Āchary Kalki Krishnan

Āchary Kalki Krishnan

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Best Astrologer, Numerologist and Vastu Expert & Logo Shastra Consultant having 30 years of teaching & practicing experience in these sciences.

Successfully transformed lives through excellent Astrology & Vastu Services in Noida & whole of India. Achary Kalki Krishnan Ji, the founder of AstroDevam.com, is a famous Astrologer, Numerologist, and Vastu Expert in India. Hailing from the sacred site of Vindhyachal, India, his spiritual inclination began in early childhood. With academic achievements including B.Com, LLB, ACMA, Jyotish Shastri,

20/01/2026

दो दिन पहले जर्मनी से जब मेरे सुपुत्र आए तो मेरे लिए एक स्वेटर लेकर आए। जब स्वेटर पहना गया तो पत्नी की प्रतिक्रियाएं कुछ अलग ही सी थी।
स्वेटर बहुत बड़ा है, कंधे लटके हुए हैं, आदि आदि। लेकिन सच कहूं तो स्वेटर इतना गर्म था कि उतारने का मन ही नहीं किया।
मुझे याद आया कि लगभग 25 वर्ष पहले मैंने कौसानी, उत्तराखंड से अपने स्वर्गीय पिताजी के लिए वहां की ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित स्वेटर लेकर आया और पिताजी ने पहना तो स्वर्गीया मां ने तुरंत कहा, इसका आकार तो देखो, यह स्वेटर नहीं झिंगोला है। लेकिन पिताजी उस झिंगोले को शान से पहनकर घूमने लगे, यह कहकर कि इतना गर्म स्वेटर तो जीवन में कभी पहना ही नहीं।
समय बदलता रहेगा, लेकिन बेटे ऐसे ही बेसाइज स्वेटर लाते रहेंगे और पिताओं को वह दुनिया का सबसे गर्म स्वेटर लगता रहेगा।
Two days ago, when my son came from Germany, he brought a sweater for me. When I put on the sweater, my wife's reactions were quite different.
"The sweater is too big, the shoulders are drooping," and so on. But to be honest, the sweater was so warm that I didn't feel like taking it off.
I remembered that about 25 years ago, I brought a sweater for my late father from Kausani, Uttarakhand, which was made by the local women there. When my father wore it, my late mother immediately said, "Look at the size of it, it's not a sweater, it's a sack!" But my father proudly wore that "sack," saying that he had never worn such a warm sweater in his life.
Times will keep changing, but sons will continue to bring oversized sweaters like this, and fathers will continue to feel that they are the warmest sweaters in the world.

04/01/2026

धुरंधर
इस फिल्म को देखने का मन तो बना लिया था, लेकिन ओटीटी पर, क्योंकि जनवरी में ही यह नेटफ्लिक्स पर आ जाएगी। लेकिन मेरे सुपुत्र आदित्य ने सलाह दी कि यह फिल्म थिएटर में ही जाकर देखना उचित होगा।
आदित्य की सलाह ठीक ही थी। 3 घंटे से ज्यादा की फिल्म में शायद ही कोई ऐसा पल आया होगा कि जब हमें इधर-उधर देखने का मौका मिले।
भरत मुनि ने नाट्यशास्त्र में नव रसों की व्याख्या की है। फिल्म में इन सारे नव रसों का पूर्ण आनंद मिला, अर्थात पैसा वसूल।
यह दूसरी 'शोले' है, हालांकि शोले और इसमें इतना अंतर है कि जहां शोले फिल्म में बहुत सारे दृश्य भारतीय फिल्मों और विदेशी फिल्मों की सीधे-सीधे नकल मात्र थे, यह फिल्म पूरी की पूरी मौलिक है।
मीडिया में एक विशेष विचारधारा के लोग इसे प्रोपगेंडा फिल्म बता रहे हैं, लेकिन अगर यह प्रोपगंडा फिल्म है तो और भी अच्छा है, क्योंकि प्रोपगंडा उस तरह का है, जैसा हॉलीवुड में जेम्स बॉन्ड वाली फिल्मों ने अमेरिकन सुप्रीमेसी को धीरे-धीरे पूरी दुनिया के मनोमस्तिष्क और चिंतन में फैला दिया था। बाकी जो राष्ट्र विरोधी प्रोपेगेंडा हम हैदर, फना, माचिस, जवान, पठान, पीके, रंग दे बसंती और ऐसी तमाम फिल्मों में झेल चुके हैं, उससे तो यह बहुत ही अच्छा है।
धुरंधर तो जरूर देखिए और थिएटर में जाकर देखिए, साथ-साथ अगर आप फिल्मों के शौकीन हैं और 2025 में निम्न तीन फिल्में नहीं देखे हैं तो देख ही लीजिए, छावा, सैयारा और महाअवतार नरसिंहा। तीनों ही अलग तरह की फिल्में हैं लेकिन बहुत ही ही उत्कृष्ट कोटि की। खासकर महाअवतार नरसिंहा, जो एक एनिमेशन फिल्म है, उसमें नरसिंह अवतार और हिरणकश्यप के बीच युद्ध के एक्शन सीन आपको चौंका देंगे।
#धुरंधर

