05/11/2024
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
WELCOME TO MY PAGE PLEASE FOLLOW KNOW
05/11/2024
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
27/10/2024
ठोकरें खा के भी ना संभले तो मुसाफ़िर का नसीब,
वर्ना पत्थरों ने तो अपना फर्ज़ निभा ही दिया|
16/10/2024
दोस्ती में हदों में कैद रहा नहीं जाता, फक़्त हदें पार की जाती हैं
दोस्ती तो वो पाक देहलीज है, जहाँ से सुकून की बहार आती है…” 🥰