Guru Dronacharyaa Academy Nowgong

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Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Pappu Bhai, Bhanwar Singh Jhala, केशव यादव
24/12/2025

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https://t.me/gkwithrkpateriyaRK Pateriya Classes:सामान्य ज्ञान तथ्य ::-1. प्राचीन भारत में निष्क से क्या जाने जाते थे  -...
06/02/2024

https://t.me/gkwithrkpateriya
RK Pateriya Classes:
सामान्य ज्ञान तथ्य ::-

1. प्राचीन भारत में निष्क से क्या जाने जाते थे - स्वर्ण आभूषण

2. मीमांसा या पूर्व मीमांसा दर्शन के प्रतिपादक क्या है - जैमिनी

3. प्रसिद्ध दस राजाओं का युद्ध किस नदी के तट पर था - परुष्णी

4. वेदांत या उत्तर-मीमांसा दर्शन के प्रतिपादक क्या है - बादरायण

5. किस देवता के लिए ऋग्वेद में पुरंदर शब्द का प्रयोग हुआ है - इंद्र

6. आर्य भारत में बाहर से आए और सर्वप्रथम कहाँ बसे थे - पंजाब में

7. यज्ञ सम्बन्धी विधि विधानों का पता किस वेद से चलता है - यजुर्वेद से

8. कपिल मुनि द्वारा प्रतिपादित दार्शनिक प्रणाली कौन सी है - सांख्य दर्शन

9. 800 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व का काल किस युग से जुड़ा है - ब्राह्मण युग

10. कथकली किस राज्य का शास्त्रीय नृत्य है - केरल

11. लोदी वंश का संस्थापक कौन था - बहलोल लोदी

12. मिड डे मील योजना किस वर्ष शुरु हुई - 1995 में

13. भारत की सर्वाधिक बड़ी जनजाति कौनसी है - गोंड

14. जनरल डायर की हत्या किसने की थी - उधम सिंह ने

15. प्रथम लोकसभा का अध्यक्ष कौन थे - जी. वी. मावलंकर

हाल में करंट अफेयर्स में रहे भारत में पहला👇👇👇

पहला भारतीय गांव - उत्तराखंड का माडा

जल बजट अपने वाला देश का पहला राज्य - केरल

भारत का पहला 3D मुद्रित डाकघर - बेंगलुरु

भारत का पहला फोटो ग्राफिक प्रमाणन दर्ज करने वाला - सुहेला अभ्यारण

भारत का पहला वायस बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन बैंकिंग ऐप लॉन्च - सिटी यूनियन बैंक के द्वारा

सुशासन नियम को मंजूरी देने वाला पहला राज्य - महाराष्ट्र

भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क -जोगी घोपा (असम)

शराब पर स्वास्थ्य चेतावनी लगाने वाला पहला देश - आयरलैंड

तंबाकू उत्पादों पर चेतावनी लगाने वाला पहला देश -कनाडा

विश्व की पहली RSV वैक्सीन को स्वीकृति - अमेरिका के द्वारा

भारत का पहला रक्षक कोस लॉन्च - एचडीएफसी द्वारा

सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को अपनाने वाला देश का पहला नगर निगम - पटना नगर निगम

भारत का पहला पूर्ण रूप से इशासित राज्य - केरल

🔲प्रस्तावना- मुद्रास्फीति का तात्पर्य कीमतों में सामान्य वृद्धि और उसके बाद एक निश्चित अवधि में पैसे की क्रय शक्ति में ग...
06/02/2024

🔲प्रस्तावना- मुद्रास्फीति का तात्पर्य कीमतों में सामान्य वृद्धि और उसके बाद एक निश्चित अवधि में पैसे की क्रय शक्ति में गिरावट से है।

🔲कारण- मुद्रास्फीति मुख्यतः दो कारणों से होती है- मांगजनित कारक एवं लागतजनित कारक।

