕉️🕉️    एक समय कृष्ण जी काल्यावन नामक दैत्य से...
03/01/2022

🙏🕉️क्या मंदिर के पिछे परिक्रमा करते समय गर्भगृह के पिछे माथा टेकना चाहिए🙏🙏🕉️🕉️

एक समय कृष्ण जी काल्यावन नामक दैत्य से युद्ध करने रण मे आये ,काल्यावन को देखते वह रण छोड कर जाने लगे तो बलराम जी पूछते है की कृष्ण कहा जा रहे हो ? कृष्ण जी कहते है भैया इसने बहुत पुण्य, यज्ञ , अनुष्ठान किया है ये भले ही राक्षस है परंतु इसके कर्म सात्विक है इसे ऐसे नही मारा जा सकता हो , बलराम जी पूछते है तो कैसे मारा जाए ? कृष्ण जी कहते है भैया जब मै रण छोड कर भागूंगा तब काल्यावन मेरे पिछे भागेगा और जो मेरा पीठ एक बार देख लेता है या नमन कर लेता है तो उसके सारे कर्म नष्ट हो जाते है । कृष्ण जी रण छोड कर भागते है( उसी वक्त उनका नाम रणछोड पर जाता है) काल्यावन उनके पीछे भागता है और उनके पीठ का दर्शन कर लेता है और उसके सारे कर्म नष्ट हो जाते और कृष्ण जी के हाथ से मरने से उसे बैकुंठ लोक प्राप्त होता है ।
भागवत महापुराण कथा
यदि कोई मंदिर के पिछे माथा थेकता है तो आप भी न थेके और उनको भी समझाए सभी कार्य के पिछे एक कारण होता है बिना कारण के कोई कार्य नही होता ।
निशांत शर्मा (BHU)
7632025209

🙏🙏क्या सच मे संतोषी माता नाम की कोई देवी है या अफवाह के तौर पर हम संतोषी माता नाम की देवी की पूजा करते है 🙏🙏    बहुत पुर...
01/01/2022

🙏🙏क्या सच मे संतोषी माता नाम की कोई देवी है या अफवाह के तौर पर हम संतोषी माता नाम की देवी की पूजा करते है 🙏🙏
बहुत पुराने समय की बात है एक व्यक्ति को सपने मे एक देवी प्रक्रट हुई (इस कथा की कोई प्रमाणिकता नही है) और देवी ने कहा की तुम मेरा व्रत करो नही तो मै तुम्हारे पुत्र को हर लूंगी , डर से उस व्यक्ति ने शुक्रवार का संतोषी माता का व्रत किया और एक पर्चा छपवाया जिसमे ये कहानी लिखी गयी और और उसके नीचे लिखा था जो भी इस पत्र को बिना पढ़े फेक देता है या इसे नजर अंदाज करता है तो उसके घर मे किसी न किसी की मृत्यु हो जाती है, इस अफवाह के साथ एक नई देवी संतोषी का जन्म होता है , शास्त्रो मे न तो संतोषी माता का कही कोई जिक्र है न तो वेदो मे कोई मंत्र आपको एक बात और बता दूं की कोई भी देवी देवता डराते नही है आपकी इच्छा है आप उनकी पूजा करे या नही । गीता मे लिखा
यह शास्त्र शास्त्रविधि मत्सृज्य
वर्तते कामकारत,
न स सिद्धिमवाप्नोति
न सुखं न परांगति।।
अर्थात - शास्त्र मे बताये गये तरीके से किया गया कार्य सफल होता है बिना शास्त्र सम्मत किया गया कार्य न तो सिद्धी होती है न तो सुख और न ही सद्गति मिलती है ।

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वतीजी के शिष्य अविमुक्तेश्वरा नंद जी मुख से संतोषी माता विचार विवरण से निकला निष्कर्ष।
निशांत शर्मा (BHU )
7632025209

🕉️🙏क्यों की जाती है मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा ?🕉️🙏कलयुग के देवता माने जाने वाले हनुमान जी की पूजा मंगलवार के दिन ...
31/12/2021

🕉️🙏क्यों की जाती है मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा ?🕉️🙏

कलयुग के देवता माने जाने वाले हनुमान जी की पूजा मंगलवार के दिन की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा या व्रत से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि मंगलवार के दिन ही हनुमान जी पूजा-अर्चना क्यों की जाती है ?

मान्यताओं के अनुसार मंगलवार के दिन ही हनुमान जी का जन्म हुआ था और उन्हें मंगल ग्रह का नियंत्रक भी माना जाता है. इस दिन हनुमान जी की उपासना करने से साहस, आत्मविश्वास और शक्ति की प्राप्ति होती है. अगर मंगलवार की रात्रि में 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए तो सभी मनोकामना पूरी होती हैं.

तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और उनके अवतारों को भी चढ़ाई जाती है. तुलसी चढ़ाने से जब श्री राम अत्यंत प्रसन्न होते हैं. ऐसे में उनके परम भक्त हनुमान जी का प्रसन्न होना लाजमी है. अगर नित्य प्रातः हनुमान जी को तुलसी जल अर्पित किया जाए तो जीवन भर अन्न का अभाव नहीं होगा.

महाभारत के युद्ध में हनुमान जी अर्जुन के रथ के ध्वज पर विराजमान थे और सारे युद्ध में उन्होंने पांडवों की रक्षा करते हुए उन्हें विजय दिलाई. आयु रक्षा, मुकदमों तथा परीक्षा में विजय और संपत्ति की प्राप्ति के लिए हनुमान जी को मंगलवार को तिकोन ध्वज चढ़ाई जाती है. अगर बार-बार प्रयास करने पर भी मकान न बन पा रहा हो तो मंगलवार को हनुमान जी को एक तिकोन लाल ध्वज चढ़ाएं, ध्वज पर 'राम' लिखा होना चाहिए.

