02/01/2023
मैने जीवन का सार पढ़ा।
होश ठिकाने तब आया जब मै अकेला शमशान में पड़ा।
बचपन से मां पापा ने खूब लाड प्यार से पढ़ाया।
बड़ा होके मेहनत बहोत की और पैसा खूब कमाया।
करोड़ों कमाया लाखो उड़ाया और आगे बढ़ा जीवन
तो बच्चे को मैने अपने पढ़ाया।
खूब अच्छी परवरिश की दुनिया के जंजाल से बचाया।
तब जाके वो बड़ा हुआ तो विदेश में उसको पढ़ाया।
वक्त का चक्र ऐसा चला की कुछ समझ नहीं आया।
उम्र का पढ़ाव ऐसा की बीमारियों ने भी अपना घर बनाया।
पूंजी बहुत थी जेब में खूब पैसा डॉक्टरो के लगाया।
रूह निकल गई जिस्म एक दिन अंजाम ये आया।
मै अकेला रूठा सा पड़ा।
रूह ने मेरी ये जंजाल पढ़ा।
कितना मैने कमाया और क्या मैने साथ रखा।
छोड़ कर तमाम संपत्ति कर ओरो के नाम चला।
कुछ आए कुछ रोए कुछ पल को तो सब एक होए।
बेटा मेरा विदेश से आया।
लोगो ने उसको समझाया।
और बेटे होने का फर्ज निभाया।
लेके मुझे वो शमशान को चले।
मेरा मेरे है घर में कुछ रह ना जाए, ये सबने ख्याल रखे।
एक बड़ा हुजूम बड़ा काफ़िला जो देखने मुझे पहले नहीं आया।
आगे आगे मैं और पीछे पीछे भीड़ का बेड़ा आया।
पीछे खड़ा देख रहा था मैं।
कैसे लोगो ने मेरा तख्त सजाया।
लकड़ी ली, उपले लिए, सामग्री डाली, घी का लेप लगाया।
बड़े आराम से मुझे, मेरी आखरी शैय्या पर लिटाया।
धीरे धीरे घेरा मुझे लकड़ियो से। और
आखिर में मेरे बेटे ने ही मुझको जलाया।
मै एक कोने में खड़ा कुछ देख यूं मुस्कुराया
ये था मेरे जीवन का सार क्या मैंने कमाया।
दो शब्द आखिर में उसके साथ भी नसीब ना हुए,
जिसको इस समाज में आगे बढ़ाया।
एक नेक इंसान बनाया।
धीरे धीरे जलता रहा मैं। अपने आपको देख यूं मुस्कुराया।
ये था मेरे जीवन का सार क्या मैने कमाया।
आखिर पड़ा हूं यहां।
अपनो ने ही मुझको जलाया।