11/05/2025
सतयुग में वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को, अर्थात् आज ही के दिन, अपने परम लाड़ले भक्त की रक्षा के लिए भगवान ने नृसिंह रूप में अवतार लिया था । सायंकाल की इसी बेला में प्रभु श्री नृसिंह रूप में प्रकट हुए थे।
भगवान नृसिंह के भयंकर रूप और उनके क्रोध को देखकर ब्रह्मा, शंकर तथा अन्य सभी देवी-देवता डर कर पीछे हट गए थे। तब अपने गुरु नारद के कहने पर 5 वर्ष के भक्त बालक प्रह्लाद ने ही आगे बढ़कर भगवान नृसिंह का पृथ्वी पर स्वागत किया और उनकी सेवा में यह स्तुति गाई 👇