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20/08/2023

जिंदगी में कुछ बनना ही है तो दीपक जैसा बनिए ताकि खुद जलकर भी दूसरों के घर में उजाला कर सको ।

26/11/2020
Sardar Vallabhbhai Patel- The Bismarck of India | सरदार पटेल- भारत के बिस्मार्क - YouTube 12/11/2020

https://youtu.be/noNnj40widE
सरदार वल्लभ भाई पटेल को लौह पुरुष एवं भारत का विस्मार्क क्यों कहा जाता है!!

Sardar Vallabhbhai Patel- The Bismarck of India | सरदार पटेल- भारत के बिस्मार्क - YouTube Hello friends in today's video we will talk about sardar Vallabhbhai Patel and why he was also known as the Bismarck of India. Born on 31st October 1875, Sardar...

20/10/2020

विश्लेषण : #आयुष्मान_सहकार_योजना
✍️✍️ महत्वपूर्ण जानकारी
🔷🔷केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आयुष्मान सहकार योजना की शुरुआत की।

आयुष्मान सहकार योजना के साथ राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहकारी समितियों को महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में मदद करने के लिए यह योजना तैयार की है। एनसीडीसी संभावित सहकारी समितियों को स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था के लिए 10,000 करोड़ रुपये का ऋण प्रदान करेगी।

♦️♦️योजना के उद्देश्य:-

सहकारी समितियों द्वारा अस्पतालों / स्वास्थ्य सेवा / शिक्षा सुविधाओं के माध्यम से सस्ती और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं के प्रावधान की सहायता करना
सहकारी समितियों द्वारा आयुष सुविधाओं को बढ़ावा देना
सहकारी समितियों की सहायता के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के उद्देश्यों को पूरा करना
सहकारी समितियों की सहायता के लिए राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन में भाग लेना
सहकारी समितियों की सहायता के लिए शिक्षा, सेवाओं और बीमा सहित व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना।
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) के बारे में:-

यह 1963 में संसद के एक अधिनियम के तहत भारत सरकार द्वारा स्थापित एक शीर्ष स्तरीय वैधानिक स्वायत्त संस्थान है।
यह सहकारी सिद्धांतों पर कृषि उत्पादों, खाद्य पदार्थों, औद्योगिक सामानों, पशुधन, कुछ अन्य वस्तुओं और सेवाओं जैसे कि अस्पताल और स्वास्थ्य और शिक्षा आदि के उत्पादन, प्रक्रिया, बाजार, भंडारण, निर्यात और आयात के कार्यक्रमों की योजना और प्रचार के लिए बनाया गया है।
यह तीनों स्तरों, प्राथमिक, जिला और सर्वोच्च / बहु-राज्य में सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। एनसीडीसी भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है।

21/09/2020

IAS PCS Exam specific ♦ 8 दैनिक समसामयिकी
🔶1. #डोनाल्ड #ट्रम्प जिसे मिडिल-ईस्ट के लिए नई सुबह बता रहे हैं, वह अरब देशों में बिखराव की वजह भी बन सकती है
♦🔶♦ • यूएई और बहरीन इजराइल के साथ डिप्लोमैटिक रिलेशन बना चुके हैं। अब अगर यह अनुमान लगाया जाए कि अक्टूबर में सऊदी अरब के शासन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) भी ऐसा ही करेंगे तो कुछ गलत नहीं होगा।
• इसमें कोई शक नहीं कि सऊदी अरब मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी ताकत है। और उसकी मर्जी के बिना यूएई और बहरीन इजराइल से समझौता नहीं कर सकते थे। दोनों देशों में राजशाही है। अब अगर सऊदी अरब भी इजराइल के साथ रिश्ते बना लेता है तो यह मध्य पूर्व में विघटन ही कहा जाएगा।
• अमेरिकी राष्ट्रपति पहले ही कह चुके हैं कि कुछ महीनों में पांच या छह अरब देश और इजराइल के साथ दोस्ताना रिश्तों की शुरुआत करेंगे। ट्रम्प इसे मिडिल ईस्ट में नई सुबह और विश्व शांति में एक नए दौर की शुरुआत बताते हैं।
पिता की सहमति का इंतजार

• प्रिंस सलमान को दुनिया में एमबीएस के नाम से जाना जाता है। एमबीएस कोशिश कर रहे हैं कि पिता सलमान इजराइल से संबंध स्थापित करने के लिए राजी हो जाएं। वो उन्हें बता रहे हैं कि दुनिया कितनी बदल चुकी है।
• एमबीएस बताते होंगे कि डेमोक्रेटिक दौर में पत्रकार जमाल खशोगी कितना बड़ा खतरा बन गए थे और यमन कैसे हमलावर हो गया था। लेकिन, क्या ये बातें इतनी आसान हैं। यूएई और बहरीन को जनता की नाराजगी की फिक्र शायद ज्यादा नहीं है। लेकिन, सऊदी के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता। यह दुनिया के 1 अरब 80 करोड़ मुस्लिमों से जुड़ा मामला हो जाता है।
ये इतना आसान नहीं

