05/07/2024
#मीडिया_का_काम_अफवायें_फैलानानहीं_सच्चाई_बताना_है
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ या झूठ की दुकान?
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाली मीडिया को यदि हम झूठ की दुकान कहें तो इसमें कोई शंका नहीं है। हाल ही में Zee न्यूज़ ने संत रामपाल जी महाराज के बारे में अपनी वेबसाइट पर एक झूठी खबर छापी है जिसमें उन्होंने झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए हैं।
मीडिया का काम अफवायें फैलाना नहीं सच्चाई बताना है | SA News Channel | Stop FakeNews On Sant RampalJi
मीडिया का काम अफवायें फैलाना नहीं सच्चाई बताना है | SA News Channel | Stop FakeNews On Sant RampalJiChannel Tags: Breaking News,Daily News,World News,Local N...
30/05/2023
दहेज रूपी दानव के समूल नाश के लिए संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में होने वाले 626 वें कबीर साहेब प्रकट दिवस के अवसर पर सैंकड़ों दहेज मुक्त विवाह होंगे। इस महासमागम में विशाल भंडारे, निःशुल्क नामदीक्षा का आयोजन भी किया जा रहा है जिसमें आप सभी आमंत्रित हैं।
07/05/2023
By consuming the medicine of
spiritual knowledge,
a living being overcomes his/her intoxication.
To know, Download our Official App "Sant Rampal Ji Maharaj"
27/02/2023
GOD KABIR
came from Satlok and gave Sant Garibdas Ji
initiation to
in 1727 A.D.
(Falgun mah, sudi, dwadashi).
So this day is celebrated as the Bodh Diwas of Sant Garibdas Ji Maharaj.
⏩Must Read The spiritual book "JINE KI RAH"
09/06/2022
निमंत्रण पत्र :-
14 june 2022
08/06/2022
14 जून कबीर प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में जरूर जानें सभी संतो की वाणियों में कबीर साहेब जी का विशेष गुणगान ।
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी चारों युगों में आते हैं और अपनी महिमा का गुणगान स्वंम किया करते हैं। तथा सत भक्ति से अवगत कराकर सतलोक लेकर जाते हैं उन संतों ने कबीर साहिब जी की महिमा का कलम तोड़ वर्णन किया है।
जिन संतों को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी मिले हैं उनका नाम निम्न है:-
1.आदरणीय धर्मदास साहेब
2 आदरणीय गरीबदास साहेब
3. आदरणीय नानक साहेब
4.आदरणीय दादू साहेब
5. आदरणीय मूलक दास साहेब
और भी संतों को परमात्मा आकर सतलोक से मिले उन्होंने अपनी वाणियों में कहा है कि:-
दादू नाम कबीर की, जै कोई लेवे ओट ।।
उनको कबहु लागे नहीं, काल वज्र की चोट ।।
केहरी नाम कबीर का, विषम काल गजराज ।।
दादू भजन प्रताप से, भागै सुनत आवाज ।।
गरीब, सब पदवी के मूल हैं,सकल सिद्धि तीर ।।
दास गरीब सत्पुरुष भजो,अविगत कला कबीर ।।
गरीब जम जौरा जासे डरें, मिटें कर्म के लेख।।
अदली असल कबीर हैं, कुल के सतगुरु एक ।।
जपो रे मन सतगुरु नाम कबीर।।
जपो रे मन परमेश्वर नाम कबीर।
तेरा एक नाम तारे संसार, मैं ऐहा आस एहो आधार।
हरदम खोज हनोज हाजर, त्रिवैणी के तीर हैं।
दास गरीब तबीब सतगुरु, बन्दी छोड़ कबीर हैं।।
हम सुल्तानी नानक तारे, दादू कूं उपदेश दिया। जात जुलाहा भेद नहीं पाया, काशी माहे कबीर हुआ।।
इन संतों की वाणी से स्पष्ट होता है कि वह परमात्मा सतलोक से चलकर पृथ्वी लोक पर आकरअच्छी आत्माओं को मिलते हैं और इनका प्रमाण सभी सद्ग्रंथ में मिलता है।
जैसे कि ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18
कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करता है अर्थात् उसे कवि कहने लग जाते हैं। इन सब से स्पष्ट होता है कि वह परमात्मा साकार है सशरीर है उसका नाम कबीर है। और वही पूर्ण परमात्मा है।
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