भगवती सीता की प्रेरणा से अपने स्वामी राम को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी ने शरीर में ढेर सारा सिन्दूर लगा लिया था, तभी से हनुमान जी को सिन्दूर चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई. हनुमान जी को सिन्दूर और चमेली का तेल चढ़ाने से रोगों और शारीरिक व्याधियों के अलावा ग्रहों की पीड़ा भी समाप्त होती है.

महिलाओं को हनुमान जी को सिन्दूर नहीं चढ़ाना चाहिए. इसकी जगह पर लाल फूल चढ़ाना उत्तम होगा. मंगलवार को हनुमान जी के चरणों से सिन्दूर लाएं, किसी भी कार्य के लिए निकलते समय उसका तिलक लगाएं, इससे आपका हर कार्य सिद्ध होगा, साथ ही दुर्घटनाओं से बचे रहेंगे.

कुछ अन्य=

पूजा के समय बरतें ये सावधानी
-अगर मंगलवार को उपवास रखते हैं तो इस दिन नमक न खायें
- अगर इस दिन मीठी वस्तु का दान करते हैं तो इस दिन इनसे परहेज करें.
- प्रयास करें कि इस दिन तामसिक चीजों का सेवन न करें.
- मंगलवार के दिन हवन करना अनुकूल नहीं माना जाता, इसलिए इस दिन हवन न करें.
निशांत शर्मा ( BHU)
7632025209

🙏🕉️अखिर क्यो भगवान शंकर को तीन नेत्र है🙏🕉️एक बार ब्रह्मा , विष्णु , महेश जी के समक्ष मां देवी पराम्बा जगदम्बा देवी प्रक्...
30/12/2021

🙏🕉️अखिर क्यो भगवान शंकर को तीन नेत्र है🙏🕉️
एक बार ब्रह्मा , विष्णु , महेश जी के समक्ष मां देवी पराम्बा जगदम्बा देवी प्रक्रट होती है जिनका मुख बिजली की तरह चमक रहा हाथ मे चक्र , गदा आदि धारण किये हुए है ऐसी मां का तीनो देवता दर्शन करते है और ये अनुभूति करते है कि हमारी शक्ति का श्रोत यही है , मां पूछती है की आप लोग मे से कौन मेरी स्तुति करेगा तब ब्रह्मा जी तो सर झुका लेते है ,विष्णु जी कहते है मै समर्थ नही तब महेश जी कहते है मै आपकी स्तुति करूंगा परंतु मुझे फलस्वरूप क्या मिलेगा , तब दूर्गा देवी उत्तर देती है की हे शंकर आप जो भी चाहेंगे मै आपको दूंगी तब मां की अराधना करते है मां प्रसन्न होकर कहती है हे शिव आपकी क्या इच्छा है तब शंकर जी बोलते है हे मां आपकी यह तीसरी नेत्र अद्वितीय है मुझे तीसरी नेत्र चाहिए मां तथास्तु कह कर अदृश्य हो जाती है तब हो से भगवान शंकर के पास तीसरा नेत्र है ।
🙏🕉️ हरहर महादेव 🙏🕉️
निशांत शर्मा ( काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) 7632025209

🙏🕉️आइये जानते है कि शिवलिंग पर कौन से अनाज और कौन से  पुष्प चढाने से क्या फल मिलता है🙏🕉️शिवलिंग  पर =1)चावल -चढाने से धन...
28/12/2021

🙏🕉️आइये जानते है कि शिवलिंग पर कौन से अनाज और कौन से पुष्प चढाने से क्या फल मिलता है🙏🕉️
शिवलिंग पर =
1)चावल -चढाने से धन संपत्ति की प्राप्ति होती है
2) गेंहू- चढाने से संतान सुख प्राप्त होता है, एवं लम्बे समय से चली आ रही बिमारी एवं परेशानी भी समाप्त होती है ।
3)तिल - चढाने से दैहिक, दैविक ,भौतिक तिन प्रकार के तापो का नाश होता है।
4)दाले- चढाने से विभिन्न प्रकार के कष्ट से मुक्ति व ऐश्वर्य एवं धन की प्राप्ति होती है।
नोट= चढाने हुए अनाज को घर न लेकर आये मात्रा ज्यादा हो तो किसी गरीब को दान कर दे जिसको इसकी जरूरी हो ।

शिवलिंग पर पुष्प चढाने के फल-
1) बिल्वपत्र - शिव जी को अत्यंत प्रिय है।
2) मदार ( आक) - चढाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है ।
3)चमेली - चढाने से वाहन आदि के सुख होती है ।
4)शमी - चढाने से घर मे सुख संपत्ति की प्राप्ति होती है।
5)बेला - चढाने से सुन्दर पत्नी की प्राप्ति होती है।
6)जूही-चढाने से अनाज के भंडार भरे रहते है।
7)कनेर - वस्त्र व आभूषण की प्राप्ति होती है।
8)धूर के पुष्प- से आज्ञाकारी पुत्र की प्राप्ति होती है।
9)गडहल- शत्रु पर विजय मुकदमे मे विजय की प्राप्ति।
10) शंख पुष्प- लक्ष्मी की प्राप्ति होती है ।
11) कमल- सभी जन्मो के पाप नष्ट हो जाती है और शिव लोक की प्राप्ति होती है।
12)अलसी के पुष्प- विष्णु लोक की प्राप्ति।
13)दूर्वा - लंबी आयु की प्राप्ति।
14)लाल गुलाब- धन और समृद्धि मे वृद्धि।

🙏🙏 शिव महापुराण 🙏🙏

निशांत शर्मा ( BHU)
7632025209

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