11/12/2024
पेशे से एक शिक्षक हूँ । ये घटना देखकर इनके शिक्षकों और अभिभावकों के शिक्षा-दीक्षा को लेकर सोचने लग गया कि कितना morality से इन्हें योग्य बनाया गया होगा !!
ज्यूडिशियरी को सबसे उच्च स्थान ना सिर्फ भारत में और धरती पर अपितु पूरे ब्रम्हांड में दिया गया है।
अतुल को यही शिक्षा दिया गया जिसे वह इस वास्तविक दुनिया में व्यवहारिक रूप से नहीं समझ पाया।
सोचने लग गया हूँ कि आजकल हमलोग सभी जितने भी शरीफ आचरण के लोग हैं अपने बच्चों को सादगी और किताबी बातों से रूबरू कराते हैं। उसे इस कठोर समाज की अन्तरगियों का खेल और सड़े तंत्र से दूर रहकर ईमानदारी और सादगी का पाठ पढ़ाते हैं जिसमें एक वकील, एक जज और वास्तविक मुवक्किल होता है जिसे इंसाफ मिल जाता है। उसे ये कभी नहीं सिखाते कि कभी-कभी (बेशक खुद ना करे) पर लोगों द्वारा कैसे तंत्र को रसूक और बायस से जबरदस्ती फेवर किया जाता है जहां प्रिंसिपल जज जैसे ओहदे की मर्यादा तक ताड़-ताड़ कर दिया जाता है।
अतुल वाकई होनहार और बहुमुखी-प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। उनसे समाज ही नहीं पूरे देश को कुछ नया मिलता।
अभी कुछ दिन पहले सुशांत सिंह राजपूत का केश सामने आया था जिसे एक षडयंत्र ने अपना शिकार बना लिया।
समय के साथ कुछ कानूनों में बदलाव की आवश्यकता है।
कितना दुखद अंत एक इंसान अपने जीवन का करने जा रहा है, बीते 2 सालों में 120 तारीखें कोर्ट की लगवाई गई थी, आप और हम समझ सकते हैं कि अतुल को कितना मानसिक तनाव दिया गया होगा, एक महिला अपने अधिकारों का किस तरह दुरुपयोग करके व्यक्ति की जीवन लीला ही समाप्त कर गई अतुल सुभाष की मां का रोकर बुरा हाल, पिता की गुहार- ऐसे दिन देखने के लिए मैंने बेटे की शादी की थी??? ...कलयुग यही है।।