• सऊदी के पॉलिटिकल एनालिस्ट अली शिहाबी कहते हैं- अगर एमबीएस इजराइल मामले में आगे बढ़ते हैं तो देश के परंपरावादी, जिहादी और ईरान इसे नहीं मानेगा। 2002 में अरब देशों ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर नजरिया साफ कर दिया था।
• इजराइल से सामान्य रिश्ते रखना आसान नहीं होगा। कई बातों पर विचार करना होगा। व्हाइट हाउस में इजराइल और यूएई के अलावा बहरीन के नेताओं की जो सेरेमनी हुई, उसे फिलिस्तीन के नजरिए से नहीं देखा गया। दरअसल, अरब देशों के लिए समस्या उनके घर में ही है। कॉम्पटीशन है नहीं, टॉर्चर और करप्शन आम बातें हैं।
तो क्या ये ट्रम्प का ड्रामा है

• अरब इजराइल संबंधों के लिए डोनाल्ड ट्रम्प और जेरेड कुशनर और इजराइल में अमेरिकी एम्बेसेडर डेविड फ्रेडमैन ने जमीन तैयार की। डेविड कहते हैं- इजिप्ट और जॉर्डन के बाद अगर दो और देश इजराइल से सामान्य संबंध बनाते हैं तो क्या गलत है।
• यहूदी और अरब जितना करीब आएंगे उतना बेहतर है। ये भी बहुत अच्छा संकेत है कि वेस्ट बैंक को इजराइल में मिलाने की योजना बेंजामिन नेतन्याहू ने रद्द कर दी। उन्होंने इस बात पर भी जोर नहीं दिया कि बहरीन और यूएई इजराइल को यहूदी राष्ट्र के रूप में मान्यता दें।
ट्रम्प की इतिहास में रुचि नहीं

• यूएई या बहरीन से इजराइल को कभी दिक्कत नहीं रही। सवाल तो फिलिस्तीन का है। ट्रम्प और कुशनर इस बात को समझने तैयार नहीं हैं। फिलिस्तीन की समस्या को उन्होंने मजाक बना दिया है। वहां की लड़ाई ऐतिहासिक है और ट्रम्प प्रशासन को इतिहास की समझ नहीं है। लिहाजा, फिलिस्तीन कभी ट्रम्प की इन कोशिशों को स्वीकार नहीं करेगा।
• दरअसल, यह 65 लाख फिलिस्तीन लोगों का मामला है, जो गाजा के अलावा वेस्ट बैंक और इजराइल में रहते हैं। वर्तमान हालात से हल नहीं निकलेगा, कुछ देर मामला टल जाएगा। ये नई सुबह तो बिल्कुल नहीं होगी, जैसा दावा ट्रम्प करते हैं।
क्या जवाब देंगे ट्रम्प

• फिलिस्तीनी नेता मोहम्मद अब्बास ताश के पत्तों से बने महल में बैठे हैं। एक दिन ये ढह जाएगा। अब्राहम लिंकन ने कहा था- हम साइसं, आर्ट और मेडिसिन को सपोर्ट करेंगे।
• हर शख्स से धैर्य और सम्मान की उम्मीद करते हैं। फिर चाहे वो किसी भी नस्ल, मजहब और संप्रदाय का हो। ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति से जो खुद साइंस और मेडिसिन का मजाक उड़ाता हो, और नस्लवाद और सांप्रदायिकता में यकीन रखता हो- जवाब की उम्मीद करना बेमानी है।
• दरअसल, ट्रम्प नामुमकिन चीजों के बारे में सोचने वाले हैं। नई सुबह के बारे में वे नहीं सोचते। अगर सऊदी-इजराइल डील होती है तो अक्टूबर में ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव की आशंका बढ़ जाएगी।

