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The Study of Past! में आपका स्वागत है! इतिहास की आकर्षक दुनिया की खोज के लिए आपका वन-स्टॉप डेस्टिनेशन। प्राचीन सभ्यताओं से लेकर आधुनिक समय की घटनाओं तक, हम आपके लिए गहन अंतर्दृष्टि और आकर्षक सामग्री लाते हैं जो आपकी जिज्ञासा को बढ़ा देगी और आपको और अधिक चाहने के लिए छोड़ देगी। चाहे आप एक छात्र हों जो अपनी परीक्षा में सफलता प्राप्त करना चाहते हों या केवल इतिहास के प्रति उत्साही हों, हमारी वेबसाइट म

ें सभी के लिए कुछ न कुछ है। तो समय के साथ इस रोमांचक यात्रा पर हमारे साथ जुड़ें क्योंकि हम अतीत के रहस्यों को उजागर करते हैं! We hope you found all of the information on History Knowledge helpful, as we love to share them with you. If you require any more information or have any questions about our site, please feel free to contact us by email at [email protected].

॥ श्रीशिव ध्यानम् ॥ॐ डिं डिं डिंकत डिम्ब डिम्ब डमरु, पाणौ सदा यस्य वै। फुं फुं फुंकत सर्पजाल हृदयं , घं घं च घण्टा रवम् ...
09/03/2024

॥ श्रीशिव ध्यानम् ॥

ॐ डिं डिं डिंकत डिम्ब डिम्ब डमरु, पाणौ सदा यस्य वै।

फुं फुं फुंकत सर्पजाल हृदयं , घं घं च घण्टा रवम् ॥

वं वं वंकत वम्ब वम्ब वहनं , कारुण्य पुण्यात् परम् ॥

भं भं भंकत भम्ब भम्ब नयनं , ध्यायेत् शिवम् शंकरम्॥

यावत् तोय धरा धरा धर धरा ,धारा धरा भूधरा॥

यावत् चारु सुचारु चारू चमरं , चामीकरं चामरं ॥

यावत् रावण राम राम रमणं , रामायणे श्रुयताम्॥

तावत् भोग विभोग भोगमतुलम् यो गायते नित्यस:॥

यस्याग्रे द्राट द्राट द्रुट द्रुट ममलं , टंट टंट टंटटम् ॥

तैलं तैलं तु तैलं खुखु खुखु खुखुमं , खंख खंख सखंखम्॥

डंस डंस डुडंस डुहि चकितं , भूपकं भूय नालम् ॥

ध्यायस्ते विप्रगाहे सवसति सवलः पातु वः चंद्रचूडः॥

गात्रं भस्मसितं सितं च हसितं हस्ते कपालं सितम् ॥

खट्वांग च सितं सितश्च भृषभः , कर्णेसिते कुण्डले ।

गंगाफनेसिता जटापशु पतेश्चनद्रः सितो मूर्धनि ।

सोऽयं सर्वसितो ददातु विभवं , पापक्षयं सर्वदा ॥

॥ इति शिव ध्यानम् ॥

22 फरवरी 1997 वह दिन था, जब स्कॉटलैंड के रोसलिन संस्थान में शोधकर्ताओं की एक टीम ने ऐलान किया कि उन्हें पहली बार किसी स्...
22/02/2024

22 फरवरी 1997 वह दिन था, जब स्कॉटलैंड के रोसलिन संस्थान में शोधकर्ताओं की एक टीम ने ऐलान किया कि उन्हें पहली बार किसी स्तनधारी जीव से निकाली गई कोशिका से 'क्लोन' बनाने में सफलता मिली। इसे दशक की सबसे बड़ी घटना कहा गया। ये 'क्लोन' भेड़ जिसे ‘‘डॉली नाम दिया गया था दरअसल पांच जुलाई 1996 को पैदा हुई थी, लेकिन इसकी घोषणा सात माह बाद फरवरी में की गई।

इससे पहले भी क्लोनिंग की जाती थी, लेकिन वह भ्रूण कोशिकाओं से की गई थी। यह पहला मौका था, जब क्लोनिंग के लिए वयस्क #कोशिका का इस्तेमाल किया गया। यह #भेड़ सात बरस तक जीवित रही और फरवरी 2003 में इसकी मौत हो गई। इसके शरीर को स्कॉटलैंड के संग्रहालय में सहेजकर रखा गया है ताकि तमाम लोगों को विज्ञान की इस अनूठी उपलब्धि को देखने का मौका मिले।

सदियों तक  #अंग्रेजों की  #गुलामी की बेड़ियों में कैद रहने के बाद भारत को आज ही के दिन 20 फरवरी 1947 को रिहाई मिली थी। भ...
20/02/2024