Photos from Āchary Kalki Krishnan's post 28/12/2025

अभी मेरे छोटे भाई मनोज जी गृह नगर मिर्जापुर से जोधपुर होते हुए नोएडा आए तो साथ में जोधपुर की फेनी के साथ-साथ मिर्जापुर से फेटुवा भी लेकर आए।
फेनी पर फिर कभी चर्चा करेंगे। आज बात करते हैं फेटुवा की।
फेटुवा या फेटुआ मिर्जापुर की एक अलग ही विशिष्ट प्रकार की मिठाई है जो सामान्यतः अन्य स्थानों पर नहीं मिलती है।
इस मिठाई को आप इस तरह समझ सकते हैं कि अगर लड्डू बनाते समय उसमें शुद्ध घी बहुत ज्यादा डाल दिया जाए और सारे मिश्रण को खूब फेंटा जाए, जिससे वह खूब हल्का हो जाए और फिर उस मिश्रण को किसी तरीके से आकार देने का प्रयास किया जाए तो उसे फेटुवा कहेंगे। इसका नाम इसको तैयार करते समय फेटे जाने की प्रक्रिया के कारण ही पड़ा है।
घी की अधिकता के कारण यह थोड़ा गीला सा रहता है, इसीलिए इसे लड्डू की तरह बांधा नहीं जा सकता है। संलग्न चित्रों में आप देख सकते हैं कि यह थोड़ा बेडौल सा ही रहता है। काफी फेंटे जाने के कारण घी की ज्यादा मात्रा रहने पर भी यह गरिष्ठ न रहकर सुपाच्य हो जाता है।
मनोज जी, जो फेटुवा लेकर आए थे, वह बाजरे के आटे से बनी थी। इसकी तासीर थोड़ी गर्म होती है। यह इतना स्वादिष्ट था कि आप देख सकते हैं कि दो-तीन दिन में ही आधे से ज्यादा डिब्बा खाली हो गया है।
वैसे यह मिठाई मूंग के आटे और चने के आटे से भी बहुत ही स्वादिष्ट बनती है।
कुछ दिनों से काजू को पीसकर के भी फेटुवा बनने लगा है, जिसकी लज्जत एकदम अलग ही होती है।
कुछ वर्ष पूर्व वाराणसी में रहने वाले मेरे भांजे, जिनका भी नाम मनोज ही है, और जिनका सूखे मेवे या ड्राई फ्रूट्स का काम है,काजू से बना हुआ फेटुवा खिलाया था, उसका स्वाद एकदम अलग ही स्तर का था।
यह स्थानीय मिठाई मिर्जापुर वाराणसी में दुकानों पर और घरों में भी जाड़े के समय ही बनाई जाती है, क्योंकि ग्रीष्मकाल में इतने घी वाली मिठाई खाना उचित भी नहीं होता है और गर्मी के कारण वह पिघलकर एकदम हलवे का आकार ले लेगा। सबसे अच्छी बात है कि हर दुकान और हर घर के फेटुए का स्वाद एकदम अलग होता है। क्षेत्र के हलवाई दालचीनी, बड़ी इलायची, छोटी इलायची, लवंग, जायफल आदि के भिन्न-भिन्न सम्मिश्रण से और इसमें पड़ने वाली चीनी और दाल किस स्तर तक पीसी जाए, दरदरा या एकदम महीन, ऐसे प्रयोगों से अपने-अपने फेटुए का वैशिष्ट्य विकसित करते हैं।
तो कभी जाड़े में वाराणसी या मिर्जापुर की यात्रा करें तो फेटुए का आनंद जरूर ले।

