Excellent Children Academy sr. sec. School Hasampur

Excellent Children Academy sr. sec. School  Hasampur A mission for complete co-Eduction http://eca-hasampur.com/

02/05/2024

* संदर्भ:- आरटीई में आयु सीमा और प्रवेश तिथि में संशोधन।*
अभिभावक अब 10 मई 2024 तक कर सकेंगे आवेदन। 13 मई 2024 को निकलेगी लॉटरी।
*RTE प्रवेश हेतु संशोधित आयु सीमा*

नर्सरी pp3 के लिए👇
31-03-2020 से 31-07-2021 के मध्य जन्म होना चाहिए

प्रथम क्लास के लिए👇
31-03-2017 से 31-07-2018 के मध्य जन्म होना चाहिए।

23/04/2024

Let us invoke the blessings of Lord Hanuman to bestow upon us the virtues of humility, courage, and selflessness.

ECA परिवार के प्रिय सदस्यनए शैक्षणिक वर्ष के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है।प्रत्येक नए सत्र क...
14/04/2024

ECA परिवार के प्रिय सदस्य

नए शैक्षणिक वर्ष के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है।

प्रत्येक नए सत्र के साथ नया उत्साह, नए दृष्टिकोण और विकास और सीखने के लिए असीम अवसर आते हैं। ECAGOS प्रत्येक शैक्षणिक यात्रा को उत्साह और दृढ़ संकल्प के साथ अपनाता है। जैसा कि हम अपने सामने आने वाली चुनौतियों और अवसरों की ओर देखते हैं, आइए हम सहयोग, लचीलापन और अनुकूलनशीलता के महत्व को याद रखें। साथ मिलकर, हम किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं और महानता प्राप्त कर सकते हैं।

मैं आप सभी को एक सफल और पुरस्कृत शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं देता हूं।
Manoj Singh Tanwar

प्रिय BPSian और ECASian!शैक्षणिक सत्र 2024-2025 में आपका स्वागत है! जैसे ही हम एक नए स्कूल वर्ष की शुरुआत करते हैं, आइए ...
14/04/2024

प्रिय BPSian और ECASian!

शैक्षणिक सत्र 2024-2025 में आपका स्वागत है! जैसे ही हम एक नए स्कूल वर्ष की शुरुआत करते हैं, आइए हम एक बार फिर अपने स्कूल के आदर्श वाक्य को अपनाएँ; "विश्वास और प्रतिबद्धता के माध्यम से उत्कृष्टता"।

BPS और ECA में, हम मानते हैं कि प्रत्येक बच्चा अद्वितीय है और ईश्वर की एक सुंदर रचना के रूप में विशेष प्रतिभा रखता है। एक खुशहाल, स्वस्थ और अनुकूल शिक्षण वातावरण के साथ, हमारी शिक्षाशास्त्र ने सभी शिक्षार्थियों के समग्र विकास को सुनिश्चित किया है। हम प्रत्येक BPSian और ECASian को समृद्ध शिक्षण अनुभव और उनकी पूरी क्षमता का एहसास करने में मदद करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित हैं, साथ ही उन्हें मूल्यवान, स्वीकृत और सुरक्षित महसूस कराते हैं। हम उन्हें उत्पादक नागरिक बनाने के लिए नैतिक और नैतिक मूल्यों को विकसित करने के लिए भी दृढ़ हैं।

आइए हम यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करें कि हमारे छात्र न केवल अकादमिक रूप से उत्कृष्ट हों बल्कि समाज के जिम्मेदार और दयालु सदस्य भी बनें।

मैं सभी को एक सफल और पुरस्कृत नए स्कूल वर्ष की शुभकामनाएं देता हूँ!

मनोज सिंह तंवर
अध्यक्ष,
Excellent group of Schools

Today the entire nation celebrates the 133th Birth Anniversary of Dr. Bhimrao Ambedkar. The contribution of Babasaheb in...
14/04/2024

Today the entire nation celebrates the 133th Birth Anniversary of Dr. Bhimrao Ambedkar. The contribution of Babasaheb in the history of our nation in unparalleled - he had also said that our Constitution is strong only as long as the people who use it do so with responsibility else this document will lose its basic soul. He perhaps foresaw misuses of the Constitution like the emergency of 1975.

ईद के इस शुभ अवसर पर हम प्रार्थना करते हैं कि अल्लाह का आशीर्वाद आपके मार्ग को रोशन करे और आपको शाश्वत खुशियों की ओर ले ...
11/04/2024

ईद के इस शुभ अवसर पर हम प्रार्थना करते हैं कि अल्लाह का आशीर्वाद आपके मार्ग को रोशन करे और आपको शाश्वत खुशियों की ओर ले जाए।

गणगौर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के निमाड़, मालवा, बुंदेलखण्ड और ब्रज क्षेत्रों का एक त्यौहार है जो चैत्र मही...
11/04/2024

