05/07/2026
तलाकशुदा महिला की गुजारा भत्ता राशि 10 लाख से बढ़ाकर 40 लाख, झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
KanoonKey99
रांची | विधिक संवाददाता
झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में तलाकशुदा महिला को मिलने वाली एकमुश्त स्थायी गुजारा भत्ता (Permanent Alimony) की राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों, बढ़ती महंगाई, महिला की आयु, भविष्य की आवश्यकताओं और सम्मानजनक जीवन के अधिकार को देखते हुए पहले निर्धारित राशि पर्याप्त नहीं थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 1984 में हुए विवाह से जुड़ा है। पति-पत्नी वर्ष 1990 से अलग रह रहे थे और लगभग 36 वर्षों तक अलग रहने के बाद वर्ष 2022 में फैमिली कोर्ट ने दोनों के तलाक को मंजूरी दे दी थी।
फैमिली कोर्ट ने तलाक के साथ महिला को 10 लाख रुपये एकमुश्त स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। महिला ने इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने किन आधारों पर बढ़ाई राशि?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर विचार किया—
महिला की उम्र लगभग 55 वर्ष है।
महिला के पास आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है।
भविष्य में चिकित्सा और दैनिक जीवन-यापन का खर्च बढ़ेगा।
लगातार बढ़ती महंगाई के कारण 10 लाख रुपये पर्याप्त नहीं माने जा सकते।
पति रेलवे सेवा से जुड़े रहे हैं और उन्हें पेंशन व अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त होंगे।
दोनों पक्ष लगभग 36 वर्षों से अलग रह रहे हैं, इसलिए वैवाहिक संबंध व्यवहारिक रूप से समाप्त हो चुके हैं।
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इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने गुजारा भत्ता बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने का आदेश दिया।
भुगतान कैसे करना होगा?
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पति 40 लाख रुपये की राशि चार समान किस्तों में 12 महीने के भीतर अदा करेंगे। यदि समय पर भुगतान नहीं किया गया तो महिला उचित कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी
अदालत ने कहा कि—
"महिला को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। वर्तमान परिस्थितियों में 10 लाख रुपये पर्याप्त नहीं हैं।"
इस फैसले का महत्व
यह निर्णय बताता है कि स्थायी गुजारा भत्ता तय करते समय अदालत केवल पुरानी आय या पहले निर्धारित राशि को नहीं देखती, बल्कि—
महंगाई,
महिला की आयु,
स्वास्थ्य,
भविष्य की आर्थिक जरूरतें,
पति की आर्थिक स्थिति,
तथा सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार
जैसे सभी पहलुओं का संतुलित मूल्यांकन करती है।
नोट: प्रत्येक मामला अपने तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि हर तलाक के मामले में 40 लाख रुपये का गुजारा भत्ता मिलेगा। अदालत प्रत्येक मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर अलग निर्णय देती है।