Love & Humanity

Love & Humanity “You can talk with someone for years, everyday, and still, it won't mean as much as what you can have when you sit in front of someone, not saying a word,

   No        ⚠️🖤
31/05/2023

No ⚠️🖤

08/05/2021

Reality of Covid-19.
With vaccination
Without vaccination

2020 🤣🙏😜
28/12/2020

2020 🤣🙏😜

24/11/2020

22/10/2020

Jithe wekhu utte dhokhe hi asi khaye hain.
Gaira 'n to kee laina saade apne paraye hain.

Shailu BaBa

Yahi sach hai
22/10/2020

Yahi sach hai

                       बलात्कार.....क्या अर्थ है इसका.... शाब्दिक रूप से कहा जाये तो, मेरी जङ बुद्धिनुसार,बिना अनुमति के...
02/10/2020


बलात्कार.....
क्या अर्थ है इसका....
शाब्दिक रूप से
कहा जाये तो,
मेरी जङ बुद्धिनुसार,
बिना अनुमति के साहचर्य माने बलात्कार।।
प्रतीकात्मक रूप से कहूं तो
निर्भया उर्फ ज्योति, रामपुर तिराहा, मुरथल कांड,
या बुलंदशहर की गुङिया.......।।

और अगर
हमारी उन्नत और दर्शनशास्त्रित
परिष्कृत सोचानुसार
देखा जाए इसका भावार्थ,
तो
पीड़ित को,
जागते सोते हर पल दिखते कुछ वहशी चेहरे
हर घूंट तेजाब की मानिन्द गले में उतरता पानी
बदन पर उन गंदे हाथों की खुरदरी सी जकङन
बेधारदार हथियार से छिली गई उसकी आत्मा
और उसे खुद में से आती हुई लाश जैसी दुर्गंध
और
फिर भी जिंदा होने का श्राप
और और और
ना जाने और क्या क्या
जो परे है,
कम से कम मेरे दर्द की ज्ञात पराकाष्ठाओं से।।

और फिर
छुपाने का प्रयास
इस बलात्कार को
"दुर्घटना", "बदकिस्मती", "लड़कों से हो जाने वाली गलती"
और
"राजनितिक साजिश" जैसे
छलावावरित नामों से
उन लोगों द्वारा,
जिनकी थी जिम्मेदारी
इस दुर्घटना को ना होने देने की
और
साथ ही साथ होने वाली
राजनीतिनुमा/मिडियानुमा/सांत्वना राशिनुमा
अम्ल की बारिश
उस
बलात्कारित, सांसों के फटे हुए तंबू पर
बदलने को,
उसे वोटों और टी.आर.पी. में......।।

लेकिन,
काश,
कभी एक पल, सिर्फ एक पल के लिए भी
ये लोग या बलात्कार करने वाले
महसूस कर पायें
इस बलात्कार शब्द का भावार्थ
तो फिर
ना तो बलात्कार की
शाब्दिक पुनरावृत्ति होगी
और
ना हीं प्रतीकात्मक
लेकिन ये सब होना नहीं लगता मुमकिन
इसलिए
मेरी एक गुजारिश को
कोई बलात्कारियों तक पहुंचा दे
कि
बलात्कार के बाद उस कन्या को
कम से कम
मौत ही बख्श दे
मैं दावा करता हूं ऐ कुत्तों
ये तुम्हारा
उस चिड़िया पर बहुत बङा अहसान होगा।।

और
वो सब
जो सह रहे हैं
इस शब्द को चुपचाप
सजग रहिये, चौकन्ने रहिये और तैयार रहिये
इन भावों को
खुद पर या अपने परिवार में महसूस करने के लिए.....

Nature is like mother love❤️
24/09/2020

Nature is like mother love❤️

Shame on you Indian Media
13/09/2020

Shame on you Indian Media

जिंदगी खूबसूरत बनाने के बीस (२०) उपाएँ :-===१. खुद की कमाई से कम खर्च हो ऐसी जिन्दगी बनायें,२. दिन मेँ कम से कम ३ लोगो क...
11/09/2020