✅1.यदि मांग के बढ़ने से वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होती है तो वह मांगजनित मुद्रास्फीति (Demand-Pull Inflation) कहलाती है।

✅2.इसके विपरीत यदि उत्पादन के कारकों (भूमि, पूंजी, श्रम, कच्चा माल आदि) की लागत में वृद्धि से वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होती है तो वह लागतजनित मुद्रास्फीति (Cost-Push Inflation) कहलाती है।

🔲मुद्रा स्फीति के प्रभाव-

1. निवेशकर्ता पर प्रभाव-सरकारी प्रतिभूतियों से निश्चित आय प्राप्त होती है तथा दूसरे निवेशकर्ता वे होते है जो संयुक्त पूंजी कम्पनियों के हिस्से खरीदते है। इनकी आय मुद्रास्फीति के होने पर बढ़ती है।

2. निश्चित आय के वर्ग पर प्रभाव-निश्चित आय वर्ग नुकसान उठाता है।

3.कृषकों पर प्रभाव-मुद्रास्फीति के दौरान कृषक वर्ग को लाभ मिलता है।

4. ऋणी और ऋणदाता पर प्रभाव-मुद्रास्फीति का ऋणदाता पर प्रतिकूल तथा ऋणी पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।

5. बचत पर प्रभाव-मुद्रास्फीति का बचत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है क्योंकि मुद्रास्फीति होने के कारण वस्तुओं पर किये जाने वाले व्यय में वृद्धि होती है। इससे बचत की सम्भावना कम हो जायेगी।

6. भुगतान संतुलन पर प्रभाव-मुद्रास्फीति के समय वस्तुओं तथा सेवाओं के मूल्यों में वृद्धि होती है। इसके कारण हमारे निर्यात मँहगे हो जायेगें तथा आयात सस्ते हो जायेगें। नियार्तों में कमी होगी तथा आयतों में वृद्धि होगी जिसके कारण भुगतान सन्तुलन प्रतिकूल हो जायेगा।

7. सार्वजनिक ऋणों पर प्रभाव-मुद्रास्फीति के कारण सार्वजनिक ऋणों में वृद्धि हो जाती है क्योंकि जब कीमत स्तर में वृद्धि होती है तो सरकार को सार्वजनिक योजनाओं पर अपने व्यय को बढ़ाना पड़ता है इस व्यय की पूर्ति के लिए सरकार जनता से ऋण लेती है। अतः मुद्रास्फीति के कारण सार्वजनिक ऋणों में वृद्धि होती है।

8. करों पर प्रभाव-मुद्रास्फीति के कारण सरकार के सार्वजनिक व्यय में बहुत वृद्धि होती है।

17/11/2023

तमन्नाओं के शहर में आज कोई रैन-बसेरा तक न रहा,
वो जो कल तक अपना कहते थे उनका नामों निशान तक न मिला,,

हम करते रहे दुआओं में जिन्हें याद,
उनके पास हमें याद करने की वजह न बची,,

जिन्दगी तमाशा बनकर रह गयी,
हमारा वजूद हमे ही ना मिला,,, 💔😔🥀✍

17/11/2023

सुनी थी हमने ग़ज़लों में जुदाई की बातें,,,

अब खुद पे बीती तो हक़ीक़त का अंदाज़ा हुआ...

16/08/2023








 #इतिहासकारों_की_तीर्थस्थली_राखीगढ़ीसिन्धु घाटी सभ्यता के अंतर्गत अभी तक 1400 पुरातात्विक स्थल खोजे जा चुके हैं जिनमें से...
02/04/2023

