29/11/2025
वक़्त कैसे बीत रहा है, पूछो कोई,
नवंबर बीत रहा है, पूछो कोई।
बीत रही है जवानी, पूछो कोई,
दिसंबर कैसे बीतेगी — पूछो कोई…
कभी थी नवंबर की आस उनके लिए,
अब उसी नवंबर की आस है इनके लिए।
ये उनके लिए, इनके लिए—आख़िर किनके लिए?
कवि जय की सोच है… शायद उसी एक के लिए।