30/11/2023
आज महान भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस का जन्मदिन है।
जन्म:30 नवम्बर 1858 , देहांत: 23 नवम्बर 1937
श्री जगदीश चंद्र बोस भारत के प्रसिद्ध भौतिकविद् तथा पादपक्रिया वैज्ञानिक थे। जगदीश चंद्र बोस ने कई महान ग्रंथ भी लिखे हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित विषयों पर आधारित हैं, जैसे- सजीव तथा निर्जीव की अभिक्रियाएँ (1902), वनस्पतियों की अभिक्रिया (1906), पौधों की प्रेरक यांत्रिकी (1926) इत्यादि।
कर्म-क्षेत्र: भौतिकी, जीवभौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पतिविज्ञान, पुरातत्त्व, बांग्लासाहित्य, बांग्ला विज्ञानकथाएँ
संस्थाये: कलकत्ता विश्वविद्यालय, क्राइस्ट महाविद्यालय, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, लंदन विश्वविद्यालय
विशेष कार्य: रेडियो, मिलीमीटर तरंगें, क्रेस्कोग्राफ़
पुरस्कार: नाइट, 'रॉयल सोसायटी लंदन' के फ़ॅलोशिप
कार्य: जगदीश चन्द्र बोस, जे.सी.बोस के नाम से प्रसिद्ध थे। आधुनिक भारतीय विज्ञान के इतिहास में उनका अद्वितीय स्थान है। उन्हें भारत का प्रथम आधुनिक वैज्ञानिक माना जाता है। 917 में जगदीश चंद्र बोस को "नाइट" की उपाधि प्रदान की गई तथा शीघ्र ही भौतिक तथा जीव विज्ञान के लिए 'रॉयल सोसायटी लंदन' के फैलो चुन लिए गए। बोस ने अपना पूरा शोधकार्य किसी अच्छे (महगें) उपकरण और प्रयोगशाला से नहीं किया था, इसलिये जगदीश चंद्र बोस एक अच्छी प्रयोगशाला बनाने की सोच रहे थे।
प्रयोग और सफलता
1.जगदीश चंद्र बोस ने सूक्ष्म तरंगों (माइक्रोवेव) के क्षेत्र में वैज्ञानिक कार्य तथा अपवर्तन, विवर्तन और ध्रुवीकरण के विषय में अपने प्रयोग आरंभ कर दिये थे।
2.लघु तरंगदैर्ध्य, रेडियो तरंगों तथा श्वेत एवं पराबैंगनी प्रकाश दोनों के रिसीवर में गेलेना क्रिस्टल का प्रयोग बोस के द्वारा ही विकसित किया गया था।
3.मारकोनी के प्रदर्शन से 2 वर्ष पहले ही 1885 में बोस ने रेडियो तरंगों द्वारा बेतार संचार का प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में जगदीश चंद्र बोस ने दूर से एक घण्टी बजाई और बारूद में विस्फोट कराया था।
4.आजकल प्रचलित बहुत सारे माइक्रोवेव उपकरण जैसे वेव गाईड, ध्रुवक, परावैद्युत लैंस, विद्युतचुम्बकीय विकिरण के लिये अर्धचालक संसूचक, इन सभी उपकरणों का उन्नींसवी सदी के अंतिम दशक में बोस ने अविष्कार किया और उपयोग किया था।
5.बोस ने ही सूर्य से आने वाले विद्युत चुम्बकीय विकिरण के अस्तित्व का सुझाव दिया था जिसकी पुष्टि 1944 में हुई।
6.इसके बाद बोस ने, किसी घटना पर पौधों की प्रतिक्रिया पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया। बोस ने दिखाया कि यांत्रिक, ताप, विद्युत तथा रासायनिक जैसी विभिन्न प्रकार की उत्तेजनाओं में सब्जियों के ऊतक भी प्राणियों के समान विद्युतीय संकेत उत्पन्न करते हैं।