#इतिहासकारों_की_तीर्थस्थली_राखीगढ़ी

सिन्धु घाटी सभ्यता के अंतर्गत अभी तक 1400 पुरातात्विक स्थल खोजे जा चुके हैं जिनमें से 925 स्थल भारत में हैं एवं 475 पाकिस्तान में हैं। राखीगढ़ी हरियाणा के हिसार जिले में सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित एक गाँव और एक पुरातात्विक स्थल है, जो दिल्ली से लगभग 150 किमी उत्तर पश्चिम में स्थित है। यह 2600 - 1900 ई.पू. की सिंधु घाटी सभ्यता के परिपक्व चरण का हिस्सा था। यह प्राचीन सभ्यता की सबसे बड़ी बस्तियों में से एक थी, हालांकि इसमें से अधिकांश की खुदाई नहीं हुई है। साइट घग्घर-हकरा नदी के मैदान में स्थित है, मौसमी घग्घर नदी से लगभग 27 किमी दूर है। आज यह मोहनजोदड़ो से भी बड़ा खुदाई स्थल है।

पुरातत्वविदों ने दावा किया है कि राखीगढ़ी साइट का आकार 550 हेक्टेयर है यानि 5.5 स्क्वायर किमी है। अभी साइट के केवल 5% भाग का ही उत्खनन किया गया है। यह घग्घर-हकरा नदी के मैदान में स्थित है।

#क्या_है_घग्गर_हकरा_मैदान?

जब तक नदी भारत में बहती है तब तक इसे घग्गर कहा जाता है फिर यह ओट्टू बाँध में मिल जाती है उसके बाद नदी बनकर यह पाकिस्तान में बहती है तब इसे हकरा कहा जाता है। भारत व पाकिस्तान के इस क्षेत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल हैं।

#राखीगढ़ी_के_टीलों_का_रहस्य

राखीगढ़ी में 11 उत्खनन टीले हैं, जिनको RGR-1 से RGR-11 तक नाम दिया गया है। टीला RGR-7 एक दफन स्थल है जहाँ मानव कंकाल पाए गए थे। 2014 की खुदाई में 2 और टीले, RGR-8 और RGR-9 की खोज की गई, जिनमें से प्रत्येक का कुल आकार 25 हेक्टेयर है, जो कुल साइट का आकार 350 हेक्टेयर (3.5 स्क्वायर किमी ) तक ले जाता है, इस प्रकार मोहनजोदड़ो (300 हेक्टेयर) को पछाड़कर राखीगढ़ी को सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल बना दिया गया है।
देखरेख के अभाव में लोगों ने अवशेषों की लूटमार भी मचा रखी है।

#आसपास_के_स्थल_और_संस्कृतियाँ

सिन्धु घाटी सभ्यता की साइटों की सबसे पहली खुदाई 1921-1922 में हड़प्पा और 1931 में मोहनजोदडों से शुरू हुई थी, राखीगढ़ी में खुदाई पहली बार 1969 में की गई थी, इसके अलग अलग चरणों में और खुदाई हुई। राखीगढ़ी में 11 टीले हैं जिनमें से आरजीआर-5 टीले पर राखीशाहपुर गांव की स्थापना होने के कारण खुदाई के लिए उपलब्ध नहीं है।

#कुछ_खास_बातें

■ नियोजित शहर: साइट की एएसआई की विस्तृत खुदाई से पक्की सड़कों, जल निकासी व्यवस्था, बड़े वर्षा जल संग्रह, भंडारण प्रणाली, टेराकोटा ईंटों, मूर्ति निर्माण, और कांस्य और कीमती धातुओं के कुशल काम के साक्ष्य को उजागर किया गया है। आभूषण, जिसमें टेराकोटा, शंख, सोना, से बनी चूड़ियाँ शामिल हैं। और अर्द्ध कीमती पत्थर भी पाए गए हैं। अब तक की खुदाई से 1.92 मीटर चौड़ी सड़कों के साथ एक सुनियोजित शहर का पता चलता है,

■ अन्न भण्डार: परिपक्व हड़प्पा चरण (2600 ईसा पूर्व से 2000 ईसा पूर्व) से संबंधित एक अन्न भंडार यहां पाया गया है। अन्नभंडार मिट्टी की ईंटों से बना होता है जिसका फर्श मिट्टी से ढका हुआ होता है जिसमें चूने को कीटनाशक के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।

