बिहार के विशेष संदर्भ में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के महत्व की (आजाद दस्ता’ की भूमिका)आलोचनात्मक विवेचना कीजिए |
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22/09/2025
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Q . चंपारण गांधी का पहला राजनीतिक अनुभव मात्र नहीं था यह भारत के स्वाधीनता संग्राम का प्रस्थान बिदुं भी था ?(450 शब्द)
ANSWERWRITING
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चंपारण सत्याग्रह (1917) महात्मा गांधी का भारत में पहला प्रमुख राजनीतिक अनुभव था और यह स्वतंत्रता संग्राम का प्रस्थान बिंदु बन गया। यह केवल एक स्थानीय आंदोलन नहीं था, बल्कि इसने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। इसका महत्व निम्नलिखित सात बिंदुओं में समझा जा सकता है:
गांधी का भारत में पहला सत्याग्रह:
चंपारण (बिहार) में गांधी ने पहली बार भारत में सत्याग्रह का प्रयोग किया। नील किसानों पर अंग्रेजों की "तिनकठिया प्रथा" के तहत शोषण हो रहा था, जिसमें उन्हें अपनी जमीन का एक हिस्सा नील की खेती के लिए देना पड़ता था। गांधी ने इस अन्याय के खिलाफ अहिंसक आंदोलन शुरू किया।
अहिंसा की शक्ति का प्रदर्शन:
चंपारण सत्याग्रह ने अहिंसा और सत्याग्रह को भारत में प्रभावी हथियार के रूप में स्थापित किया। गांधी ने हिंसा का सहारा लिए बिना अंग्रेजी प्रशासन को झुकने पर मजबूर किया, जिसने भारतीयों को अहिंसक प्रतिरोध की ताकत दिखाई।
किसानों को संगठित करना:
गांधी ने चंपारण के किसानों को एकजुट किया और उनकी समस्याओं को समझा। उन्होंने स्थानीय लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया, जिससे ग्रामीण भारत स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बना। यह पहली बार था जब किसानों की इतनी बड़ी भागीदारी देखी गई।
राष्ट्रीय नेतृत्व की स्थापना:
चंपारण की सफलता ने गांधी को राष्ट्रीय नेता के रूप में उभारा। उनकी कार्यशैली और विचारों ने देशभर में लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इसने गांधी को जनता का विश्वास दिलाने में मदद की।
औपनिवेशिक शासन पर दबाव:
इस आंदोलन के दबाव में अंग्रेजों को जांच समिति बनानी पड़ी, जिसमें गांधी भी शामिल थे। अंततः तिनकठिया प्रथा समाप्त हुई और किसानों को राहत मिली। यह अंग्रेजी शासन के खिलाफ पहली बड़ी जीत थी।
स्वतंत्रता संग्राम में जनभागीदारी:
चंपारण ने स्वतंत्रता संग्राम को जन-आंदोलन में बदल दिया। गांधी ने दिखाया कि आम लोग भी स्वतंत्रता की लड़ाई में योगदान दे सकते हैं। इसने स्वतंत्रता संग्राम को व्यापक आधार दिया।
आगामी आंदोलनों की नींव:
चंपारण ने गांधीवादी सिद्धांतों—अहिंसा, सत्याग्रह और स्वदेशी—को स्वतंत्रता संग्राम का आधार बनाया। इसके बाद खेड़ा सत्याग्रह (1918) और असहयोग आंदोलन (1920-22) जैसे बड़े आंदोलनों की नींव पड़ी, जिसने स्वतंत्रता संग्राम को गति दी।
निष्कर्षतः, चंपारण सत्याग्रह गांधी का पहला राजनीतिक अनुभव होने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम का प्रस्थान बिंदु था। इसने भारतीयों में आत्मविश्वास जगाया, गांधी को राष्ट्रीय नेता बनाया और स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी। (450 शब्द)
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