2. ब्लैक मनी, आतंकी फंडिंग वाला मॉरीशस कई देशों में एक अक्टूबर से होगा ब्लैक लिस्ट, सेबी ने कहा भारत में काम करेगा
• यूरोपीय यूनियन मॉरीशस को मनी लांड्रिंग और आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग मिलने के कारण ब्लैक लिस्ट करने जा रहा है। मॉरीशस को एक अक्टूबर से ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। उधर भारत में शेयर बाजार के रेगुलेटर सेबी ने कहा कि वह मॉरीशस को एक एफपीआई के रूप में भारत में परमिशन जारी रखेगी। हालांकि वह निगरानी भी करेगी।
यूरोपीय यूनियन में 27 देश हैं
• ब्लैक लिस्ट का मतलब यह है कि अब मॉरीशस से कोई भी बिजनेस या एफपीआई के पैसे को यूरोपीय यूनियन नहीं स्वीकारेगा। यूरोपीय यूनियन में कुल 27 सदस्य देश हैं। यूरोपीय यूनियन यह कदम ऐसे समय में उठा रहा है जब छोटा सा देश मॉरीशस कोविड-19 के बाद अपनी अर्थव्यवस्था को रीस्टोर करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
• 7 मई को 22 देशों को ब्लैक लिस्ट करने का लिया गया था फैसला
• बता दें कि 7 मई को यूरोपीय यूनियन कमीशन ने मॉरीशस के साथ 22 देशों को ब्लैक लिस्ट में डालने का फैसला किया था। इन सभी देशों से यूरोपीय यूनियन की वित्तीय व्यवस्था को खतरा है। अगर एक अक्टूबर को ऐसा होता है तो इससे न केवल मॉरीशस की प्रतिष्ठा पर आंच आएगी, बल्कि इसका वित्तीय सिस्टम भी बिगड़ जाएगा।
• मॉरीशस के फाइनेंशियल सर्विसेस के मंत्री महेन सीरुत्तुन ने कहा कि यह सही है कि यूरोपीय यूनियन ब्लैक लिस्ट करने जा रहा है। इस प्रक्रिया में काफी सारी गलतियां की जा रही हैं।
बिना किसी चर्चा के यूरोपीय यूनियन का फैसला
• उन्होंने कहा कि इस संबंध में कमीशन ने कोई चर्चा हमारे साथ नहीं की है। न ही कोई असेसमेंट किया है। हमें भी खबरों से ही यह बात पता चली है। यह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) द्वारा दी गई लिस्ट पर फैसला हो रहा है। एफएटीएफ वैश्विक स्तर की मनी लांड्रिंग और आतंकी गतिविधियों को पैसा देने पर नजर रखनेवाली रेगुलेटर है। एफएटीएफ दो लिस्ट बनाता है। एक ब्लैक लिस्ट और एक ग्रे लिस्ट होती है।
पनामा, बार्बाडोस, बोत्सवाना, कंबोडिया, घाना, जमैका भी होंगे ब्लैक लिस्ट
• मॉरीशस के अलावा 17 अन्य देश जिसमें पनामा, बार्बाडोस, बोत्सवाना, कंबोडिया, घाना, जमैका, मंगोलिया, म्यामार और जिंबाब्वे भी लिस्ट में हैं। ये सभी एक अक्टूबर से ब्लैक लिस्ट होंगे। पिछले दो सालों से यूरोपीय यूनियन ने एफएटीएफ की 58 सिफारिशों में से 53 पर अमल किया है। मंत्री ने कहा कि इस मामले में हम यूरोपीय यूनियन को मनाने में असफल रहे हैं। सरकार ने कई सारी यूनियन से इस बारे में अपील की थी।
मॉरीशस के प्रधानमंत्री की कोशिश नाकाम
• मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनौथ ने भी जून में यूरोपीय काउंसिल के प्रेसीडेंट चार्ल्स मिशेल को कॉल किया था। हालांकि इसमें थोड़ा विवाद है।
• कुछ समय पहले ही यूरोपीय यूनियन ने सउदी अरबिया को ब्लैक लिस्ट से बाहर कर दिया था। इसके पीछे कारण यह था कि सउदी अरबिया यूरोपियन देशों से हथियारों की खरीदी करता है।
दूसरे देशों की ओर जा सकते हैं निवेशक
• मॉरीशस को ब्लैक लिस्ट में डालने के बाद यहां के निवेशक दूसरे देशों की ओर जा सकते हैं। साथ ही यहां बैंकों में जमा डिपॉजिट भी निकलनी शुरू हो जाएगी और इससे मुद्रा और महंगाई में बढ़त होने लगेगी। एफएटीएफ के कुल 39 देश सदस्य हैं।
• यूरोपीय यूनियन की ब्लैक लिस्ट में होने के नाते पूरी अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इस घटना से प्राइवेट इक्विटी फंड मॉरीशस के माध्यम से निवेश करने के लिए कम तैयार होंगे।
मॉरीशस में ढेर सारे अवैध काम होते हैं
• मॉरीशस में अवैध पैसे को वैध बनाने में मुख्य रूप से ड्रग ट्रैफिकिंग (हेरोइन और अन्य ड्रग) के साथ पोंजी स्कीम्स, फोर्जरी और भ्रष्टाचार का समावेश है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यहां बैंकों में भी मनी लांड्रिंग होती है। मॉरीशस विदेशी निवेश के रूट के लिए एशिया में एक पसंदीदा स्थान है।
भारत में एफडीआई के मामले में मॉरीशस दूसरे स्थान पर
• आंकड़े बताते हैं कि भारत में एफडीआई के मामले में सिंगापुर टॉप पर है। वित्त वर्ष 2019-20 में सिंगापुर से 14.67 अरब डॉलर की एफडीआई आई जबकि दूसरे नंबर पर मॉरीशस है जहां से 8.24 अरब डॉलर की राशि आई है। भारत में इसी तरह के देशों की ज्यादा एफडीआई आती है। केमन, से 3.7 अरब डॉलर, नीदर लैंड से 6.5 अरब डॉलर की एफडीआई आई है।
मुखौटा कंपनियां मॉरीशस के जरिए पैसे को घुमाती हैं
• जानकारों के मुताबिक देश में मॉरीशस की मुखौटा कंपनियों के जरिए से फंड आता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वहां टैक्स बचाया जाता है। यह एक तरह से राउंड ट्रिपिंग करते हैं। इसके लिए हवाला और दूसरे चैनलों का उपयोग करते हैं। मल्टी लेयर टैक्स हैवेन बैंक के जरिए भारत में पैसा लाया जाता है। पहले एक ट्रस्ट बनाकर छोटे देशों से मॉरीशस में पैसा आता है। मॉरीशस से सेबी ने पैसे को अथेंटिक कर दिया गया है।
मॉरीशस खुद दक्षिण अफ्रीका पर निर्भर है
• जानकार कहते हैं कि मॉरीशस में इतना पैसा नहीं होता है। यहां कोई निवेशक भी नहीं है। मॉरीशस दक्षिण अफ्रीका पर निर्भर है। ऐसे में वह कैसे भारत को सपोर्ट कर सकता है? जहां न तो इंडस्ट्री है, न टेलीकॉम है, न तो टेक्सटाइल्स है। मॉरीशस की जीडीपी 2019 में 1,439 करोड़ डॉलर रही है। जीडीपी के लिहाज से यह दुनिया में 123 वें नंबर पर है।

