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VAST
वैश्विक सनातन तरंग
12/07/2022
5 Lessons on Life as an Entrepreneur That You Don't Learn in School Success might mean unlearning everything you were taught as a kid.
05/06/2022
VAST द्वारा पटना पॉलिटेक्निक मोड़ स्थित- शनि मंदिर में दीप चढ़ाने के उद्देश्य से - मंदिर में आए भक्तजनों को दीपक दान किए गए एवं उनके द्वारा पूजा अर्चना किए जाने के बाद उन्हें नींबू पानी भेंट किया गया । कुछ लिखित सामग्री भी दी गई धर्म के संबंध में अग्र्तर जानकारी के उद्देश्य से । चित्र में VAST के स्वयंसेवी देखे जा सकते हैं।
विज्ञान और आध्यात्म
यह श्रृष्टि चार आयाम के बीच अवस्थित है 1. आकाश
2. समय 3. वस्तु और
4. जीवात्मा
इन चार आस्तित्व के संयोग से श्रृष्टि की उत्पत्ति होती है, जिनमें आकाश एक स्थिर घटक है और समय इस श्रृष्टि में होने वाले परिवर्तन की माप के लिए आस्तित्व में होता है। स्पष्ट है कि परिवर्तन से समय और आकाश दोनों निर्लिप्त होते हैं।
तीसरा घटक है वस्तु जो पदार्थ एवम उर्जा का सामुहिक नाम है। पदार्थ उर्जा का संघनित स्वरूप होता है और उर्जा पदार्थ के विघटन से उत्पन्न होता है। सभी परिवर्तन - पदार्थ के आकार मे परिवर्तन के - परिणाम स्वरूप उत्पन्न होते है। किन्तु फिर भी, पदार्थ और उर्जा के उपलब्ध होने से भी परिवर्तन नहीं होती है बल्कि इसके लिए जीवात्मा की जरूरत होती है।
यह जीवात्मा शक्ति एवम प्रज्ञा का संयुक्त आस्तित्व होता है। आप जानते हैं कि शक्ति जब कारण बनती है तब उसके दबाव के अनुरूप उर्जा का बहाव होता है और उर्जा का यह बहाव पदार्थ में परिवर्तन करके परिणाम उत्पन्न करता है।
अब यह परिणाम किस प्रकार का होना है और कितनी मात्रा में होना है इसके लिए विवेक आवश्यक होता है।
और इस तरह से
सभी परिवर्तन का कारण जीवात्मा होता है।
शेष अगले पृष्ठ पर ......
मनुष्य एक जटिल संरचना है जो शरीर - मन - आत्मा के संयोग से उत्पन्न होता है। इनमें से कोई भी एक दूसरे से अधिक पवित्र अथवा महत्वपूर्ण नहीँ है बल्कि प्रत्येक का अपना एक महत्व होता है। इनमें से किसी की भी उपेक्षा करके जीवन का पूर्ण आनंद नहीं लिया जा सकता।
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