Pantnagar Research School on Organic / Natural Farming

Pantnagar Research School on Organic / Natural Farming Research on organic farming
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08/06/2026

How to Save the Soil?
खेत को कैसे बचाएँ?

12/05/2026

Saving of Fertilizer with Green Manuring

18/04/2026

🌿 अपना सफल ऑर्गेनिक खेती मॉडल बनाएं – छोटे किसान, बड़ा मुनाफा! 🌿

अगर आपके पास सिर्फ 1 एकड़ ज़मीन है, तब भी आप एक सस्टेनेबल और सफल ऑर्गेनिक मॉडल बना सकते हैं। ज़रूरत है सही प्लानिंग और स्मार्ट काम की।

🔹 1. मिट्टी की सेहत से शुरुआत करें
गोबर खाद, वर्मी-कम्पोस्ट और जैविक खाद का इस्तेमाल करें। स्वस्थ मिट्टी = बेहतर उत्पादन।

🔹 2. फसल विविधता (Crop Diversity)
एक ही फसल पर निर्भर न रहें। सब्ज़ियाँ + दालें + मसाले उगाएं, ताकि साल भर आय बनी रहे।

🔹 3. इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल
खेती के साथ बकरी पालन, मुर्गी पालन या मधुमक्खी पालन जोड़ें। इससे आय के कई स्रोत बनते हैं।

🔹 4. पानी का स्मार्ट उपयोग
ड्रिप इरिगेशन और वर्षा जल संचयन अपनाएं। कम पानी में ज्यादा उत्पादन संभव है।

🔹 5. खुद की ब्रांडिंग और डायरेक्ट सेलिंग
अपने प्रोडक्ट को “ऑर्गेनिक” ब्रांड बनाकर सीधे ग्राहक तक बेचें—लोकल मार्केट, व्हाट्सऐप, सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें।

🔹 6. वैल्यू एडिशन (Value Addition)
कच्चा बेचने के बजाय अचार, पाउडर, या पैकेजिंग करके ज्यादा कीमत पाएं।

✨ सफलता का मंत्र:
छोटा शुरू करें, लगातार सीखें, और धीरे-धीरे विस्तार करें।

💬 क्या आप ऑर्गेनिक खेती शुरू करना चाहते हैं? कमेंट में बताएं!

18/04/2026

🌿 ऑर्गेनिक खेती में कम्पोस्टिंग का महत्व 🌿

कम्पोस्टिंग यानी जैविक कचरे को पौष्टिक खाद में बदलना—यह ऑर्गेनिक खेती की रीढ़ है। अगर आप कम लागत में ज्यादा उत्पादन चाहते हैं, तो कम्पोस्टिंग जरूर अपनाएं।

👉 कम्पोस्टिंग क्या है?
रसोई के कचरे, फसल अवशेष, गोबर और सूखे पत्तों को सड़ाकर प्राकृतिक खाद बनाना ही कम्पोस्टिंग है।

👉 फायदे क्या हैं?
✔️ मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है
✔️ रासायनिक खाद पर खर्च कम होता है
✔️ मिट्टी की संरचना और पानी रोकने की क्षमता बेहतर होती है
✔️ फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार

👉 कम्पोस्ट बनाने का आसान तरीका
1️⃣ गड्ढा या ड्रम तैयार करें
2️⃣ सूखा कचरा (पत्ते, भूसा) + गीला कचरा (सब्ज़ी छिलके) परतों में डालें
3️⃣ थोड़ा गोबर या पुराना कम्पोस्ट मिलाएं
4️⃣ नमी बनाए रखें (बहुत सूखा या गीला न हो)
5️⃣ 40–60 दिन में तैयार खाद मिल जाएगी

👉 ध्यान रखें
❌ प्लास्टिक या केमिकल कचरा न डालें
❌ समय-समय पर पलटते रहें ताकि हवा मिलती रहे

🌱 निष्कर्ष:
कम्पोस्टिंग से खेत की सेहत सुधरती है और किसान की लागत घटती है—यही है असली ऑर्गेनिक सफलता का राज!

💬 क्या आप अपने खेत में कम्पोस्ट बनाते हैं? अनुभव साझा करें!

18/04/2026

🌱 एक एकड़ ज़मीन… और अनगिनत अवसर! 🌱
छोटे किसान अक्सर सोचते हैं कि कम ज़मीन में कमाई सीमित होती है। लेकिन सही योजना और नई तकनीकों के साथ एक एकड़ खेत भी सुनहरा मौका बन सकता है।
👉 1. उच्च मूल्य वाली फसलें (High Value Crops)
सब्ज़ियाँ, मसाले (जैसे हल्दी, अदरक), और औषधीय पौधे कम जगह में ज़्यादा मुनाफा दे सकते हैं।
👉 2. जैविक खेती (Organic Farming)
आजकल लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं। जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिससे बेहतर दाम मिल सकते हैं।
👉 3. बहु-फसली खेती (Multi Cropping)
एक ही खेत में अलग-अलग फसलें उगाकर जोखिम कम करें और आय बढ़ाएँ।
👉 4. डेयरी और पोल्ट्री (Dairy & Poultry)
छोटी जगह में गाय, बकरी या मुर्गी पालन जोड़कर नियमित आय का स्रोत बनाया जा सकता है।
👉 5. ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीक
कम पानी में अधिक उत्पादन—खर्च कम, फायदा ज्यादा।
👉 6. डायरेक्ट मार्केटिंग
मंडी पर निर्भर रहने के बजाय, सीधे ग्राहक तक पहुंचकर बेहतर कीमत पाएं (जैसे लोकल मार्केट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म)।
💡 याद रखें:
छोटा खेत कोई कमजोरी नहीं, बल्कि स्मार्ट खेती का मौका है।
सही जानकारी + मेहनत = ज्यादा मुनाफा 🚜✨
आप एक एकड़ में क्या उगाते हैं? अपने अनुभव कमेंट में साझा करें 👇