3. कोरोना से उपजे हालातों के खिलाफ लड़ाई में एक-दूसरे का साथ देंगे भारत-मालदीव: PM मोदी
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि एक गहरे मित्र और पड़ोसी होने के नाते भारत और मालदीव कोविड-19 से पैदा हुई स्वास्थ्य व आर्थिक चिंताओं का मुकाबला करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग जारी रखेंगे। मोदी ने यह बात मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के एक ट्वीट के जवाब में कही। सोलिह ने उनके देश की वित्तीय सहायता करने के लिए मोदी को धन्यवाद दिया था।
• सोलिह ने कहा, ''मालदीव को जब भी दोस्त की जरूरत महसूस हुई है भारत ने हमेशा उसकी मदद की है। 25 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता के रूप में सदाशयता और पड़ोसी होने की भावना दिखाने के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत और वहां की जनता का तहेदिल से शुक्रिया करता हूं।
• इसके जवाब में मोदी ने ट्वीट किया, ''राष्ट्रपति सोलिह, आपकी भावनाओं का हम आदर करते हैं। एक गहरे मित्र और पड़ोसी होने के नाते भारत और मालदीव कोविड-19 से पैदा हुई स्वास्थ्य व आर्थिक चिंताओं का मुकाबला करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग जारी रखेंगे।
• उन्होंने कहा कि उनकी शुभकामनाएं उन्हें अपने देश के नागरिकों की जिंदगी संवारने की दिशा में सेवा और काम करने में मजबूती देंगी।
• ज्ञात हो कि भारत ने रविवार को कोविड-19 महामारी के अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव से निपटने में मदद के लिये मालदीव को 25 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी है।

NATIONAL

4. 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी सरकार से मंजूरी लिए बिना स्टाफ की छंटनी कर सकेगी, सरकार ने पेश किया विधेयक
• 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी जल्द ही सरकार से पूर्व मंजूरी लिए बिना अपने स्टाफ की जब चाहे छंटनी कर सकेगी। इसके लिए नियमों में बदलाव किया जाएगा। श्रम मंत्रालय ने शनिवार को लोकसभा में इससे संबंधित एक विधेयक पेश किया।
• विधेयक के इस प्रावधान पर मंत्रालय और ट्रेड यूनियंस के बीच काफी मतभेद था। यह प्रस्ताव इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल, 2020 का हिस्सा है। अभी 100 से कम कर्मचारियों वाले औद्योगिक प्रतिष्ठान ही सरकार से मंजूरी लिए बिना कर्मचारियों का हायर एंड फायर कर सकते हैं।
श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने पेश किया विधेयक
• श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने कांग्रेस और कुछ अन्य दलों के विरोध के बीच यह विधेयक पेश किया। इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड बिल 2019 पिछले साल भी लोकसभा में पेश किया गया था। इसके बाद श्रम पर संसद की स्थायी समिति में उस विधेयक को भेज दिया गया था। शनिवार को वह विधेयक संसद से वापस ले लिया गया।
ट्रेड यूनियन के विरोध के कारण 2019 के विधेयक में छंटनी के प्रावधान को शामिल नहीं किया जा सका था
• श्रम मंत्रालय ने पहले चर्चा के लिए एक मसौदा विधेयक जारी किया था। उस विधेयक में भी प्रस्ताव रखा गया था कि 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी सरकार से मंजूरी लिए बिना कर्मचारियों की छंटनी कर सकेगी। ट्रेड यूनियंस ने इस प्रावधान का कड़ा विरोध किया था। इसलिए 2019 के विधेयक में इस प्रावधान को शामिल नहीं किया जा सका था।
राजस्थान जैसे कुछ राज्यों ने 300 कर्मचारियों वाली कंपनी को छंटनी की अनुमति दे दी है
• इस साल के शुरू में संसद की समिति ने एक विकल्प रखा था कि 300 से कम कर्मचारियों वाली कंपनी को सरकार से मंजूरी लिए बिना कर्मचारियों की छंटनी करने या प्रतिष्ठान को बंद करने की अनुमति दे दिया जाए।
• राजस्थान जैसे राज्यों ने छंटनी के लिए कर्मचारियों की सीमा को बढ़ाकर पहले ही 300 कर दिया है। श्रम मंत्रालय के मुताबिक समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सीमा बढ़ाए जाने से इन राज्यों में रोजगार बढ़ा है और छंटनी घटी है।
सरकार ने इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 में धारा 77(1) जोड़ने का प्रस्ताव रखा
• छंटनी के प्रावधान के लिए सरकार ने इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 में धारा 77(1) जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। इस सेक्शन के मुताबिक छंटनी और प्रतिष्ठान बंद करने की अनुमति उन्हीं प्रतिष्ठानों को दी जाएगी, जिनके कर्मचारियों की संख्या पिछले 12 महीने में हर रोज औसतन कम से कम 300 हो। सरकार अधिसूचना जारी कर इस न्यूनतम संख्या को बढ़ा सकती है।
मंत्री ने दो और विधेयक लोकसभा में पेश किए
• इस कोड के अलावा मंत्री ने लोकसभा में दो और कोड पेश किए। ये हैं ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020 और कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020। अन्य सांसदों के अलावा कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और शशि थरूर ने तीनों विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया।
29 से ज्यादा श्रम कानूनों को मिलाकर 4 कोड बना दिया गया है
• गंगवार ने लोकसभा में कहा कि 29 से ज्यादा श्रम कानूनों को मिलाकर 4 कोड बना दिया गया है। इनमें से एक पहले ही पारित हो चुका है। संसद ने पिछले साल कोड ऑन वेजेज बिलख् 2019 को पारित कर दिया था।

5. इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड अमेंडमेंट बिल राज्यसभा से पास, कंपनियों को 6 महीने तक दिवालिया प्रक्रिया से मोहलत मिलेगी
• राज्यसभा ने शनिवार को इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (सेकेंड अमेंडमेंट) बिल 2020 को पास कर दिया। इस बिल के पास होने के साथ ही इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड से जुड़े कानूनों में बदलाव हो गया है। इन बदलावों के तहत 25 मार्च से 6 महीने तक कंपनियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की नई दिवालिया प्रक्रिया शुरू नहीं होगी। कोरोनावायरस महामारी के कारण केंद्र सरकार ने 25 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी।
भुगतान में डिफॉल्ट के कारण दिवालिया प्रक्रिया से मिलेगी राहत
• बिल पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड में बदलाव की मकसद कंपनियों को बर्बाद होने से रोकना है। नए बिल के मुताबिक, 25 मार्च के बाद भुगतान में डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों के खिलाफ कम से कम 6 महीने तक दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने पर विचार नहीं हो सकता है। इस बिल को 15 सितंबर को राज्यसभा में पेश किया गया था।
ऑर्डिनेंस की जगह लेगा नया बिल
• डाटा का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि लोक अदालत के मुकाबले इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड में वसूली का अनुपात 42.5 फीसदी ज्यादा है। केंद्र सरकार ने कंपनियों को डिफॉल्ट होने पर दिवालिया प्रक्रिया से बचाने के लिए इसी साल जून में इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (अमेडमेंट) ऑर्डिनेंस 2020 जारी किया था। इस ऑर्डिनेंस को स्थायी करने के लिए यह बिल लाया गया है। यह बिल जून में जारी किए गए ऑर्डिनेंस की जगह लेगा।
बैंकिंग रेगुलेशन अमेंडमेंट बिल लोकसभा से पास
• इससे पहले बुधवार को बैंकिंग रेगुलेशन (अमेंडमेंट) बिल-2020 लोकसभा में पारित हो गया। इस विधेयक में कोऑपरेटिव बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की निगरानी में लाने का प्रस्ताव रखा गया है।
• वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोऑपरेटिव बैंकों के गवर्नेंस में सुधार करने और जमाकर्ताओं के पैसे की सुरक्षा के लिए यह विधेयक लाया गया है। इस बिल को लोकसभा में पेश करते हुए सीतारमण ने कहा था कि सरकार को लॉकडाउन के दौरान अध्यादेश लाना पड़ा था, क्योंकि कोऑपरेटिव बैंकों की हालत बहुत खराब थी।

1. इस संशोधन के तहत पूर्ववर्ती प्रबंधन/प्रवर्तकों की ओर से किए गए अपराधों के लिए नए खरीदार पर कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
2. अधिनियम में संशोधन यह भी सुनिश्चित करेगा कि कॉरपोरेट लेनदार के कारोबार का आधार कमजोर न पड़े और उसका व्यवसाय निरंतर जारी रहे।
3. इसके लिए यह स्पष्ट किया जाएगा कि कर्ज वसूली स्थगन की अवधि के दौरान उद्यम का लाइसेंस, परमिट, रियायत, मंजूरी इत्यादि को समाप्त या निलंबित नहीं किया जाएगा और न ही उनका नवीकरण रोका जाएगा। इससे कंपनी चलता हाल उद्यम मानी जाएगी।
4. कोड में संशोधन से बाधाएं दूर होंगी, सीआईआरपी सुव्यवस्थित होगी और अंतिम विकल्प वाले फंडिंग के संरक्षण से वित्तीय संकट का सामना कर रहे सेक्टरों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
5. कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए व्या‍पक वित्तीय कर्जदाताओं के लिए अतिरिक्त आरंभिक सीमा शुरू की गई है, जिनका प्रतिनिधित्व एक अधिकृत प्रतिनिधि करेगा।
6. यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कॉरपोरेट कर्जदार के कारोबार का आधार कमजोर न पड़े और उसका व्यवसाय निरंतर जारी रहे। इसके लिए यह स्पष्ट किया जाएगा कि कर्ज स्थगन अवधि के दौरान लाइसेंस, परमिट, रियायतों, मंजूरी इत्यादि को न तो समाप्त अथवा निलंबित या नवीकरण नहीं किया जा सकता है।
7. आईबीसी के तहत कॉरपोरेट कर्जदार को संरक्षण प्रदान किया जाएगा. इसके तहत पूर्व मैनेजमेंट/प्रमोटरों द्वारा किए गए अपराधों के लिए सफल दिवाला समाधान आवेदक पर कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