गणगौर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के निमाड़, मालवा, बुंदेलखण्ड और ब्रज क्षेत्रों का एक त्यौहार है जो चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया (तीज) को आता है। इस दिन कुँवारी लड़कियाँ एवं विवाहित महिलाएँ शिवजी (इसर जी) और पार्वती जी (गौरी) की पूजा करती हैं। पूजा करते हुए दूब से पानी के छींटे देते हुए "गोर गोर गोमती" गीत गाती हैं। इस दिन पूजन के समय रेणुका की गौर बनाकर उस पर महावर, सिन्दूर और चूड़ी चढ़ाने का विशेष प्रावधान है। चन्दन, अक्षत, धूपबत्ती, दीप, नैवेद्य से पूजन करके भोग लगाया जाता है।
गण (शिव) तथा गौर (पार्वती) के इस पर्व में कुँवारी लड़कियाँ मनपसन्द वर पाने की कामना करती हैं। विवाहित महिलायें चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर पूजन तथा व्रत कर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।
होलिका दहन के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक, 18 दिनों तक चलने वाला त्योहार है -गणगौर। यह माना जाता है कि माता गवरजा होली के दूसरे दिन अपने पीहर आती हैं तथा अठारह दिनों के बाद ईसर (भगवान शिव ) उन्हें फिर लेने के लिए आते हैं ,चैत्र शुक्ल तृतीया को उनकी विदाई होती है।
गणगौर की पूजा में गाये जाने वाले लोकगीत इस अनूठे पर्व की आत्मा हैं। इस पर्व में गवरजा और ईसर की बड़ी बहन और जीजाजी के रूप में गीतों के माध्यम से पूजा होती है तथा उन गीतों के उपरांत अपने परिजनों के नाम लिए जाते हैं। राजस्थान के कई प्रदेशों में गणगौर पूजन एक आवश्यक वैवाहिक रीत के रूप में भी प्रचलित है।
निमाड़ में गणगौर का पवित्र त्योहार बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है त्योहार के अंतिम दिन प्रत्येक गांव में भंडारे का आयोजन होता है तथा माता की विदाई की जाती है
गणगौर पूजन में कन्याएँ और महिलाएँ अपने लिए अखण्ड सौभाग्य, अपने पीहर और ससुराल की समृद्धि तथा गणगौर से प्रतिवर्ष फिर से आने का आग्रह करती हैं।

27/01/2024
आज महान भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस का जन्मदिन है।जन्म:30 नवम्बर 1858 , देहांत: 23 नवम्बर 1937  श्री जगदीश चंद्र बो...
30/11/2023

आज महान भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस का जन्मदिन है।

जन्म:30 नवम्बर 1858 , देहांत: 23 नवम्बर 1937

श्री जगदीश चंद्र बोस भारत के प्रसिद्ध भौतिकविद् तथा पादपक्रिया वैज्ञानिक थे। जगदीश चंद्र बोस ने कई महान ग्रंथ भी लिखे हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित विषयों पर आधारित हैं, जैसे- सजीव तथा निर्जीव की अभिक्रियाएँ (1902), वनस्पतियों की अभिक्रिया (1906), पौधों की प्रेरक यांत्रिकी (1926) इत्यादि।

कर्म-क्षेत्र: भौतिकी, जीवभौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पतिविज्ञान, पुरातत्त्व, बांग्लासाहित्य, बांग्ला विज्ञानकथाएँ

संस्थाये: कलकत्ता विश्वविद्यालय, क्राइस्ट महाविद्यालय, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, लंदन विश्वविद्यालय

विशेष कार्य: रेडियो, मिलीमीटर तरंगें, क्रेस्कोग्राफ़

पुरस्कार: नाइट, 'रॉयल सोसायटी लंदन' के फ़ॅलोशिप

कार्य: जगदीश चन्द्र बोस, जे.सी.बोस के नाम से प्रसिद्ध थे। आधुनिक भारतीय विज्ञान के इतिहास में उनका अद्वितीय स्थान है। उन्हें भारत का प्रथम आधुनिक वैज्ञानिक माना जाता है। 917 में जगदीश चंद्र बोस को "नाइट" की उपाधि प्रदान की गई तथा शीघ्र ही भौतिक तथा जीव विज्ञान के लिए 'रॉयल सोसायटी लंदन' के फैलो चुन लिए गए। बोस ने अपना पूरा शोधकार्य किसी अच्छे (महगें) उपकरण और प्रयोगशाला से नहीं किया था, इसलिये जगदीश चंद्र बोस एक अच्छी प्रयोगशाला बनाने की सोच रहे थे।

प्रयोग और सफलता

1.जगदीश चंद्र बोस ने सूक्ष्म तरंगों (माइक्रोवेव) के क्षेत्र में वैज्ञानिक कार्य तथा अपवर्तन, विवर्तन और ध्रुवीकरण के विषय में अपने प्रयोग आरंभ कर दिये थे।

2.लघु तरंगदैर्ध्य, रेडियो तरंगों तथा श्वेत एवं पराबैंगनी प्रकाश दोनों के रिसीवर में गेलेना क्रिस्टल का प्रयोग बोस के द्वारा ही विकसित किया गया था।

3.मारकोनी के प्रदर्शन से 2 वर्ष पहले ही 1885 में बोस ने रेडियो तरंगों द्वारा बेतार संचार का प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में जगदीश चंद्र बोस ने दूर से एक घण्टी बजाई और बारूद में विस्फोट कराया था।

4.आजकल प्रचलित बहुत सारे माइक्रोवेव उपकरण जैसे वेव गाईड, ध्रुवक, परावैद्युत लैंस, विद्युतचुम्बकीय विकिरण के लिये अर्धचालक संसूचक, इन सभी उपकरणों का उन्नींसवी सदी के अंतिम दशक में बोस ने अविष्कार किया और उपयोग किया था।

5.बोस ने ही सूर्य से आने वाले विद्युत चुम्बकीय विकिरण के अस्तित्व का सुझाव दिया था जिसकी पुष्टि 1944 में हुई।

6.इसके बाद बोस ने, किसी घटना पर पौधों की प्रतिक्रिया पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया। बोस ने दिखाया कि यांत्रिक, ताप, विद्युत तथा रासायनिक जैसी विभिन्न प्रकार की उत्तेजनाओं में सब्जियों के ऊतक भी प्राणियों के समान विद्युतीय संकेत उत्पन्न करते हैं।

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Nim Ka Thana
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