Pankaj Kumar
लत हिन्दुगिरी की लगी हैं, तो नशा अब सरे आम होगा,
हर लम्हा मेरे जीवन का सिर्फ, हिन्दुत्व के नाम होगा।
ये गर्भस्थ शिशु की प्रस्तर प्रतिमा "कुंददम वादककुनाथ स्वामी मन्दिर“ की दीवारों पर उकीर्ण हैं।
कल्पना करें X-RAY की खोज से हजार साल पहले ये जानकारी उस समय के लोगों को कैसे मिली होगी??
उत्तर है - दिव्यदृष्टि!!
मन्दिर की दूसरी दीवारों पर भी गर्भस्थ शिशु के हर महीने की स्थिति की प्रतिमा उकेरी हुई है।
सनातन धर्म संसार का सबसे प्राचीन पहला और आखरी वैज्ञानिक धर्म है।
सनातन ने ही विश्व को विज्ञान दिया।
दृष्टि दी।
जीवन जीने की कला दी।
सहित्य दिया, संस्कृति दी।
विज्ञान दिया, विमान शास्त्र दिया।
चिकित्सा शास्त्र दिया।
अर्थ शास्त्र दिया।
व्याकरण दिया।
दर्शनशास्त्र दिया।
सनातन धर्म करोड़ों वर्षों से वैज्ञानिक अनुसंधान करता आया है।
हमारे ऋषि मुनियों (विज्ञानियों) ने विज्ञान की नींव रखे हैं।
सनातन ऋषियों (विज्ञानियों) ने अपनी हड्डिया गलाकर विश्व को विज्ञान ओर अनुसंधान के दर्शन कराए हैं।
सम्पूर्ण विश्व कभी सनातन के ऋषी मुनियों (विज्ञानियों) के ऋण से उऋण नहीं हो पाएँगे।
इतना दिया है विश्व को हमारे सनातनी पूर्वजों ने।
कुंददम कोयम्बटूर से करीब ८० किलोमीटर की दूरी पर है।
🙏🙏🙏🙏🙏🌹
19/03/2021
1669 ईसवी ।
औरंगज़ेब ने समस्त वैष्णव मन्दिरों को तोड़ने का आदेश दिया ।
मथुरा के श्रीनाथ जी मंदिर के पुजारी श्री कृष्ण की मूर्ति लेकर राजस्थान की ओर निकल गए ।
जयपुर व जोधपुर के राजाओं ने औरंग से बैर लेना उचित नहीं समझा । पुजारी मेवाड़ की पुष्यभूमि पर महाराणा राजसिंह के पास गए ।
एक क्षण के विलम्ब के बिना राज सिंह ने यह कहा -
“ जब तक मेरे एक लाख राजपूतों का सर नहीं कट जाए , आलमगीर भगवान की मूर्ति को हाथ नहीं लगा सकता । आपको मेवाड़ में जो स्थान जंचे चुन लीजिए , मैं स्वयं आकर मूर्ति स्थापित करूँगा । “
मेवाड़ के ग्राम सिहाड़ में श्रीनाथ जी की प्रतिष्ठा धूमधाम से हुई , जिसमें स्वयं राज सिंह पधारे ।
आज जो प्रसिद्ध नाथद्वारा तीर्थस्थल है , वह सिहाड़ ग्राम ही है ।
औरंग ने राज सिंह जी को पत्र लिखा कि श्रीनाथ जी की मूर्ति को शरण दी तो युद्ध होगा ।
राज सिंह जी ने कोई उत्तर ना दिया । चुपचाप मारवाड़ के वीर दुर्गादास राठौड़ के नेतृत्व में राठौडों व मेवाड़ के हिन्दुओं की सामूहिक सेना का गठन करने लगे ।
1679-80 ईसवीं । दो वर्षों तक मुग़ल मेवाड़ संघर्ष चला ।
दो बार राज सिंह जी ने औरंग को गिरफ़्तार करके दया करके छोड़ दिया ।
1680 में पूर्ण रूप से पराजित औरंग अपना काला मुँह लेकर सर्वथा के लिए राजस्थान से चला गया ।
नाथद्वारा हम में से बहुत लोग गए हैं ।
हमें क्यूँ नहीं पता कि यह विग्रह मूल रूप से मथुरा के हैं ?
किसके कारण पुजारियों को पलायन करना पड़ा ?
किसने अपना सर्वस्व दाँव पर लगाकर श्रीनाथ जी की रक्षा की ?
किसी ने राज सिंह जी का नाम भी सुना है ?
हमें क्यूँ नहीं पता कि पचास सहस्त्र (हज़ार) मेवाड़ व मारवाड़ के हिन्दुओं ने शीश का बलिदान देकर मुग़लों से श्रीनाथ जी की रक्षा की थी ?
इस अभागे देश के इतिहासकार तो ठग हैं ही ( केवल शिष्टाचार के चलते माँ बहन की गालियाँ नहीं दे रहा हूँ ) , पर हम हिन्दुओं को क्या हुआ है ?
भोगविलास में हम अपने देवताओं, अपने महिमाशाली पुरखों के नाम तक विस्मृत कर चुके हैं !
अब नाथद्वारा जाएँ तो इन महान पूर्वजों की स्मृति में दो अश्रु बहाएँ व आकाश की ओर मुँह करके इन महान आत्माओं का धन्यवाद दें जिनके कारण हम आज हिन्दू हैं ।
वे खाने में खुद का थुक मिला रहे है, केरल मे प्रतिकात्मक ही सही मगर वो RSS वालों को बंदी बना जुलूस निकाल अपने इरादे जग जाहीर कर रहे हैं, और हम मात्र पेट्रोल पर मातम मना रहे है
इतिहास खंगाला जायेगा
बाबर,नेहरू,जिन्ना,
अकबर को नहीं अब बोस,आजाद,भगतसिंह प्रताप को पूजा जाएगा।
❤️❤️❤️
04/01/2021
जय श्री कृष्णा 🙏🙏
29/12/2020
❤️❤️
सब याद रहेगा 🔥🔥
27/12/2020
#मुरूदेश्वरमंदिर की ऊंचाई 249 फीट है, जबकि कुतुबमीनार की ऊंचाई 238 फीट है!
इतिहास में जब भी ऊंची इमारतों की बात आयी तो केवल कुतुबमीनार का ही महिमामंडल देखने को मिला! लेकिन कहीं भी इस मंदिर का कोई जिक्र तक नहीं, क्योंकि बचपन से ही हमें मनगढ़ंत वामपंथी इतिहास ही पढाया और परोसा जाता रहा है.!!
😊
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