6. लोकसभा ने रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक को दी मंजूरी
• लोकसभा ने रविवार को राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक 2020 को मंजूरी प्रदान की। इसमें गुजरात के गांधीनगर स्थित रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय को उन्नत करके राष्ट्रीय महत्व की संस्था का दर्जा देने का प्रस्ताव है। गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने विधेयक को चर्चा एवं पारित कराने के लिए सदन में रखा। इसे संक्षिप्त चर्चा के बाद सदन ने मंजूरी प्रदान कर दी।
• राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के राज्यवर्धन राठौर ने कहा कि अब जरूरी है कि पुलिस से जुड़े क्षेत्र और नयी तकनीक को लेकर शोध हो सके। यह भी जरूरी है कि हम इस क्षेत्र में निर्यातक बनें। इसमें यह विधेयक मददगार होगा। चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के अब्दुल खालिक ने सवाल किया कि सिर्फ गुजरात के विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय दर्जा क्यों दिया जा रहा है।
• रक्षा विश्वविद्यालय विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि प्रस्तावित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय अनुसंधान एवं विभिन्न पक्षकारों के साथ सहयोग के माध्यम से नई जानकारियां सृजित करेगा तथा पुलिस एवं व्यवस्था, दंड न्याय प्रणाली एवं प्रशासन सुधार के संबंध में विशेष ज्ञान एवं नये कौशल, प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करेगा।
• इस प्रस्तावित विश्वविद्यालय के संबंध दुनिया के अन्य देशों के विश्वविद्यालयों के साथ होंगे जो समकालीन अनुसंधान के आदान प्रदान, शैक्षणिक सहयोग, पाठ्यक्रम डिजाइन, तकनीकी जानकारी एवं प्रशिक्षण तथा कौशल विकास प्रयोजनों पर आधारित होंगे।

ECONOMY

8. भारत की ईंधन मांग 2020 में 11.5 प्रतिशत घटेगी: फिच सॉल्यूशंस
• फिच सॉल्यूशंस का अनुमान है कि 2020 में भारत की ईंधन की मांग 11.5 फीसद घटेगी। देश का आर्थिक परिदृश्य और कमजोर होने के बीच फिच सॉल्यूशंस ने ईंधन की मांग में गिरावट के अपने अनुमान को बढ़ा दिया है।
• फिच सॉल्यूशंस के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि 2020-21 में भारत के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8.6 फीसद की गिरावट आएगी। पहले उसने अर्थव्यवस्था में 4.5 फीसद की गिरावट का अनुमान लगाया था। फिच सॉल्यूशंस की ओर से शनिवार को जारी नोट में कहा गया, ''ईंधन की मांग व्यापक रूप से प्रभावित हुई है।
• उपभोक्ता के साथ औद्योगिक ईंधन दोनों की मांग में बड़ी गिरावट आई है। पहले फिच सॉल्यूशंस ने 2020 में ईंधन की मांग में 9.4 फीसद की गिरावट का अनुमान लगाया था।
2021 और 2022 में भारतीय अर्थव्यवस्था मे होगी वृद्धि
• फिच सॉल्यूशंस का अनुमान है कि 2021 और 2022 में भारतीय अर्थव्यवस्था पांच फीसद की वृद्धि दर्ज करेगी। उसने कहा कि उस समय महामारी नियंत्रण में होगी और आर्थिक गतिविधियां सामान्य होने से अर्थव्यवस्था वृद्धि दर्ज करेगी।
• चालू वित्त वर्ष की पहली अप्रैल-जून की तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 23.9 फीसद की गिरावट आई है। नोट में कहा गया कि कोविड-19 का प्रसार थमता नहीं दिख रहा। प्रतिदिन संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।
• फिच सॉल्यूशंस ने कहा कि बेरोजगारी की ऊंची दर तथा कोरोना वायरस की वजह से लोगों की आय घटने की वजह से उपभोक्ता खर्च प्रभावित हुआ है।

