जवाहर नवोदय विद्यालय नांदला,अजमेर

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जवाहर नवोदय विद्यालय नांदला,अजमेर हम ही नवोदय हो । The institute of the imminence work all our the country

ऑक्सफोर्ड के कोरोना वैक्सीन के दूसरे,तीसरे चरण के मानव परीक्षण पर डीसीजीआई की मुहर
03/08/2020

ऑक्सफोर्ड के कोरोना वैक्सीन के दूसरे,तीसरे चरण के मानव परीक्षण पर डीसीजीआई की मुहर

ऑक्सफोर्ड के कोरोना वैक्सीन के दूसरे,तीसरे चरण के मानव परीक्षण पर डीसीजीआई की मुहर

बिल्कुल सही कहा आपने
10/07/2019

बिल्कुल सही कहा आपने

अंत मे टीम ने गजब सँघर्ष किया हार जीत चलती रहती है जडेजा-धोनी दिल जीत लिया आपने
हम कौन होते है कोहली और रोहित को कहने वाले
न हम सचिन न हम गांगुली

हर आदमी का अपना दिन होता है आज केन विलियमसन की कप्तानी का दिन था

न्यूज़ीलैंड को बधाई
टीम इंडिया ने पूरे टूर्नामेंट में दिल जीता उसके लिए धन्यवाद

जय हो

टीम
अम्बेडकर जंक्शन

A Book by Navodayan Sangeeta Patidar
07/07/2019

A Book by Navodayan Sangeeta Patidar

Hello Friends!!
Let me introduce you a very talented SANGEETA PATIDAR, of course a Navodayan, from Bhopal. She is a Commerce Post Graduate with MBA & MSW.
'EHSAAS…DIL SE DIL KI BAAT' is her debut bouquet of poetry, filled with Love, Pain and some emotional Feelings. Written during her good times and the hard ones of her life, these poems reflect the dreams, aspirations, success, love, anger, ups and lows of her life in profound words.
As she says that, this Poetry Book is dedicated to all, we Love or Hate sometimes in our life. She pays her gratitude to the almighty, her parents and to all those ‘ANGELS’ who encouraged her to fly high toward her Dreams.
Experience the poetic journey and go through this book filled with love.

For Order your copy, Contact Udaan Team… Please Read & Give Review…

‘A NAVODAYA MAGAZINE’
-NAI UDAAN… Sapno Ki Or
(Sambhavit Shirshak)

Please LIKE, SHARE, INVITE & SUBSCRIBE “Shri Radhe Krishna Publication” FB page and Support your Navodayan Family & Friends…
- If any Navodayan writer's book has been published, then you can contact to UDAAN TEAM and we will introduce your book here.

Thank You,
CONTACT US:
UDAAN TEAM
Preeti ‘Pravah’ – 9926367979
Vivek Singh – 9681422805
Jaihind Verma & Team
Email: [email protected]

निःशुल्क विधिक सहायता
07/07/2019

निःशुल्क विधिक सहायता

निःशुल्क विधिक सहायता

“सामान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता प्रत्येक नागरिक को प्राप्त कराना राज्य का कर्तव्य है।” -भारतीय संविधान

कानूनी सहायता का अर्थ यह है कि सीमित साधन वाले व्यक्तियों को निःशुल्क अथवा नाम-मात्र की फीस पर विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाये। यद्यपि कानूनी सलाह और कानूनी सहायता एक-दूसरे कीे पूरक हैं, परन्तु दोनों एक-दूसरे से पूर्णतः भिन्न हैं। विधिक सहायता से आशय किसी न्यायालय या अधिकरण की कार्यवाही में पक्षकार की निःशुल्क या नाममात्र की फीस लेकर सहायता करना जबकि विधिक-सलाह में उपचारात्मक तथा निवारणात्मक, दोनों का समावेश है।

ब्रिटिश भारत मे निर्धनों के लिए सहायता उपलब्ध कराने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। यद्यपि कलकत्ता (कोलकाता) और बम्बई (मुम्बई) की कुछ निजी संस्थाएँ स्वैच्छिक रूप से गरीबों की निःशुल्क कानूनी सहायता करती थीं जिन्हें विकलांगों के लिए निशुल्क कानूनी सहायता की योजना बनाने का कार्य सौंपा गया।

सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 आदेश 33, नियम 1 में अकिंचन-वाद के प्रावधान हैं, इसके अंतर्गत निर्धन व्यक्ति को केार्ट-फीस देने से छूट मिलती है। दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-304 प्रावधान करती है कि जब कभी कोर्ट के समक्ष किसी मामले का विचारण चल रहा हो और पीठासीन अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि उपस्थिति अभियुक्त अपनी प्रतिरक्षा के लिये किसी प्लीडर की नियुक्ति करने हेतु असमर्थ है तो ऐसा पीठासीन अधिकारी ऐसे अभियुक्त को राज्य सरकार के खर्चे पर प्लीडर उपलब्ध करवायेगा।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39-क निःशुल्क विधिक सहायता राज्य का कर्त्तव्य प्रावधानित करता है।

अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर कानूनी सहायता का उदय विख्यात ऐतिहासिक प्रलेख मैग्नाकार्टा माना जाता है, तथापि पश्चात्वर्ती सामाजिक प्रगति तथा आर्थिक विकास के साथ-साथ अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रादुर्भाव हुआ। समाज के कमजोर वर्गों के लिए अनेक लाभकारी योजनाएँ राज्य द्वारा हाथ में ली गई। न्यायिक क्षेत्र में विधिक सलाह तथा विधिक सहायता की योजना भी गरीबों तथा कमजोर वर्गों के लोगों को सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू की गई है।

निर्धनों को उचित विधिक सहायता दिये जाने के सम्बन्ध में प्रस्ताव सर्वप्रथम संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में तेहरान में सन् 1968 में आयोजित मानव अधिकार सम्मलेन में परित हुआ। इस प्रस्ताव में यह स्वीकार किया गया कि समाज के निर्धन तथा विधिक सहायता उपलब्ध कराना राज्य का दायित्व है और इस हेतु संयुक्त द्वारा राज्यों को आवश्यक आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए।

मानव के सिविल तथा राजनीतिक अधिकारों सम्बन्धी अन्तर्राष्ट्रीय प्रसंविदा के अनुच्छेद 22(3) में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद की विधिक सहायता द्वारा स्वयं की प्रतिरक्षा का अधिकार दिया गया है।

उच्चतम न्यायलय ने अपने विनिश्चयों में भी संविधान के अनुच्छेद 14, 21 तथा 22 का निर्वचन इस प्रकार किया है कि जिससे विधिक सलाह और सहायता को प्रति लोगों में चेतना उत्पन्न हो। माधव हास्काट बनाम महाराष्ट्र राज्य में उच्चतम न्यायालय ने बन्दियों को विधिक सहायता दिये जाने हेतु निम्नलिखित कल्याणकारी निर्देश दिये हैं, जिन्हें ऐसे नागरिकों के प्रति लागू किया जाना अपेक्षित है, जिसके जीवन का वैयक्तिक स्वाधीनता को गम्भीर खतरा उत्पन्न हुआ हैः

1- कारावास की सजा से दण्डित व्यक्ति को दण्डादेश देते समय न्यायालय के निर्णय की प्रति मुफ्रत दी जानी चाहिए।

2- बन्दी द्वारा अपील या पुनरीक्षण दायर की जाने की स्थिति में जेल प्रशासन द्वारा उसे आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध करायी जानी चाहिये।

3- यदि अभियुक्त साधनहीन या अकिंचन है, तो न्यायालय उसे प्रतिरक्षा हेतु वकील की सेवाएँ निःशुल्क उपलब्ध करायेगा।

4- राज्य द्वारा साधनहीन अभियुक्त के लिए नियुक्त वकील को उचित फीस दी जानी चाहिये।

सभी को न्याय का समान अवसर उपलब्ध कराना न्यायिक प्रशासन का मूलभूत सिद्धान्त है। प्रत्येक कल्याणकारी राज्य का यह परम कर्त्तव्य है कि वह जाति-पाँति तथा धार्मिक, सामाजिक या आर्थिक भेदभाव के बिना सभी नागरिकों को समुचित न्याय उपलब्ध कराये।

भारत जैसे विकासशील देश में जहाँ अधिकांश जनता निर्धन, साधनहीन और गरीब हैं, सभी को समान न्याय दिलाना तभी सम्भव है, जब आपराधिक एवं सिविल मामलों में विवादियों को समुचित कानूनी सहायता उपलब्ध हो। यदि व्यक्ति को अपने अधिकारों को प्रवर्तित कराने या समुचित प्रतिरक्षा का पर्याप्त अवसर उपलब्ध न हो, तो ऐसी न्याय-व्यवस्था भेदभावपूर्ण होगी जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के प्रतिकूल है।

– मनमोहन जोशी

Happy Birthday Mahendra Singh Dhoni - MSD
07/07/2019

Happy Birthday Mahendra Singh Dhoni - MSD

07/07/2019

कर्मफल

जनहित में जारी
07/07/2019

जनहित में जारी

एक मिनख👳 एक पेड़🌳
05/07/2019

एक मिनख👳 एक पेड़🌳

...

वृक्ष करे यही पुकार।
बढ़ाओ उनका भी संसार।।

एक मिनख एक पेड़...
संतुलन का यही खेल...

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा 4 किलोमीटर की दौड़ दिनांक 07.07.2019 को प्रातः 6 बजे आयोजित की जा रही है जिसका पंजीकरण 1 जुलाई को शुरू हो चुका है, यही दौड़ प्रत्येक जिला मुख्यालय पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित की जा रही है जिसमें कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है...

03/07/2019

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305601

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