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वक़्त कैसे बीत रहा है, पूछो कोई,नवंबर बीत रहा है, पूछो कोई।बीत रही है जवानी, पूछो कोई,दिसंबर कैसे बीतेगी — पूछो कोई…कभी ...
29/11/2025

वक़्त कैसे बीत रहा है, पूछो कोई,
नवंबर बीत रहा है, पूछो कोई।
बीत रही है जवानी, पूछो कोई,
दिसंबर कैसे बीतेगी — पूछो कोई…

कभी थी नवंबर की आस उनके लिए,
अब उसी नवंबर की आस है इनके लिए।
ये उनके लिए, इनके लिए—आख़िर किनके लिए?
कवि जय की सोच है… शायद उसी एक के लिए।

कौन कमबख्त कहता है कि वक्त बदलता है, बदलते तो इंसान हैं। जो थामते थे कभी हाथ अपने बनकर, वही बनते अब अनजान हैं। कौन कहता ...
14/09/2025

कौन कमबख्त कहता है कि
वक्त बदलता है, बदलते तो इंसान हैं।
जो थामते थे कभी हाथ अपने बनकर,
वही बनते अब अनजान हैं।
कौन कहता है कि वक्त बदलता है,
बदलते तो इंसान हैं।

जिनकी लफ्जों पर हमेशा हमारा नाम था,
आज वही हम गुमनाम है।
जो हमारे याद में बेचैन रहते थे,
अब कहते भूलना हमारा काम है।
कौन कहता है कि वक्त बदलता है,
बदलते तो इंसान हैं।

जिनके पास हमारी हर मर्ज की दवा थी
आज वही दर्द की दुकान हैं।
जिनके मुस्कुराहट में हमारी जान थी,
आज उनकी हंसी बेजान है।
कौन कमबख्त कहता है कि वक्त बदलता है,
बदलते तो इंसान है।।
-Sonu

नाराज हो! खता हुई है क्या?इंतजार है! तुम्हे भी है क्या?सोने से पहले,  जागने के बाद रिप्लाई करने, पढ़ने के बाद नींद आती ह...
27/03/2025

नाराज हो! खता हुई है क्या?
इंतजार है! तुम्हे भी है क्या?
सोने से पहले, जागने के बाद
रिप्लाई करने, पढ़ने के बाद
नींद आती है! सोने के बाद
हैरत हुई है! जागने के बाद
जय! डर है कहीं हो न जाए
कमबख्त कैसे करें इज़हार?

सबकी परेशानियां सुनता हूँअपनी बताने का मन नहीं करता..
15/02/2025

सबकी परेशानियां सुनता हूँ
अपनी बताने का मन नहीं करता..

15/02/2025
लाख कोशिशों के बाद मुकाम मिलता है,हर रोज कोई-न-कोई काम मिलता है.दिल करता है छू लूं आसमां को,कमबख्त नजरें, जमीं छोड़ती ही ...
10/02/2025

लाख कोशिशों के बाद मुकाम मिलता है,
हर रोज कोई-न-कोई काम मिलता है.
दिल करता है छू लूं आसमां को,
कमबख्त नजरें, जमीं छोड़ती ही नहीं.
________ जय

10/02/2025

लाख कोशिशों के बाद मुकाम मिलता है,
हर रोज कोई-न-कोई काम मिलता है.
दिल करता है छू लूं आसमां को,
कमबख्त नजरें, जमीं छोड़ती नहीं.
______________@jayawadhesh

05/02/2025

*डाक के उस लाल डिब्बे में जब बारिश की पहली बूंद गई*

*तो डब्बे ने पूछा, "तुम यहाँ क्यूँ आई हो, यहाँ तो अब कोई नहीं आता"*

*बूंद ने मासूमियत से कहा, "अब मेरे लिए भी कौन अपनी हथेली फैलाता है"*

05/02/2025

ज़िद है तो जिद ही सही,
आत्मसम्मान से बड़ा कुछ नहीं !

22/01/2025

मुश्किलों के बाद अच्छे वक्त आते हैं
बेशक असफल हुआ हो कई बार
एक बार उम्मीदों के जोर आजमाईस से
नाहक न मिली हो मंज़िल पर
उम्मीदों के सहारे एक दिन जब शिखर (सफलता) को छूती है
आशियां बन जाती है, समा बंध जाता है, होती है फिर खुशामद और सेहरा बांधने लोग आ जाते हैं ___@jayawadhesh

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