CWSN Block Resourse Center,GSSS Kalyanpur

CWSN Block Resourse Center,GSSS Kalyanpur राजस्थान के बाड़मेर जिले के कल्याणपु?

29/01/2022
दिव्यांगों के लिए किया गया फिजियोथैरेपी शिविर का आयोजनब्लॉक कल्याणपुर के समस्त राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्याँग व...
29/01/2022

दिव्यांगों के लिए किया गया फिजियोथैरेपी शिविर का आयोजन
ब्लॉक कल्याणपुर के समस्त राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्याँग व विशेष आवश्यकता वाले बालक बालिकाओं हेतु फिजियोथेरेपी शिविर का आयोजन संदर्भ केंद्र रा उ मा विद्यालय कल्याणपुर में किया गया ।

मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी श्रीमान बुद्धाराम जी चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस शिविर में 40 से अधिक दिव्याँग बालकों को फ़िज़ियोथैरेपिस्ट डॉक्टर रमेश कुमार द्वारा थेरेपी से लाभान्वित किया गया ।

प्रधानाचार्य श्री बाबूलाल जी की उपस्थिति में समस्त बच्चों में अभिभावकों को विभाग द्वारा प्रदत्त नास्ता व किराया भुगतान किया गया । दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के के लिए विशेष शिक्षक श्री संदीप विश्नोई व मांगीलाल क़ासनिया ने परामर्श सेवाएँ दी ।
सन्दर्भ कक्ष प्रभारी संदीप लिम्बा (विशेष शिक्षक) ने दिव्याँगो को दी जाने वाली समस्त राजकीय सहायताओं के बारे में जानकारी देकर अभिभावकों में जागरूकता लाने हेतु परामर्श दिया ॥
29.01.2022

*विश्व दिव्यांग दिवस 2020 (International Day of Disabled Persons)*हर साल 3 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांग व्यक...
03/12/2020

*विश्व दिव्यांग दिवस 2020 (International Day of Disabled Persons)*
हर साल 3 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांग व्यक्तियों का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी और 1992 से संयुक्त राष्ट्र के द्वारा इसे अंतरराष्ट्रीय रीति-रिवीज़ के रुप में प्रचारित किया जा रहा है। दिव्यागों के प्रति सामाजिक कलंक को मिटाने और उनके जीवन के तौर-तरीकों को और बेहतर बनाने के लिये उनके वास्तविक जीवन में बहुत सारी सहायता को लागू करने के द्वारा तथा उनको बढ़ावा देने के लिये साथ ही दिव्यांग लोगों के बारे में जागरुकता को बढ़ावा देने के लिये इसे सालाना मनाने के लिये इस दिन को खास महत्व दिया जाता है। 1992 से, इसे पूरी दुनिया में ढ़ेर सारी सफलता के साथ इस वर्ष तक हर साल से लगातार मनाया जा रहा है।

समाज में उनके आत्मसम्मान, सेहत और अधिकारों को सुधारने के लिये और उनकी सहायता के लिये एक साथ होने के साथ ही लोगों की दिव्यांगता के मुद्दे की ओर पूरे विश्वभर की समझ को सुधारने के लिये इस दिन के उत्सव का उद्देश्य बहुत बड़ा है। जीवन के हरेक पहलू में समाज में सभी दिव्यांग लोगों को शामिल करने के लिये भी इसे देखा जाता है जैसे राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक। इसी वजह से इसे “विश्व दिव्यांग दिवस” के शीर्षक के द्वारा मनाया जाता है। विश्व दिव्यांग दिवस का उत्सव हर साल पूरे विश्वभर में दिव्यांग लोगों के अलग-अलग मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करता है।

*विश्व दिव्यांग दिवस के थीम*
दिव्यांग व्यक्तियों के लिये समाज में नियम और नियामकों को ठीक ढंग से लागू करने के लिये दिव्यांग व्यक्तियों के अंतरराष्ट्रीय दिवस के उत्सव को एक असरदार थीम की ज़रुरत है। नीचे दिव्यांग व्यक्तियों के अंतरराष्ट्रीय दिवस के उत्सव के लिये वार्षिक आधार पर निम्न थीम दिये गये हैं:

वर्ष 1998 का थीम था “कला, संस्कृति और स्वतंत्र रहन-सहन”।
वर्ष 1999 का थीम था “नयी शताब्दी के लिये सभी की पहुंच”।
वर्ष 2000 का थीम था “सभी के लिये सूचना क्रांति कार्य निर्माण”।
वर्ष 2001 का थीम था “पूर्ण सहभागिता और समानता: प्रगति आँकना और प्रतिफल निकालने के लिये नये पहुंच मार्ग के लिये आह्वान”।
वर्ष 2002 का थीम था “स्वतंत्र रहन-सहन और दीर्घकालिक आजीविका”।
वर्ष 2003 का थीम था “हमारी खुद की एक आवाज”।
वर्ष 2004 का थीम था “हमारे बारे में कुछ नहीं, बिना हमारे”।
वर्ष 2005 का थीम था “दिव्यांगजनों का अधिकार: विकास में क्रिया”।
वर्ष 2006 का थीम था “ई- एक्सेसिबिलीटी”।
वर्ष 2007 का थीम था “दिव्यांगजनों के लिये सम्माननीय कार्य”।
वर्ष 2008 का थीम था “दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर सम्मेलन: हम सभी के लिये गरिमा और न्याय”।
वर्ष 2009 का थीम था “एमडीजी का संयुक्त निर्माण: पूरी दुनिया में दिव्यांग व्यक्तियों और उनके समुदायों का सशक्तिकरण”।
वर्ष 2010 का थीम था “वादे को बनाये रखना: 2015 और उसके बाद की ओर शताब्दी विकास लक्ष्य में मुख्यधारा दिव्यांगता”।
वर्ष 2011 का थीम था “सभी के लिये एक बेहतर विश्व के लिये एक साथ: विकास में दिव्यांग व्यक्तियों को शामिल करते हुए”।
वर्ष 2012 का थीम था “सभी के लिये एक समावेशी और सुगम्य समाज उत्पन्न करने के लिये बाधाओं को हटाना”।
वर्ष 2013 का थीम था “बाधाओं को तोड़ें, दरवाज़ों को खोलें: सभी के लिये एक समावेशी समाज और विकास”।
वर्ष 2014 का थीम था “सतत् विकास: तकनीक का वायदा”।
वर्ष 2015 का थीम था “समावेश मायने रखता है: सभी क्षमता के लोगों के लिये पहुंच और सशक्तिकरण”।
वर्ष 2016 में विश्व दिव्यांग दिवस के लिए थीम "भविष्य के लिए 17 लक्ष्य हासिल करना" था।
वर्ष 2017 में विश्व दिव्यांग दिवस के लिए थीम "सभी के लिए टिकाऊ और लचीला समाज की ओर परिवर्तन" था।
वर्ष 2018 का थीम "दिव्यांग व्यक्तियों को सशक्त बनाओ तथा उनके समावेश और समानता को सुनिश्चित करो (इम्पावरिंग पर्सन विथ डिसएबिलिटीज एंड इनश्योरिंग इनक्लूजीवनेस एंड इक्वालिटी)" है।
वर्ष 2019 का थीम ''दिव्यांग व्यक्तियों के नेतृत्व और उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना" है।
वर्ष 2020 का थीम “पूर्ण सहभागिता और समानता” है

03/12/2020

3 December 2017
अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस

दोस्तों,
मैं हर रोज भिन्न भिन्न प्रकार की पोस्ट अपडेट करता रहता हूं , लेकिन आज अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर एक अति महत्वपूर्ण पोस्ट आप सभी तक पहुंचाने का एक छोटा सा प्रयास कर रहा हूं । इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी विकलांगता या दिव्यांग जनों के बारे में अपनी पुरानी धारणाओं से कुछ अलग ग्रहण करेंगे और अगर चाहो तो किसी दिव्यांग की तरफ तिरछी या कटी नजर से देखने की बजाए उसकी सहायता भी करोगे ।

