Amish Mishra "Motivate Yourself"
TUTOR/EDUCATOR
04/10/2022
#शिक्षा_का_गिरता_स्तर_चिंता_का_विषय
👇𝑯𝒆𝒍𝒍𝒐 𝑫𝒆𝒂𝒓 𝑴𝒆𝒎𝒃𝒆𝒓𝒔, 𝑰 𝒂𝒎 𝒓𝒆𝒒𝒖𝒆𝒔𝒕𝒊𝒏𝒈 𝒂𝒍𝒍 𝒐𝒇 𝒚𝒐𝒖.........🙏𝑷𝒍𝒆𝒂𝒔𝒆 𝑳𝒊𝒌𝒆 & 𝑺𝒉𝒂𝒓𝒆🙏
#सफलता_की_व्याख्या
दुनिया में हर किसी की सफलता की व्याख्या अलग होती है। कुछ के लिए यह मन की एक अवस्था है, कुछ के लिए भौतिक सुख, तो कुछ के लिए एक निश्चित पद को पाना और कुछ के लिए समाज में कुछ बड़ा कर नाम और प्रसिद्धि पाना।
सफलता कभी पूर्ण नहीं होती है बल्कि यह सिर्फ एक अल्पविराम है, पूर्णविराम नहीं। यह अंत न होकर जीवन की यात्रा का सिर्फ एक मोड़ है। यह एक ऐसी मरीचिका है जिसका हम सब पीछा तो करते हैं लेकिन पाने में नाकामयाब रहते हैं क्योंकि हम खुद से स्पर्धा करने की जगह दूसरों के साथ स्पर्धा में अपना वक्त और ऊर्जा लगाते हैं। सही मायनों में सफल होने के लिये पहले हम खुद को पहचानें और फिर अपनी अंतरात्मा के साथ स्पर्धा करें।
सफलता से कभी संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। असल में सफलता बहुत हद तक व्यक्तिगत पहल और सही कोशिश पर निर्भर करती है। सफलता हमेशा बेहतर करने और आगे बढ़ने का संदेश देती है। दुनिया में कोई भी अपने काम से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है और ऐसे में एक सपने को पालना और उसे पूरा करने के प्रयास करने से बेहतर कुछ भी नहीं है। हर किसी के जीवन में एक सपना होना चाहिये और उसे उसका पीछा करते रहना चाहिए।
08/11/2021
खुशियों का कोई रास्ता नहीं होता
खुश रहना ही रास्ता है ..
हाँ..... किताबें...बोलती हैं।।
दुर्गम पथ हो काटों भरा कोई
चुपचाप पड़ी हो किस्मत सोई
ये दुर्भाग्य को भगाती हैं,
कठिन को सरल बनाती हैं,
कडुआहट को निकाल कर
मिठास को घोलती हैं,
हाँ..... किताबें...बोलती है।
पुस्तकालय ही देवालय होता है,
मंदिर मस्जिद हिमालय होता है।
अज्ञानता की घातक बीमारी का
दिव्य ज्ञान औषधालय होता है।
मानवता और पशुता के
अंतर को बाखूबी से तौलती हैं,
हाँ..... किताबें...बोलती हैं।।
आओ, किताबों से मिलते हैं
लायब्रेरी से लव करते हैं,
जो मन करेगा वो पढेंगें,
खेलेंगे कूदेंगे खूब बढेंगें,
पन्ने उलटते उलटते
हम सब हिसाब सिखेंगे।
Amish Mishra "Motivate Yourself"
07/07/2021
Cbse News | CBSE Announce Major Changes For Class 10th, 12th Board Exams 2021-22 Cbse News | CBSE Announce Major Changes For Class 10th, 12th Board Exams 2021-22
एक कहानी सी #🤟
अगर मेंढक को गर्मा गर्म उबलते पानी में डाल दें तो वो छलांग लगा कर बाहर आ जाएगा और उसी मेंढक को अगर सामान्य तापमान पर पानी से भरे बर्तन में रख दें और पानी धीरे धीरे गरम करने लगें तो क्या होगा ?
मेंढक फौरन मर जाएगा ?
जी नहीं....
