20/07/2022
मध्यप्रदेश के एक ऐसे बहादुर सपूत की आपको कहानी बता रहे हैं। जो वतन के लिए शहीद हो गए पर अपने जान देकर कई परिवार की जिंदगी भी बचा गए। शहीद का नाम है लेफ्टिनेंट कमांडर धर्मेंद्र सिंह चौहान।
शहीद लेफ्टिनेंट कमांडर धर्मेंद्र सिंह चौहान की शादी 10 मार्च 2019 को आगरा की करुणा सिंह के साथ हुई थी। 12 मार्च 2019 को रतलाम में रिसेप्शन हुआ था उसके बाद 23 मार्च 2019 को वो ड्यूटी पर वापस लौट गए थे।
जाते समय धर्मेंद्र ने अपनी मां से वादा किया था कि दीपावली पर वापस आऊंगा और सबको घुमाने ले जाऊंगा। लेकिन 26 अप्रैल 2019 को आईएनएस विक्रमादित्य में लगी आग को बुझाने के दौरान वो शहीद हो गए।
करुणा बार-बार तस्वीरों को निहारती और ताबूत से लिपट रही थी। करुणा कह रही थी। डेढ़ माह पहले ही तो तुम मेरी जिंदगी में आए थे। इन तस्वीरों और यादों की सहारे तो जीना है। अभी पूरी जिंदगी बची है।
पति के शहीद होनेके बाद भी करुणा आज भी माथे पर सिंदूर लगाती हैं। उनका कहना है कि मैं उनकी पत्नी हूं और उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए खुद की जान दी हे।
आज भी मां को दिन रो-रोकर गुजरता है। आज भी रोत हुए शहीद की मां कहती हैं, दीपावली में घुमाने का किया था वादा, अब कौन घुमायेगा बेटा, बहुत क्यूट था मेरा बेटा। वो रियल हीरो था।
मैंने मेहनत-मजदूरी कर उसे पाला था। क्योंकि आगे में सुख भोगूंगी। अब सब कुछ लूट गया, इकलौता बेटा था मेरा वो। ऐसी ही होती हैं वीर की मां शत-शत नमन जय हिन्द..!!