05/11/2015
नवलगढ :
राजस्थान में झुन्झुनू जिले की तहसील है। यह 15 किलोमीटर (9.3 मील) मुकुंदगढ़ के उत्तर में और 10 किलोमीटर (6.2 मील) डुण्डलोद से दूर पड़ता है। नवलगढ के सीमावर्ती गाँव और कस्बे डुण्डलोद, बिड़ोदी बड़ी, बेरी और झाझड़ हैं। नवलगढ़ यह एक रेलवे-स्टेशन भी है।
इतिहास
ठाकुर नवल सिंह जी बहादुर (शेखावत) ने 1737 ई. में नवलगढ़ की स्थापना थी। मारवाड़ी समुदाय के कई महान व्यापारिक परिवार नवलगढ़ मूल के है। नवलगढ़ उच्च दीवारों (परकोटा) और अलग अलग दिशाओं में चार परास्नातक (फाटकों), अगूना दरवाजा, बावड़ी दरवाजा (उत्तर में), मंडी दरवाजा और नानसा दरवाजा से मिलकर सुसज्जित घेरे में सुरक्षित किया गया था।
परिवहन :
क़स्बानुमा नवलगढ़ शहर सीकर एवं झुंझनू ज़िला मुख्यालय से लगभग समान दूरी पर स्थित है। यह झुंझनू से क़रीब 39 किलोमीटर दूर है, जबकि सीकर से मात्र 30 किलोमीटर। जयपुर, दिल्ली, अजमेर, कोटा और बीकानेर से यह सड़क मार्ग से सीधे जुड़ा हुआ है। जयपुर यहां से क़रीब 160 किलोमीटर है, जबकि राजधानी दिल्ली क़रीब 225 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जयपुर-लुहारू मार्ग पर स्थित नवलगढ़ ब्रॉडगेज रेल लाइन से जुड़ा हुआ है। हेरिटेज ऑन व्हील्स, यह एक लक्ज़री टूरिस्ट ट्रेन है, जो नवलगढ़ और शेखावाटी को क़रीब से देखने का अवसर प्रदान करती है।
पर्यटन :
नवलगढ़ का किला, रूप निवास पैलेस, शीशमहल, पोद्दार कॉलेज टावर, लक्ष्मी नृसिंह मंदिर और गोपीनाथ जी मंदिर दर्शनीय आकर्षण हैं।
हवेलियाँ
शेखावाटी के राजपूत किलों एवं हवेलियों में बनी सुंदर फ्रेस्को पेंटिंग्स दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। इसी के चलते शेखावाटी अंचल को राजस्थान के ओपन आर्ट गैलरी की संज्ञा दी जाती है। 1830 से 1930 के दौरान व्यापारियों ने अपनी सफलता और समृद्धि को प्रमाणित करने के उद्देश्य से सुंदर एवं आकर्षक चित्रों से युक्त हवेलियों का निर्माण कराया। इनमें भगतों की हवेली, छोटी हवेली, परशुरामपुरिया हवेली, छावछरिया हवेली, सेकसरिया, मोरारका की हवेली एवं पोद्दार हवेली आदि प्रमुख हैं। हवेलियों के रंग शानों-शौकत के प्रतीक बने। समय गुजरा तो परंपरा बन गए और अब तो विरासत का रूप धारण कर चुके हैं। कलाकारों की कल्पना जितना उड़ान भर सकती थी, वह सब इन हवेलियों की दीवारों पर आज देखने को मिल जाता है।
होटल एवं गेस्ट हाऊस :
नवलगढ़ में ठहरने के लिए शानदार होटल एवं गेस्ट हाऊस उपलब्ध हैं। इनमें रूपनिवास पैलेस, होटल अपणी ढाणी, होटल सिटी पैलेस, नवल होटल, तीज होटल आदि प्रमुख हैं।
शिक्षा :
शेखावाटी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी माना जाता है। पिलानी, लक्ष्मणगढ़ और नवलगढ़ ने शैक्षिक परिदृश्य को संवारने का काम किया है। राजस्थान के सबसे पहले महाविद्यालय सेठ ज्ञानीराम बंसीधर पोदार महाविद्यालय, नवलगढ़ की स्थापना यहां 1921 में हुई थी। स्वयं महात्मा गांधी जी इस कॉलेज के ट्रस्टी थे। नवलगढ़ में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूल के अलावा पॉलीटेक्निक एवं डुण्डलोद इंजीनियरिंग कॉलेज भी है।
धर्म और समारोह :
सभी प्रमुख हिंदू और मुस्लिम त्योहारों को मनाते हैं। प्रमुख हिंदू त्यौहारों में से कुछ हैं : होली, दीपावली, मकर संक्रांति, रक्षाबंधन, सावन, तीज और गौगा, सहकर्मी, गणगौर आदि।
राजनीति :
नवलगढ़ में सर्वप्रथम 1952 चुनाव हुए।
वर्ष चुने गये विधायक का नाम पार्टी संबद्धता
1952 ठा.भीमसिंह आरआरपी
1957 श्रीराम बासोतिया निर्दलीय
1962 ठा.भीमसिंह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1967 सांवरमल बासोतिया स्वतंत्र पार्टी
1972 भंवरसिंह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1977 नवरंगसिंह जनता पार्टी
1980 भंवरसिंह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1985 नवरंगसिंह लोकदल
1990 भंवरसिंह निर्दलीय
1993 भंवरसिंह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1998 भंवरसिंह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2003 प्रतिभा सिंह निर्दलीय
2008 डॉ॰ राजकुमार शर्मा बहुजन समाज पार्टी
2013 डॉ॰ राजकुमार शर्मा निर्दलीय
ये रहे हैं जिला प्रमुख :
श्रीराम बासोतिया -1959-1961 कांग्रेस
शीशराम ओला -1961-1977
हरदेवसिंह भारू -1982-1988
बृजेन्द्र ओला -1988-1991
प्रहलादसिंह यादव -1995-1999
मदनसिंह गिल -1999-2000
बृजेंद ओला -2000-2005
डा. राजबाला ओला -2005-2010
हनुमानप्रसाद -2010-2015
सुमन चौधरी -नवनिर्वाचित