ऐसा बहुत देर के बाद होगा...
दरअसल होता ये है कि जैसे जैसे पानी का तापमान बढता है, मेढक उस तापमान के हिसाब से अपने शरीर को Adjust करने लगता है।
पानी का तापमान, खौलने लायक पहुंचने तक, वो ऐसा ही करता रहता है।अपनी पूरी उर्जा वो पानी के तापमान से तालमेल बनाने में खर्च करता रहता है।लेकिन जब पानी खौलने को होता है और वो अपने Boiling Point तक पहुंच जाता है, तब मेढक अपने शरीर को उसके अनुसार समायोजित नहीं कर पाता है, और अब वो पानी से बाहर आने के लिए, छलांग लगाने की कोशिश करता है।
लेकिन अब ये मुमकिन नहीं है। क्योंकि अपनी छलाँग लगाने की क्षमता के बावजूद , मेंढक ने अपनी सारी ऊर्जा वातावरण के साथ खुद को Adjust करने में खर्च कर दी है।
अब पानी से बाहर आने के लिए छलांग लगाने की शक्ति, उस में बची ही नहीं I वो पानी से बाहर नहीं आ पायेगा, और मारा जायेगा I
👉मेढक क्यों मर जाएगा ?
👉कौन मारता है उसको ?
👉पानी का तापमान ?
👉गरमी ?
👉या उसके स्वभाव से ?
मेढक को मार देती है, उसकी असमर्थता सही वक्त पर ही फैसला न लेने की अयोग्यता । यह तय करने की उसकी अक्षमता कि कब पानी से बाहर आने के लिये छलांग लगा देनी है।
MORAL:
इसी तरह हम भी अपने वातावरण और लोगो के साथ सामंजस्य बनाए रखने की तब तक कोशिश करते हैं, जब तक की छलांग लगा सकने कि हमारी सारी ताकत खत्म नहीं हो जाती ।
लोग हमारे तालमेल बनाए रखने की काबिलियत को कमजोरी समझ लेते हैं। वो इसे हमारी आदत और स्वभाव समझते हैं। उन्हें ये भरोसा होता है कि वो कुछ भी करें, हम तो Adjust कर ही लेंगे और वो तापमान बढ़ाते जाते हैं।
हमारे सारे इंसानी रिश्ते, राजनीतिक और सामाजिक भी, ऐसे ही होते हैं, पानी, तापमान और मेंढक जैसे। ये तय हमे ही करना होता है कि हम जल मे मरें या सही वक्त पर कूद निकलें।
(विचार करें, गलत-गलत होता है, सही-सही, गलत सहने की सामंजस्यता हमारी मौलिकता को ख़त्म कर देती है) 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 साभार
बच्चे तितली के जैसे होते हैं।
उनमें से कुछ ज्यादा ऊपर तक उड़
सकते हैं और कुछ कम।
पर सभी अपनी क्षमता भर ऊपर उड़ते हैं।
फिर हम क्यों उनमें तुलना करते हैं?
जबकि सभी बच्चे विशेष होते हैं!
सभी बच्चे अलग होते है!
सभी बच्चे सुन्दर होते हैं!
हमें किसी भी बच्चे को हतोत्साहित नहीं
करना है क्योंकि हर बच्चा सीख रहा होता है।
भले ही उसकी सीखने की गति
कितनी भी कम क्यों न हो।
सभी बच्चे प्रतिभाशाली होते हैं।
सभी बच्चे Gifted होते हैं।
बस उनमें छिपी प्रतिभाओं के
बाहर आने का समय अलग-अलग होता है।
वो खुद से आगे न आएं तो भी उन्हें
गतिविधियों में भाग लेने के लिए
प्रोत्साहित अवश्य करें। उन्हें यथासंभव
अपनी बात कहने का अवसर दें।
कठोरता से बचें और उनकी बातों
को स्वीकार करें उनके सुझावों
के प्रति संवेदनशील रहें।
उनकी विफलता को स्वीकार
करने में संकोच न करें।
एक दिन वो उठ खड़ें होंगे और इतना
आगे जाएंगे कि आपको उनपर गर्व होगा।
-अमीष मिश्रा
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