14/08/2025
कई काम ऐसे होते हैं जो सुविधाओं की कमी की वजह से देरी से होते हैं। लेकिन जब भी मौका मिलता है, बच्चों की शिक्षा और अच्छी आदतें सिखाने वाली गतिविधियाँ शुरू कर दी जाती हैं। आज भी हमारे इसी लक्ष्य की एक छोटी शुरुआत हुई।
छुट्टी में दस मिनट बाकी थे और बच्चे अपनी रोज़ की गतिविधियों में व्यस्त थे। तभी अचानक विचार आया,, क्यों न आज बच्चों को किड्स मैसेज प्रोग्राम की एक कहानी दिखाई जाए? यह विचार उसी पल आया और तुरंत किया गया।
कुछ ही समय में स्क्रीन पर कहानी "ईमान" चल रही थी। बच्चे ध्यान से देख रहे थे, उनकी नजरें स्क्रीन पर जमी हुई थीं और चेहरे पर गंभीरता और जिज्ञासा थी।
आज के लिए यह प्रोग्राम शेड्यूल में नहीं था, इसलिए कुछ बच्चे पहले ही जा चुके थे। कुल 15 बच्चे मौजूद थे। वीडियो के बाद पाँच बच्चों से उनकी राय पूछी गई:
Anas: "ईमान बचाना जरूरी है।"
Munish: "एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।"
Affan: "हमारे नबी के बाद कोई नबी नहीं आया।"
Ansar: "बच्चों को पढ़ाई करनी चाहिए।"
Sufiyan: "किताबें ऑर्डर करें।"
ये मासूम शब्द उनके दिल से निकले थे। आज यह गतिविधि का पहला दिन था, और इंशाअल्लाह इसे आगे भी जारी रखा जाएगा ताकि बच्चों के दिल में ईमान और अच्छे संस्कार और मजबूत हों।
__________________ Al-Hilal Academy
अल्हिलाल एकेडमी के बारे में:
अल्हिलाल एकेडमी बच्चों की शिक्षा और उनकी नैतिक एवं धार्मिक तरबियत के लिए समर्पित एक संस्था है। यहाँ बच्चों को न केवल पढ़ाई सिखाई जाती है, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार, ईमान और समाज सेवा की आदतें भी दी जाती हैं।