🌱 प्राकृतिक खेती में उन्नत फसल प्रणाली: सनई (Sesbania) - गन्ना + लहसुन + चना +-गेहूँ 🌾🧄🌿आज मैं प्राकृतिक खेती के अंतर्गत...
15/04/2026

🌱 प्राकृतिक खेती में उन्नत फसल प्रणाली: सनई (Sesbania) - गन्ना + लहसुन + चना +-गेहूँ 🌾🧄🌿

आज मैं प्राकृतिक खेती के अंतर्गत विकसित एक बहुआयामी एवं टिकाऊ फसल प्रणाली साझा कर रहा हूँ — सनई -गन्ना + लहसुन + चना - गेहूँ। यह प्रणाली भूमि की उर्वरता बढ़ाने, संसाधनों के कुशल उपयोग, जोखिम कम करने तथा किसानों की आय में वृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावी है।

🌿 सनई (Sesbania) हरी खाद के रूप में मिट्टी में जैविक पदार्थ एवं नाइट्रोजन बढ़ाती है।
🌾 गन्ना मुख्य नकदी फसल के रूप में बेहतर आर्थिक लाभ देता है।
🧄 लहसुन अतिरिक्त आय के साथ प्राकृतिक कीट प्रबंधन में सहायक है।
🌱 चना दलहनी फसल होने के कारण मिट्टी को पोषक तत्व प्रदान करता है।
🌾 गेहूँ खाद्यान्न सुरक्षा और अतिरिक्त उत्पादन सुनिश्चित करता है।

✅ इस फसल प्रणाली के प्रमुख लाभ:
• एक ही खेत से बहुस्तरीय उत्पादन
• मिट्टी की सेहत एवं उर्वरता में सुधार
• जैव विविधता में वृद्धि
• कीट एवं रोग प्रकोप में कमी
• जल एवं पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग
• किसानों की आय में स्थिरता और वृद्धि

प्राकृतिक खेती आधारित ऐसी मिश्रित फसल प्रणालियाँ भविष्य की स्मार्ट, लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल कृषि की दिशा हैं। 🌍🌱

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09/04/2026

🌱 जैविक खेती में विभिन्न प्रकार के खाद जैसे जीवामृत, घन जीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट, कम्पोस्ट और समृद्ध खाद का निर्माण सरल प्रक्रियाओं से किया जा सकता है, जो मिट्टी की उर्वरता, सूक्ष्मजीव सक्रियता और फसलों की उत्पादकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन सभी खादों की तैयारी और उपयोग करने की जानकारी इस वीडियो में विस्तार से दी गई है, जिससे किसान कम लागत में टिकाऊ प्राकृतिक खेती अपना सकते हैं। 🌾📽️ #जैविकखेती #प्राकृतिकखेती #ऑर्गेनिकफर्टिलाइजर #सस्टेनेबलएग्रीकल्चर

🌱 प्राकृतिक खेती में फसल प्रणाली (Cropping Systems) 🌱गेहूं + मसूरपीली सरसों + सब्जी मटरगेहूं + अलसीप्याज + धनियागेहूं + ...
09/04/2026

🌱 प्राकृतिक खेती में फसल प्रणाली (Cropping Systems) 🌱
गेहूं + मसूर
पीली सरसों + सब्जी मटर
गेहूं + अलसी
प्याज + धनिया
गेहूं + चना
शरबती गेहूं + चना
सब्जी मटर + धनिया
आज मैं प्राकृतिक खेती के अंतर्गत विकसित विविध फसल प्रणालियों की कुछ झलकियाँ साझा कर रहा हूँ। ये प्रणालियाँ पारिस्थितिक सिद्धांतों पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता, जैव विविधता और दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ाना है।
🌾 बहुफसली एवं अंतरवर्तीय खेती (Intercropping) से पोषक तत्वों का बेहतर चक्रण होता है और संसाधनों का कुशल उपयोग संभव होता है।
🌿 जीवामृत, बीजामृत और जैविक मल्चिंग जैसे प्राकृतिक इनपुट्स मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🌻 मिश्रित फसल प्रणाली से कीट एवं रोगों का प्रकोप कम होता है और खेती की सहनशीलता (resilience) बढ़ती है।
इस प्रकार की खेती न केवल स्थिर उत्पादन सुनिश्चित करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक स्थिरता को भी मजबूत बनाती है।
#प्राकृतिकखेती #फसलप्रणाली ृषि #जैविकखेती #मिट्टी_स्वास्थ्य #कृषि_पारिस्थितिकी #जैवविविधता #पर्यावरण_अनुकूल_खेती 🌿

🌱 Cropping Systems under Natural Farming 🌱
Wheat + Lentil
Yellow mustard + Vegetable pea
Wheat+ Linseed
Onion +Coriander
Wheat + Chickpea
Sarbati Wheat + Chickpea
Vegetable pea + Coriander
Today I am sharing glimpses of diversified cropping systems developed under natural farming practices. These systems are designed based on ecological principles, aiming to enhance soil health, biodiversity, and long-term sustainability.
🌾 Integration of multiple crops helps in efficient nutrient cycling and better resource utilization.
🌿 Natural inputs like Jeevamrit, Beejamrit, and organic mulching play a crucial role in maintaining soil microbial activity.
🌻 Mixed and intercropping systems reduce pest incidence and improve overall system resilience.
Such approaches not only ensure stable yields but also promote environmental conservation and economic viability for farmers.
📸 Sharing some field images highlighting these sustainable cropping models.

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