सदियों तक #अंग्रेजों की #गुलामी की बेड़ियों में कैद रहने के बाद भारत को आज ही के दिन 20 फरवरी 1947 को रिहाई मिली थी। भले ही हम 15 अगस्त को #स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, लेकिन भारत के इतिहास के लिए 20 फरवरी की तारीख बहुत मायने रखती है। ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने भारत को 30 जून, 1948 तक ब्रिटेन की गुलामी से आजाद करने की घोषणा इसी दिन की थी।

कंप्यूटर को मानव इतिहास के चंद सबसे महत्वपूर्ण आविष्कारों में शुमार किया जाता है। इसके होने से आंकड़ों का संकलन और संचाल...
20/02/2024

कंप्यूटर को मानव इतिहास के चंद सबसे महत्वपूर्ण आविष्कारों में शुमार किया जाता है। इसके होने से आंकड़ों का संकलन और संचालन बड़ी सहजता से हो जाता है। भारतीय रेलवे ने 20 फरवरी 1986 को कंप्यूटर से रेलवे टिकट आरक्षण प्रणाली की शुरूआत की थी।

माता के मार्गदर्शन में बीता शिवाजी का बचपन:शिवाजी का जन्म 19 फरवरी, 1630 को शिवनेरी दुर्ग में एक मराठा परिवार में हुआ था...
19/02/2024

माता के मार्गदर्शन में बीता शिवाजी का बचपन:

शिवाजी का जन्म 19 फरवरी, 1630 को शिवनेरी दुर्ग में एक मराठा परिवार में हुआ था. उनका नाम शिवाजी भोंसले था. उनके पिता जी शहाजीराजे भोंसले एक शक्तिशाली सामंत राजा कुल में जन्मे थे. उनके पिता अहमदनगर सलतनत में सेनापति थे. उनकी माता जिजाबाई जाधवराव कुल में उत्पन्न असाधारण प्रतिभाशाली महिला थी. शिवाजी महाराज के चरित्र पर माता-पिता का बहुत प्रभाव पड़ा. उनका बचपन उनकी माता के मार्गदर्शन में बीता. उनकी माता की रुचि धार्मिक ग्रंथों में थी. उन्होंने राजनीति और युद्ध की शिक्षा ली थी.

मुगलों के खिलाफ बजाया युद्ध का बिगुल

#शिवाजी महाराज बचपन से ही उस युग के वातावरण और घटनाओं को भली प्रकार समझने लगे थे. उनके हृदय में स्वाधीनता की लौ प्रज्वलित हो गयी थी. उन्होंने कुछ स्वामिभक्त साथियों का संगठन किया. उस समय देश में मुगलों का आक्रमण चरम पर था. महाराज शिवाजी ने ही मुगलों के खिलाफ युद्ध का बिगुल बजाया. उन्होंने सिर्फ 15 वर्ष की उम्र में जान की परवाह किए बिना मुगलों पर आक्रमण किया था. इस आक्रमण को गोरिल्ला युद्ध की नीति कहा गया.

#भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी:

भारत के एक महान राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने 1674 ई. में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी. इसके लिए उन्होंने मुगल साम्राज्य के शासक औरंगजेब से संघर्ष किया. सन् 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और वह छत्रपति बनें. लेकिन इसके कुछ साल बाद ही एक गंभीर बीमारी के कारण 3 अप्रैल 1680 को उनकी मृत्यु हो गई. शिवाजी के बाद इनके पुत्र संभाजी ने राज्य का कार्यभार संभाला.

शिवाजी महाराज का वैवाहिक जीवन:

शिवाजी का विवाह सन् 14 मई 1640 में सइबाई निंबाळकर (सई भोसले) के साथ लाल महल, पुणे में हुआ था. सई भोसले शिवाजी की पहली और प्रमुख पत्नी थीं. वह अपने पति के उत्तराधिकारी संभाजी की मां थीं. शिवाजी ने कुल 8 विवाह किए थे. वैवाहिक राजनीति के जरिए उन्होंने सभी मराठा सरदारों को एक छत्र के नीचे लाने में सफलता प्राप्त की.

