18/08/2021
ये पोस्ट उन #बकलोलों के लिए हैं,,जिन्हें इतिहास का क-ख-ग भी नही पता फिर भी जातीय द्वेष में एक दूसरे पे ही उँगली उठाते रहते हैं।
20 साल अमेरिका का समर्थन और आधुनिक हथियार मिलने के बाद भी ये #अफ़ग़ान 20 दिनो में ही घुटने टेक कर अपनी बहन बेटियों को #तालिबान के लड़ाकों को सोंपने तैयार हो गए!
ये घटना देखती हूँ तो गर्व से मस्तक उठ जाता हैं कि हज़ारों सालो की लूट और #इस्लामिक_बर्बरता से लड़ते हुए #हमारे_पूर्वजों ने हमें #सनातनी रखा! हो सकता हैं कुछ लोगों को अपनी अपनी जाति के योद्धाओं पर गर्व हो लेकिन मुझे अपने सभी वीर बलिदानी पूर्वजों पर गर्व हैं...
वो महान लोग किसी भी जाति या समुदाय से क्यों न हो लेकिन उनके अदम्य साहस और बलिदान के कारण ही आज हम हैं! वर्तमान में जो वहाँ में हो रहा हैं उसको देख कर समझ आता हैं कि इस्लामिक आक्रांताओं की लूट का समय देश में क्या स्तिथि रही होगी ?
आख़िर कैसे जब #मक्का से इंसानी खून की प्यासी मुस्लिम आक्रांताओ की तलवार लपलपाते हुए निकली थी तो एक झटके में ही ईरान, इराक, सीरिया, मिश्र, दमिश्क,अफगानिस्तान, कतर, बलूचिस्तान से ले के मंगोलिया और रूस तक ध्वस्त होते चले गए थे उन देशों में स्थानीय धर्मों परम्पराओं का समाप्त कर #शिरयत_कानून लागू हो गया और बड़ी शान से इस्लाम का झंडा आसमान चूमता हुआ अफगानिस्तान होते हुए सिंध के रास्ते हिंदुस्तान पहुंचा
यहां पहुंचते ही इस्लाम की लगाम आगे बढ़ के क्षत्रियों ने थाम ली थी भीषण रक्तपात हुआ पीढ़ी दर पीढ़ी तक #क्षत्रिय_राजवंशों से ले के आम क्षत्रियों ने इस्लाम की नकेल ढीली न पड़ने दी एक साथ तीन तीन पीढ़ियां अपने #मातृभूमि के लिए बलि चढ़ गए पुस्त दर पुस्त मातृ भूमि के लिए अपना सर्वकुछ बलिदान कर दिया एक समय ऐसा आया जब 18 साल से ऊपर के युवक/वीर योद्धा ही न रहे क्षत्रियों राजपूतो में ..!
#विधवाओं का अंबार लग गया ..! इसी वजह से सती प्रथा जौहर जैसी व्यवस्थाएं आकार लेने लगी आज इस देश में उसी प्रथा पर भंसाली जैसे सुवर फिल्मकार मजाक उड़ाते हुए फ़िल्म बनता है। देश के लिए जज्वा के लिए इस प्रकार के कविता सुनाया जाता था #राजपुरोहितो के द्वारा।
"बारह बरस ले कुकुर जीये ,, औ सोरह ले जिये सियार ।
बरस अट्ठारह क्षत्रिय जिये ,, त ओकरे जीये पे धिक्कार"
यह क्षत्रियो का ही संघर्ष और युद्ध का परिणाम का नतीजा हुआ के इस्लाम यहीं फंस के रह गया ...7वीं सदी में भारत मे घुसने की कोशिश करने वाला ईस्लाम 12वीं सदी में घुसने में जैसे तैसे कामयाब हो पाए ,,,पर उसके बाद भी उनको कभी कामयाबी नही मिली, हमेशा उनको #पृथ्वीराज, जयचंद्र भीमदेव सोलंकी,राणा कुम्भा, राणा सांगा,महाराणा प्रताप, वीर दुर्गादास, राजा मान सिंह, वीर शिवाजी,वीर छत्रसाल,राणा राज सिंह जैसे कई राजाओं से चुनौति मिलती रही तभी आज भी भारत में #हिन्दू_राष्ट्र है
सोचिए जरा इन क्रूर 1000 वर्षों में कितना संघर्ष किया होगा हमारे पूर्वजों ने .
और इसी संघर्ष की वजह से भारत के अलावा चाइना,कोरिया, जापान, नेपाल जैसे भारत के पूर्वी राज्य इस्लाम के हमले से बच गए।