20/12/2021
विज्ञान और आध्यात्म
यह श्रृष्टि चार आयाम के बीच अवस्थित है 1. आकाश
2. समय 3. वस्तु और
4. जीवात्मा
इन चार आस्तित्व के संयोग से श्रृष्टि की उत्पत्ति होती है, जिनमें आकाश एक स्थिर घटक है और समय इस श्रृष्टि में होने वाले परिवर्तन की माप के लिए आस्तित्व में होता है। स्पष्ट है कि परिवर्तन से समय और आकाश दोनों निर्लिप्त होते हैं।
तीसरा घटक है वस्तु जो पदार्थ एवम उर्जा का सामुहिक नाम है। पदार्थ उर्जा का संघनित स्वरूप होता है और उर्जा पदार्थ के विघटन से उत्पन्न होता है। सभी परिवर्तन - पदार्थ के आकार मे परिवर्तन के - परिणाम स्वरूप उत्पन्न होते है। किन्तु फिर भी, पदार्थ और उर्जा के उपलब्ध होने से भी परिवर्तन नहीं होती है बल्कि इसके लिए जीवात्मा की जरूरत होती है।
यह जीवात्मा शक्ति एवम प्रज्ञा का संयुक्त आस्तित्व होता है। आप जानते हैं कि शक्ति जब कारण बनती है तब उसके दबाव के अनुरूप उर्जा का बहाव होता है और उर्जा का यह बहाव पदार्थ में परिवर्तन करके परिणाम उत्पन्न करता है।
अब यह परिणाम किस प्रकार का होना है और कितनी मात्रा में होना है इसके लिए विवेक आवश्यक होता है।
और इस तरह से
सभी परिवर्तन का कारण जीवात्मा होता है।
शेष अगले पृष्ठ पर ......