29/08/2016
योग की उत्पत्ति हमारे देश में हुई है, किंतु आधुनिक समय में इसका प्रचार-प्रसार विदेशियों ने किया है, इसलिए पाश्चात्य सभ्यता की नकल करने वाले 'योग' शब्द को 'योगा' बोलने में गौरवान्वित महसूस करते हैं।
प्राचीन समय में इस विद्या के प्रति भारतीयों ने सौतेला व्यवहार किया है। योगियों का महत्व कम नहीं हो जाए। अत: यह विद्या हर किसी को दी जाना वर्जित थी। योग ऐसी विद्या है जिसे रोगी-निरोगी, बच्चे-बूढ़े सभी कर सकते हैं।
महिलाओं के लिए योग बहुत ही लाभप्रद है। चेहरे पर लावण्य बनाए रखने के लिए बहुत से आसन और कर्म हैं। कुंजल, सूत्रनेति, जलनेति, दुग्धनेति, वस्त्र धौति कर्म बहुत लाभप्रद हैं। कपोल शक्ति विकासक, सर्वांग पुष्टि, सर्वांग आसन, शीर्षासन आदि चेहरे पर चमक और कांति प्रदान करते हैं।
इसी तरह से नेत्रों को सुंदर और स्वस्थ रखने, लंबाई बढ़ाने, बाल घने करने, पेट कम करने, हाथ-पैर सुंदर-सुडौल बनाने, बुद्धि तीव्र करने, कमर और जंघाएँ सुंदर बनाने, गुस्सा कम करने, कपोलों को खूबसूरत बनाने, आत्मबल बढ़ाने, गुप्त बीमारियाँ दूर करने, गर्दन लंबी और सुराहीदार बनाने, हाथ-पैरों की थकान दूर करने, पाचन शक्ति सुधारने, अच्छी नींद, त्वचा संबंधी रोगों को दूर करने व अन्य कई प्रकार के कष्टों का निवारण करने के लिए योग में व्यायाम, आसन और कर्म शामिल हैं। प्राचीन समय में इस विद्या के प्रति भारतीयों ने सौतेला व्यवहार किया है। योगियों का महत्व कम नहीं हो जाए। अत: यह विद्या हर किसी को दी जाना वर्जित थी। योग ऐसी विद्या है जिसे रोगी-निरोगी, बच्चे-बूढ़े सभी कर सकते हैं।
किंतु योगाभ्यास करने से पूर्व कुशल योग निर्देशक से अवश्य सलाह लेना चाहिए। निम्नांकित आसन क्रियाएँ प्रस्तुत की जा रही हैं जिन्हें आप सहजता से कर सारे दिन की स्फूर्ति अर्जित कर सकती हैं।
श्वास क्रिया संपादित करें
सीधे खड़े होकर दोनों हाथों की उँगलियाँ आपस में फँसाकर ठोढ़ी के नीचे रख लीजिए। दोनों कुहनियाँ यथासंभव परस्पर स्पर्श कर रही हों। अब मुँह बंद करके मन ही मन पाँच तक की गिनती गिनने तक नाक से धीरे-धीरे साँस लीजिए।
इस बीच कंठ के नीचे हवा का प्रवाह अनुभव करते हुए कुहनियों को भी ऊपर उठाइए। ठोढ़ी से हाथों पर दबाव बनाए रखते हुए साँस खींचते जाएँ और कुहनियों को जितना ऊपर उठा सकें उठा लें। इसी बिंदु पर अपना सिर पीछे झुका दीजिए। धीरे से मुँह खोलें। आपकी कुहनियाँ भी अब