05/06/2022
14 जून कबीर प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में जरूर जानें कबीर साहेब जी का अद्भुत तत्वज्ञान
वेदों में प्रमाण है कि परमात्मा पृथ्वी पर प्रकट होकर यथार्थ आध्यात्म ज्ञान स्वयं अपने मुख से बोली वाणी में बताता है जो सूक्ष्म वेद यानी तत्वज्ञान कहा जाता है। कबीर जुलाहा पूर्ण परमात्मा है उन्होंने जो आध्यात्मिक ज्ञान अपनी कबीर वाणी में बोलकर बताया है वह सूक्ष्मवेद यानी तत्वज्ञान है। यह संपूर्ण सत्य आध्यात्म ज्ञान है। कबीर जी का ज्ञान तोप यंत्र के गोले के समान है जो अज्ञान रूपी दुर्ग को ढहाकर मैदान बना देता है।
कबीर परमेश्वर ने ही सतलोक के विषय में बताया कि ऊपर एक ऐसा लोक है जहां सर्व सुख है। वहां कोई कष्ट नहीं है।
वहां शरीर पांच तत्वों का नहीं है सिर्फ नूरी तत्व का है।
जिसकी गवाही संत गरीबदास जी ने दी है।
संखों लहर मेहर की ऊपजैं, कहर नहीं जहाँ कोई।
दास गरीब अचल अविनाशी, सुख का सागर सोई।।
तीनों देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की वास्तविक स्थिति से परिचित करवाते हुए परमात्मा कबीर जी ने कहा :-
तिनके सुत हैं तीनों देवा, आंधर जीव करत हैं सेवा।
कबीर साहेब ने ही हमें तत्वज्ञान से अवगत कराया कि हमें जन्म देने व मारने में काल (ब्रह्म) प्रभु का स्वार्थ है जोकि श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में कहता है कि मैं बढ़ा हुआ काल हूँ अर्जुन।
काल कौन है, कहां रहता है, वह हमें कष्ट क्यों देता है, काल के सभी कार्यों के बारे में परमात्मा कबीर जी ने ही विस्तार से बताया है।
सभी धर्म के धर्मगुरुओं ने आज तक यही बताया है कि परमात्मा/रब/गॉड/अल्लाह/खुदा निराकार है, उसका केवल प्रकाश देखा जा सकता है।
लेकिन सर्वप्रथम कबीर जी ने इसका खंडन करते हुए बताया कि परमात्मा/अल्लाह/गॉड साकार है, नराकार है।
आज का समाज परमात्मा कबीर जी को एक सामान्य संत समझता है जबकि अपनी महिमा बताते हुए परमात्मा कबीर जी ने हमें बताया कि वही सृष्टि के रचनहार हैं और चारों युगों में आते हैं।
सतयुग में सतसुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनिन्दर मेरा।
द्वापर में करुणामय कहाया, कलयुग नाम कबीर धराया।।
कबीर परमेश्वर जी ने शास्त्रानुकूल भक्ति तथा शास्त्रविरूद्ध भक्ति का भेद बताया।
शास्त्र अनुकूल साधना करने से सुख व मोक्ष संभव है तथा शास्त्रविरूद्ध साधना करने से जीवन हानि तथा नरक व चौरासी का कष्ट सदैव बना रहेगा।
(गीता अ.16, श्लोक 23-24)
आज तक किसी ऋषि, महर्षि धर्मगुरू ने सृष्टि रचना की सही जानकारी नहीं दी।
कबीर परमेश्वर जी ने सृष्टि रचना की यथार्थ जानकारी दी। जिसका भेद आज केवल जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने ही बताया है।
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