■ औजार: यहाँ से ताँबे के हत्थे और मछली के काँटे जैसे शिकार के उपकरण मिले हैं। मिनी व्हील्स, मिनिएचर लिड्स, स्लिंग बॉल्स, जानवरों की मूर्तियों जैसे विभिन्न खिलौनों की उपस्थिति खिलौना संस्कृति की व्यापकता का संकेत देती है। इसके अलावा राखीगढ़ी में अग्नि वेदियों और अर्धवृत्ताकार संरचनाओं का पता चला था।

#राखीगढ़ी_के_कंकालों_का_रहस्य

राखीगढ़ी में परिपक्व हड़प्पा काल का एक कब्रिस्तान मिला है, जिसमें आठ कब्रें मिली हैं। अक्सर कब्रें ईंटों से ढकी होती थी। अब तक 46 कंकालों के साथ 53 दफन स्थलों की खोज की जा चुकी है। 37 कंकालों पर किए गए मानवशास्त्रीय परीक्षण में 17 वयस्कों के, 8 उप-वयस्कों के होने का पता चला जबकि 12 कंकालों की उम्र का सत्यापन नहीं किया जा सका। 17 कंकालों का लिंग पता लगाने में सफलता मिली, जिनमें से 7 नर और 10 मादा कंकाल थे।

हड्डियों के DNA विश्लेषण से ज्ञात होता है कि ये बाहर से नहीं आये थे। इनका दक्षिण भारतीय जनजाति इरुला आबादी के साथ संबंध दिखता है। 2016 तक कुल 61 कंकाल मिले थे।
एक पुरुष व महिला का आमने सामने मुँह रखकर औपचारिक दफन का संकेत मिलता है कि वे अवैध संबंध में नहीं थे ऐसे में इतिहासकारों ने उन्हें 'लवबर्ड्स' की संज्ञा दी है।

ाखीगढ़ी_सबसे_महत्वपूर्ण_क्यों?

राखीगढ़ी वर्ष 2020 में बजट भाषण के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित पाँच प्रतिष्ठित स्थलों में से एक है। ऐसे अन्य स्थल उत्तर प्रदेश में हस्तिनापुर, असम में शिवसागर, गुजरात में धोलावीरा और तमिलनाडु में आदिचनल्लूर हैं। इन साइट्स के विकास के लिए प्रयास किया जायेगा। अब आगे की खुदाई में सम्भवतया कई नए रहस्य और खुल सकते हैं।

02/04/2023

भारतीय रिजर्व बैंक

🔘स्थापना 👉 1 अप्रैल 1935
(रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया ऐक्ट 1934 के अनुसार)

🔘मुख्यालय👉 मुम्बई

🔘राष्ट्रीयकरण👉 1 जनवरी 1949

🔘वर्तमान गवर्नर👉 शक्तिकांत दास (25 वें)

❇️भारतीय रिजर्व बैंक के प्रमुख कार्य-

➡️ "बैंक नोटों के निर्गम को नियन्त्रत करना, भारत में मौद्रिक स्थायित्व प्राप्त करने की दृष्टि से प्रारक्षित निधि रखना और सामान्यतः देश के हित में मुद्रा व ऋण प्रणाली परिचालित करना । "

➡️ मौद्रिक नीति तैयार करना, उसका कार्यान्वियन और निगरानी करना ।

➡️ वित्तीय प्रणाली का विनियमन और पर्यवेक्षण करना।

➡️ विदेशी मुद्रा का प्रबन्धन करना ।

➡️ मुद्रा जारी करना, उसका विनियमन करना और परिचालन योग्य न रहने पर उन्हें नष्ट करना।

➡️ सरकार का बैंकर और बैंकों का बैंकट के रूप में काम करना।

➡️ साख नियन्त्रित करना।

➡️ मुद्रा के लेन देन को नियंत्रित करना।

02/04/2023

#निस्सार_है_जीवन_यदि....

