Krishn Geeta

Krishn Geeta

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Krishngeeta is an attempt to reintroduce the old wisdom of Bhagvad geeta for the modern world.
~Radh

17/05/2025

❤️!! कृष्ण से कृष्ण को मांगिए !!❤️

एक राजमहल के द्वार पर बड़ी भीड़ लगी थी। किसी फकीर ने सम्राट से भिक्षा मांगी थी। सम्राट ने उससे कहा-'जो भी चाहते हो, मांग लो। फकीर ने अपने छोटे से भिक्षापात्र को आगे बढ़ाया और कहा- बस इसे स्वर्ण मुद्राओं से भर दें। सम्राट ने सोचा इससे सरल बात और क्या हो सकती है! लेकिन जब उस भिक्षा पात्र में स्वर्ण मुद्राएं डाली गई, तो ज्ञात हुआ कि उसे भरना असंभव था। सम्राट ने अपना सारा खजाना खाली कर दिया, लेकिन अद्भुत पात्र न भरा । तब उस सम्राट ने पूछा- इस अद्भुत पात्र का रहस्य क्या है? वह फकीर बोला- कोई विशेष रहस्य नहीं। यह पात्र मनुष्य के हृदय से बनाया गया है। क्या आपको ज्ञात नहीं है कि मनुष्य का हृदय कभी भी भरा नहीं जा सकता ? धन से,पद से-किसी से भी भरो,वह खाली ही रहेगा,क्योंकि हृदय तो परमात्मा को पाने के लिए बना है। शांति - संतृप्ति चाहिए ? तो अपने संकल्प को कहिए कि "भगवान श्रीकृष्ण" के सेवा के अतिरिक्त और मुझे कुछ भी नहीं चाहिए।

"कृष्ण से कृष्ण को ही मांगिए..

25/06/2023

कृष्ण से कितना कुछ छूटा.!

पहले माँ छूटी, फिर पिता छूटे.!
फिर जो नंद-यशोदा मिले, वे भी छूटे.।
संगी-साथी छूटे.
राधा भी छूटीं.।
गोकुल छूटा, फिर मथुरा छूटी.।
कृष्ण से जीवन भर, कुछ न कुछ छूटता ही रहा.!

नहीं छूटा तो देवत्व, मुस्कान और सकारात्मकता.।

कृष्ण दुःख नहीं, उत्सव के प्रतीक हैं.।
सब कुछ छूटने पर भी, कैसे खुश रहा जा सकता है यह,'श्री कृष्ण' से अच्छा कोई नहीं सिखा सकता.!

इसलिए हमेशा खुश रहें सदा मुस्कुराते रहें, परिवार के साथ औरों को भी हँसाते रहें,व्यस्त रहें मस्त रहें.😊


Admin

23/06/2023

यदि आपके पास अहंकार भाव हैं तो समझ लेना अब आपको किसी और शत्रु की जरुरत ही नहीं हैं

क्योंकि अहंकार वो सब काम कर देगा
जो काम शायद ही कोई महाशत्रु भी नहीं कर सकें

अहंकार शक्तिशाली ही नहीं महा शक्तिशाली शत्रु होता हैं

वो अहंकार ही तो था जिसके बल पर रावण ने साक्षात त्रिभुवनपति श्रीराम जी को ही चुनौती दे डाली,

जिसके बल पर कंस ने जगत पालक को बालक मान कर उसे मारने के प्रयत्न शुरू कर दिए

जिसके बल पर दुर्योधन ने एक सती नारी के चीर हरण करने का आदेश भरी सभा में दे दिया था

अहंकार आग की वो धधकती लपटें हैं, जो गर्म तो नहीं मगर जलाकर राख अवश्य कर देती हैं

अतः अहंकार में नहीं

अपितु प्यार और उपकार में जीने का प्रयास शुरू करके अपने जीवन के अर्थ को सार्थक करें????

जय श्री सीताराम जी की


Admin

22/06/2023

जिस प्रकार जल मछली को, धन लोभी मनुष्य को तथा पुत्र अपने माता को प्यारा होता है,
उसी प्रकार भक्त को प्रभु की भक्ति प्यारी होती है।


Admin

30/04/2023

🙏 स्वयं विचार कीजिये 🙏

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"कृष्णगीता" आधुनिक दुनिया के लिए भगवदगीता और पुराणों के ज्ञान को फिर से प्रस्तुत करने का एक प्रयास है।

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jain  

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teoftheday
 

22/04/2023

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18/04/2023

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