02/04/2023
#इतिहासकारों_की_तीर्थस्थली_राखीगढ़ी
सिन्धु घाटी सभ्यता के अंतर्गत अभी तक 1400 पुरातात्विक स्थल खोजे जा चुके हैं जिनमें से 925 स्थल भारत में हैं एवं 475 पाकिस्तान में हैं। राखीगढ़ी हरियाणा के हिसार जिले में सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित एक गाँव और एक पुरातात्विक स्थल है, जो दिल्ली से लगभग 150 किमी उत्तर पश्चिम में स्थित है। यह 2600 - 1900 ई.पू. की सिंधु घाटी सभ्यता के परिपक्व चरण का हिस्सा था। यह प्राचीन सभ्यता की सबसे बड़ी बस्तियों में से एक थी, हालांकि इसमें से अधिकांश की खुदाई नहीं हुई है। साइट घग्घर-हकरा नदी के मैदान में स्थित है, मौसमी घग्घर नदी से लगभग 27 किमी दूर है। आज यह मोहनजोदड़ो से भी बड़ा खुदाई स्थल है।
पुरातत्वविदों ने दावा किया है कि राखीगढ़ी साइट का आकार 550 हेक्टेयर है यानि 5.5 स्क्वायर किमी है। अभी साइट के केवल 5% भाग का ही उत्खनन किया गया है। यह घग्घर-हकरा नदी के मैदान में स्थित है।
#क्या_है_घग्गर_हकरा_मैदान?
जब तक नदी भारत में बहती है तब तक इसे घग्गर कहा जाता है फिर यह ओट्टू बाँध में मिल जाती है उसके बाद नदी बनकर यह पाकिस्तान में बहती है तब इसे हकरा कहा जाता है। भारत व पाकिस्तान के इस क्षेत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल हैं।
#राखीगढ़ी_के_टीलों_का_रहस्य
राखीगढ़ी में 11 उत्खनन टीले हैं, जिनको RGR-1 से RGR-11 तक नाम दिया गया है। टीला RGR-7 एक दफन स्थल है जहाँ मानव कंकाल पाए गए थे। 2014 की खुदाई में 2 और टीले, RGR-8 और RGR-9 की खोज की गई, जिनमें से प्रत्येक का कुल आकार 25 हेक्टेयर है, जो कुल साइट का आकार 350 हेक्टेयर (3.5 स्क्वायर किमी ) तक ले जाता है, इस प्रकार मोहनजोदड़ो (300 हेक्टेयर) को पछाड़कर राखीगढ़ी को सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल बना दिया गया है।
देखरेख के अभाव में लोगों ने अवशेषों की लूटमार भी मचा रखी है।
#आसपास_के_स्थल_और_संस्कृतियाँ
सिन्धु घाटी सभ्यता की साइटों की सबसे पहली खुदाई 1921-1922 में हड़प्पा और 1931 में मोहनजोदडों से शुरू हुई थी, राखीगढ़ी में खुदाई पहली बार 1969 में की गई थी, इसके अलग अलग चरणों में और खुदाई हुई। राखीगढ़ी में 11 टीले हैं जिनमें से आरजीआर-5 टीले पर राखीशाहपुर गांव की स्थापना होने के कारण खुदाई के लिए उपलब्ध नहीं है।
#कुछ_खास_बातें
■ नियोजित शहर: साइट की एएसआई की विस्तृत खुदाई से पक्की सड़कों, जल निकासी व्यवस्था, बड़े वर्षा जल संग्रह, भंडारण प्रणाली, टेराकोटा ईंटों, मूर्ति निर्माण, और कांस्य और कीमती धातुओं के कुशल काम के साक्ष्य को उजागर किया गया है। आभूषण, जिसमें टेराकोटा, शंख, सोना, से बनी चूड़ियाँ शामिल हैं। और अर्द्ध कीमती पत्थर भी पाए गए हैं। अब तक की खुदाई से 1.92 मीटर चौड़ी सड़कों के साथ एक सुनियोजित शहर का पता चलता है,
■ अन्न भण्डार: परिपक्व हड़प्पा चरण (2600 ईसा पूर्व से 2000 ईसा पूर्व) से संबंधित एक अन्न भंडार यहां पाया गया है। अन्नभंडार मिट्टी की ईंटों से बना होता है जिसका फर्श मिट्टी से ढका हुआ होता है जिसमें चूने को कीटनाशक के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
■ औजार: यहाँ से ताँबे के हत्थे और मछली के काँटे जैसे शिकार के उपकरण मिले हैं। मिनी व्हील्स, मिनिएचर लिड्स, स्लिंग बॉल्स, जानवरों की मूर्तियों जैसे विभिन्न खिलौनों की उपस्थिति खिलौना संस्कृति की व्यापकता का संकेत देती है। इसके अलावा राखीगढ़ी में अग्नि वेदियों और अर्धवृत्ताकार संरचनाओं का पता चला था।
#राखीगढ़ी_के_कंकालों_का_रहस्य
राखीगढ़ी में परिपक्व हड़प्पा काल का एक कब्रिस्तान मिला है, जिसमें आठ कब्रें मिली हैं। अक्सर कब्रें ईंटों से ढकी होती थी। अब तक 46 कंकालों के साथ 53 दफन स्थलों की खोज की जा चुकी है। 37 कंकालों पर किए गए मानवशास्त्रीय परीक्षण में 17 वयस्कों के, 8 उप-वयस्कों के होने का पता चला जबकि 12 कंकालों की उम्र का सत्यापन नहीं किया जा सका। 17 कंकालों का लिंग पता लगाने में सफलता मिली, जिनमें से 7 नर और 10 मादा कंकाल थे।
हड्डियों के DNA विश्लेषण से ज्ञात होता है कि ये बाहर से नहीं आये थे। इनका दक्षिण भारतीय जनजाति इरुला आबादी के साथ संबंध दिखता है। 2016 तक कुल 61 कंकाल मिले थे।
एक पुरुष व महिला का आमने सामने मुँह रखकर औपचारिक दफन का संकेत मिलता है कि वे अवैध संबंध में नहीं थे ऐसे में इतिहासकारों ने उन्हें 'लवबर्ड्स' की संज्ञा दी है।
ाखीगढ़ी_सबसे_महत्वपूर्ण_क्यों?
राखीगढ़ी वर्ष 2020 में बजट भाषण के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित पाँच प्रतिष्ठित स्थलों में से एक है। ऐसे अन्य स्थल उत्तर प्रदेश में हस्तिनापुर, असम में शिवसागर, गुजरात में धोलावीरा और तमिलनाडु में आदिचनल्लूर हैं। इन साइट्स के विकास के लिए प्रयास किया जायेगा। अब आगे की खुदाई में सम्भवतया कई नए रहस्य और खुल सकते हैं।