04/09/2023
शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर....
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जिंदगी में शिक्षक की भूमिका अहम है। सन 1888 में जन्मे पूर्व राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन के जन्म दिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था कि शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियां के लिए तैयार करे।
किसी भी क्षेत्र में तरक्की पाने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है। इंसान की जिंदगी में कामयाबी के पीछे सबसे अहम भूमिका माता-पिता के साथ शिक्षकों की भी होती है। शिक्षक ही अपने विद्यार्थियों की जिंदगी में शिक्षा का प्रकाश भरता है। हर शिक्षक का यह स्वप्न होता है कि उसका पढ़ाया हुआ विद्यार्थी, जीवन में एक अच्छा मुकाम हासिल करें। शिक्षकों को भगवान से बढ़कर माना जाता है परंतु आज आधुनिकता की अन्धी दौड़ में कुछ बच्चे अपने शिक्षकों का आदर नहीं करते हैं। पीठ पीछे क्या, उनके सामने भी उनका मजाक बनाने से नहीं चुकते। एक समय था कि जब कोई भी शिक्षक, शिक्षा संस्थान के अलावा कहीं भी सामने से आता हुआ दिख जाये तो विद्यार्थी अपना रास्ता बदल लेते थे, और नहीं तो नमस्कार जरूर करते थे, परंतु आज के विद्यार्थी चौड़ी छाती करके उनके आगे से निकाल जाते हैं । जो विद्यार्थी अपने शिक्षकों का आदर नहीं करते हैं उनसे दूसरों के आदर की क्या अपेक्षा की जा सकती है? ऐसे विद्यार्थी अपने गलत व्यवहार के कारण हमेशा ही दूसरों के उपहास का पात्र बनते है।
इसलिए यह जरूरी है कि अपने बच्चों को सभी का सम्मान करना सिखाए ताकि शिक्षक और विद्यार्थी का रिश्ता आधार और सम्मान से भरा हो और साथ ही यह कोशिश किया जाए की लोग इस रिश्ते को पैसे से ना तोलें। गुरु का आदर करना हमारी परंपरा का हिस्सा है और इसके पीछे भारतीय संस्कृति में गहरा मान है। हमारे पुराने ग्रंथों में भी गुरु का महत्व बहुत ऊँचा बताया गया है। गुरु का आदर करना न केवल एक शिक्षक के प्रति हमारी आभारी भावना का प्रतीक होता है, बल्कि यह एक सामाजिक मूल्य भी है जो हमें हमारे गुरुओं के प्रति गहरी आदरभावना और समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
कल, जब हम शिक्षक दिवस को मनाने जा रहे हैं, तो हमें गुरुओं का सम्मान करने का एक मौका मिल रहा है। हमें यह याद रखना चाहिए कि वे हमारे जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से