21/05/2026
भारत की 8 मुख्य मिट्टियाँ संक्षेप में इस प्रकार हैं:
1. जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil)
क्षेत्र: उत्तर के विशाल मैदान और तटीय इलाके (43% भाग)।
खासियत: भारत की सबसे उपजाऊ मिट्टी। इसमें पोटाश की मात्रा अधिक होती है।
फसलें: गेहूं, धान (चावल), गन्ना और तिलहन।
2. लाल और पीली मिट्टी (Red and Yellow Soil)
क्षेत्र: दक्कन का पठार, तमिलनाडु, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्य (18.5% भाग)।
खासियत: लोहे (Iron) की मौजूदगी के कारण रंग लाल होता है। पानी सोखने पर यह पीली दिखती है।
फसलें: दालें, बाजरा, मक्का और मूंगफली।
3. काली मिट्टी (Black / Regur Soil)
क्षेत्र: महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश (15% भाग)।
खासियत: इसे 'रेगुर' भी कहते हैं। ज्वालामुखी के लावे से बनी इस मिट्टी में नमी रोकने की क्षमता सबसे ज्यादा होती है।
फसलें: कपास (Cotton) के लिए सबसे उत्तम, सोयाबीन और ज्वार।
4. लैटेराइट मिट्टी (Laterite Soil)
क्षेत्र: पश्चिमी घाट, केरल, कर्नाटक और असम के पहाड़ी इलाके (4.3% भाग)।
खासियत: अत्यधिक बारिश और तेज धूप वाले क्षेत्रों में बनती है। सूखने पर यह ईंट जैसी सख्त हो जाती है।
फसलें: काजू, चाय, कॉफी और रबर।
5. मरुस्थलीय मिट्टी (Arid / Desert Soil)
क्षेत्र: पश्चिमी राजस्थान, दक्षिण पंजाब और हरियाणा।
खासियत: यह रेतीली और नमकीन होती है। इसमें जैविक तत्वों (humus) की कमी होती है।
फसलें: बाजरा, ज्वार, ग्वार और जौ।
6. पर्वतीय मिट्टी (Forest and Mountain Soil)
क्षेत्र: हिमालय के पहाड़ी क्षेत्र, जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड।
खासियत: पेड़ों की सड़ी पत्तियों के कारण इसमें 'ह्यूमस' (Humus) की मात्रा अधिक होती है।
फसलें: सेब, चाय, कॉफी और मसाले।
7. लवणीय और क्षारीय मिट्टी (Saline and Alkaline Soil)
क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी राजस्थान और गुजरात के शुष्क इलाके।
खासियत: अधिक नमक की मात्रा के कारण इसे 'ऊसर' या बंजर मिट्टी भी कहा जाता है। खेती के लिए यह अनुपयुक्त होती है।
8. पीट और दलदली मिट्टी (Peaty and Marshy Soil)
क्षेत्र: पश्चिम बंगाल (सुंदरबन), तटीय ओडिशा और केरल के कुछ हिस्से।
खासियत: भारी बारिश और जलभराव वाले क्षेत्रों में जैविक पदार्थों के सड़ने से बनती है। यह गहरे रंग की और अम्लीय होती है।
फसलें: मुख्य रूप से धान (चावल) की खेती और मैंग्रोव वनस्पति।
Video Source : The.gs.booster