03/12/2020
3 December 2017
अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस
दोस्तों,
मैं हर रोज भिन्न भिन्न प्रकार की पोस्ट अपडेट करता रहता हूं , लेकिन आज अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर एक अति महत्वपूर्ण पोस्ट आप सभी तक पहुंचाने का एक छोटा सा प्रयास कर रहा हूं । इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी विकलांगता या दिव्यांग जनों के बारे में अपनी पुरानी धारणाओं से कुछ अलग ग्रहण करेंगे और अगर चाहो तो किसी दिव्यांग की तरफ तिरछी या कटी नजर से देखने की बजाए उसकी सहायता भी करोगे ।
दोस्तों जिस प्रकार किसी खेत या बगीचे में कोई एक पौधा अगर थोड़ा कमजोर रह जाता है तो किसान या माली उसे उखाड़ फेंकने के बजाय उसका उपाय सुझाते हैं,और उसे उपयुक्त पोषक तत्व देकर उससे भी ठीक वैसे ही उत्पादन की उम्मीद करते हैं,जैसी उम्मीद बाकी की फसल या पौधों से की जाती है।
ठीक उसी प्रकार इंसान भी प्रकृति का सबसे श्रेष्ठ प्राणी माना जाता है,लेकिन इन इंसानों में से ही कुछ इंसान ऐसे होते हैं जो किसी भी कारण से शारीरिक या मानसिक रूप से अन्य लोगों से थोड़ा पीछे रह जाते हैं। वे उस शारीरिक या मानसिक कमजोरी के कारण वह सब कार्य इतनी आसानी से नहीं कर पाते जितनी आसानी से एक आम इंसान कर लेता है। इस प्रकार के शारीरिक या मानसिक रूप से पिछड़े लोगों को अपंग ,विकलांग, विशेष योग्यजन या दिव्यांग कहा जाता है ।
दिव्यांग लोगों को बहुत से प्रकार अपने अपने समाज में भी बखूबी देखे हैं जैसे श्रवण अक्षम, दृष्टि अक्षम, बौद्धिक अक्षम, मानसिक रुग्णता वाले या मानसिक रोगी ,C.P. या पोलियो से ग्रसित विकलांग या दुर्घटनाग्रस्त होने से होने वाली विकलांगता आदि ।
यदि किसी भी परिवार में ऐसा बच्चा जन्म लेता है तो पहचान शीघ्र हो या देर से पूरा परिवार मानसिक तनाव में आ जाता है ,और कुछ लोग इसे देवीय प्रकोप या पिछले जन्मों के बुरे कर्मों का फल बताकर इस बात को नकारात्मक मानकर इस पर बात भी नहीं करना चाहते हैं,वास्तव में इसका कारण ऐसा कुछ नहीं होता है ।इसके कुछ वैज्ञानिक कारण होते हैं जिनमें से कुछ मुख्य कारणों से मैं आपको अवगत कराना चाहूंगा ।
कोई भी दिव्यांग मुख्यतः चार चार दिशाओं में होने वाले विभिन्न कारणों से दिव्यांग या विशिष्ट योग्यता के साथ पैदा हो सकता है-
1. गर्भधारण से पूर्व -
रक्त संबंध में विवाह होना ,पूर्वजों में कोई व्यक्ति का विकलांग होना ,मां या पिता की आयु 18-21 वर्ष से कम या 35 वर्ष से अधिक होना ।
इन सभी कारणों से विकलांग/दिव्यांग बच्चों के जन्म होने की संभावना रहती है ।
2. प्रसव पूर्व अवस्था (गर्भधारण से लेकर जन्म से पूर्व तक की अवस्था)-
इस अवस्था में मां को चोट लगने पर, मां के तनाव में रहने पर ,अधिक एक्स रे करवाने पर, माँ द्वारा अधिक नशीली दवाओं या शराब आदि के सेवन पर,माँ का कुपोषण का शिकार होने पर व लंबे समय तक बीमार रहने पर होने वाला बच्चा दिव्यांग पैदा हो सकता है ।
3. प्रसव के दौरान या जन्म के समय-