कितने वर्षों का जीवन जिया उससे ज्यादा अच्छा यह है कि उन वर्षों में कितना जीवन रहा।

निस्सार है जीवन यदि हमनें पहाड़ों की ताजगी भरी हवा और शिखरस्थ नीलाभ नभ के उन्मादित करने वाले दृश्यों को चितवन में नहीं संजोया।

निस्सार है जीवन यदि पहाड़ों की करधनी बनी सतत प्रवाहित नदी की तरंगों ने हमारे वर्तमान में अतीत घोलकर गहरी घनेरी हलचल उत्पन्न न की हो।

निस्सार है जीवन यदि आपने किसी निर्जनवन में स्थित कंदरा में झाँककर नहीं देखा। यदि आपने किसी डरावने जंगल की खामोशी से ताजगी नहीं चुराई या कभी चाँदनी में भीगकर आपने खुद से कभी कोई संवाद नहीं किया।

निस्सार है जीवन यदि हमने प्रकृति की पाठशाला के हजारों अद्भुत शिक्षकों से सरल और समृद्ध जीवन जीने का ताना-बाना बुनना नहीं सीखा।

निस्सार है जीवन यदि आप अपने सपनों को आकार देने की शुरुआत के लिए आज के बजाय किसी कल की प्रतीक्षा कर रहे हो या अपने भीतर दहकते अंगारों पर लाचारी के आँसू गिरा रहे हो या प्रणायालाप करते करते अक्षर नहीं भूले हो।

निस्सार है जीवन यदि आपकी धड़कनें कभी बढ़ी नहीं, टांगे काँपी नहीं, होंठ थिरके नहीं और अपशगुन होने के बावजूद भी आपने अपनी निरन्तर चलने की जिद को जारी नहीं रखा।

निस्सार है जीवन यदि आपने अपने किसी पाप का खुलासा किसी विश्वस्त दोस्त के कान में नहीं किया।

निस्सार है जीवन यदि हमने किसी आँख के बोल नहीं पढे या उनको नहीं समझा जिनका सिर्फ एक मक़सद था कि अपनी सांसें आपके लिए संभालकर रखें।

निस्सार है जीवन यदि आप यह सोचकर दोस्त गँवा देते हो कि आप क्यों छोटे बनें।

निस्सार है जीवन यदि पुस्तकों पर गर्द जमती रहे और हम पर चर्बी।

निस्सार है जीवन जब तक हमने किसी को पसीने से तरबतर मुस्कुराते नहीं देखा और उसके जैसा बनने की नहीं ठानी।

02/04/2023

#कठिन_रास्ते_कल_को_सरल_बनाते_है

जिन्दगी हर व्यक्ति के लिए कठिनाइयों भरी डगर है; जिनकी प्रसिद्धि, उपलब्धि से आप ईर्ष्या करते हैं, वे खुद रात दिन किसी और से कुढ़ते रहते हैं। आप खाली जेब फुटपाथ पर चल रहे है तो अभी भी आप दुनियां के उन करोड़ों लोगों से बेहतर स्थिति में है जो अस्पतालों के आपातकाल या आईसीयु में लेटे हैं।

जीवन की सबसे बड़ी खूबसूरती और सबसे बड़ा दर्द यह है कि कल के बारे में किसी को कुछ नहीं पता। सरल भाषा में कहें तो जिसमें कल को खूबसूरत बनाने का जज्बा आज जिंदा है तो वह अमीर है और जिसको कोई अच्छे कल की उम्मीद ही नहीं है, वह दुनियां में सबसे गरीब है।