जिंदगी खूबसूरत बनाने के बीस (२०) उपाएँ :-
===
१. खुद की कमाई से कम खर्च हो ऐसी जिन्दगी बनायें,
२. दिन मेँ कम से कम ३ लोगो की प्रशंशा करें,
३. खुद की भुल स्वीकार ने मेँ कभी भी संकोच मत करें,
४. किसी के सपनो पर कभी भी न हंसें,
५. अपने पीछे खडे व्यक्ति को भी कभी आगे जाने का मौका दें,
६. रोज हो सके तो सुरज को उगता हुआ अवश्य देखे,
७. खुब जरुरी हो तभी कोई चीज उधार लें,
८. किसी से कुछ जानना हो तो, विवेक से दो बार पूछे,
९. कर्ज और शत्रु को कभी बडा मत होने दें,
१०. ईश्वर पर अटूट पुरा भरोशा रखें,
११. प्रार्थना करना कभी मत भूले, प्रार्थना मेँ अपार शक्ति होती है,
१२. अपने काम से मतलब रखें,
१३. समय सबसे ज्यादा कीमती है, इसको फालतु कामो मेँ खर्च मत करें,
१४. जो आपके पास है, उसी मेँ खुश रहना सीखें,
१५. बुराई कभी भी किसी कि भी मत करें, क्योकिँ बुराई नाव मेँ छेद समान है, छेद छोटी हो या बडी नाव तो डुबो ही देती है,
१६. हमेशा सकारात्मक सोच रखे,
१७. हर व्यक्ति एक हुनर लेकर पैदा होता हैं, बस उस हुनर को दुनिया के सामने लायें,
१८. कोई काम छोटा नही होता, हर काम बडा होता है जैसे कि सोचो जो काम आप कर रहे हो अगर आप वह काम आप नही करते हो तो दुनिया पर क्या असर होता..?,
१९. सफलता उनको ही मिलती है जो कुछ करते है,
२०. कुछ पाने के लिए कुछ खोना नही बल्कि कुछ करना पडता है.

                         ऐसा मत करोना“कोरोना” से नहीं डरोनाभागो मत कहीं भीबस थोड़ा सावधान रहोनाकरते रहो बात सबसेबस किसी ...
28/04/2020


ऐसा मत करोना
“कोरोना” से नहीं डरोना
भागो मत कहीं भी
बस थोड़ा सावधान रहोना
करते रहो बात सबसे
बस किसी से भी मिलोना
मत जताओ प्यार कुछ दिन
किसी को भी छुओ ना
बन्द कर लो खुद को कहीं
चुपचाप वहीं बैठोना
तुम नहीं बचा पाओगे किसी को भी
खुद तुम बचोना
जाती, धर्म, देश सब हमको बांटते हैं
हम सब एक हैं
अब ये तुम समझ लो ना
आपस का बैर भूल जाओ
“कोरोना” से तुम लड़ोना

हवस मिटाने के लिए जो जाल बिछाये रखते हैउन हब्शियो की हवस का ईलाज,अब क्यों ना हो?कब तक लूटते रहेंगे दरिंदे इज्ज़त-ए-आबरूब...
05/12/2019

हवस मिटाने के लिए जो जाल बिछाये रखते है
उन हब्शियो की हवस का ईलाज,अब क्यों ना हो?
कब तक लूटते रहेंगे दरिंदे इज्ज़त-ए-आबरू
बलात्कारियो का बलात्कार, अब क्यों ना हो?

नज़रो से नोच डालते है जिस्मो को जो अंदर तक
उन आँखों में दहकते अँगारे, अब क्यों ना हो?
जिन हाथो से करते है इज्ज़त नंगी मासूमों की
उन हाथो में जख्म गहरे, अब क्यों न हो ?

फैंककर तेज़ाब जिस्मो पर जो बहादुरी दिखाते है
उनके जिस्मो को भी एहसास इस दर्द का, अब क्यों ना हो ?
तारीख़ पर तारीख कब तक मिलेगी अदालतों से हमे
इस मुद्दे की मोके पर सुनवाई, अब क्यों ना हो?

मुँह उठायें कब तक देखोगे सरकारों की तरफ
खुद की हिफाज़त खुद करने का प्रण,अब क्यों न हो?
कितनी देर रहोगी बनकर अबला कमजोर सी तुम,
तेरे पास भी रानी लक्ष्मीबाई सा फौलादी हौसला, अब क्यों ना हो?

क्यों जियें ख़ौफ़ में बेटियां या माँ-बाप उनके
अँधेरी गलियां भी बेख़ौफ़, अब क्यों ना हो?
हे खुदा ! शुद्धता अदा कर सोच में सबकी
हर नारी का दिल से सम्मान, अब क्यों ना हो ?

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