21/08/2024
विनेश ओलंपिक कैसे पहुंची? क्या उसने किसी का हक मारा? समझिए इस पहेली को।
ओलंपिक में कोटा हासिल करने के दो नियम है।
एक नियम है वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स में मेडल और रेसलर द्वारा वर्ल्ड टॉप रैंकिंग बनाये रखने से उस देश को ओलंपिक के लिए कोटा मिलता है।
दूसरा तरीका है कि एशियन ओलंपिक क्वालीफाई गेम्स में देश जिस ख़िलाडी को भेजता है वह ओलंपिक कोटा वहां जीते।
विनेश 53 kg में खेल रही थी लेकिन उन्हें इंजरी होने के कारण वह वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में न खेल सकी। उसकी जगह अंतिम पंघाल को भेजा गया जहां वह कांस्य जीतकर देश के लिए कोटा जीत गयी। मतलब 53kg में कोटा अंतिम पंघाल जीत चुकी थी।
अंतिम के अलावा बाकी किसी भी भर वर्ग में किसी भी ख़िलाडी ने इस पहले नियम से कोटा नहीं जीता।
अब बचा दूसरा नियम के एशियन ओलंपिक क्वालीफाई टूर्नामेंट में क्वालीफाई का कोटा जीतना।
अब एशियन ओलंपिक क्वालीफाई के लिए भेजने के लिए ट्रायल होने थे। जो अप्रैल में होने थे।
53kg में कोई ट्रायल न होने थे क्योंकि अंतिम कोटा जीत चुकी थी विनेश ने 53 kg में ट्रायल की बात कही लेकिन कुश्ती संघ ने मना कर दिया। और कहा कि 53kg में ट्रायल स्टैंड बाय के लिए होगी ना कि ओलंपिक जाने के लिए। यानी अगर कोई ख़िलाडी उन ट्रायल्स में जीत भी जाये तो भी वह ओलंपिक न जाएगा ओलंपिक अंतिम ही जाएगी। अगर किसी कारणवश अंतिम न खेल पाए तो वह जा सकता। मतलब 53kg में रास्ता बिल्कुल बन्द कर दिया गया था। यह नियम भी कुश्ती संघ ने सिर्फ इसी साल के लिए बनाया मतलब विनेश को रोकने तक यह नियम था आगे यह बदलना ही था।
अब यह देखकर विनेश ने 50kg में खेलने के लिए अपना वजन मेंटेन करना पड़ा। क्योंकि 53kg के अलावा सब वेट कैटेगरी में दूसरे नियम से सेलेक्शन होना था।
जब ट्रायल हुई तो विनेश वहां 50kg में ट्रायल देने गयी। वजन कैटेगरी बदलना कोई अपराध न है दुनिया भर के हर खिलाडी को यह अधिकार है।
लेकिन जब कुश्ती संघ को यह पता चला कि विनेश 50kg में ट्रायल देने आ पहुंची है तो कुश्ती संघ ने विनेश पर दबाव बनाया के वह 53kg में ट्रायल दे।
और 53 में अंतिम का कब्जा पहले से था।
फिर विनेश ने कहा कि अगर एक वजन में ट्रायल देनी है तो फिर वह 50kg में देगी अगर दोनो में देनी है तो वह 53 और 50 दोनो में देगी। उसकी बात मान ली गयी।
अब जो लोग कह रहे है कि विनेश 53 से 50 में क्यों आई क्योंकि 53 में रास्ता बंद था। वहां जीतकर भी वह ओलंपिक न जा पाती।
दो ट्रायल्स क्यों दी तो यह इस कारण दी कि 53kg में ट्रायल देने को कुश्ती संघ ने कहा जिस कारण उसे 53 व 50 दोनो में दी।
अब बात करते हैं अंतिम अंजू शिवानी विनेश की
53kg में अंतिम तो कोटा जीत चुकी थी और कुश्ती संघ ने कहा ढिया था कि उसके साथ ट्रायल जीतकर भी आप ओलंपिक न जा सकते। सिर्फ स्टैंड बाय के लिए ही ट्रायल होगी। तो विनेश 50kg में ट्रायल देने गयी लेकिन फिर भी उसे 53 की ट्रायल खेलने को कहा गया।