अगर आपने रास्ता ही सिर्फ आराम वाला चुना है तो आपको अपनी तकदीर के खिलाफ शिकायत करने का कोई हक नहीं। शिखर तक चढ़ने में हाँफना पड़ता है लेकिन वहाँ से हम संसार को जमीन पर खड़े लोगों से बेहतर देख पाते हैं। रोज कई घंटों का साज पर या कण्ठ से रियाज आपको थका देता है लेकिन एक कलाकार का कद धीरे धीरे उसी से बड़ा होता है। बावड़ी में बाल्टी औंधे मुँह गिरती है तो सरस सलिल से भर कर बाहर आती है। जिन्दगी के इम्तिहान जब नीरस रेगिस्तान ले रहा होता है तब हमें छोटे से छोटे हासिल की अहमियत समझ आती है। सर्दियों में चूल्हे के आगे सिकुड़ कर बैठे बैठे निगाहों में सूरज की उदारता का अप्रतिम चित्र उमड़ता है। खानपान के सुखों की अतिशयता से थुलथुल हुआ शरीर पुनः कष्ट की प्रक्रिया से गुजर कर ही पूर्ववत होता है।

रिश्ते नातों से ही तथाकथित सारे सुख मिलते है और तथाकथित सारे दुःख भी वहीं से मिलते हैं। तेरे मेरे के इस झगड़े को आप हर जगह टाल पाते है तो आप उन तमाम खूबसूरत चीजों, पलों और स्थानों को पाने के हकदार हो जाते हैं जिसके बारे में झगड़ालू प्रवृत्ति के लोग सोच भी नहीं पाते।

सहनशील व्यक्ति के तेवर दिखते नहीं है लेकिन आसमाँ उन्हीं की जद में आता है। छोटी छोटी हारों और तकलीफों को तत्काल भूलकर नए सृजन पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। जीवनपथ सिर्फ तकलीफों से ही भरा हुआ नहीं है इसमें खुशियों का भी अपार खजाना है। जीवन को खूबसूरत बनाने में सबसे बड़ा योगदान आपका स्वयं का होता है। लीक से हटकर चलने वाले रास्तों में कठिनाइयां बहुत है लेकिन उससे कम है जहाँ रास्ता सिर्फ आराम का है। आज के कठिन रास्ते कल को सरल बनाते है, आज के आराम के रास्ते कल को कठिन बनाते है।

हमारे शास्त्र कहते है कि इन्सान इस दुनियां में ना कुछ लाता है ना कुछ ले जाता है। सच ही कहा है। लेकिन ऐसे में हमारा इतना तो दायित्व बनता है कि हम हमारी और आसपास की दुनियां को बेहतर बनाएं, पर किसी भी हालत में हम इसे खुद के लिए और दूसरों के लिए बदतर नहीं बनाएं।

जिंदगी कैसी भी हो लेकिन आपने उसमें खूबसूरती के तत्व खोज लिए हैं तो अब आपको जीवन के किसी भी मिशन पर आगे बढ़ने के लिए बैसाखियों की जरूरत नहीं है।

02/04/2023

#इम्तहान_जीवनपर्यंत_रहेंगे।

आँखों में सपने लिए और दिल में अरमान लिए कितने युवा दिन-रात एक करके किसी इम्तहान की तैयारी करते हैं। उनमें से कुछ ही सही नक्शा सटीक रणनीति और योजना बनाकर सागर के उसपार विजय पताका लेकर खड़े हो पाते हैं। वे सभी बधाई के पात्र हैं जो उसपार पहुँच जाते हैं लेकिन सागर के इसपार खड़े लोग महज एक इम्तहान हारे हैं, उन्होंने ज़िन्दगी नहीं हारी है।

इम्तहान जीतने वालों ने उतना पा लिया है जितना वो इम्तहान दे सकता है लेकिन जिन्होंने जिन्दगी नहीं हारी है उनकी जद में अभी भी सारा आसमाँ, सारी जमीं और सारी कायनात का हर कोना पाने की प्रबल संभावना है बशर्ते कि किसी इम्तहान में हारने वाला अभी भी प्रयत्नशील है।

वैसे जिन्दगी के इम्तहान कभी खत्म नहीं होते। किसी एक इम्तहान में असफलता खुद को असफल मानने का पैमाना नहीं है।