हर दिन कुछ नया करने और कुछ अनोखा खोजने के इच्छुक लोगों की दुनिया में कमी नहीं है। 18 फरवरी 1930 को ऐसे ही एक जिज्ञासु अम...
18/02/2024

हर दिन कुछ नया करने और कुछ अनोखा खोजने के इच्छुक लोगों की दुनिया में कमी नहीं है। 18 फरवरी 1930 को ऐसे ही एक जिज्ञासु अमेरिकी वैज्ञानिक क्लाइड टॉमबा ने एक बौने ग्रह की खोज की थी। पहले इसे ग्रह मान लिया गया था, लेकिन बाद में इसे ग्रहों के परिवार से बाहर कर दिया गया। इस ग्रह का नाम रखने के लिए सुझाव मांगे गए तो 11वीं में पढ़ने वाली एक लड़की ने इसे प्लूटो नाम दिया। उसका कहना था कि रोम में अँधेरे के देवता को प्लूटो कहते हैं।इस ग्रह पर भी हमेशा अँधेरा रहता है, इसलिए इसका नाम प्लूटो रखा जाए। प्लूटो को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 248 साल लग जाते हैं।

श्री तारण माताजी और धारणा माताजी का इतिहास..!!👇पुराना सर्वेक्षण संख्या 519/आर ए और टिम्बा गांव, सतलासाना तालुक, मेहसाणा ...
15/02/2024

श्री तारण माताजी और धारणा माताजी का इतिहास..!!👇

पुराना सर्वेक्षण संख्या 519/आर ए और टिम्बा गांव, सतलासाना तालुक, मेहसाणा जिला, उत्तरी #गुजरात का नया सर्वेक्षण। नंबर 1095 और खाता नंबर 45, जिसमें ये दोनों #मंदिर स्थित हैं. इसका क्षेत्रफल 4/08/30 हेक्टेयर वर्ग है। इसके पूर्ण स्वामी टिम्बा गांव के समत चौहान दरबार हैं। यह #भारत के सबसे पुराने तीर्थस्थलों में से एक है। पुराणों के अनुसार, इन मंदिरों का निर्माण त्रेता युग में एक क्षत्रिय राजा द्वारा किया गया था और इस भूमि का पुराना (पुराणु) नाम तारानगर शहर था। जिस समय यह शहर डर के कारण नष्ट हो गया था, उस समय भोन्यारा वाता शहर के लोग पाटन चले गए और तरंगा की भूमि पर इस तारानगर शहर का नाम पेस्टी तरंगजी रखा गया। जिस समय वह जैन गुरु हेमचंद्राचार्य के शिष्य बने, उस समय कुमारपाल के पास श्री सोमनाथ महादेव का लिंग था। पुरुण मंदिर में उस अनुष्ठान के अनुसार, इस मंदिर के दक्षिण दिशा में एक झील है। 121 (ई.) 1175 में अजित्नय #भगवान की स्थापना की गई, जिसके बाद उस झील के बगल में लदुशावीर महाराज की पहाड़ी के पास एक नया मंदिर बनाया गया और सोमनाथ महादेव की स्थापना की गई। पुणे: प्रतिष्ठा 1436 में हुई थी। यह संक्षिप्त सारांश पुराने ग्रंथों के साक्ष्य प्राप्त करने के बाद लिखा गया है।

वसन्त पञ्चमी : मां सरस्वती की उपासना का पर्व.....सारस्वत महोत्सव का महत्व..... #वसंतपंचमी एक भारतीय त्योहार है, इस दिन व...
14/02/2024

वसन्त पञ्चमी : मां सरस्वती की उपासना का पर्व.....
सारस्वत महोत्सव का महत्व.....

#वसंतपंचमी एक भारतीय त्योहार है, इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं। माघ शुक्ल पंचमी को मनाए जाने वाले सारस्वत महोत्सव का महत्व निराला है। मां सरस्वती विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी हैं तथा शास्त्र ज्ञान को देने वाली है। भगवती शारदा का मूलस्थान अमृतमय प्रकाशपुंज है। जहां से वे अपने उपासकों के लिए निरंतर पचास अक्षरों के रूप में ज्ञानामृत की धारा प्रवाहित करती हैं। उनका विग्रह शुद्ध ज्ञानमय, आनन्दमय है। उनका तेज दिव्य एवं अपरिमेय है और वे ही शब्द ब्रह्म के रूप में पूजी जाती हैं।

प्राचीन भारत में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों मे सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।

सृष्टि काल में ईश्वर की इच्छा से आद्याशक्ति ने अपने को पांच भागों में विभक्त कर लिया था। वे राधा, पद्मा, सावित्री, दुर्गा और सरस्वती के रूप में प्रकट हुई थीं। उस समय श्रीकृष्ण के कण्ठ से उत्पन्न होने वाली देवी का नाम सरस्वती हुआ। श्रीमद्देवीभागवत और श्रीदुर्गा सप्तशती में भी आद्याशक्ति द्वारा अपने आपको तीन भागों में विभक्त करने की कथा है। आद्याशक्ति के ये तीनों रूप महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के नाम से संसार में जाने जाते हैं।