दोस्तों जिस प्रकार किसी खेत या बगीचे में कोई एक पौधा अगर थोड़ा कमजोर रह जाता है तो किसान या माली उसे उखाड़ फेंकने के बजाय उसका उपाय सुझाते हैं,और उसे उपयुक्त पोषक तत्व देकर उससे भी ठीक वैसे ही उत्पादन की उम्मीद करते हैं,जैसी उम्मीद बाकी की फसल या पौधों से की जाती है।
ठीक उसी प्रकार इंसान भी प्रकृति का सबसे श्रेष्ठ प्राणी माना जाता है,लेकिन इन इंसानों में से ही कुछ इंसान ऐसे होते हैं जो किसी भी कारण से शारीरिक या मानसिक रूप से अन्य लोगों से थोड़ा पीछे रह जाते हैं। वे उस शारीरिक या मानसिक कमजोरी के कारण वह सब कार्य इतनी आसानी से नहीं कर पाते जितनी आसानी से एक आम इंसान कर लेता है। इस प्रकार के शारीरिक या मानसिक रूप से पिछड़े लोगों को अपंग ,विकलांग, विशेष योग्यजन या दिव्यांग कहा जाता है ।

दिव्यांग लोगों को बहुत से प्रकार अपने अपने समाज में भी बखूबी देखे हैं जैसे श्रवण अक्षम, दृष्टि अक्षम, बौद्धिक अक्षम, मानसिक रुग्णता वाले या मानसिक रोगी ,C.P. या पोलियो से ग्रसित विकलांग या दुर्घटनाग्रस्त होने से होने वाली विकलांगता आदि ।

यदि किसी भी परिवार में ऐसा बच्चा जन्म लेता है तो पहचान शीघ्र हो या देर से पूरा परिवार मानसिक तनाव में आ जाता है ,और कुछ लोग इसे देवीय प्रकोप या पिछले जन्मों के बुरे कर्मों का फल बताकर इस बात को नकारात्मक मानकर इस पर बात भी नहीं करना चाहते हैं,वास्तव में इसका कारण ऐसा कुछ नहीं होता है ।इसके कुछ वैज्ञानिक कारण होते हैं जिनमें से कुछ मुख्य कारणों से मैं आपको अवगत कराना चाहूंगा ।

कोई भी दिव्यांग मुख्यतः चार चार दिशाओं में होने वाले विभिन्न कारणों से दिव्यांग या विशिष्ट योग्यता के साथ पैदा हो सकता है-

1. गर्भधारण से पूर्व -
रक्त संबंध में विवाह होना ,पूर्वजों में कोई व्यक्ति का विकलांग होना ,मां या पिता की आयु 18-21 वर्ष से कम या 35 वर्ष से अधिक होना ।
इन सभी कारणों से विकलांग/दिव्यांग बच्चों के जन्म होने की संभावना रहती है ।

2. प्रसव पूर्व अवस्था (गर्भधारण से लेकर जन्म से पूर्व तक की अवस्था)-
इस अवस्था में मां को चोट लगने पर, मां के तनाव में रहने पर ,अधिक एक्स रे करवाने पर, माँ द्वारा अधिक नशीली दवाओं या शराब आदि के सेवन पर,माँ का कुपोषण का शिकार होने पर व लंबे समय तक बीमार रहने पर होने वाला बच्चा दिव्यांग पैदा हो सकता है ।

3. प्रसव के दौरान या जन्म के समय-
बच्चे का देर से रोना ,ऑक्सीजन या रक्त की कमी ,सिर पर चोट लगने से या गर्भनाल का शिशु के गले के बाहर लिपटा होना या ऑपरेशन के समय कोई नुकीला औजार या किसी प्रकार की कोई चोट लग जाने से होने वाला बच्चा दिव्यांग हो सकता है।

