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15/08/2025

🇮🇳 79वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🇮🇳

आज का दिन हर भारतीय के लिए गर्व, उत्साह और देशभक्ति से भर देने वाला है। 79 वर्ष पहले, हमारे वीर स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत माता को विदेशी शासन से मुक्त कराया। यह दिन सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि उन अनगिनत बलिदानों, संघर्षों और सपनों का स्मरण है जो हमारे पूर्वजों ने हमें एक स्वतंत्र और गौरवशाली राष्ट्र देने के लिए देखे थे।

इस विशेष अवसर पर हमें मंगल पांडे, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे अनगिनत वीरों की याद आती है, जिनके साहस और दृढ़ संकल्प ने स्वतंत्रता की नींव रखी। उन्होंने हमें यह सिखाया कि एकजुट होकर, सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए, किसी भी कठिनाई को हराया जा सकता है।

आज भारत विज्ञान, तकनीक, खेल, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान मजबूती से स्थापित कर रहा है। लेकिन यह भी सच है कि स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी आती है। हमें अपने राष्ट्र को न केवल आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी काम करना है।

🇮🇳 जय हिंद! वंदे मातरम्! 🇮🇳

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#79वांस्वतंत्रतादिवस #भारत #आजादी

Manzil door ho, lekin apne safar ka har pal ka aanand lo!
26/06/2025

Manzil door ho, lekin apne safar ka har pal ka aanand lo!

पूरे भारत में कोरोना की वजह से लॉकडाउन लागू ---- "लॉकडाउन क्या है यह कितना जरूरी था? और  इसका सामान्य जनजीवन पर असर क्या...
24/03/2020

पूरे भारत में कोरोना की वजह से लॉकडाउन लागू ---- "लॉकडाउन क्या है यह कितना जरूरी था? और इसका सामान्य जनजीवन पर असर क्या होगा ??
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लॉकडाउन क्या है?और जनजीवन पर इसका असर--

लॉकडाउन एक आपातकालीन प्रोटोकॉल है जिसका आसान भाषा में अर्थ तालाबंदी से है जो किसी आपदा या महामारी के वक्त सरकारी रूप से देश में अंशतः या पूर्णतः लागू की जाती है ,जिसके तहत शहर या प्रदेश में रहने वाले लोगों को अपने क्षेत्र छोड़कर जाने या घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध रहता है

उन्हें सिर्फ दवा और अनाज जैसी जरूरी चीजों की खरीदारी के लिए ही बाहर आने की इजाजत मिलती है, इस दौरान वे बैंक से पैसे निकालने भी जा सकते है कहने का अर्थ है कि आप अनावश्यक कार्य के लिए सड़कों पर ना निकलें.

अगर आपको लॉकडाउन की वजह से किसी तरह की परेशानी हो तो आप संबंधित पुलिस थाने, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक अथवा अन्य उच्च अधिकारी को फोन कर सकते हैं.

सभी प्राइवेट और कॉन्ट्रेक्ट वाले दफ्तर बंद रहते हैं, सरकारी दफ्तर जो जरूरी श्रेणी में नहीं आते, वो भी बंद रहते हैं.
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Lockdown कितना जरूरी?

किसी तरह के खतरा से या ऐसे किसी खतरे की संभावना से, इंसान या सम्पूर्ण इलाके को बचाने के लिए लॉकडाउन किया जाता है। जैसे कोरोना के संक्रमण को लेकर कई देशों में किया गया है।

कोरोनावायरस का संक्रमण एक-दूसरे इंसान में न हो इसके लिए जरूरी है कि लोग घरों से बाहर कम निकले। बाहर निकलने की स्थिति में संक्रमण का खतरा बहुत बढ़ जाता है इसलिए बहुत देशों ने अपने इलाके को लॉकडाउन किया है। जैसे- चीन, डेनमार्क, अल सलवाडोर, फ्रांस, आयरलैंड, इटली, न्यूजीलैंड, पोलैंड और स्पेन , भारत व अन्य देशों में लॉकडाउन जैसी स्थिति है।

इटली में मामला गंभीर होने के बाद वहां के प्रधानमंत्री ने पूरे देश को लॉकडाउन किया जिस कारण कोरोना से मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा हो गयी है।

मुझे ऐसा लगता है कि इस वैश्वीकरण के दौर में कोरोना से महफ़ूज रहने का सबसे प्रभावशाली तरीका lockdown ही है। जो देश इस बात को जितना देर से समझेगा उस देश के लिए यह वायरस उतना ही खतरनाक साबित होगा।
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Important question-