भगवती #सरस्वती सत्वगुण संपन्न हैं। इनके अनेक नाम हैं, जिनमें से वाक्‌, वाणी, गिरा, भाषा, शारदा, वाचा, श्रीश्वरी, वागीश्वरी, ब्राह्मी, गौ, सोमलता, वाग्देवी और वाग्देवता आदि प्रसिद्ध हैं। ब्राह्मणग्रंथों के अनुसार वाग्देवीर ब्रह्मस्वरूपा, कामधेनु, तथा समस्त देवों की प्रतिनिधि हैं। ये ही विद्या, बुद्धि और सरस्वती हैं। इस प्रकार देवी सरस्वती की पूजा एवं आराधना के लिए माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि वसंत पंचमी को ही इनका अवतरण दिवस माना जाता है। अतः वागीश्वरी जयंती एवं श्री पंचमी के नाम से भी इस तिथि को जाना जाता है।

रेडियो दिवस का इतिहास-बात अगर रेडियो दिवस के इतिहास की करें तो देश-दुनिया में रेडियो के सदियों से चले आ रहे योगदान को दे...
13/02/2024

रेडियो दिवस का इतिहास-

बात अगर रेडियो दिवस के इतिहास की करें तो देश-दुनिया में रेडियो के सदियों से चले आ रहे योगदान को देखते हुए साल 2010 में स्पेन रेडियो अकादमी ने पहली बार 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद साल 2011 में यूनेस्को के सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करके आधिकारिक रूप से पहली बार 13 फरवरी 2012 को रेडियो दिवस के रूप में मनाया। बता दें, 13 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र रेडियो की वर्षगांठ भी है। इसी दिन वर्ष 1946 में इसकी शुरुआत हुई थी।

World Radio Day 2024:

दुनियाभर में हर साल 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्ल्ड रेडियो डे को मनाने के पीछे का उद्देश्य लोगों के बीच रेडियो के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। आज भले ही लोग पल-पल की खबरों की जानकारी अपने स्मार्ट फोन के जरिए ले लेते हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब देश दुनिया से जुड़ी तमाम जानकारियों को हासिल करने के लिए रेडियो एक बड़ा साधन माना जाता था।

वर्ल्ड रेडियो डे का उद्देश्य-

इतिहास में रेडियो ने दुनिया भर में सूचना के आदान-प्रदान

और लोगों को शिक्षित करने में अहम भूमिका निभाई है।

इसका इस्तेमाल युवाओं को उन विषयों की चर्चा में शामिल

करने के लिए किया गया जो उनको प्रभावित करते हैं।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक बहस और शिक्षा के प्रसार

में रेडियो के महत्व को समझाने के उद्देश्य से वर्ल्ड रेडियो डे

मनाया जाता है।

शादी की सालगिरह शब्द हमारा नहीं, ये ऊर्दु का शब्द है और सालगिरह का अर्थ है साल गिर गयाहमारा शब्द है  #वैवाहिक_वर्षगांठ य...
08/02/2024

शादी की सालगिरह शब्द हमारा नहीं, ये ऊर्दु का शब्द है और सालगिरह का अर्थ है साल गिर गया

हमारा शब्द है #वैवाहिक_वर्षगांठ यानि जो गांठ चारवेदी और यज्ञ मण्डप में सर्वसमाज के समक्ष पुरोहित द्वारा मंत्रों का उच्चारण करते हुऐ बांधी गयी थी उसकी गांठ में एक वर्ष ओर जुड़ गया यानि गांठ और मजबूत हो गयी !

अत: हमें शब्दों की गहराई समझनी चाहीऐ !

सनातन संस्कृति में वर्ष जुड़ता है और मुगल संस्कृति (इस्लाम) में साल गिरता है, क्यों की वहां पर्दे के पीछे से जब कबूल है, कबूल है, तीन बार होती है तो पर्दा गिर जाता है, इसलिऐ हर बर्ष साल भी गिरता है उनका, किंतु हमारी संस्कृति में वर्ष जुड़ता है, ना की गिरता है !
इसलिए अपनी व्यक्तिगत बोलचाल में उर्दू के शब्दों का प्रयोग न कर अपनी सनातन संस्कृति के शब्दों का ही प्रयोग करना चाहिए।

22/01/2024

पीताम्बर वस्त्र, बदन पर आभूषण, मुख पर मुस्कान, ललाट पर तिलक, हाथ में स्वर्ण धनुष- बाण, अयोध्या के राघव की ऐसी है छवि आज अयोध्या में...!!! आज दीवाली है, आज राम चौदह वर्ष बाद नहीं, पाँच सौ वर्ष बाद आये हैं। जय जय जय जय जय जय जय जय श्री राम !!

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