4. जन्म के पश्चात -
जैसा हम सभी को पता है मुख्यतः 5 साल तक बालक का अधिकतर विकास होता है इस समय में यदि बालक को किसी प्रकार की चोट यदि मस्तिष्क पर लग जाती है या वह कुपोषण का शिकार होता है तो उसे किसी भी प्रकार की अक्षमता का सामना करना पड़ सकता है तथा जन्म के बाद कई बार देखा जाता है कि किसी दुर्घटना के कारण कोई बालक या व्यक्ति अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है जिस कारण वह हमेशा के लिए मानसिक रोगी हो जाता है ।

हम इन मुख्य सावधानियों को ध्यान में रखकर तथा सभी को इनसे अवगत करवाते हुए विकलांगता के उन्मूलन में सहायक बन सकते है ।

इसके बावजूद यदि कोई बच्चा इस प्रकार की योग्यताओं के साथ जन्म लेता है तो उसे नकारा ना समझकर सामान्य बच्चों की तरह ही महसूस किया जाए तो उस परिवार में बच्चे का जीवन आसान हो जाता है।

शिक्षा- दिव्यांग बच्चों की शिक्षा की बात की जाए तो समाज में यह एक बहुत बड़ी समस्या मानी जा रही है केवल उन लोगों के द्वारा, जिन्हें इन बच्चों को दी जाने वाली विशेष शिक्षा के बारे में जानकारी नहीं है। इस बारे में भी आपको अवगत कराना चाहूंगा की वर्तमान में प्रत्येक जिला मुख्यालय एवं विभिन्न छोटे बड़े शहरों और कस्बों में विशेष विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं इन विशेष विद्यालयों में विशेष बच्चों को शिक्षा, चिकित्सा, घरेलू प्रशिक्षण ,व्यवसायिक प्रशिक्षण तथा आदर्श जीवन जीने योग्य समस्त कौशल विशेष प्रशिक्षण प्राप्त विशेष शिक्षकों व अध्यापकों द्वारा बहुत ही धैर्यपूर्वक एवं रुचिपूर्वक सिखाए जाते हैं । इन बच्चों को विशेष विद्यालय में प्रवेश दिलाना प्यासे को कुएं के पास ले जाने जैसा कार्य है।

RTE के तहत इन बच्चों को अपने आसपास के किसी भी राजकीय या निजी सामान्य विद्यालय में भी प्रवेश दिला कर वहां विशेष शिक्षक की मांग कर के इन बच्चों को शिक्षा दिलाई जा सकती है ।

वर्तमान में आप इंटरनेट पर बहुत से ऐसे उदाहरण देख सकते हैं जो विकलांग या दिव्यांग होते हुए भी बहुत बड़े-बड़े कार्य कर चुके हैं जैसे देवेंद्र झाझड़िया दीपा मलिक तथा और भी विभिन्न से विशेष बच्चों व व्यक्तियो को व उनकी कला आदि को special child या CWSN से YouTube पर सर्च करके देख सकते हैं ।

अंततः आज विश्व दिव्यांग दिवस पर समस्त नागरिकों, युवा साथियों व दोस्तों से निवेदन है कि आसपास कभी भी कहीं भी कोई दिव्यांग को सहायता की जरूरत हो ,तो उसकी सहायता अवश्य करें और वक्त निकालकर किसी भी विशेष विद्यालय में जाकर इन बच्चों की आदर्श जिंदगी को देखें और उस दिव्यांग के घर तक पहुंच कर उन्हें आसपास के विशेष विद्यालय के बारे में अवगत कराएं ।
तथा जिंदगी भर के लिए इस बात का हमेशा स्मरण रखें कि "ये दिव्यांगजन समाज का अलग हिस्सा ना होकर हम में से ही कुछ लोग हैं जिन्हें दया या सहानुभूति की जरूरत नहीं बल्कि सहायता व समानुभूति की जरूरत है ।"

धन्यवाद
आपका अपना -संदीप लिंबा (विशेष शिक्षक) 91-8290540273
91-9829917273

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08/11/2020

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In a significant step towards leveraging technology to enhance efficiency and manage the implementation of newly launched Centrally Sponsored Integrated Scheme for School Education, Samagra Shiksha, a PRABANDH System has enabled on the https://seshagun.gov.in website, in which States and UTs may vie...

08/11/2020

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