16/11/2021
आज ही के दिन 1857 में यदुवंशी लाल घाटी नसीबपुर में अंग्रेजों के खिलाफ तैयारी में लगे हुए थे i 1857 की क्रांति के महानतम युद्ध के लिए अगले दिन वीर यदु-वंशज यलगार करने वाले थे i वीर भूमि अहीरवाल के समस्त ठीकाणों की अहीर सरदारी अपने कुटुंब-कबीले के साथ अहीर कौम के नाम को अज़र-अमर करने वाले थे i 5 हज़ार यदुवंशी योद्धा ..माँ जाए हुए भाई,काका-भतीजे,सब भाई-बंध-रिश्तेदार कौम के मान-सम्मान के लिए अहीरवाल नरेश राव राजा तुला सिंह जी की अगुवाई में मर-खपने के लिए तैयार थे i i अहीरवाल की तमाम खाप ..आफ़रिया,सान्तोरिया,नुणिवाल,कोसलिया,निगानिया,सेह्लंगीया,खोस्या,झाडोदिया,झगडोलिया,
निर्बान,सुल्तानिया,खातोदिया,साँप,झाड़ोदिया,जादम,मेहता,डागर,चितोसिया,भाटोटिया,सिसोठिया,गणवाल, खोला आदि तमाम अहीर-सरदारी कौम पर मर-मिटने को तैयार थी i साथ में नबाब झाझर समद खान और उसके साथी,शेखावाटी और मारवाड़ के राजपूत ,बुधराम गुज्जर,और मेवात के मेव आदि सब अहीरवाल की फौज के साथ अंग्रेजों के मुकाबले में खड़े थे i नांगल पठानी के राव किशन सिंह जी , उनके अनुज राव रामलाल सिंह जी, राव रामसिंह जी, राव सेढू सिंह जी सरदारान बहरोड़ , राव भानुप्रताप सिंह जी , राव शिवसहाय जी पाल्हावास वाले आदि समस्त अहीर सरदारी रण-खेतों में जूझने को तैयार थी i 1857 के इतिहास के महानतम समर की रूपरेखा तैयार हो चुकी थी ---- मर्द कौम अहीर अपने सरदारों राव राजा तुला सिंह जी बहादुर, राव गोपाल देव जी ,राव किशन सिंह जी आदि के साथ ,लाल घाटी ,नसीबपुर के रण-खेतों में अज़र-अमर होने वाली थी i
II जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी II
II शूरवीरों में अति शूरवीर अहीर II #1857