12/07/2015
उ.प्र.में आरक्षण में प्रमोशन के बाद रिवर्ट होने पर उन लोगों के लिए, जिन्होंने बाबा साहेब को न जाना ----------------------------------- जब लगी नौकरी इनकी तो माता का आशीर्वाद बताया, और घर में बैंड बाजों से रात्रि जागरण करवाया। जब हुआ प्रमोशन तब तु फूला न समाया, दौङा मंदिर और खूब प्रसाद चढाया। जब प्रमोशन में मिला आरक्षण तो दावत में अपनों को भूल गैरो फूल पे गिराया, तुझे न भीम याद आया न भीमसंघर्ष याद आया। तूने तो अपनी पहचान को ही जीवन भर छिपाया, एक-आद भीम जीवनी कभी खरीद के न लाया। शर्म भी न आयी एक फोटो तेरे घर में भीम का ना पाया, सारी दीवारों को तूने देवी देवताओं से सजाया। मौके बे मौके ब्राह्मण घर बुलवाया, पैसे दे पैर छू और हाथों में कलावा भी बंधवाया। डिमोशन हुआ तो समाज याद आया, SC/ST पे हुआ अत्याचार कह कह हल्ला मचाया। आरक्षण तो तूने खाया समाज के काम कभी तू न आया, "भीम ज्ञान चर्चा" यदि अपनो में जाकर की होती और सोई कौम को होता जगाया, तो आज अकेला ना होता तू सताया। क्या कीमत चुकाई बाबा ने,तू इन सब बातों से है पराया, " भीम ज्ञान" को ठुकरा कर तुने अपने को ही भीम से बड़ा बताया। समय से जाग ऐ अन्जान मुसाफिर, हम "भीम वाले हैं" तेरा साथ खून पसीना बहाकर भी निभाते हैं,निभाऐगें और हमेशा ही निभाया।। जय भीम जय भारत