ट्रायल दो राउंड में होती है। पहले राउंड में टॉप 4 को अगले राउंड में पहुंचाया जाता है। पहले राउंड में शुरू के मैच जीतकर विनेश टॉप 4 में आ गयी। उसके बाद अंजू के साथ उसका मैच हुआ जिसमें हारने के बाद भी वह अगले राउंड में जा सकती थी। तो विनेश को अपनी एनर्जी अगले राउंड के लिए बचानी थी क्योंकि यह सब मैच लगातार थे इसलिए वह अंजू से बिना कोई डिफेंस किये जानबूझकर कुछ सेकेंड में ही पॉइंट दे दिए। अंजू जीत गयी लेकिन वह टॉप 4 में नहीं थी क्योंकि बाकी मैच हार चुकी थी इसलिए वह अगले राउंड में न जा सकी।
अब अगला राउंड जो ख़िलाडी कोटा ले चुका है उसी से होना था यानी अंतिम से। उसमे भी वह जीते या हारे कोई फर्क न पड़ना था उसे दोनो स्तिथि में स्टैंड बाय में ही रहना पड़ता। लेकिन विनेश को दूसरे भार वर्ग में ट्रायल देनी थी इसलिए वह अपनी एनर्जी बचाने के लिए कुछ सेकेंड में ही बिना डिफेंस दिए पॉइंट देकर हार गई। आप ये दोनों ही मैच देखेंगे तो आपको साफ पता लग जायेगा कि वह जानबूझकर हारी है।
अब 50kg में ट्रायल की बात आई तो कुश्ती संघ अपनी बात से पलट गया कहा कि दो में ट्रायल न देने देंगे तब विनेश ने कहा कि मुझसे 53 में ट्रायल देने को क्यों कहा गया सबने विनेश का समर्थन किया तो मजबूरन कुश्ती संघ को उसे 50 में खलने देना पड़ा और फिर इस 50kg कैटेगरी में विनेश ने सबको हराया। उसका फाइनल मैच शिवानी से हुआ जिससे वह बड़ी आसानी से बड़े मार्जिन से जीत गयी। मतलब वह 50kg में ट्रायल देकर जीती।
लेकिन मात्र ऐसा करने से ही वह ओलंपिक के लिए कावालीफाई न हुई बल्कि यहां ट्रायल जीतकर वह ओलंपिक के कोटा के लिए होने वाले एशियन कुश्ती ओलंपिक क्वालिफिलेशन के लिए भारत की ओर से 50kg के लिए क्वालीफाई हुई।
इसके बाद अप्रैल में विनेश ने एशियन ओलंपिक कुश्ती क्वालिफिकेशन में एशिया की तीन जाबांज पहलवानों को हराकर देश के लिए 50kg में कोटा हासिल किया। और अन्य भार वर्ग में अमन शेहरावत, रितिका हुड्डा ने भी इसी तरह कोटा हासिल किया। और बहुत से भार वर्ग में हमारे पहलवान कोटा हासिल न कर पाए। और विनेश ने यहां अपना भार मेंटेन रखा और विदेशी पहलवानों को तीन मैच में 10-0, 2-0 व 10-0 से बुरी तरह हराकर यह कोटा हासिल किया।
इस तरह विनेश ने पहले देश मे 50kg ट्रायल जीती उसके बाद विदेश में 50kg में ओलंपिक कोटा जीता वह भी एकतरफा।
और इसी के जस्ट बाद होने वाले ग्रा प्री स्पेन में 50kg में देश के लिए गोल्ड भी जीता।
मतलब वह 50kg में भार मेंटेन करते हुए देश की ट्रायल फिर ओलंपिक की क्वालिफिकेशन और फिर स्पेन में भी गोल्ड जीता। तो साफ है कि विनेश अपने दम पर अपने खेल के दम पर ओलंपिक गयी।
उसे 50kg चुनना पड़ा क्योंकि 53kg में इंजरी की वजह से वह वर्ल्ड चैंपियनशिप न खेल स्की और वहां अंतिम ने देश के लिए कोटा जीत लिया था। और उसके बाद कुश्ती संघ ने इनकी ट्रायल कराने से मना कर दिया था। मतलब 53 में विनेश के लिए रास्ता बंद कर दिया था इसलिए वह 50kg में आई।