बच्चे का देर से रोना ,ऑक्सीजन या रक्त की कमी ,सिर पर चोट लगने से या गर्भनाल का शिशु के गले के बाहर लिपटा होना या ऑपरेशन के समय कोई नुकीला औजार या किसी प्रकार की कोई चोट लग जाने से होने वाला बच्चा दिव्यांग हो सकता है।
4. जन्म के पश्चात -
जैसा हम सभी को पता है मुख्यतः 5 साल तक बालक का अधिकतर विकास होता है इस समय में यदि बालक को किसी प्रकार की चोट यदि मस्तिष्क पर लग जाती है या वह कुपोषण का शिकार होता है तो उसे किसी भी प्रकार की अक्षमता का सामना करना पड़ सकता है तथा जन्म के बाद कई बार देखा जाता है कि किसी दुर्घटना के कारण कोई बालक या व्यक्ति अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है जिस कारण वह हमेशा के लिए मानसिक रोगी हो जाता है ।
हम इन मुख्य सावधानियों को ध्यान में रखकर तथा सभी को इनसे अवगत करवाते हुए विकलांगता के उन्मूलन में सहायक बन सकते है ।
इसके बावजूद यदि कोई बच्चा इस प्रकार की योग्यताओं के साथ जन्म लेता है तो उसे नकारा ना समझकर सामान्य बच्चों की तरह ही महसूस किया जाए तो उस परिवार में बच्चे का जीवन आसान हो जाता है।
शिक्षा- दिव्यांग बच्चों की शिक्षा की बात की जाए तो समाज में यह एक बहुत बड़ी समस्या मानी जा रही है केवल उन लोगों के द्वारा, जिन्हें इन बच्चों को दी जाने वाली विशेष शिक्षा के बारे में जानकारी नहीं है। इस बारे में भी आपको अवगत कराना चाहूंगा की वर्तमान में प्रत्येक जिला मुख्यालय एवं विभिन्न छोटे बड़े शहरों और कस्बों में विशेष विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं इन विशेष विद्यालयों में विशेष बच्चों को शिक्षा, चिकित्सा, घरेलू प्रशिक्षण ,व्यवसायिक प्रशिक्षण तथा आदर्श जीवन जीने योग्य समस्त कौशल विशेष प्रशिक्षण प्राप्त विशेष शिक्षकों व अध्यापकों द्वारा बहुत ही धैर्यपूर्वक एवं रुचिपूर्वक सिखाए जाते हैं । इन बच्चों को विशेष विद्यालय में प्रवेश दिलाना प्यासे को कुएं के पास ले जाने जैसा कार्य है।
RTE के तहत इन बच्चों को अपने आसपास के किसी भी राजकीय या निजी सामान्य विद्यालय में भी प्रवेश दिला कर वहां विशेष शिक्षक की मांग कर के इन बच्चों को शिक्षा दिलाई जा सकती है ।
वर्तमान में आप इंटरनेट पर बहुत से ऐसे उदाहरण देख सकते हैं जो विकलांग या दिव्यांग होते हुए भी बहुत बड़े-बड़े कार्य कर चुके हैं जैसे देवेंद्र झाझड़िया दीपा मलिक तथा और भी विभिन्न से विशेष बच्चों व व्यक्तियो को व उनकी कला आदि को special child या CWSN से YouTube पर सर्च करके देख सकते हैं ।
अंततः आज विश्व दिव्यांग दिवस पर समस्त नागरिकों, युवा साथियों व दोस्तों से निवेदन है कि आसपास कभी भी कहीं भी कोई दिव्यांग को सहायता की जरूरत हो ,तो उसकी सहायता अवश्य करें और वक्त निकालकर किसी भी विशेष विद्यालय में जाकर इन बच्चों की आदर्श जिंदगी को देखें और उस दिव्यांग के घर तक पहुंच कर उन्हें आसपास के विशेष विद्यालय के बारे में अवगत कराएं ।
तथा जिंदगी भर के लिए इस बात का हमेशा स्मरण रखें कि "ये दिव्यांगजन समाज का अलग हिस्सा ना होकर हम में से ही कुछ लोग हैं जिन्हें दया या सहानुभूति की जरूरत नहीं बल्कि सहायता व समानुभूति की जरूरत है ।"
धन्यवाद
आपका अपना -संदीप लिंबा (विशेष शिक्षक) 91-8290540273
91-9829917273