05/09/2020

अपनी तकनीकी शक्ति के मोर्चे पर पीछे न रहे भारत
#योगेशगुप्ता) (पूर्व राजदूत) (साभार हिंदुस्तान )
✍️♦️✍️ संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के साथ चीन के व्यापार और प्रौद्योगिकी प्रतिस्पद्र्धा की पृष्ठभूमि में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 21 जुलाई को चीन के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रणनीतिक उद्योगों के दिग्गजों की बैठक बुलाई थी। बैठक में शी ने चीन की जरूरतों के हिसाब से व्यापार रणनीतियों को दिशा देने के लिए कहा था।
गौर करने की बात है कि शी ने साल 2013 में ही उभरती प्रौद्योगिकियों के मोर्चे पर चीन को विश्व नेता बनाने की अपनी महत्वाकांक्षा का इजहार कर दिया था। चीन सरकार ने एआई, 5जी तकनीक, ऊर्जा प्लेटफार्म, क्वांटम कंप्यूटिंग व वित्तीय प्रौद्योगिकियों के वाणिज्यिक व सैन्य प्रयोगों को विकसित करने के लिए अरबों डॉलर का प्रावधान किया। इस क्षेत्र में विकास की रूपरेखा नागरिक व सैन्य, दोनों के समन्वय के आधार पर तय की गई। यह काम ऐसे किया गया कि मंत्रालय और सशस्त्र बल सरकारी और निजी कंपनियों के लिए मिलकर काम कर सकें। प्राथमिकता वाले क्षेत्र में सरकार के निर्देशन में विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा की गुंजाइश नहीं है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (2018) के अध्ययन के अनुसार, चीन दिमागी वर्चस्व कायम करने की कोशिश में है। वह एआई व व्यापक डाटा को मानवरहित हवाई वाहनों, ड्रोन और साइबर सिस्टम में एकीकृत करने की कोशिश कर रहा है, ताकि दुश्मन की सोच को नुकसान पहुंचाने की क्षमता हासिल कर सके।
दुनिया में सबसे बड़े दूरसंचार उपकरण निर्माता और दूसरे सबसे बड़े विक्रेता के रूप में हुआवेई का उद्भव हम सबको पता है। चीन इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी और सौर पैनल के सबसे बड़े निर्माता और निर्यातक के रूप में भी उभरा है। वाणिज्यिक ड्रोन-निर्माण में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी चीन की है। इसने यूएस के एमक्यू-1 प्रीडेटर ड्रोन जैसे संस्करणों को भी विकसित कर लिया है।
चीन ने कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, फिर भी वह अत्याधुनिक तकनीकों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर है। हुआवेई के वर्चस्व का अंत हो सकता है, क्योंकि माइक्रोचिप किरिन (चिप पर लगने वाला सिस्टम) की आपूर्ति में अमेरिकी प्रतिबंध के कारण कमी आने लगी है। पिछले 30 वर्षों में भारी निवेश के बावजूद चीन माइक्रोचिप्स की आपूर्ति के लिए अमेरिकी, दक्षिण कोरियाई और ताइवानी कंपनियों पर निर्भर है। एआई के लिए जरूरी सेमी-कंडक्टर्स के लिए भी चीन इन्हीं देशों पर निर्भर है। लंबी दूरी के विमानों के लिए इंजन निर्माण में चीन का रिकॉर्ड निराशाजनक है। साल 2015 में चीन ने जे-20 स्टील्थ फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए अपना डब्ल्यूएस-15 इंजन बनाया था, पर परीक्षण के दौरान इंजन फट गया। इसके बाद चीन ने रूसी इंजन एएल-31 के साथ जे-20 का निर्माण शुरू कर दिया। इस रूसी इंजन में वैसा कंट्रोल सिस्टम नहीं है, जैसा पांचवीं पीढ़ी के विमानों में होना चाहिए। चीन अपने विमानों के लिए उच्च श्रेणी के कार्बन बनाने या अपने विमानों के लिए परमाणु रिएक्टर को छोटा करने में भी असमर्थ है।
ऐसे कई उदाहरण हैं, चीन ने विदेशी कंपनियों को मजबूर करके उन्नत तकनीकों की व्यवस्था की है। विदेशी कंपनियों को अपने बाजार में पहुंचने की मंजूरी देने के एवज में चीन ने दबाव डालकर तकनीक का संग्रह किया है, विदेशी डिजाइनों की चोरी या नकल भी की है। चीन के इस दृष्टिकोण के पीछे एक बुनियादी कमी है, उसने आधारभूत विज्ञान और मौलिक शोध पर बहुत कम खर्च किया है। उसका शोध और विकास खर्च महज पांच प्रतिशत है, जबकि विकसित देशों में यह खर्च 25-30 प्रतिशत है। इसके साथ ही वहां कुशल लोगों की कमी है। उसके वैश्विक गठजोड़ को भी नुकसान पहुंच रहा है, जबकि यह अनुसंधान और सहयोग के लिए जरूरी है।
इधर, भारत ने भी प्रौद्योगिकी की दिशा में कदम उठाए हैं। नागरिक व सैन्य क्षेत्र में एआई को बढ़ावा देने के लिए नीति निर्धारण हुआ है। शोध और प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए रक्षा संस्थानों व उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के उपाय किए हैं। कुछ मामलों में ड्रोन, स्मार्ट हथियार और अन्य हाई-टेक सैन्य उपकरण अमेरिका, रूस, फ्रांस और इजरायल से आयात किए गए हैं। भारत में एआई प्लेटफार्मों केविकास में संसाधनों को प्राथमिकता देने की तत्काल जरूरत है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत एक शक्ति के रूप में चीन से पीछे न रहे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

