22/05/2026
🌿🙏 जय सेवा जोहार 🙏🌿
।। सादगी, संस्कार और प्रेम से सजा पावन रिश्ता ।।
आदिवासी रीति-रिवाजों, संस्कारों, परंपराओं और सयाना पूरखाओं के आशीर्वाद से बंधा यह पवित्र वैवाहिक रिश्ता हमारे जीवन का सबसे सुंदर अध्याय है।
रेंगी गाड़ी में निकली बारात, ढोल-मांदल की मधुर धुन, लोकगीतों की मिठास, पारंपरिक वेशभूषा की सुंदरता और समाज का अपनापन हमारी आदिवासी संस्कृति की सादगी, शालीनता और गौरव की जीवंत पहचान है।
प्रकृतिशक्ति बड़ादेव की असीम कृपा, माता-पिता के आशीर्वाद और आप सभी के प्रेम से बंधा यह रिश्ता केवल दो दिलों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कारों और भावनाओं का पावन मिलन है।
हम दोनों का साथ यूँ ही जीवनभर प्रेम, विश्वास, सम्मान और अपनापन की डोर में बंधा रहे — यही आप सभी से आशीर्वाद और शुभकामनाएँ हैं।
जो अपनी संस्कृति, संस्कार और परंपराओं को दिल से अपनाता है, वही जीवन में रिश्तों की असली खूबसूरती को महसूस करता है। जो समाज अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़ा रहता है, वही हमेशा अपनी पहचान और सम्मान को जीवित रखता है।
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