Photos from Āchary Kalki Krishnan's post 27/12/2025

दिल्ली के अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आदरणीय स्वर्गीय राम सुतार जी, जो परिवार के वरिष्ठ सदस्य की भांति ही थे, के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। पुष्पार्पण करते वक्त सच में मन एक बार फिर से भावुक हो गया।
चित्र में सुतार जी की जो आवक्ष प्रतिमा दिख रही है, वह उनके अत्यंत प्रतिभाशाली पुत्र अनिल सुतार जी ने चार दिन पहले ही तैयार की। महान पिता के प्रतिभाशाली पुत्र।
इस अवसर पर सुतार जी की महान कृतियों के चित्र भी प्रदर्शित किए गए।
A condolence meeting was held at the Ambedkar International Centre in Delhi for the revered late Ram Sutar ji, who was like a senior member of the family. My heart was truly filled with emotion once again while offering floral tributes.
The bust of Sutar ji visible in the picture was created just four days ago by his extremely talented son, Anil Sutar ji. A talented son of a great father. Pictures of Sutar ji's great works were also displayed on this occasion.
Swati Sutar

25/12/2025

You don’t need a factory to become a billionaire.

You need an idea backed by unshakeable belief.

Jesus Christ owned no land, no army, no wealth

Yet His belief created a movement followed by billions.

Belief builds empires.

Doubt builds excuses.

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Photos from Āchary Kalki Krishnan's post 23/12/2025

सन 2016 की 29 और 30 जुलाई के बीच की मध्य रात्रि में देश की राजधानी दिल्ली के बहुत पास हुई इस सामूहिक बलात्कार की घटना पर कल फैसला आ गया और अपराधियों को अधिकतम सजा भी हुई है। घटना के एक-दो दिन बाद जब मीडिया में खबर आई तो लगता था कि इस भीषण अपराध ने समाज की चेतना को हिला दिया है।
लेकिन जमीन पर सच्चाई कुछ और ही थी। पीड़ित परिवार के साथ कुछ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा था, जैसे वही अपराधी हो। घटना के कुछ ही दिन बाद, 18 अगस्त को उस वर्ष रक्षाबंधन था। परिवार को समर्थन देने के लिए मैंने पीड़िता बेटी से राखी बंधवाकर उसका मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया। संलग्न चित्र उसी समय का है।
लेकिन सामान्य भारतीय समाज अभी भी अपनी मनोग्रंथियों से उबरा नहीं है। पिछले नौ वर्ष में पीड़ित परिवार को केवल अपनी पहचान छिपाने के लिए पांच बार अपना मकान बदलना पड़ा।
यह विवशता अपराधियों के परिवार की होती तो समझ में बात आती है, लेकिन अगर यह विवशता पीड़ित परिवार की है तो पूरे समाज को आईने में अपना चेहरा देखना चाहिए।

Photos from Āchary Kalki Krishnan's post 22/12/2025

वंदे भारत एक्सप्रेस में वायुयानों की तरह आपकी सीट पर मनोरंजन देने का वादा किया जा रहा है तो अभी मैंने वाराणसी से दिल्ली की यात्रा वंदे भारत एक्सप्रेस से की और चेक किया कि मनोरंजन के नाम पर क्या विकल्प उपलब्ध है।
कुल मिलाकर दो हिंदी फिल्में, दो तमिल फिल्में और तीन अंग्रेजी फिल्में और जो इन फिल्मों के नाम पर विकल्प चुने गए हैं, उनको देखकर आपको मजा आ जाएगा। सबसे मजेदार तो टीवी शो के नाम पर जो विकल्प थे, वे थे। आप संलग्न चित्रों को देखकर रेलवे मंत्रालय के अधिकारियों के फिल्मी और टेलीविजन के ज्ञान के स्तर का अनुमान लगा सकते हैं।
इससे ज्यादा और स्तरीय विकल्प तो विदेशी एयरलाइंस हिंदी फिल्मों की और अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्मों की देती है। जब भी मैंने वास्तु संबंधी यात्राओं के लिए इन एयरलाइंस के मनोरंजन के विकल्पों को देखा तो भारतीय फिल्मों के उनके चुनाव को देखकर आश्चर्य भी होता है और प्रसन्नता भी।
और हमारे घर में इस वंदे भारत एक्सप्रेस का यह हाल है।
Travelled on (Varanasi → Delhi) and checked the onboard entertainment.
The “choices” were honestly limited as well as funny: 2 Hindi + 2 Tamil + 3 English films — that’s it. (See the attached images)
Even international airlines offer a much better variety, on which I travel often for visits, so I’m comparing from experience.
IRCTC Government of India Ashwini Vaishnaw

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