अगर आपने 'धन' को सफलता का मानक माना है तो अपनी निगाहों को जहाँ गड़ाकर देखोगे तो आप पाओगे कि अलग अलग कर्म-कौशलों में पारंगत लोग खूब कमा रहे हैं। हमने कुछ पढ़े-लिखे होने के भ्रम में उन कामों में यह सोचकर हाथ डाला ही नहीं कि लोग ताना कसेंगे। फ्राइड, ब्रूनर, स्किनर और चोम्स्की के सिद्धांतों को नहीं जानते हुए एक प्रश्न गलत कर दिया तो कोई बड़ा पाप नहीं किया लेकिन यदि आप अपने खुद के कुछ मजबूत सिद्धान्तों को नहीं जानते उनपर कायम नहीं हो; तो दुनियांदारी के हवा के थपेड़े आपको कभी इधर तो कभी उधर धकेलते रहेंगे।

अगर आपने 'यश' को सफलता का मानक माना है तो यह धन, कर्म और संचित कौशलों से पाया जा सकता है। भीड़ में अलग चेहरा बनने के लिए आपको निरन्तर प्रयत्नशील रहने के साथ-साथ अनुसन्धानपरक एवं भारी थकान होने के बावजूद भी ऊर्जावान बने रहना होता है। ऐसे में आपको दूसरों से ज्यादा जागना पड़ता है, ज्यादा यात्रा करनी पड़ती है, ज्यादा तकलीफ सहनी पड़ती है, आँखे और कान ज्यादा खुले रखने पड़ते हैं, खुद पर ज्यादा भरोसा रखना पड़ता है, अपने चुने गए काम को बेहद प्यार देना होता है। दुनियां के सबसे बड़े व्यावसायिकों के गुल्लक में पहले ही दिन से पैसे बरसने शुरू नहीं हुए, बल्कि शुरुआती दौर में आँसू भी बरसे होंगे, लेकिन एकनिष्ठता से किया गया पुरूषार्थ एकदिन सब कुछ बदल देता है। उस एकदिन के लिए कई दिनों का संघर्षमय जीवन, आनन्द के साथ जीयो या दुःख के साथ, पर जीना पड़ता है।

इम्तहानों में मिली असफलता से बेशक निराशा मिलती है लेकिन कौन जानता है कि जमींदोज मिट्टी से ही कीचड़, लोहा, चांदी, सोना और हीरा निकलता है। जो जितना ज्यादा तपा और दबा वह उतना ही अधिक निखरता है और मूल्यवान बनता है।

ये इम्तहान जीवन की एक छोटी सी घटना मात्र है। इनमें सफल होकर कौनसा जीवन सफल हो जायेगा? जीवन की असली सफलता के लिए आपको अभी प्रतिदिन आने वाले हज़ारों इम्तहानों में पास होना होगा।लोग आपके धैर्य की, साहस की, ईमानदारी की, कर्तव्यनिष्ठा की, जीवन मूल्यों की, आत्मनिष्ठा की पग पग पर परीक्षा लेंगे। उन सब परीक्षाओं में जो सफल होगा, देखना एक दिन सफलता के उदाहरण लोग उसी के देंगे।

बहरहाल जो भी इम्तहान दो, उसमें मेहनत के मामले में कोई कोर कसर मत छोड़ो लेकिन हार जाओ तो कई बड़ी जीतें आपका आगे इंतजार कर रही होती है, चलना आपको ही होगा। पुनः नक्शा अच्छा बनाओ। इसबार पगडण्डी का जायजा ठीक से लेना। कदम भले थक जाय पर मन मस्तिष्क में हार मत मानना। भले पैदल ही सही पर धैर्यपूर्वक पुनः चल पडो। पास में फर्राटे से कोई कार गुजरे तो ईर्ष्या मत करना। न हारने वाले व्यक्ति से धनवान इस संसार में कोई नहीं है।
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