एक ही दिन में दो भार वर्ग में ट्रायल कुश्ती संघ ने उसे खिलाई। अगर कुश्ती संघ दबाव न डालता तो वह सिर्फ 50kg में ही ट्रायल देती। और कुश्ती संघ ने 50 की बजाय पहले 53 की ट्रायल करवाई जिसमे वह ओलंपिक जा ही न सकती थी सिर्फ स्टैंड बाय रह सकती थी। यहां मंशा थी कि वह 53 में थक जाए और फिर 50 में हार जाए।
परन्तु 53kg में विनेश ने कुछ मैच आसानी से ओपोनेंट को दे दिए ताकि वह थके न। ये वह मैच थे जिनका असर विनेश के क्वालिफिकेशन पर नहीं पड़ना था। दो राउंड में हुई ट्रायल में उसने पहले राउंड में टॉप 4 में जगह बना ली थी सबको हराकर उसके बाद अंजू के साथ हुए मैच में उसे फर्क न पड़ना था इसलिए वह जबुझकर हार गई। और फिर अंतिम से फाइनल में भी उसके जितने या हारने के फर्क न पड़ना था क्योंकि कुश्ती संघ ने साफ कह दिया था कि ओलंपिक का कोटा अंतिम लाई है वही जाएगी आप जीतो हारो आपको स्टैंड बाय ही रहना होगा।
इसलिए वह यह भी आसानी से हार गई ताकि 50kg में ट्रायल के लिए उसकी एनर्जी बच सके।
फिर 50kg में उसने सबको हराया। शिवानी को फाइनल में बड़े मार्जिन से आसानी से हराया और एशियन ओलंपिक क्वालिफिकेशन राउंड में अपनी जगह बनाई।
और एशियन क्वालिफिकेशन राउंड में विनेश ने विदेशी पहलवानों को बुरी तरह से हराया व ओलंपिक कोटा जीता और ओलंपिक में गयी।
इसी बीच उसने 50kg में ग्रा प्री स्पेन में गोल्ड भी जीता।
साफ है कि विनेश ने अपने दम पर जगह बनाई और फिर ओलंपिक में भी वह सब मैच अच्छे मार्जिन से एकतरफा जीती और फाइनल तक पहुंची।
ओलंपिक के फाइनल में विनेश वेट मेंटेन न कर पाई जो उसने देश को ट्रायल में भी मेंटेन किया था और जो उसने एशियन ओलंपिक क्वालिफिकेशन में भी मेंटेन किया था और जो उसने स्पेन में भी मेंटेन किया था।
अगर विनेश को इंजरी न होती तो वह पहले नियम के तहत कोटा लाती। उसे इंजरी हुई तो उस दौरान अंतिम ले आई।
अंतिम से विनेश की ट्रायल के लिए कुश्ती संघ ने मना कर दिया तो उसे 50kg में आना पड़ा।
दो भार वर्ग में उसे खेलने को कुश्ती संघ ने मजबूर किया और पहले 53 की ट्रायल करवाई पर वह फिर भी इस बाधा को जीत गयी और अवांछित कुछ मैच जानबुझकर हारे ताकि एनर्जी बच सके और कुश्ती सँघ के जो कुछ लोग उसे धकेलना चाहते थे वह उन्हें न धकेल सके। 53 में भी उसने योग्यता साबित की और फाइनल में पहुंची व स्टैंड बाय के लिए क्वालीफाई हुई।
और फिर उसने 50kg में ट्रायल दिया और देश मे ट्रायल जीती शिवानी को हराया।
फिर उसने विदेशों में विदेशी पहलवानों को हराकर ओलंपिक के कोटा जीता। और इस तरह वह ओलंपिक गयी इतनी बाधाएं इतनी साजिशें पार करके।
और वहां भी वह अजेय रही।
तो साफ है कि न तो विनेश ने किसी का हक मारा, न विनेश को किसी के रहमो करम या सिफारिश पर ओलंपिक भेजा गया। उसे रोकने के कई प्रयास हुए परन्तु सब बाधाओ को पार करके उसने अपने दम पर ओलंपिक कोटा हासिल किया।
आज लोग सैल्यूट कर रहे है क्योंकि उसने सारे तंत्र से लड़ाई लड़ते हुए इतनी बाधाएं पार की और अपने खेल पर भी असर न पड़ने दिया अपने दिमाग को भी मजबूत रखा और ओलंपिक में अजेय रही।