Gurukul
Gurukul-the mind gym
At Gurukul we dont teach but help you to learn. We provide techniques that help the students in propelling their mind to excellence.
29/10/2022
दुनिया काफ़ी तेज़ी से बदल रही है और इसके कई प्रमाण आसपास दिखाई दे रहे हैं। आउटलुक के आगामी अंक के इस कवर को देखिए।
शिक्षक वर्ग हमेशा से पर्दे के पीछे से या यूं कहे लाइमलाइट से हटकर देशनिर्माण का कार्य करता रहा है।
लेकिन 2022 के सेलिब्रिटी अब शिक्षक हैं और वो पढ़ाने की वजह से हैं। इनकी लोकप्रियता अब फ़िल्म सितारों और क्रिकेट खिलाड़ियों से होड़ ले रही है। इनके वीडियो अब यूट्यूब ट्रेंड करते हैं । यहाँ तक की नई रिलीज़, पाकिस्तान को हराने वाले क्रिकेट मैच जैसी सामग्री पीछे रह जाती है।
दिलचस्प बात यह है हमारे समाज ने पिछले दशक में काफी जागरूकता हासिल की है, जहां पहले फिल्मी सितारे रॉल मॉडल माने जाते थे, आज के समय यह स्थान गुरु यानी शिक्षकों ने हासिल कर लिया है। असल में यह है बदलते भारत की तस्वीर जिसे देखकर सुदृढ़, संगठित और विचारशील भारत की युवा पीढ़ी नजर आने लगी है।
जय हिंद, जय भारत।।
13/07/2022
कर्ता करे ना कर सके, गुरु करे सब होय।
सात द्वीप नौ खंड में गुरु से बड़ा ना कोय।।
गुरू पूर्णिमा के अवसर पर समस्त गुरुजनों एवं देश व प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
अमित गुप्ता (गुरु भाई)
Youth Leader
14/10/2021
16/12/2020
बाज पक्षी जिसे हम ईगल या शाहीन भी कहते है। जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे चिचियाना सीखते है उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर सबसे ऊंचा उड़ जाती है। पक्षियों की दुनिया में ऐसी Tough and tight training किसी और की नही होती।
मादा बाज अपने चूजे को लेकर लगभग 12 Km ऊपर ले जाती है। जितने ऊपर अमूमन हवाई जहाज उड़ा करते हैं और वह दूरी तय करने में मादा बाज 7 से 9 मिनट का समय लेती है। यहां से शुरू होती है उस नन्हें चूजे की कठिन परीक्षा। उसे अब यहां बताया जाएगा कि तू किस लिए पैदा हुआ है?तेरी दुनिया क्या है?
तेरी ऊंचाई क्या है? तेरा धर्म बहुत ऊंचा है और फिर मादा बाज उसे अपने पंजों से छोड़ देती है।
धरती की ओर ऊपर से नीचे आते वक्त लगभग 2 Km उस चूजे को आभास ही नहीं होता कि उसके साथ क्या हो रहा है। 7 Kmt. के अंतराल के आने के बाद उस चूजे के पंख जो कंजाइन से जकड़े होते है, वह खुलने लगते हैं। लगभग 9 Kmt. आने के बाद उनके पंख पूरे खुल जाते है। यह जीवन का पहला दौर होता है जब बाज का बच्चा पंख फड़फड़ाता है।
अब धरती से वह लगभग 3000 मीटर दूर है लेकिन अभी वह उड़ना नहीं सीख पाया है। अब धरती के बिल्कुल करीब आता है जहां से वह देख सकता है अपने इलाके को। अब उसकी दूरी धरती से महज 700/800 मीटर होती है लेकिन उसका पंख अभी इतना मजबूत नहीं हुआ है की वो उड़ सके। धरती से लगभग 400/500 मीटर दूरी पर उसे अब लगता है कि उसके जीवन की शायद अंतिम यात्रा है। फिर अचानक से एक पंजा उसे आकर अपनी गिरफ्त मे लेता है और अपने पंखों के दरमियान समा लेता है।
यह पंजा उसकी मां का होता है जो ठीक उसके उपर चिपक कर उड़ रही होती है। और उसकी यह ट्रेनिंग निरंतर चलती रहती है जब तक कि वह उड़ना नहीं सीख जाता। यह ट्रेनिंग एक कमांडो की तरह होती है, तब जाकर दुनिया को एक बाज़ मिलता है अपने से दस गुना अधिक वजनी प्राणी का भी शिकार करता है।
हिंदी में एक कहावत है... "बाज़ के बच्चे मुँडेरों पर नही उड़ते....."
बेशक अपने बच्चों को अपने से चिपका कर रखिए पर उसे दुनियां की मुश्किलों से रूबरू कराइए, उन्हें लड़ना सिखाइए। बिना आवश्यकता के भी संघर्ष करना सिखाइए।
वर्तमान समय की अनन्त सुख सुविधाओं की आदत व अभिवावकों के बेहिसाब लाड़ प्यार ने मिलकर,आपके बच्चों को "ब्रायलर मुर्गे" जैसा बना दिया है जिसके पास मजबूत टंगड़ी तो है पर चल नही सकता। वजनदार पंख तो है पर उड़ नही सकता क्योंकि..
"गमले के पौधे और जमीन के पौधे में बहुत फ़र्क होता है।"
माता पिता अपने बच्चो को कोमल नही कठोर बनाएँ
शस्त्र और शास्त्र दोनो की विद्दा अवश्य दें 🙏 यही आपका प्रथम कर्तव्य है,
AC की हवा मे तभी बैठने दें जब वह गर्मी मे रहना सीख जाए, गाडी की चाबी तभी दें जब वह कई किलोमीटर पैदल चलने से हिचहिचाता न हो ।
06/04/2020
अब तक हमारी टीम ने ईश्वर कृपा और आपके सहयोग से 450 जरुरतमंद घरों की मदद करने की कोशिश की | हमारे इस कार्य में सहयोग देने के लिए आप 8130401439 पर paytm कर सकते हैं | आप सब का साथ रहेगा तो देश में कोई भी भूखा नहीं सोएगा !जय हिंद जय भारत||🙏🙏🙏
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