14/08/2025
65 लाख नाम कटे — जवाबदेही कौन लेगा ?
हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा 65 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। जब इन सभी का डेटा वेबसाइट पर अपलोड होगा, तब असल तस्वीर साफ होगी—पता चलेगा कि इनमें कितने ऐसे लोग थे जिनका नाम एक से अधिक जगह या बार-बार दर्ज था।
लेकिन असली सवाल यह है—अगर ऐसे लोगों का नाम भी हटा दिया गया जिनका केवल एक ही जगह नाम था, तो यह नाम पहली बार कैसे जुड़ा था?
क्या बिना दस्तावेज दिए उनका नाम जोड़ा गया था?
अगर हाँ, तो यह गंभीर लापरवाही है, और जिसके माध्यम से यह जोड़ा गया, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
और अगर दस्तावेज दिए गए थे और वे पर्याप्त भी थे, तो फिर नाम काटने का आधार क्या था?
मामला जितना छोटा दिख रहा है, उतना है नहीं।
जवाबदेही सिर्फ जनता पर नहीं डाली जा सकती। चुनाव आयोग और उनके जिला स्तर के पदाधिकारी, जो मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का कार्य करते हैं, उनकी भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
एक सामूहिक याचिका चुनाव आयोग के उन जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दायर होनी चाहिए, जो इस प्रक्रिया में लापरवाही बरतते हैं।
पारदर्शिता और जिम्मेदारी—दोनों लोकतंत्र की नींव हैं, और इन्हें किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहिए।
Zaki S Haidar