Q. भारत के किस राज्य में सबसे पहले लॉक डाउन किया गया था?

Q. दुनिया में सबसे पहला लॉक डाउन कहाँ पर किया गया था?

●   बढ़ते मुकदमों की संख्या को देखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को बढ़ाने का न...
02/08/2019

● बढ़ते मुकदमों की संख्या को देखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को बढ़ाने का निर्णय लिया है।
● वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या 31 (मुख्य न्यायाधीश सहित) है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद बढ़ाकर 34 (मुख्य न्यायाधीश सहित) कर दिया जाएगा।.......................................................
➡️न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का इतिहास~

1. वर्ष 1950 में स्थापना के समय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या कुल संख्या 8 थी।

2. वर्ष 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 के माध्यम से इसे 10 कर दिया गया।

3. सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 के तहत बढ़ाकर 13 कर दिया गया था।

4. 1977 में एक अन्य संशोधन के द्वारा यह संख्या 17 कर दी गई और बाद में वर्ष 1986 में इसे 25 कर दिया गया.

5. अंत में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2009 के माध्यम से इस संख्या को बढ़ाकर 25 से 30 किया गया था, जिसे अब पुनः बढ़ाया जा रहा है।...................................................

● विश्व बैंक के वर्ष 2018 के आँँकड़ों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था 2.73 ट्रिलियन डॉलर के साथ विश्व की सातवीं सबसे बड़ी अ...
01/08/2019

● विश्व बैंक के वर्ष 2018 के आँँकड़ों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था 2.73 ट्रिलियन डॉलर के साथ विश्व की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, विदित हो कि वर्ष 2017 के आँँकड़ों के अनुसार भारत का स्थान छठा था।

● विश्व बैंक के इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत की अर्थव्यवस्था वर्ष 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की क्षमता के साथ जापान की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़कर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।

● वर्ष 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिये आर्थिक सर्वेक्षण ने अनुमान लगाया है कि भारत को एक वर्ष में चालू कीमतों (Current Prices) पर 12% की वृद्धि करनी होगी।

● भारतीय रिज़र्व बैंक की मुद्रास्फीति की वृद्धि दर के अनुमानों को 4% मानते हुए सर्वेक्षण में कहा गया है कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये एक वर्ष में अर्थव्यवस्था की स्थिर कीमतों (Constant Prices) में 8% की वृद्धि की आवश्यकता होगी।

● स्थिर कीमतों (Constant Prices) पर भारत की अर्थव्यवस्था में वर्ष 2018-19 के दौरान 6.8% की वृद्धि देखी गई है।

हाल ही में संसद में पेश किये गए बजट में"नीली अर्थव्यवस्था" का जिक्र किया गया गया है। ब्लू इकॉनमी किसे कहते है जाने-● विश...
31/07/2019

हाल ही में संसद में पेश किये गए बजट में"नीली अर्थव्यवस्था" का जिक्र किया गया गया है। ब्लू इकॉनमी किसे कहते है जाने-

● विश्व बैंक के अनुसार, महासागरों के संसाधनों का उपयोग जब आर्थिक विकास, आजीविका तथा रोज़गार एवं महासागरीय पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर किया जाता है तो वह नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) के अंतर्गत आता है। नीली अर्थव्यवस्था को प्रायः मरीन अर्थव्यवस्था, तटीय अर्थव्यवस्था एवं महासागरीय अर्थव्यवस्था के नाम से भी पुकारा जाता है।

● महासागर मानव के लिये अकूत संपदा के भंडार होते हैं जिनका उपयोग मानव प्राचीन समय से ही करता रहा है। वर्तमान में भी विभिन्न देश महासागरीय संसाधनों का उपयोग अपनी अर्थव्यवस्था को बल देने के लिये कर रहे हैं। भारत भी नीली अर्थव्यवस्था की अवधारणा पर बल दे रहा है ताकि महासागरीय संसाधनों का उचित उपयोग किया जा सके। भारत की अवस्थिति इस विचार में अनुपूरक की भूमिका निभाती है क्योकि भारत की तटीय सीमा काफी लंबी है। (लगभग 8000 किलोमीटर)

● महासागर विश्व के सबसे बड़े पारिस्थितिकी तंत्र हैं, साथ ही ये पृथ्वी के तीन-चौथाई हिस्से में फैले हुए हैं। महासागर वैश्विक GDP में 5 प्रतिशत का योगदान देते हैं तथा 350 मिलियन लोगों को महासागरों से जीविका प्राप्त होती है। इस संदर्भ में ये क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, आजीविका, वाणिज्य तथा सुरक्षा से संबंधित विभिन्न संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ उत्पन्न करते हैं।
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"खाने और  सोने  का  नाम  जीवन  नहीं  है, जीवन नाम हैआगे बढ़ते रहने की लगन का"~मुंशी प्रेमचंद
31/07/2019

"खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है,
जीवन नाम हैआगे बढ़ते रहने की लगन का"

~मुंशी प्रेमचंद

30/07/2019

भारत में थायराइड के बढ़ते मामलों के कारण एक "सार्वभौमिक थायरॉयड स्क्रीनिंग कार्यक्रम" (Universal Thyroid Screening Programme) शुरू करने की बात की जा रही है।

●भारत की कुल जनसंख्या में से 10% लोगों को थायराइड
की समस्या है।

●थायराइड ग्रंथि, गर्दन के सामने वाले हिस्से में पाई जातीहै।

● इस रोग में थायराइड ग्रंथि पर्याप्त थायराइड हारमोंस का
उत्पादन नहीं कर पाती है।

● थायरॉयड के मामलों में लगातार बढ़ोत्तरी का एक प्रमुख
कारण तनाव है।थायराइड पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को
अधिक प्रभावित करता है; इसीलिये जागरूकता अभियान
में महिलाओं को विशेष रूप से जागरूक करने का प्रयास
किया गया है।

●इस सिंड्रोम के कारण महिलाओं में मासिक धर्म की
निरंतरता प्रभावित होती है, साथ ही एंड्रोजन हार्मोन का
स्तर भी कम या ज़्यादा हो सकता है.

●  बाघों के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 29 जुलाई को ‘अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस’  मनाया जाता है...
30/07/2019

● बाघों के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 29 जुलाई को ‘अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस’ मनाया जाता है।
● भारत में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। 2010 की गणना में भारत में 1706 बाघ पाए गए। 2014 में 2226 बाघ और 2018 की गणना में देश में 2967 बाघ पाए गए हैं।
● देश में बाघों की अधिकतर संख्या वाले राज्यों की बात करें तो 2018 की गणना में मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा बाघ पाए गए। यहां 526 बाघ हैं। इसके बाद कर्नाटक दूसरे स्थान पर है। यहां 524 बाघ पाए गए।......................................

अनुच्छेद-35A और अनुच्छेद-370 लगातार चर्चा में है।इन अनुच्छेद की प्रमुख बातें निम्न है~जम्मू-कश्मीर को संविधान के अनुच्छे...
29/07/2019

अनुच्छेद-35A और अनुच्छेद-370 लगातार चर्चा में है।
इन अनुच्छेद की प्रमुख बातें निम्न है~

जम्मू-कश्मीर को संविधान के अनुच्छेद 35A एवं 370 द्वारा विशेष राज्य का दर्जा प्रदान किया गया है.संविधान का यह प्रावधान राजनीतिक विवाद का केंद्र भी रहा है. यह एक अस्थायी अनुच्छेद है जिसे आवश्यकता पड़ने पर समाप्त भी किया जा सकता है इसलिए इसे रदद् करने को लेकर आए दिन विवाद होते रहते है।.............................….
➡️अनुच्छेद-370

• 17 अक्तूबर, 1949 को संविधान में शामिल, अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान से जम्मू-कश्मीर को छूट देता है (केवल अनुच्छेद 1 और अनुच्छेद 370 को छोड़कर) और राज्य को अपने संविधान का मसौदा तैयार करने की अनुमति देता है।

• राज्य का अपना अलग संविधान, एक अलग ध्वज और एक अलग दंड संहिता (रणबीर दंड संहिता) है।

• भारतीय संसद केवल रक्षा, विदेश और संचार के मामलों में जम्मू-कश्मीर के संबंध में कानून पारित कर सकती है। संघ द्वारा बनाया गया कोई अन्य कानून केवल राष्ट्रपति के आदेश से जम्मू-कश्मीर में तभी लागू होगा जब राज्य विधानसभा की सहमति हो।

• जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता (भारत और कश्मीर) होती है.
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➡️अनुच्छेद-35A

• अनुच्छेद 35A को मई 1954 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा इसे संविधान में जोड़ा गया.

• यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर विधान सभा को स्थायी नागरिक की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है.

• राज्य जिन नागरिकों को स्थायी घोषित करता है केवल वही राज्य में संपत्ति खरीदने, सरकारी नौकरी प्राप्त करने एवं विधानसभा चुनावों में मतदान का अधिकार रखते हैं.

• यदि जम्मू-कश्मीर का निवासी राज्य से बाहर के किसी व्यक्ति से विवाह करता है तो वह यह नागरिकता खो देगा.

• 1954 के जिस आदेश से अनुच्छेद 35A को संविधान में जोड़ा गया था, वह आदेश अनुच्छेद 370 की उपधारा (1) के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा पारित किया गया था.
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