01/08/2020

संयुक्त राष्ट्र में वंचितों की आवाज बुलंद करे #भारत
♦️ मीनाक्षी गांगुली,(निदेशक, ह्यूमन राइट्स वाच) #हिंदुस्तान , उपयोगी एवं महत्वपूर्ण जानकारी
✍️✍️✍️ जब भारत जनवरी 2021 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थाई सदस्य के रूप में शामिल हो जाएगा, तब वहां अनेक मसलों से रूबरू होगा। क्या संयुक्त राष्ट्र आने वाले दिनों में दुनिया के लोगों के लिए मानवीय सहायता और गलत काम करने वालों के विरुद्ध न्याय को बेहतर तरीके से सुनिश्चित कर पाएगा? सीरिया, यमन और अफगानिस्तान जैसे देशों में चल रहे संघर्ष के समाधान में क्या वह मदद कर सकेगा? अशांत जगहों से भाग रहे शरणार्थियों की रक्षा करेगा?
चीन, रूस या अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों में भी मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है, लेकिन ऐसे देशों की आलोचना न करने की वजह से मानवाधिकार समूहों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की बार-बार आलोचना की है। जवाब में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र व उसके सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे अधिकारों की बढ़ती चुनौतियों पर अधिक ध्यान देने के मकसद से ‘कॉल टु एक्शन ऑन ह्यूमन राइट्स’ की पहल करें। अब दुनिया भर में उत्पीड़न का सामना करने वालों के अधिकारों के बचाव की दिशा में भारत से भी बड़ी उम्मीदें होंगी। भारत सरकार ने कहा है कि सुरक्षा परिषद में भारत तर्क व संयम की आवाज बुलंद करेगा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत दृढ़ विश्वास के साथ काम करेगा।
दुर्भाग्य से अन्य देशों में मानवाधिकारों के सम्मान को बढ़ावा देने के मामले में भारत का रिकॉर्ड खराब रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने आमतौर पर देश-विशिष्ट प्रस्तावों पर ही अमल किया है। भारत रोहिंग्या मामले अर्थात म्यांमार में जातीय शोषण या फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते के ड्रग युद्ध जैसे मामलों में संयुक्त राष्ट्र की पहल का समर्थन करने में नाकाम रहा है। कुछ ही मौके आए हैं, जब भारत ने आवाज उठाई है। अतीत में देखें, तो भारत ने श्रीलंका में कथित युद्ध अपराधों की जवाबदेही की चर्चा की थी। हाल की बात करें, तो हांगकांग में अधिकारों की रक्षा के प्रति भारत ने चिंता का इजहार करते हुए कहा है कि इसे ‘ठीक से, गंभीरता से और निष्पक्ष रूप से देखा जाए’।
भारत दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में अपने सैनिक भेजकर महत्वपूर्ण योगदान करता रहा है और सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनने की इच्छा रखता है। संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियान किसी संघर्ष के बाद स्थितियों की निगरानी, जांच और मानवाधिकार पर ध्यान केंद्रित रखते हैं। भारत को ऐसी कोशिशों का विस्तार करते हुए नेतृत्व और समर्थन का प्रदर्शन करना चाहिए। दुनिया में मानवाधिकार के पक्ष में खड़े होने के लिए अपने मानवाधिकार रिकॉर्ड को भी देखना चाहिए। जहां भारत लंबे समय से ज्यादा स्वतंत्र समाज रहा है, वहीं चीन एकदलीय अधिनायकवादी राज्य है। हाल ही में भारत ने भी चीन जैसी पाबंदियों की कुछ नकल की है। जब सूचना, संचार, मनोरंजन, शिक्षा और व्यवसाय इत्यादि क्षेत्रों में इंटरनेट बुनियादी आजादी का हिस्सा हो गया है, तब भारत में कुछ पाबंदियां दिखी हैं।
अमेरिका में पुलिस द्वारा अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद जो आंदोलन हुआ, उसने दुनिया या भारत पर कोई खास असर नहीं डाला है। भारतीय पुलिस में भी ज्यादती का पुराना ढर्रा जारी है। हाशिये पर पड़े वंचितों के संरक्षण की जरूरत पर अधिकारी चुप रहते हैं। उधर, अमेरिका में पुलिस ने न सिर्फ अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया है, बल्कि प्रदर्शनकारियों की रक्षा में नाकाम रही है। कुछ मामलों में तो पुलिस खुद हमलों में शामिल दिखी है।
आज भारत निर्णायक मोड़ पर है। जब भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शामिल हो जाएगा, तब उसके पास दो विकल्प होंगे, या तो वह मानवाधिकार का सम्मान करने वाले देशों के पक्ष में खड़ा हो जाए या फिर चीन, रूस, ब्राजील जैसे देशों के साथ तालमेल बनाकर चलता रहे। ये देश अक्सर मानवाधिकार के मामले में वैश्विक नियम आधारित कानूनी प्रणाली को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश करते हैं। दुनिया में आक्रामक होता चीन, कोरोना की वजह से सेहत व आजीविका पर दोहरे संकट की पृष्ठभूमि में साल 2021 का आगाज भारत के लिए अहम मौका होगा। देखना है, देश मानवाधिकारों के समर्थकों के साथ खड़ा होता है या मानवाधिकारों को कमजोर करने वालों के साथ?
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)

30/07/2020

2006-18 से बाघ की आबादी में प्रतिवर्ष 6% की दर से वृद्धि हुई है:रिपोर्ट .... GK Power
💢💢💢पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने एक कार्यक्रम में वर्ष 2018 की बाघों की गणना पर विस्तृत रिपोर्ट जारी की।

🩸🩸🩸विवरण
चौथी अखिल भारतीय बाघ अनुमान -2018 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 2014-18 से चार साल के भीतर 741 बढ़ गई है।
रिपोर्ट में पाँच ज़िलों शिवालिक पहाड़ियों और गंगा के मैदानी भू-दृश्य, मध्य भारतीय भू-दृश्य और पूर्वी घाट, पश्चिमी घाट भू-दृश्य, उत्तर पूर्व पहाड़ियों और ब्रह्मपुत्र मैदानी लैंडस्केप और सुंदरवन पर प्रकाश डाला गया।
रिपोर्ट पूरे भारत में व्यक्तिगत आबादी के स्थानिक अधिभोग और घनत्व के संदर्भ में बाघों की स्थिति का आकलन करती है और प्रमुख बाघ आबादी को जोड़ने वाले निवास स्थान के गलियारों की स्थिति का मूल्यांकन करती है और संवेदनशील क्षेत्रों पर प्रकाश डालती है जिन्हें संरक्षण ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस की पूर्व संध्या पर जारी की गई थी।
👁️‍🗨️👁️‍🗨️👁️‍🗨️👁️‍🗨️👁️‍🗨️रिपोर्ट की खोज:-

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी घाट में लगभग 724 बाघों की दुनिया में सबसे बड़ी बाघ आबादी थी।
छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में बाघों की स्थिति में लगातार गिरावट आई है और मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में वृद्धि हुई है।
4 अखिल भारतीय बाघ अनुमान अद्वितीय क्यों है?

सह-शिकारियों और अन्य प्रजातियों का प्रचुरता सूचकांक।
बाघों का लिंगानुपात पहली बार किया गया है।
बाघों की आबादी पर मानवजनित प्रभावों पर चर्चा की गई है।
बाघ अभयारण्यों के भीतर बाघों की बहुतायत का प्रदर्शन किया गया है।
Manish Singh

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